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सिंगापुर में दौड़ने लगी बिना ड्राइवर वाली टैक्सी

ओएसजे/एमजे (एएफपी)२६ अगस्त २०१६

दुनिया की पहली बिना ड्राइवर के चलने वाली टैक्सी सेवा शुरू हुई. और तो और इन टैक्सियों की सवारी फिलहाल मुफ्त रखी गई है.

Autonomes Taxi in Singapur nuTonomy Testfahrt
तस्वीर: picture-alliance/dpa/Kyodo

खुद ब खुद चलने वाली गाड़ियों का परीक्षण कई देशों में हो रहा है. लेकिन सिंगापुर ने इस कड़ी में एक बड़ी छलांग लगाई है. सिंगापुर में नु टोनोमी कंपनी ने ड्राइवरलेस टैक्सियां सड़क पर उतार दी हैं. कंपनी ने फिलहाल छह कारें उतारी हैं. 2016 के अंत तक इनकी संख्या बढ़ाकर एक दर्जन कर दी जाएगी. नु टोनोमी 2018 के अंत तक सिंगापुर को पूरी तरह ड्राइवरलेस टैक्सियों वाला शहर बनाना चाहती है.

गुरुवार को इस योजना की शुरुआत हुई. छह टैक्सियों के लिए अभी 6.5 वर्गकिलोमीटर का इलाका तय किया गया है. बिना ड्राइवर वाली टैक्सी में सफर करने के लिए फिलहाल यात्रियों को अपना रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ रहा है. ऐसा बीमा संबंधी नियमों के चलते किया जा रहा है. अब तक हजारों लोग अपना रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. टैक्सी की सवारी मुफ्त है, लेकिन इसमें वही लोग सवार हो सकते हैं, जिन्हें गाड़ी चलानी आती हो. यात्रियों को स्टीयरिंग के सामने बैठना होता है. कंपनी के मुताबिक ऐसा एहतियातन किया जा रहा है.

(तस्वीरों में मर्सिडीज की ड्राइवरलेस बस)

25 साल की ओलिविया सेओव इस टैक्सी की सवारी करने वाले लोगों में शुमार हुई. टेस्ट राइड के बाद ओलिविया ने कहा, "कार में बैठते ही मैं थोड़ी नर्वस जरूर हुई. स्टीयरिंग अपने आप घूम रहा था. ऐसा लगा जैसे कोई भूत या कुछ और हो." लेकिन थोड़ी देर बाद वह सहज हो गईं. कार चिड़ियां और खड़ी मोटरसाइकिल या साइकिलों का भी ख्याल रखते हुए आगे बढ़ती गई. ओलिविया कहती हैं, "जो चीजें मैं अपनी आंखों से नहीं देख पा रही थी वह भी कार देख रही थी. मुझे अहसास हुआ कि मैं कार पर भरोसा कर सकती हूं." किसी चीज के सामने आने पर कार खुद ब्रेक लगा रही थी. लेन बदलने से पहले कार इंडिकेटर भी देती रही.

रेनॉ और मित्सुबिशी की ड्राइवरलेस टैक्सियां एक खास ऐप से चल रही हैं. हर कार में छह लिडार लगे हुए हैं. लिडार, रडार सिस्टम की तरह है, लेजर से चलने वाला यह सिस्टम अपने आस पास मौजूद हर चीज को स्कैन करता है. कार के डैशबोर्ड पर दो कैमरे लगे हैं जो लाल, पीली और हरी ट्रैफिक लाइट डिटेक्ट करते हैं. कार की छत पर भी डिटेक्शन सिस्टम लगा है.

सिंगापुर में फिलहाल 9,00,000 टैक्सियां हैं. ड्राइवरलेस टैक्सी के सफल होते ही वहां सिर्फ 3,00,000 टैक्सियां बचेंगी. भविष्य में ऐप के जरिये बिना ड्राइवर वाली टैक्सी को कभी भी बुलाया जा सकेगा. ऐप के जरिये पेमेंट करने और पता डालने के बाद सवारी की जा सकेगी.

नु टोनोमी के सीईओ कार्ल आईआंगेनेमा के मुताबिक, "सड़कों से बहुत सारी कारों के हटने के बाद कई तरह की संभावनाएं सामने आएंगी. छोटी सड़कें बनाना संभव होगा, पार्किंग का आकार भी कम होगा. भविष्य में लोगों और शहरों के बीच संवाद बिल्कुल बदल जाएगा."

अमेरिका में टेस्ला कंपनी भी ड्राइवरलेस कारों का परीक्षण कर रही है. जर्मन कंपनी मर्सिडीज तो ड्राइवरलेस ट्रक और बसें भी बनाने लगी है. स्वीडन की कार कंपनी वोल्वो भी ड्राइवरलेस कार उतारने का एलान कर चुकी है. एप्पल, गूगल और उबर टैक्सी सर्विस भी अपने अपने टेस्ट कर रहे हैं. जाहिर है बेहतर सॉफ्टवेयर, बेहतर डिटेक्शन सिस्टम और अच्छे जीपीएस की मदद से ड्राइवरलेस कारें काफी तेजी से अपनी जगह पाने जा रही हैं. 21वीं सदी परिवहन के पारंपरिक तरीके को बदलने जा रही है.

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