एक ओर जहां संयुक्त राष्ट्र अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिकुड़ते दायरे पर चिंता जता रहा है तो वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान में अपने अधिकारों की मांग कर रहे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के गायब होने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. हाल में पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ता के गायब होने का पांचवां मामला सामने आया है. आईटी क्षेत्र में काम करने वाले और आतंकवाद विरोधी सिविल प्रोग्रेसिव अलायंस का मुखिया समर अब्बास बीती 7 जनवरी को कराची से इस्लामाबाद पहुंचे थे. इसके बाद से ही वह गायब हैं. उनके साथी तालिब रजा ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि हमने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक संगठन तैयार किया है. उन्होंने कहा, "हम प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों के खिलाफ संघर्ष और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम करते हैं."
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शरणार्थी संकट के बीच हजारों पाकिस्तानी भी यूरोप में पहुंचे हैं. ग्रीस से पाकिस्तानी इफ्तिखार अलीकी भेजी कुछ तस्वीरें भेजीं यूरोप में बेहतर जिंदगी के इन लोगों के सपने की हकीकत को बयान करती हैं.
तस्वीर: Iftikhar Aliहजारों पाकिस्तानी अपने घरों से निकले और उनकी मंजिल जर्मनी या उसके पड़ोसी देश थे. किसी ने सोचा भी न होगा कि खतरनाक पहाड़ी और समंदरी रास्ते पर जिंदगी दांव पर लगाने के बाद उन्हें एथेंस के शरणार्थी शिविर में शौचालय साफ करना होगा.
तस्वीर: Iftikhar Aliइनमें से ज्यादा लोग पाकिस्तान के पंजाब प्रांत हैं. एजेंटों ने उन्हें जर्मनी तक पहुंचाने का खर्चा प्रति व्यक्ति पांच लाख रुपए बताया था और सबसे ये पैसा एडवांस में ही ले लिया गया. लेकिन अब एजेंटों के दिखाए सब्जबाग झूठे साबित हो रहे हैं.
तस्वीर: Iftikhar Aliसीरिया और अन्य संकटग्रस्त देशों से आए शरणार्थियों को बालकन देशों के रास्ते जर्मनी जाने की इजाजत दी गई थी. लेकिन यूरोपीय सरकारों का मानना है कि ज्यादातर पाकिस्तानी आर्थिक कारणों से यूरोप आ रहे हैं. इसलिए उन्हें यहां शरण दिए जाने की संभावना बहुत कम है.
तस्वीर: Iftikhar Aliइन लोगों का कहना है कि ग्रीस में अधिकारियों ने सफाई का काम सिर्फ उन्हें ही सौंपा है. इनसे कहा गया है कि पाकिस्तानी नागरिकों को शरणार्थी शिविर में रखने की इजाजत ही नहीं है, फिर भी उन्हें वहां रहने की इजाजत सिर्फ इस शर्त पर दी गई है कि वो सफाई करेंगे.
तस्वीर: Iftikhar Aliऐसे सैकड़ों पाकिस्तानी आप्रवासियों को अब उम्मीद ही नहीं है कि वो ग्रीस से आगे पश्चिमी यूरोप की तरफ जा पाएंगे और इसलिए वो वापस पाकिस्तान जाना चाहते हैं. इनमें से बहुत से मानसिक और शारीरिक बीमारियों का शिकार हैं. कई लोगों ने आत्महत्या की कोशिश भी है.
तस्वीर: Iftikhar Aliग्रीस में शरण की आस में रह रहे ज्यादातर पाकिस्तानियों का कहना है कि शिविर में उन्हें पर्याप्त खाना भी नहीं मिलता है और वो अच्छा भी नहीं होता है. कई लोगों का कहना है कि उन्हें सिर्फ जिंदा रहने के लिए रोज एक वक्त का खाना दिया जाता है. ऐसे में कई लोग बीमारियों का शिकार हैं.
तस्वीर: Iftikhar Aliविडंबना तो ये है कि ज्यादातर लोगों के पास पासपोर्ट या अन्य दस्तावेज भी नहीं है और पाकिस्तान वापस जाना भी उनके लिए कठिन है. एथेंस में पाकिस्तानी दूतावास की तरफ से उनकी पहचान और पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया बहुत धीमी है.
तस्वीर: Iftikhar Aliपाकिस्तान के जिला गुजरात से संबंध रखने वाले 41 साल के सज्जाद शाह भी अब वापस वतन लौटना चाहते हैं. उनके तीन बच्चे हैं. वो कहते हैं कि कैंप में बच्चे को खेलते देख उन्हें अपने बच्चे याद आते हैं और जल्द से जल्द उनके पास जाना चाहते हैं.
तस्वीर: Iftikhar Aliअन्य देशों से संबंध रखने वाले आप्रवासियों और शरणार्थियों को यूनानी अधिकारियों ने रिहायशी इमारतों में रहने को जगह दी है जबकि पाकिस्तानियों को ज्यादातर अस्थायी शिविरों में रखा गया है. हालत इसलिए भी खराब है कि उन्हें यूरोप की कड़ी सर्दी की आदत नहीं है.
तस्वीर: Iftikhar Aliइन लोगों का कहना है यात्रा दस्तावेजों के लिए उन्होंने एथेंस के पाकिस्तानी दूतावास में अर्जी दी है लेकिन महीनों बाद भी कोई जबाव नहीं मिला है. कुछ लोगों ने शरणार्थी एजेंसी से भी खुद को स्वदेश भिजवाने की अपील की, लेकिन उन्होंने कहा कि इसके लिए पासपोर्ट या अन्य दस्तावेज चाहिए.
तस्वीर: Iftikhar Aliबहुत से लोगों ने पाकिस्तान सरकार से भी जल्द से जल्द वतन वापसी की गुहार लगाई है. एहसान नाम के एक पाकिस्तानी आप्रवासी ने डीडब्ल्यू को बताया, “न हम वापस जा सकते हैं और न आगे. बस पछतावा है और यहां टॉयलेट की सफाई का काम है.”
तस्वीर: Iftikhar Ali इसके पहले पाकिस्तान में 4 से 7 जनवरी के दौरान भी चार वामपंथी ब्लॉगर्स के गायब होने की खबरें सामने आई थीं. गैर सरकारी संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने इन लोगों की गायब होने की घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. हालांकि सरकार ने इसे पूर्ण रूप से खारिज किया है. मंगलवार को गृह मंत्री निसार अली खान ने कहा कि जल्द ही इन लापता लोगों को ढूंढ़ निकाला जाएगा.
संयुक्त राष्ट्र और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गायब होते इन कार्यकर्ताओं पर चिंता जाहिर की है. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत डेविड के ने कहा कि किसी भी सरकार को अपने नागरिकों पर ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि इन मामलों की जांच को तत्काल प्राथमिकता देते हुए पाकिस्तान सरकार यह संदेश दे सकती है कि वे अपने नागरिकों की जान और उनकी हिफाजत को लेकर कितनी गंभीर है, खासकर तब, जब मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा हो.
तस्वीरों में: इनका भी है पाकिस्तान
पाकिस्तान की अनुमानित 20 करोड़ की आबादी में लगभग 95 फीसदी मुसलमान हैं. इनमें भी बहुसंख्यक सुन्नी हैं जिनकी संख्या 75 से 85 फीसदी बताई जाती है. एक नजर पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों पर.
तस्वीर: DW/U. Fatimaशिया मुसलमान पाकिस्तान का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है जिसकी आबादी से 10 से 15 फीसदी बताई जाती है. हाल के सालों में पाकिस्तान में कई बार शिया धार्मिक स्थलों को आतंकवादी हमलों में निशाना बनाया गया है.
तस्वीर: picture-alliance/ZUMAPRESS.comपाकिस्तान की जनसंख्या में अहमदी मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 2.2 प्रतिशत है. हालांकि पाकिस्तान में इन्हें मुसलमान नहीं माना जाता. 1970 में दशक में एक कानून पारित कर इन्हें गैर मुसलमान घोषित कर दिया गया था और इनके साथ कई तरह के भेदभाव होते हैं.
तस्वीर: Arif Ali/AFP/Getty Imagesपाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी लगभग दो प्रतिशत है जिनमें से ज्यादातर सिंध प्रांत में रहते हैं. पाकिस्तान में हिंदू बेहद पिछड़े हैं और अभी तक बुनियादी अधिकारों के लिए जूझ रहे हैं.
तस्वीर: DW/U. Fatimaहिंदुओं के बाद पाकिस्तान में संख्या के हिसाब से ईसाई समुदाय की बारी आती है. उनकी आबादी लगभग 1.6 प्रतिशत है जबकि संख्या देखें तो यह 28 लाख के आसपास है. हाल के सालों में कई चर्चों पर हमले हुए हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/S. Akberबहाई धर्म को मानने वालों की संख्या पाकिस्तान में 40 से 80 हजार हो सकती है.
सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक का जन्म मौजूदा पाकिस्तान के ननकाना साहिब में हुआ था. यह स्थान सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है. पाकिस्तान में अब सिर्फ लगभग 20 हजार ही सिख बचे हैं.
तस्वीर: Farooq Naeem/AFP/Getty Imagesपारसियों की आबादी दुनिया भर में घट रही है. पाकिस्तान में भी ऐसा ही ट्रेंड दिखाई पड़ता है. वहां इनकी संख्या चंद हजार तक सिमट गई है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/D. Solankiखैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के चित्राल में रहने वाला कलाश समुदाय अपनी अलग संस्कृति के लिए जाना जाता है. उनकी अलग भाषा और अलग धर्म है. लगभग तीन हजार की आबादी के साथ इसे पाकिस्तान का सबसे छोटा धार्मिक समुदाय माना जाता है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/O. Matthys पाकिस्तान, पत्रकारों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक माना जाता है. इसकी सेना भी पत्रकारों के साथ आराम से पेश नहीं आती. वर्ष 2014 में एक बंदूकधारी ने देश के मशहूर टीवी एंकर हामिद मीर पर हमला किया था. खुशकिस्मती से मीर इस हमले से बच गए थे. बाद में इनके परिवार और इनकी कंपनी ने इस हमले के लिए देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया के हाथ होने की बात कही थी.
एए/वीके (एएफपी)