फिनलैंड के स्कूलों में अब बच्चों की खिलखिलाहट और शोर की गूंज
१५ सितम्बर २०२५
ये नतीजा है किशोरों के मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाने का. फिनलैंड में इस साल जब गर्मी की छुट्टियों के बाद अगस्त में बच्चे स्कूल लौटे तो उनके फोन रखने की आजादी छिन चुकी थी.
हेलसिंकी के उत्तरपूर्व में 13-15 साल की उम्र के बच्चों के स्कूल कुंग्सवागेंस स्कोला में टीचर सुबह स्कूल पहुंचते ही बच्चों से उनका फोन जमा करा लेते हैं. इन्हें स्कूल खत्म होने तक के समय के लिए स्टोरेज रूम में सुरक्षित रख दिया जाता है.
स्कूल की प्रिंसिपल मारिया तालबर्ग का कहना है कि फोन मुक्त स्कूल बनाने की मुहिम का नतीजा "उम्मीदों से ज्यादा बेहतर है." तालबर्ग ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "निश्चित रूप से वे (छात्र) पहले शिकायत कर रहे थे क्योंकि उन्हें ब्रेक में भी फोन नहीं मिल रहा था लेकिन वे अब इसे समझने लगे हैं. बहुतों ने तो यह भी कहा कि उन्हें अंदाजा ही नहीं था कि वे अपने फोन के आदी हो चुके हैं."
फिनलैंड में क्लास टाइम में फोन पर पाबंदी लगाने का नियम 1 अगस्त से लागू हुआ. फिनलैंड को लंबे समय से शिक्षा की उच्च गुणवत्ता के लिए जाना जाता है. बहुत सी नगरपालिकाओं और स्कूलों ने फोन पर पाबंदी को ब्रेक में भी जारी रखने का फैसला किया है.
फोन रखने पर प्रतिबंध का फैसला ऐसे वक्त में लागू हुआ है जब दुनिया भर में यह बहस चल रही है कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल कैसे ना सिर्फ दिमाग बल्कि सीखने की क्षमता और शिक्षा पर भी असर डालता है. 2023 में यूनेस्को की रिपोर्ट के अलावा कई और रिसर्च रिपोर्टों ने यह चेतावनी दी है कि क्लासरूम में फोन ध्यान बंटाने के साथ ही सीखने की क्षमता को प्रभावित करता है. इस तरह की पाबंदियों के नियम कई और देशों में स्कूलों ने बनाए हैं. इनमें दक्षिण कोरिया, इटली, नीदरलैंड्स और फ्रांस शामिल हैं. भारत में दिल्ली के स्कूलों में भी मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है.
बेहद अलग अनुभव
कुंग्सवागेंस स्कोला में रसायन शास्त्र पढ़ाने वालीं अनिका रायलीला का कहना है कि क्लासरूम अब ज्यादा शांत हैं और छात्रों का ध्यान बंटना कम हो रहा है. रायलीला ने कहा, "पहले हमें उन्हें लगभग हर पाठ में यह याद दिलाना पड़ता था कि फोन को बैग में रखें और उसे क्लास के दौरान इ्स्तेमाल ना करें. उन्होंने यह भी कहा कि ब्रेक के दौरान छात्र आपस में अब ज्यादा घुलमिल रहे हैं. रायलीला के मुताबिक "वास्तव में आप अब उनके चेहरे और आंखें ज्यादा देख रहे हैं, जो स्क्रीन पर देखते हुए हेलो करने से बहुत बेहतर है."
15 साल के लिंडफोर्स ने अब स्कूल के वातावरण को "बहुत अलग" बताया है. लिंडफोर्स ने कहा, "मैं अब ज्यादा लोगों से बात करता हूं. स्कूल में एक कमरा है, जहां बोर्डगेम जैसी खूब सारी चीजें हैं तो रिसेस में वहां जाना और खूब मस्ती हो रही है." लिंडफोर्स की क्लासमेट लोट्टा नापास को लगता है कि अब स्कूल में ज्यादा "शोरगुल" और "रोमांच" है. नापास ने कहा, "मैं समझती हूं कि हम पाठ के दौरान उसे इस्तेमाल नहीं कर सकते लेकिन मुझे लगता है कि यह एक तरह का बेजुबान है जो वे हमसे पूरे दिन के लिए अलग कर देते हैं."
हालांकि 14 साल के ऑस्कर इंगमान को लगता है कि कुछ छात्र खुद को ज्यादा अकेला महसूस कर सकते हैं. उनका कहना है, "मैं लोगों को ज्यादा सामाजिक और ज्यादा लोगों से बात करते देखता हूं. लेकिन मैं कभी कभी कुछ लोगों को गलियारे में अकेले बैठे भी देखता हूं."
धारा बदलने की कोशिश
स्कूल यह कोशिश कर रहा है कि छात्रों के सामने ऐसी स्थिति ना आए कि उनके पास करने को कुछ ना हो. प्रिंसिपल ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि इंटरनेट पर धमकाने जैसी गतिविधियां पहले ही बहुत कम हो गई हैं. तालबर्ग ने कहा, "छात्र पढ़ाई के दौरान और उसके बाद बहुत सारी तस्वीरें और वीडियो बनाते थे और अकसर हमें उन क्लिप्स की जांच करनी पड़ती थी जो हर जगह शेयर की जाती हैं."
फिनलैंड के शिक्षा मंत्री आंदर्स आदलरक्रॉयत्स ने बताया कि देश में शिक्षा की स्थिति बिगड़ने के बाद नया कानून लाया गया. आदलरक्रॉयत्स का कहना है, "हमने दूसरे कई देशों की तरह फिनलैंड में देखा कि हमारी पढ़ने और गणित की क्षमता नीचे जा रही है और फिनिश तरीका ये है कि हम कैसे सीखने और सिखाने के लिए ज्यादा मौके बनाएं." उनका कहना है कि क्लासरूम में बाधा उत्पन्न करने वाले तत्वों को हटाने का फायदा हो रहा है.
ऑर्गनाइजेशन फॉर इकॉनॉमिक कॉपरेशन एंड डेवलपमेंड (ओईसीडी) के 38 सदस्य देशों में फिनलैंड शिक्षा के मामले में शीर्ष पर है. हालांकि बीते सालों में 15 साल तक की उम्र वाले बच्चों में गणित, विज्ञान और कुछ दूसरे विषयों में छात्रों की क्षमता घटने जैसी बातें सामने आ रही हैं. शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि मोबाइल फोन से क्लास में बच्चों को दूर करने का मतलब डिजिटल दुनिया से उनको दूर करना नहीं है.