अभूतपूर्व जंगल की आग से जूझते फ्रांस में पहली बार फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनते देखा गया है. आखिर आग के बादल होते क्या हैं और इनका क्या असर होता है. फ्रांस में इसे देखने के बाद क्यों चिंता बढ़ रही है.
फ्रांस में पहली बार आग के बादल बनते देखे गए हैं तस्वीर: Maximilien Lamy/AFP
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फ्रांस जंगल की अभूतपूर्व आग से जूझ रहा है. लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है और सैर सपाटे के मौसम में अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है. जंगल की आग ना सिर्फ अपने विस्तार में भयानक है बल्कि यह जिस रूप में नजर आ रही है वह इससे पहले फ्रांस में कभी नहीं देखी गई. यहां फायर क्लाउड यानी आग के बादल बनने की भी खबरें आ रही हैं जो फ्रांस के लिए दुर्लभ रहा है.
फायर क्लाउड क्या है?
पाइरक्यूम्यूलोनिंबस एक तरह का बादल है जो जंगल की बड़ी आग के ऊपर बनता है. तेज गर्मी जब धुएं, राख और भाप को वातावरण में धकेलती है तो पाइरोक्यूम्यूलोनिंबस बनता है जिसे फायर क्लाउड यानी आग के बादल भी कहा जाता है.
तस्मानिया यूनिवर्सिटी में पायरोजियोग्राफी के प्रोफेसर डेविड बोमान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "आप किसी चिमनी के रूप में इसकी कल्पना कर सकते हैं, जिसमें नीचे आग होती है, धुआं चिमनी के रास्ते से होता हुआ वायुमंडल में जाता है."
फायर क्लाउड अकसर ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में दिखते हैं तस्वीर: Dreamstime/IMAGO
मौसमविज्ञानी उन परिस्थितियों की पहचान कर सकते हैं जो फायर क्लाउड बनाने के लिए आदर्श होते हैं, हालांकि वे बारीकी से यह नहीं बता सकते कि वे कब बनेंगे. ऐसे में वे चेतावनी तो दे सकते हैं लेकिन इसकी सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकते.
जंगल की आग पर बुरा असर
फायर क्लाउड जंगल की आग को ज्यादा खतरनाक और अप्रत्याशित बना सकते हैं. तेज हवाएं पैदा करके वे आग की दिशा बदल सकते हैं और बिजली पैदा करके वह आग की नई लपटों को जन्म दे सकते हैं.
उनके अंदर की ऊर्जा खत्म होने के बाद भी "प्लूम कोलैप्स" की स्थिति पैदा कर के नुकसान पहुंचा सकते हैं. प्लूम जब बादलों के अंदर पर्याप्त ऊर्जा नहीं बचती तो वे ढह जाते हैं, इसके साथ राख और कचरा जमीन पर गिर कर नुकसान पहुंचाता है. इसे ही प्लूम कोलैप्स कहते हैं. बोमन का कहना है, "प्लूम कोलैप्स होता है तो वहां जलते कचरे की बारिश होती है."
गर्मी बढ़ने के साथ ही यूरोप के कई इलाकों में जंगल की आग तबाही मचा रही है. अब तक सबसे ज्यादा नुकसान स्पेन और फ्रांस में हुआ है.
तस्वीर: Stephane Mahe/REUTERS
स्पेन में 13 लोगों की मौत
स्पेन में जंगल की आग की चपेट में आकर मरने वालों की संख्या 13 पर पहुंच गई है. सोमवार को 93 साल की एक ब्रिटिश महिला मौत हो गई. महिला पहले से भी बीमार थी. जंगल की आग में 12 लोगों की मौत शुरुआती आग में शुक्रवार की रात को ही हो गई थी. आठ लोग अस्पताल में भर्ती हुए थे और उनमें से सात अब भी अस्पताल में हैं.
तस्वीर: Loyola Perez de Villegas Muniz/REUTERS
7,000 हेक्टेयर जंगल खाक
अधिकारियों को संदेह है कि दक्षिणी स्पेन के लो गैलार्दोस में बिजली के तारों से उठी चिंगारी की वजह से आग लगी. बीते हफ्ते लगी इस जंगल की आग में करीब 7,000 हेक्टेयर जंगल जल कर खाक हो गया. शनिवार के बाद से आग की लपटें और आगे नहीं फैली हैं. हालांकि आग बुझाने का काम अभी जारी है और अधिकारी कह रहे हैं कि स्थिति नियंत्रण में है.
तस्वीर: Jorge Guerrero/AFP
घरों को लौट रहे लोग
इलाके के घरों से निकाले गए करीब 1,600 लोगों को अब अपने घर लौटने को कहा गया है. आग में फंसे लोगों की तलाश भी अब बंद कर दी गई है. आग लगने के बाद पैदल और गाड़ियों से भाग रहे कुछ लोग भी इसकी चपेट में आ गए. मरने वालों में से 10 लोगों की आधिकारिक पहचान हो गई है बाकी के तीन लोगों की पहचान करने में अधिकारी जुटे हुए हैं.
तस्वीर: Ana Beltran/REUTERS
विमान से बुझाइ जा रही है आग
फ्रांस में सोमवार को लगातार दूसरे दिन भी आग बुझाने वाले विमान आग को बुझाने की कोशिश में जुटे रहे. पेरिस के आसपास के इलाके में पहली बार आग बुझाने के लिए विमान का प्रयोग किया गया है. बहुत से लोगों को अपना घर छोड़ कर जाना पड़ा है. जंगल के किनारे बसे गांवों करीब 750 लोग रहते हैं.
तस्वीर: Alexandre Dimou/REUTERS
1,300 हेक्टेयर जंगल साफ
गर्म हवाओं के चलने और तापमान बढ़ने से यहां के जंगलों की आग फैलती जा रही है. आग में लगभग 1,300 हेक्टेयर जंगल जल कर खत्म हो चुका है. आग दो जगहों पर लगी है. एक जगह 1,200 और दूसरी जगह 100 हेक्टेयर जंगल साफ हो गया. आग की वजह से यहां रेल और हाइवे पर ट्रैफिक बाधित रहा. नेशनल रेलवे का कहना है कि प्रभावित इलाकों में रेलवे सेवा मरम्मत के बाद सोमवार सुबह से चालू हो गई है.
तस्वीर: Jc Milhet/AFP
फ्रांस में चलती लू
तीन महीने से भी कम समय में फ्रांस तीसरी बार लू का सामना कर रहा है. बीते हफ्ते यहां के कई और हिस्सों में फैले जंगल आग की चपेट में आए हैं. जून में यहां गर्म हवाओं के चलने से 2,000 अतिरिक्त लोगों की मौत हुई. मई के आखिर में भी यहां 300 लोगों की गर्मी की वजहों से मौत हुई. वैज्ञानिकों ने तापमान बढ़ने के लिए इंसानी गतिविधियों को दोषी माना है.
तस्वीर: Xavier Leoty/MAXPPP/picture alliance
पुर्तगाल, ग्रीस और इटली
पुर्तगाल के वोजेला, ग्रीस के थेसालोनिकी और मंद्रा क्षेत्र में आग लगी है. इटली और बाल्कन देशों के कुछ हिस्सों में भी जंगल की आग लगी है. ब्रिटेन के नॉर्थ वेल्स में भी कुछ जगहों पर आग लगने के बाद लोगों को उनके घरों से निकाल कर सुरक्षित ठिकानों पर लगाया गया है. यूरोपीय संघ के अर्थ ऑब्जर्वेशन प्रोग्राम कॉपरनिकस के मुताबिक जुलाई 2026 कर यूरोप में आग से प्रभावित क्षेत्र औसत से काफी ज्यादा हैं.
तस्वीर: Andrea Carrubba/Anadolu/picture alliance
यूरोप में गर्मी
आमतौर पर ठंडे रहने वाले यूरोप में बीते कुछ सालों सें तापमान में काफी इजाफा हुआ है. यहां गर्मियों में 30 डिग्री से ऊपर तापमान वाले दिन बहुत कम ही होते थे लेकिन हाल के वर्षों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जा रहा है. जून के महीने में जर्मनी, फ्रांस,स्पेन समेत कई जगहों पर तापमान 40 डिग्री को छू गया. ना सिर्फ तापमान बढ़ रहा है बल्कि अधिक तापमान वाले दिनों की संख्या भी बढ़ गई है.
तस्वीर: Stephane Mahe/REUTERS
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यूरोप पर क्या असर होगा?
फ्रेंच अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि बोर्दो के पास पाइरोक्यूमूलोनिंबस देखा गया है जो फ्रांस में पहली बार है. फ्रांस में बोर्दो के पास बीते कई दिनों से जंगल की आग धधक रही है.आग के बादल बनने की खबर आने के बाद आपातकालीन सेवाओं की चुनौती बढ़ गई है. आग की अप्रत्याशित प्रवृत्ति की वजह से अधिकारी इलाकों को खाली कराने का दायरा बढ़ा सकते हैं.
बोमन का कहना है कि पूर्वी यूरोप में आग के बादल पैदा होने की घटनाएं बढ़ सकती हैं. अब तक इन्हें ज्यादातर कनाडा या ऑस्ट्रेलिया में ही देखा जाता रहा है. बोमन के मुताबिक, "यह बहुत गंभीर स्थिति है. यह हैरान करने वाला है लेकिन यह विनाशकारी और भयानक है, हम ऐसी चीजें और नहीं चाहते."
जंगल की आग से निपटने के लिए एआई अर्ली वॉर्निंग सिस्टम