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विज्ञानसंयुक्त राज्य अमेरिका

मछली से जमीन का जीव बनने की कहानी बदल गई

१९ जून २०२६

विज्ञान करीब 150 सालों से यही मानता आया है कि जीवों का जन्म पहले पानी में हुआ और फिर वहां से वे क्रमिक विकास कर जमीन पर चौपाया जानवर बने. इनके बीच एक उभयचर प्राणियों के जीवन जैसा चरण था. अब यह कहानी बदल गई है.

मेजॉन क्रीक में मिला एम्बोलोमीयर का जीवाश्म
वैज्ञानिकों ने जलीय जीव से जमीन पर चलने वाले जीवों के बनने की कहानी में अहम जानकारी पता की है तस्वीर: Arjan Mann/Field Museum/AFP

वैज्ञानिक लंबे समय से यह मानते आए हैं कि जमीन पर रहने वाले जीवों की उत्पत्ति मेंढक के जीवन जैसी प्रक्रिया से हुई थी. यानी पानी में पैदा होने के बाद जब जमीन की ओर आए तो उनसे पहले टैडपोल जैसे उभयचर गुणों वाले जीवों का विकास हुआ. बाद में इसी टैडपोल जैसे जीव से मुख्य जीव बने जिनकी आकृति टैडपोल से बिल्कुल अलग थी. 

एक नई रिसर्च से इस कहानी के कुछ नए पहलू सामने आए हैं. साइंस जर्नल में इस रिसर्च पर रिपोर्ट छपी है. यह रिपोर्ट दुर्लभ जीवाश्मों के विश्लेषण से तैयार हुई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जमीन पर शुरुआती कशेरुकी जीवों का उभार जिन जीवों की वजह से हुआ उसके बारे में कई नई जानकारियां मिली हैं.

मेजॉन क्रीक के जीवाश्म

यह रिसर्च उत्तरी इलिनॉय में शिकागो के दक्षिण पश्चिम में मेजॉन क्रीक में मिले जीवाश्मों पर आधारित है. करीब 30.9 करोड़ साल पहले आयरन कार्बोनेट के जमा होने से बनी यह जगह प्राचीन जीवों के जीवाश्म के लिए विख्यात है. यहां की दलदलों, छिछले इलाकों और नदी डेल्टाओं में प्राचीन जीवों को फलने फूलने के भरपूर मौके मिले थे. वैज्ञानिकों को यहां असाधारण रूप से बेहतर संरक्षित नमूने हासिल हुए हैं, जिनमें कुछ नरम ऊतक भी शामिल हैं.

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नई रिसर्च में दर्जनों जीवाश्मों का अध्ययन कर मछली और टेट्रापॉड यानी चौपाया जीवों के बीच विकास की पड़ताल की गई है. इसके केंद्र में एक ऐसा नमूना है जिसे किसी मगरमच्छ के बच्चे जैसे जीव का माना जा रहा है. इसे इमबोलोमीयर कहा जाता है. यह ज्यादातर पानी में ही रहता था, हालांकि इसके छोटे छोटे पैर विकसित हुए.

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इसकी बाल्यावस्था के बारे में अनुमान लगाया गया था कि इसमें टैडपोल की तरह बाहरी गिल जैसी संरचना विकसित हुई होगी. शिकागो के फील्ड म्यूजियम के रिसर्च एसोसिएट और इस रिसर्च रिपोर्ट के सहलेख जेसन पार्दो का कहना है कि ऐसा नहीं हुआ था.

इस बच्चे के शरीर में उन्हें सीधे विकास के सबूत मिले हैं. यानी कि वयस्क होने पर जिस तरह उनका शरीर विकसित हुआ वह उनके बचपन जैसा ही था. इस जीव के नमूने का आकार एक छोटे मैक्रोनी नूडल के बराबर है.

उभयचर प्राणियों में हम ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं कर सकते. अंडे से निकलने के बाद वे पहले टैडपोल में विकसित होते हैं और फिर वयस्क प्राणी जिनमें कई अंगों और हाथ पांव का बिल्कुल अलग तरीके से विकास होता है. पार्दो ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "अब जीवाश्मों के जरिए हमारे पास इस बात के सीधे प्रमाण हैं कि उभयचर प्राणी जैसे जीवन चक्र जो हमारे इतिहास का 150 साल से हिस्सा रहा है, वास्तव में ऐसा बिल्कुल नहीं था.

गौरवशाली जीवाश्म

ऑस्ट्रेलियाई जीवाश्मविज्ञानी जॉन लॉन्ग ने भी इस क्षेत्र में काफी रिसर्च किया है उन्होंने इस रिसर्च को "काफी असाधारण" बताया है. उन्होंने एएफपी से कहा कि शुरुआती चौपाया जीवों को जन्म देने वालों के, "जीवन के शुरुआती चरणों के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था. गौरवशाली जीवाश्मों के समूह पर विस्तृत रिसर्च ने यह साबित किया कि वे सीधे बाल्यावस्था में गए और उन्हें टैडपोल अवस्था में जाने की जरूरत नहीं पड़ी."

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यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी के जेसन एंडर्सन इस रिसर्च पेपर को "शानदार" बताया है जो जीवाश्मों को उन सवालों का जवाब देने की क्षमता को दिखाता है जिनके बारे में हम सोचते थे कि वे बहुत कम समय में हुई हैं, और ऐसे ऊतकों में हुई हैं जो करोड़ों सालों तक आमतौर पर संरक्षित नहीं रहते."

पार्दो और एंडरसन दोनों ने इस ओर भी ध्यान दिलाया है कि यह रिसर्च इस बात की पुष्टि करती है कि उभयचर क्रमिक विकास से जुड़े अपने आप में शानदार जीव हैं. एंडर्सन ने एएफपी से कहा, "हमारे उभयचर चौपाया जानवरों के विकास के इतिहास के शुरुआती चरणों का प्रमाण होने की बजाय वे अपने आप में ही उच्च विकसित जीव हैं.

इस रिसर्च के लिए मुख्य भूमिका निभा रहे जीवाश्म फील्ड म्यूजियम के संग्रह का काफी लंबे समय से हिस्सा हैं. कई साल पहले म्यूजियम के निदेशक ने अर्जन मान को जब इसे दिखाया तो वह बहुत रोमांचित तहुए. अर्जन मान इस रिसर्च रिपोर्ट के सहलेखक हैं. कनाडा में डॉक्टोरल स्टूडेंड रहे मान और पार्दो कई सालों तक इस गुत्थी में उलझे रहे. आखिरका कनेडियन म्यूजियम ऑफ नेचर में स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कॉपी की मदद से इसका विश्लेषण करने से रिसर्च इसे संभावित इमबोलोमीयर के रूप में पुष्टि करने में सक्षम हुए.

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