रंग-बिरंगी ब्रा और इत्र नष्ट करवा देता था आईएस, लेकिन...
२ दिसम्बर २०१६
मोसुल के तीन चौथाई हिस्से को इस्लामिक स्टेट से वापस छीन लिया गया है. अब सामने आ रहा है कि इस्लामिक स्टेट के राज में वहां जिंदगी कैसी थी.
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इस्लामिक स्टेट के लड़ाके जब मोसूल के हमजा समीह की दुकान में आए तो उसका डरना लाजमी था. इत्र की दुकान में घुसते ही आतंकियों ने हमजा को दो हुक्म दिए. एक तो इत्र और रंग-बिरंगी ब्रा नहीं बिकेंगी और दूसरा, महिला और पुरुष के लिए अलग अलग दरवाजे होने चाहिए. वक्त गुजरने पर वही आतंकवादी समीह के सबसे अच्छे ग्राहक बन गए.
23 साल के समीह मोसुल के उस इलाके में रहते हैं जहां से इस्लामिक स्टेट को भगाया जा चुका है. पश्चिमी देशों की सेनाओं की मदद से इराकी फौज ने शहर के इस हिस्से पर कब्जा कर लिया है जहां समीह की दुकान है. लेकिन समीह के लिए इस कब्जे का मतलब है उसके सबसे अच्छे ग्राहकों का चले जाना. वह बताते हैं, "पैसे तो उन्हीं के पास होते थे. वे अपने लिए और अपनी पत्नियों के लिए इत्र खरीदते थे."
देखिए, 3000 साल पुराने शहर को आईएस ने कैसे किया बर्बाद
आईएस ने ऐसे बर्बाद किया 3000 साल पुराना शहर
इराकी सैनिकों ने प्राचीन शहर निमरूद को इस्लामिक स्टेट के कब्जे से मुक्त करा लिया है. लेकिन यहां मौजूदा विरासत को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो पाएगी.
2014 में जब इस्लामिक स्टेट ने उत्तरी इराक के बड़े हिस्से पर कब्जा किया तो निमरूद भी इसमें शामिल था. चरमपंथियों ने यहां जमकर लूटपाट और तोड़फोड़ की.
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बर्बादी का वीडियो
पिछले साल इस्लामिक स्टेट ने एक वीडियो जारी किया था जिसमें चरमपंथियों को निमरूद के भित्ति चित्रों और मूर्तियों को बुलडोजर से तहस नहस करते हुए दिखाया गया था.
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बुतपरस्ती
कट्टरपंथी विचारधारा पर चलने वाला इस्लामिक स्टेट इस्लामी दौर से पहले की विरासतों को बुतपरस्ती से जोड़कर देखता है और इसलिए उन्हें ध्वस्त किया जाता है.
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युद्ध अपराध
यूनेस्को ने निमरूद में हुई तबाही की निंदा की है और इसे युद्ध अपराध बताया है.
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लामासु
निमरूद की मशहूर प्रतिमाओं में पंखों वाले एक सांड भी है जिसका मुंह इंसान का है. इसका नाम लामासु है जो ईसा पूर्व नौंवी सदी के राजा अशुरनसीपाल द्वितीय के महल के मुख्यद्वार पर है.
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तिगरिस के किनारे
निमरूद तिगरिस नदी के पूर्वी किनारे पर बसा और मोसुल से 30 किलोमीटर दूर पूर्व में स्थित है.
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किसने खोजा निमरूद
निमरूद को 19वीं सदी में ब्रिटिश पुरातत्वविद ऑस्टेन लेयार्ड ने खोजा था. बाद में 1950 के दशक में ब्रिटिश पुरातत्वविद मैक्स मेलोवेन और उनकी पत्नी और अपराध लेखिका अगाथा क्रिस्टी ने भी निमरूद में काम किया था.
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उपन्यासों की पृष्ठभूमि
निमरूद और मध्यपूर्व में अगाथा क्रिस्टी का सफर उनके कई उपन्यासों की पृष्ठभूमि बना.
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इराकी शहर मोसुल पर इस्लामिक स्टेट का दो साल से ज्यादा समय तक पूरा कब्जा रहा. यहां उन्होंने सुन्नी इस्लाम के नए नियम थोपे. महिलाओं के लिबास से लेकर पुरुषों की दाढ़ी की लंबाई तक हर चीज के लिए नए नियम बनाए गए. अक्टूबर में इराकी फौज ने मोसुल पर दोबारा कब्जा करने के लिए जंग शुरू की थी. अब तीन चौथाई शहर इस्लामिक स्टेट से आजाद हो चुका है.
समीह बताते हैं कि इस्लामिक स्टेट के नियमों ने तो उनका धंधा ही बंद करा दिया था. उनकी मुख्य ग्राहक महिलाएं ही थीं और आईएस ने महिलाओं को पूरी तरह काले बुर्के में ढके रहने, बाहर न निकलने और सार्वजनिक जगहों पर इत्र का इस्तेमाल न करने का आदेश दिया था. समीह बताते हैं, "दाएश (आईएस) ने मेरी दुकान में मिलने वालीं ज्यादातर चीजों पर प्रतिबंध लगा दिया था. मेकअप करने की इजाजत नहीं थी. इत्र बंद था." अपने फोन में एक तस्वीर दिखाते हुए समीह कहते हैं, "...और यह भी." यह तस्वीर हरी और नीली ब्रा की है जिन्हें समीह को नष्ट करना पड़ा था.
तस्वीरों में, आईएस से लोहा लेतीं कुर्द लड़कियां
आईएस से लोहा लेतीं ईरान की कुर्द हसीनाएं
ईरान की लगभग दो सौ कुर्द महिलाएं उत्तरी इराक में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ रही हैं. ये महिला फाइटर कुर्दों की फोर्स पेशमर्गा में शामिल हैं और इन्हें अमेरिकी सेना का समर्थन हासिल है.
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पहले गीत, फिर मशीन गन
समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि जब भी आईएस के चरमपंथियों की तरफ से ईरान की इन कुर्द महिलाओं पर मोर्टार गोले दागे जाते हैं तो सबसे पहले ये उनका जबाव लाउडस्पीकर पर गीत गाकर देती हैं. इसके बाद मशीनगनों की तरफ हाथ बढ़ाती हैं और निशाने पर होता है इस्लामिक स्टेट.
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"हमें खौफ नहीं"
21 साल की मानी नसरुल्ला का कहा है कि वो गीत इस वजह से गाती हैं ताकि आईएस के चरमपथियों को और गुस्सा आए. वो कहती हैं, “इसके अलावा हम इन्हें बताना चाहती हैं कि हमें उनका खौफ और डर नहीं हैं.” लगभग दो सौ कुर्द औरतें ईरान छोड़ कर इराक में जंग लड़ रही हैं.
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छह सौ की यूनिट में
ये महिलाएं जिस यूनिट का हिस्सा हैं, उसमें छह सौ लोग शामिल हैं. यह यूनिट कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी के साथ मिल कर लड़ रही है. कुर्द इसे पीओके के नाम से पुकारते हैं.
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अलग देश की जंग
ये यूनिट अब इराक और अमेरिकी सेना के साथ मिल कर काम कर रही है. कुर्द लोग अपने लिए एक अलग देश के लिए भी लड़ रहे हैं.
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विरोध
कुर्द लोग ईरान, सीरिया, इराक और तुर्की के कुछ हिस्सों को मिलाकर अपना अलग देश चाहते हैं. लेकिन इसका काफी विरोध होता है. तुर्की तो कुर्द बागियों के खिलाफ कार्रवाई भी कर रहा है.
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"लड़ते रहेंगे"
एक महिला कुर्द सैनिक का कहना है कि वो अपनी सरमजीन की हिफाजत के लिए लड़ रही है. अब वो सरजमीन चाहे ईरान के कब्जे में हो या इराक के. इनके सामने चाहे इस्लामिक स्टेट हो या कोई और दूसरी ताकत, वो अपनी अपनी सरजमीन की आजादी के लिए लड़ती रहेंगी.
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आईएस की कोई परवाह नहीं
इस समय ये महिलाएं पुरुष कुर्दों के साथ उत्तरी इराक में स्थित फजलिया नाम के एक देहाती इलाके में लड़ रही हैं. एक 32 वर्षीय महिला फाइटर का कहना है, “ये सच है कि इस्लामिक स्टेट खतरनाक है, लेकिन हमें उसकी परवाह नहीं है.”
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"मैं भी दूंगी जबाव"
वहीं एक अन्य फाइटर का कहना है कि उसने पेशमर्गा में शामिल होने का फैसला उस वक्त किया था जब हर तरफ से ये खबरें आ रही थीं कि इस्लामिक स्टेट के चरमपंथी महिलाओं के साथ बहुत बुरा व्यवहार करते हैं. “मैंने फैसला किया कि मैं भी उनको जवाब दूंगी.”
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विवाद
हालांकि उत्तरी इराक में इन महिलाओं की मौजूदगी को लेकर विवाद भी हो रहा है. ईरान ने कुर्दिस्तान की क्षेत्रीय सरकार पर इन महिलाओं को बेदखल करने का दबाव बढ़ दिया है. 2016 में कुर्द लड़ाकों की ईरानी सेना के साथ कम से कम छह बार झड़पें हो चुकी हैं.
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गर्व
इन महिलाओं के पुरुष कमांडर हाजिर बाहमानी कहते हैं कि इनके साथ पुरुषों जैसा ही बराबर सलूक किया जाता है और उन्हें इन महिलाओं पर गर्व है. इन्हें छह हफ्ते की स्नाइपर ट्रेनिंग भी दी गई है.
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ऐसी चीजों पर भी रोक थीं जिन पर अंग्रेजी में बड़े बड़े अक्षरों में नाम लिखा हो. समीह बताते हैं, "छोटे आकार के अक्षर चल जाते थे." लेकिन ये सारे प्रतिबंध आम लोगों के लिए ही थे. आतंकवादियों पर ऐसा कोई प्रतिबंध लागू नहीं होता था. समीह के कुछ पड़ोसी बताते हैं कि आतंकवादी महंगी कारों में चलते थे और लूटे गए बड़े बड़े बंगलों में रहते थे. अपने ग्राहक बन गए आतंकवादियों के बारे में समीह कहते हैं, "वे लोग महंगे विदेशी ब्रैंड्स पसंद करते थे. कुछ की चार पत्नियां थीं."