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अमेरिकी वैज्ञानिकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा यूरोप

५ मई २०२५

फ्रांस और यूरोपीय संघ, अमेरिकी वैज्ञानिकों को यूरोप की तरफ आकर्षित करने के लिए कई कदम उठा रहे हैं. माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नीतियों की वजह से कई अमेरिका वैज्ञानिक देश छोड़ने को तैयार हैं.

फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों और यूरोपीय आयोग की प्रेसीडेंट उर्सुला फॉन डेय लाएन
यूरोप के नेताओं को उम्मीद है कि अमेरिकी वैज्ञानिक अपने देश छोड़ कर यूरोप को चुनेंगेतस्वीर: Tom Nicholson/Getty Images

फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों और यूरोपीय आयोग की प्रेसीडेंट उर्सुला फॉन डेय लाएन, पांच मई से पेरिस में एक सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं. सम्मलेन का उद्देश्य, ट्रंप की नीतियों की वजह से अमेरिका छोड़कर कहीं और जाने को तैयार अमेरिकी वैज्ञानिकों को आकर्षित करना है.

इस सम्मलेन में यूरोपीय संघ के आयुक्त, वैज्ञानिक और सदस्य देशों के मंत्री, इस पर भी चर्चा करेंगे कि ऐसे नाराज वैज्ञानिकों को आकर्षित करने के लिए किस तरह के वित्तीय प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं.

अमेरिका में संस्थानों पर दबाव

'चूज यूरोप फॉर साइंस' यानी 'विज्ञान के लिए यूरोप को चुनें' नाम से आयोजित किया जा रहा यह सम्मेलन पेरिस के सोर्बोन विश्वविद्यालय में हो रहा है. इसके समापन सत्र को माक्रों और फॉन डेय लाएन संबोधित करेंगे.

अमेरिका में वैज्ञानिक और शैक्षिक समुदाय कई तरह के दबावों का सामना कर रहा हैतस्वीर: Robyn Stevens Brody/Sipa USA/dpa/picture alliance

डॉनल्ड ट्रंप के दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल में अमेरिकी विश्वविद्यालयों और शोध केंद्रों पर राजनीतिक और वित्तीय दबाव बढ़ा है. वे बड़े पैमाने पर सरकारी फंडिंग में कटौती का खतरा झेल रहे हैं और शोध कार्यक्रम बंद होने की संभावना का सामना कर रहे हैं.

हजारों सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है और विदेशी छात्रों को उनके राजनीतिक विचार व्यक्त करने के लिए देश से निकाले जाने का डर सता रहा है.

माक्रों के कार्यालय में काम करने वाले एक अधिकारी ने कहा कि यूरोपीय संघ उम्मीद करता है कि वो शोधकर्ताओं को एक विकल्प दे सकेगा और ऐसा करके, "हमारे रणनीतिक हितों की रक्षा हो पाएगी और एक वैश्विक नजरिए को प्रोत्साहन मिलेगा."

अमेरिकी वैज्ञानिकों को लुभाता फ्रांस

माक्रों ने पिछले महीने ही अमेरिकी और अन्य विदेशी शोधकर्ताओं से अपील की थी कि वो "फ्रांस को चुनें". उन्होंने एक ऐसी फंडिंग योजना के बारे में भी बताया जो विदेशी वैज्ञानिकों को फ्रांस लाने के खर्च को वहन करने में विश्वविद्यालयों और दूसरी शोध संस्थाओं की मदद करेगी.

इससे थोड़ा पहले दक्षिणी फ्रांस में स्थित 'एक्स मार्से विश्वविद्यालय' ने बताया था कि उसकी "सेफ प्लेस फॉर साइंस" यानी "विज्ञान के लिए सुरक्षित जगह" योजना में आवेदनों की बाढ़ आ गई थी. इस विश्वविद्यालय ने मार्च में घोषणा की थी कि वह ऐसे वैज्ञानिकों के लिए अपने दरवाजे खोलेगा जो फंडिंग में कटौती के खतरे का सामना कर रहे हैं.

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पिछले हफ्ते फ्रांस के प्रमुख वैज्ञानिक शोध केंद्र सीएनआरएस ने एक नई पहल शुरू की, जिसका उद्देश्य खतरों का सामने कर रहे विदेशी शोधकर्ताओं और दूसरे देशों में काम कर रहे फ्रांसीसी शोधकर्ताओं को आकर्षित करना है.

लेकिन अमेरिका जैसी फंडिंग और तनख्वाह नहीं है

सीएनआरएस के अध्यक्ष औंथ्वां पेति ने कहा था कि इन शोधकर्ताओं में से कुछ "ट्रंप के अमेरिका में रहना और अपने बच्चों को बड़ा करना नहीं चाहते हैं." फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय के एक अधिकारी के मुताबिक, सोमवार का सम्मेलन "ऐसे समय पर हो रहा है जब कई मामलों में शैक्षणिक आजादी घट रही है व खतरे का सामना कर रही है और यूरोप आकर्षण का महाद्वीप है."

हालांकि जानकारों का कहना है कि यूरोपीय संघ के देश, शोध के लिए अच्छा इंतजाम और जीने का अच्छा स्तर तो दे सकते हैं, लेकिन रिसर्च के लिए फंडिंग और शोधकर्ताओं की तनख्वाह के मामले में यूरोप अमेरिका से बहुत पीछे है.

सीएनआरएस के पेति ने पिछले हफ्ते उम्मीद जताई कि शिक्षा और स्वास्थ्य का कम खर्च और सामाजिक सुविधाओं से जुड़े अन्य लाभों को देखें तो अमेरिका के मुकाबले यूरोप में तनख्वाह में कमी, शायद कम महसूस होगी.

माक्रों के दफ्तर ने कहा कि फ्रांस और यूरोपीय संघ स्वास्थ, जलवायु, बायोडाइवर्सिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले शोधकर्ताओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

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