अंजनी 11वीं कक्षा तक पढ़ा एक लड़का है जो काम की तलाश में दिल्ली आ जाता है. अंजनी की बहन और जीजा दिल्ली की एक कच्ची बस्ती में रहते हैं. बहन मसालों के पैकेट पैक करने का काम करती है और जीजा एक सिक्योरिटी गार्ड हैं. अंजनी के जीजा उसे नई दिल्ली नगर निगम में सरकारी इमारतों से बंदर भगाने का काम दिलवा देते हैं.
अंजनी की मुलाकात यहां जितेंद्र नाम के एक साथी से होती है जो ईब आले ऊ की आवाज निकालकर बंदर भगा है. जितेंद्र बताता है कि ईब लंगूर की आवाज, आले इंसान और ऊ बंदर की आवाज है. इससे बंदर भागते हैं. अंजनी ऐसा करने की कोशिश करता है लेकिन वो बंदरों से डरता है. ऐसे में बंदर उसके भगाने से नहीं भागते.
अंजनी की बहन गर्भवती होती है. उसके जीजा अपनी नौकरी के चलते अपनी पत्नी का ख्याल नहीं रख पाते. अंजनी के जीजा को उनकी कंपनी प्रमोशन देती है लेकिन साथ में बंदूक रखने की शर्त होती है जो उन्हें घर भी ले जानी होती है. अंजनी की बहन बंदूक को नेगेटिव एनर्जी मानकर उसे घर से बाहर रखने की जिद करती है.
उनका घर एक कमरे का है. ऐसे में बंदूक बाहर नहीं रखी जा सकती. अंजनी की बहन गरीबी के चलते दवाएं नहीं खरीद पातीं. इससे उनके गर्भ में पल रहे बच्चे पर असर पड़ता है. साइकिल पर बंदूक लेकर चलने से अंजनी के जीजा की पीठ में तकलीफ होने लगती है.
इस सब के बीच बंदर भगाने के लिए अंजनी को एक आइडिया आता है और वो जगह-जगह लंगूरों की तस्वीरें लगा देता है. इस पर एक सरकारी अधिकारी उसकी शिकायत कर देता है. अंजनी का ठेकेदार उसे चेतावनी देता है. गणतंत्र दिवस परेड के दौरान अंजनी को बंदर भगाने का काम मिलता है.
वहां उसे लंगूर की कॉस्ट्यूम पहन बंदर भगाने का आइडिया आता है. यह आइडिया काम कर जाता है लेकिन एक और सरकारी अधिकारी जानवर अधिकारों को लेकर अंजनी की शिकायत कर देता है. इसके चलते उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है. उसे कोई काम नहीं आता है लेकिन वो लगातार काम तलाशता रहता है. जितेंद्र से एक बार एक बंदर मर जाता है और भीड़ पीट-पीटकर उसकी हत्या कर देती है. इससे अंजनी अवसाद में आ जाता है.
नरेंद्र मोदी पर फिल्म आई. मोदी से पहले भी कई नेताओं पर फिल्म बन चुकी हैं.
तस्वीर: Getty Images/I. Mukherjeeभारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बायोपिक और वेब सीरीज दोनों बनी हैं. फिल्म का नाम पीएम नरेंद्र मोदी है. इसमें नरेंद्र मोदी का किरदार विवेक ओबेरॉय ने निभाया है. वेब सीरीज का नाम है 'मोदीः जर्नी ऑफ अ कॉमन मैन'. दोनों हिन्दी में हैं.
तस्वीर: Getty Images/AFP/M. Sharmaपूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल ऊपर लिखी गई किताब 'दी एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' के ऊपर फिल्म बनी जा चुकी है. किताब के नाम से बनी फिल्म में मनमोहन सिंह का किरदार अनुपम खेर ने निभाया था. ये फिल्म भी हिंदी में है.
तस्वीर: Getty Images/AFP/M. Kiranशिवसेना के संस्थापक और महाराष्ट्र के बड़े नेता रहे बाल ठाकरे पर बनी फिल्म का नाम ठाकरे है. यह 2019 में रिलीज हुई. बाल ठाकरे का किरदार नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने निभाया. यह फिल्म हिंदी में है.
तस्वीर: picture-alliance/dpaसमाजसेवी और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के नेता रहे अन्ना हजारे पर भी फिल्म बन चुकी है. हिंदी में बनी 'अन्ना किशन बाबूराव हजारे' नाम की इस फिल्म में अन्ना का किरदार शंशाक उदापुरकर ने निभाया था.
तस्वीर: Reutersभारत की आजादी की लड़ाई के नायक रहे महात्मा गांधी के ऊपर तो कई फिल्में बन चुकी हैं. अंग्रेजी में बनी फिल्म 'गांधी' में अभिनेता बेन किंग्सले ने गांधी का किरदार निभाया था. वहीं भारत में भी 'गांधी माई फादर' नाम से महात्मा गांधी पर फिल्म बन चुकी है.
तस्वीर: picture-alliance/akg-images/K. Gandhiभीमराव अंबेडकर के ऊपर कई भाषाओं में कई फिल्में बन चुकी हैं. इनमें मराठी में बाल भीमराव, कन्नड में बालक अंबेडकर और डॉक्टर बी आर अंबेडकर और अंग्रेजी में डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर बन चुकी हैं.
तस्वीर: public domainनेताजी के उपनाम से प्रसिद्ध सुभाष चंद्र बोस के ऊपर भी फिल्म बन चुकी है. 'सुभाष चंद्र बोस दी फॉरगोटन हीरो' फिल्म में सचिन खेड़ेकर ने बोस का किरदार निभाया था. यह फिल्म भी हिंदी में है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/Kyodo फिल्म की कहानी तीन हिस्सों में दिखती है. पहली गरीबी से निकलने के लिए संघर्ष करता अंजनी का परिवार. अंजनी के पास कोई स्किल नहीं है लेकिन वो काम की तलाश में लगातार बना हुआ है. पूरा परिवार काम करने की कोशिश कर रहा है जिसका असर आने वाले बच्चे के स्वास्थ्य पर भी है. इसका मतलब आने वाली पीढ़ी भी परेशानी झेलेगी.
दूसरा हिस्सा समाज के अंदरूनी टकराव का है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की बड़ी सरकारी इमारतों से बंदर भगाने के लिए इंसानों को काम पर लगाया हुआ है. लेकिन ये इंसान कहीं किसी सरकारी रिकॉर्ड में बस एक संख्या की तरह दर्ज हैं. जब ये अपने काम को बेहतर करने की कोशिश करते हैं तो इनकी शिकायत कर दी जाती है.
तीसरा हिस्सा दिखाता है कि कैसे भीड़ अपने काम की कोशिश में लगे एक गरीब की हत्या कर देती है और व्यवस्था में इसका कोई हिसाब नहीं रहता.
मामी फिल्म फेस्टिवल में गोल्डन गेटवे अवॉर्ड जीत चुकी इस फिल्म को प्रतीक वत्स ने डायरेक्ट किया है. अंजनी के किरदार में शारदुल भारद्वाज हैं जो अपने किरदार के साथ न्याय करते दिखते हैं. महिंद्र के किरदार में महिंद्र नाथ हैं जो कोई अभिनेता ना होकर दिल्ली में बंदर पकड़ने का काम करते हैं. फिल्म में बंदरों के कई शॉट लाजवाब हैं. एक्टर श्वेताभ सिंह ने इस फिल्म के साथ प्रॉडक्शन की शुरुआत की है. इस फिल्म का अधिकतर क्रू फिल्म एंड टेलिविजन इंडस्ट्री से पढ़ा है. ऐसे में उनकी फिल्मी समझ भी फिल्म में दिखाई देती है. बर्लिनाले में यह फिल्म पैनोरमा कैटिगिरी में आई है.
__________________________
हमसे जुड़ें: Facebook | Twitter | YouTube | GooglePlay | AppStore
इमेज से बंधे बॉलीवुड के एक्टर्स
फिल्मों में गुस्से की बात होगी तो सनी देओल का नाम आएगा. रोमांस की बाजी शाहरुख खान के हाथ लगेगी. देखिये कुछ खास भूमिकाओं में सबसे सटीक बैठने वाले एक्टर्स.
तस्वीर: picture alliance/AP Photoमारपीट में शामिल रहना, पिस्तौल से फायरिंग करना और कभी कभी जज्बाती हो जाना, बॉलीवुड में जब जब ऐसे अभिनय की बात होती है तो संजय दत्त का नाम जेहन में आता है.
तस्वीर: picture alliance/AP Photoइस मामले में सनी देओल से बेहतर शायद कोई नहीं. उनके चेहरे पर गुस्सा 100 फीसदी सच लगता है. लात घूसों के सहारे होने वाली फाइट में सनी देओल सबसे ज्यादा असरदार नजर आते हैं.
तस्वीर: picture-alliance/ZUMAPRESS/A. Khanहिरोइन को रिझाना हो, झल्लाना हो या प्यार से दूर करना हो, सिनेमा के पर्दे पर यह काम अक्षय कुमार बहुत ही अच्छे करते हैं. वक्त के साथ उनके अभिनय में विविधता आई है लेकिन फ्लर्ट करने के मामले में अब भी उनका कोई सानी नहीं है.
तस्वीर: picture alliance/ZUMA Press/ India Todayइरफान खान. तमाम फिल्में देखने के बाद भी इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है कि इरफान खान अगला डॉयलॉग किस अंदाज में कहेंगे. बेहद मंझे हुए अभिनेता इरफान हर किरदार में रहस्य और नयापन फूंकने के लिए जाने जाते हैं.
तस्वीर: STRDEL/AFP/Getty Imagesइस मामले में शाहरुख खान का सिक्का चलता है. नायिका से हाथ फैलाकर बेपनाह मुहब्बत और इमोशनल करते हुए विदा लेना, शाहरुख ये काम बखूबी करते हैं. डर और बाजीगर जैसी फिल्मों के किंग खान ने यह भी साबित किया है कि वह पर्दे पर कैसा अंधा गुस्सा सामने ला सकते हैं.
तस्वीर: Twentieth Century Foxरणबीर कपूर. कॉलेज में पढ़ने वाला एक ऐसा युवा जो खुद नहीं जानता कि वह क्या करना चाहता है. वह प्यार तो करता है, लेकिन उसमें भी उलझता रहता है. पढ़ाई खत्म करने के बाद क्या करना, ये भी उसे पता नहीं. लेकिन वह गजब का दोस्त है. रणबीर कपूर का अभिनय कुछ ऐसी इमेज तैयार करता है.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/R. Maqboolएक्टिंग के मामले में सलमान खान भले ही हल्के महसूस हों, लेकिन स्टाइल के मामले उनका जवाब नहीं. चाहे चश्मा कॉलर के पीछे लटकाना हो, बॉडी दिखानी हो या फिर जेब में हाथ डालकर डांस करना हो, सलमान युवाओं के बीच स्टाइल ऑइकन से कम नहीं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/EPA/H. Tyagiमनोवैज्ञानिक और शारीरिक स्तर पर हर इंसान के भीतर कुछ डर छुपे होते हैं, लेकिन यह डर सच साबित हो जाएं तो? ऐसी परिस्थितियों में आयुष्मान खुराना की एक्टिंग बेजोड़ नजर आती है.
तस्वीर: DW/Maniऐसी भूमिका में नाना पाटेकर 100 फीसदी सटीक बैठते हैं. आराम से बात करते हुए अचानक भड़क जाना और एक्सप्रेस ट्रेन की तेजी से लंबा डॉयलॉग छाड़ देना यह नाना पाटेकर की खूबी है.
तस्वीर: Getty Images/G. Cattermoleगजब का डांस, नफासत भरी लाइफस्टाइल और नपे तुले ढंग से डॉयलॉग डिलीवरी, ये काम ऋतिक रोशन बड़ी बखूबी कर जाते हैं. उनकी एक्टिंग में एक स्टाइल दिखाई पड़ती है.
तस्वीर: Getty Images/AFP/M. Rasfanहीरो या गुंडे को अगर किसी ऐसे इंसान की जरूरत हो जो हंसा भी सके, लड़ भी सके और ऐन मौके पर गच्चा देकर भाग भी सके, ऐसे किरदार में अरशद वारसी बखूबी ढल जाते हैं.
तस्वीर: DWरजत कपूर. मंझे हुए कलाकार और डायरेक्टर रजत कपूर चाहकर भी गरीब नहीं दिख पाते. उनके चेहरे में कुछ ऐसी बात है कि वह अमीर या संभ्रात ही नजर आते हैं. ऐसे रोल रजत बखूबी निभाते हैं. कुछ ऐसा ही आभास करीना कपूर देती हैं.
तस्वीर: imago/Hindustan Times/S. Bateकोई भी काम कुछ खाते पीते करना, कल्लू मामा के नाम से मशहूर हुए सौरभ शुक्ला ऐसी छवि सहज ढंग से निभा जाते हैं. हांफते हुए चलना, फूलती सांस के साथ कुछ बोलना या खिसियाते हुए कोई काम करना सौरभ शुक्ला ऐसी भूमिकाओं के साथ गजब का न्याय करते हैं.
तस्वीर: Getty Images/AFP/Strdelअभय देओल, विनय पाठक, नवाजुद्दीन सिद्दीकी ऐसी भूमिकाओं में बड़े सटीक बैठते हैं. उनके संवाद आम समाज की भाषा और भावनाएं व्यक्त करते हैं. आम आदमी की पीड़ा, उसकी ठोकरें, बदकिस्मती रुआंसी सी खुशी या अंतहीन इंतजार का रोल निभाते हुए ये तीनों कभी निराश नहीं करते.
तस्वीर: DW/M. Gopalakrishnanनशेड़ी, कॉमेडियन, गाली गलौच का इस्तेमाल और लोगों को बेवकूफ बनाना या ड्राइवर, गुर्गे या हसीन सपनों में खोए लड़के का अभिनय विजय राज भी बखूबी निभाते हैं.
तस्वीर: AFP/Getty Imagesफिल्मों में विलेन अपने शत्रु को खत्म करने के लिए पैसा, ताकत और साजिशों का खूब इस्तेमाल करते रहे हैं. आशुतोष राणा और प्रकाश राज ऐसे किरदारों को बड़े सटीक ढंग से निभाते हैं. उनकी बड़ी घूरती आंखें, हीरो के आस पास भय का माहौल बसा देती हैं.
तस्वीर: Imago/Hindustan Times/A. Senकुछ ही एक्टर्स ऐसे होते हैं जो हर किरदार में बखूबी ढल जाते हैं. अभिताभ बच्चन, नसीरुद्दीन शाह, परेश रावल, अजय देवगन, इरफान खान, कंगना रनौत, अनिल कपूर, अक्षय कुमार, केके और कोंकणा सेन शर्मा शायद इसी श्रेणी में आते हैं.
तस्वीर: DW/P. Mani Tewari