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इतिहाससंयुक्त राज्य अमेरिका

सदियों पहले छोटी नावों में सात हजार किलोमीटर का सफर करने वाले लोग

निखिल रंजन रॉयटर्स
२३ अक्टूबर २०२६

सदियों पहले छोटी-छोटी नावों में सात हजार किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा कर हवाई द्वीप पहुंचे पोलेनेसियाई. आज यह जगह अमेरिका का एक राज्य कहलाता है. इस यात्रा को वैज्ञानिकों ने जेनेटिक रिसर्च से साबित कर दिया है.

हवाई द्वीप के पास सागर में एक पाल नौका (प्रतीकात्मक तस्वीर)
हजारों साल पहले 7 हजार किलोमीटर दूर से आए थे हवाई द्वीप पर बस्ती बसाने वाले तस्वीर: Zak Noyle/A-Frame/ZUMA/dpa/picture alliance

दक्षिण प्रशांत महासागर के ईस्टर आईलैंड से समुद्री नाविकों का एक दल छोटी नावों में बैठकर पृथ्वी के सबसे बड़े महासागर को पार कर हवाई द्वीप तक पहुंच गया. उत्तरी गोलार्ध का यह अकेला पोलेनेसियाई द्वीप था. यह दूरी करीब 7,100 किलोमीटर लंबी है. ये लोग अपने साथ जरूरी चीजें लेकर इतनी लंबी यात्रा के बाद अपना घर बसाने आए थे. यही लोग बाद में हवाई द्वीप के मूलनिवासी कहलाए. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कहानी सच्ची है. 

अभूतपूर्व सफलताः वैज्ञानिकों ने मानव जीनोम के हर हिस्से का पता लगा लिया

मानव इतिहास में यह एक बिल्कुल अकल्पनीय और असाधारण कारनामा था. हालांकि, सदियों पुरानी यह लंबी समुद्री यात्रा अब कोई मिथक नहीं है. रिसर्चरों ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि हवाई द्वीप के मूल निवासी ईस्टर आइलैंड के लोगों के करीबी रिश्तेदार हैं, कम से कम जेनेटिक रूप से. ईस्टर आइलैंड को रापा नुई भी कहा जाता है.

जेनेटिक विश्लेषणों से मिले सबूत 

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के कंप्युटेशनल जेनेटिसिस्ट यानी कंप्यूटर, गणित और डेटा विश्लेषण का उपयोग कर जीन, डीनएन और वंशानुगत गुणों का पता लगाने वाले आलेक्जांडर लोआनिडिस साइंस जर्नल में प्रकाशित नई रिसर्च रिपोर्ट के सह लेखक हैं. उनका कहना है, "पूरे जीनोम का इस्तेमाल कर हमारे अल्गोरिद्म दोनों द्वीपों के निवासियों की डीएनए सीक्वेंस से सीधे मेल खाते दिखा रहे हैं जो उनके साझे पूर्वजों की विरासत हैं. इन आकड़ों के इस्तेमाल से द्वीपों की पारिवारिक वंशावली तैयार की जा सकती है.

इस्टर द्वीप से चले पोलेनेसियाई लोग हजारों किलोमीटर की समुद्री यात्रा करके हवाई पहुंचे और वहां बस्तियां बसाईतस्वीर: Stefan Nehls/imageBROKER/picture alliance

यह खोज इशारा करती है कि ज्वालामुखी वाले हवाई द्वीप पर बसने वाले पहले मानव समूह ईस्टर द्वीप से आए थे. पोलेनेसियाई लोग लंबी समुद्री यात्राओं के लिए जाने जाते हैं.

क्या चीन से भी आए थे अमेरिका के मूल निवासी

लोआनिडिस के मुताबिक, आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ईस्टर द्वीप पर बसने वाले लोग यहां तेरहवीं सदी में आए थे. ये लोग फ्रेंच पोलिनेसिया मांगारेवा आइलैंड से 2,400 किलोमीटर की यात्रा कर आए थे. उन्हीं में से कुछ लोगों का समूह हवाई के लिए आगे बढ़ गए. यह यात्रा भी उसी सदी में हुई.

वैज्ञानिकों ने डीएनए की मदद से बनाया निएंडरथाल का परिवार

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के जीनोम साइंटिस्ट और रिसर्च रिपोर्ट के सहलेखक केउलु फॉक्स ने बताया, "हमने डीएनए के साझे हिस्सों, जेनेटिक बदलावों और दोबारा बनाई गईं हजारों पारिवारिक वंशावलियों का परीक्षण किया है. उन वंशावलियों में 61 फीसदी हवाई और रापा नुई के आपस में जुड़ गए. हमने उन्हें चार अलग अलग तरीकों से परखा क्योंकि नतीजे इतने हैरान करने वाले थे कि हमें खुद पर ही भरोसा नहीं हो रहा था."

कौन हैं पोलेनेसियाई लोग

लोआनिडिस ने कहा है कि यह यात्रा अतुलनीय रही होगी. लोआनिडिस के मुताबिक, "अपनी नावों में अपने साथ वे उन पौधों को भी लाए थे जिनकी उन्हें नए द्वीप पर जरूरत होगी और उनमें केला, टारो और शकरकंद और मुर्गे जैसे जीव भी शामिल थे. माना जाता है कि पोलिनेसिया संसाधनों के धनी और बसने के लिए जमीन वाले द्वीपों की खोज में हजारों मीलों की समुद्री यात्रा पर गए."

जमीन और संसाधनों की तलाश में पोलेनेसियाई लोगों ने हजारों किलोमीटर की समुद्री यात्राएं कीतस्वीर: Stefan Nehls/imageBROKER/picture alliance

रिसर्चरों ने जेनेटिक डेटा के आधार पर लंबी यात्राओं के सिरे जोड़े हैं. अलग-अलग पोलिनेसियाई द्वीपों के रहने वालों का रिश्ता पता लगाने के लिए 1,000 से अधिक पोलिनेसियाई लोगों के डीएनए का विश्लेषण किया गया है. इनमें 317 हवाई मूल निवासी, 12 रापा नूई के और आठ मांगारेवैंस के लोग शामिल हैं. इनके अलावा सोसायटी, तुआमोतू, मारक्वेसास, ऑस्ट्राल, समोआ और टोंगा द्वीपों के भी लोग शामिल हैं.

महासागर को पार करने की कवायद

रिसर्चरों ने महासागरों के पार जाने की इस भारी भरकम कवायद का श्रेय लंबी यात्रा करने वाली आबादी को दिया है जिन्हें वे होलमोआना नुई कहते हैं. इन हवाईयन शब्दों का मतलब है "महासागरों की लंबी यात्राएं." इनलोगों की आखिरी मंजिल हवाई थी.

फॉक्स खुद भी मूल रूप से हवाईयन हैं. उनके मुताबिक ये लोग मानव इतिहास के सबसे महान यात्री समुदाय थे. उनका कहना है, "पोलिनेसियाई लोग यूरोपीय लोगों की महान यात्राओं से कई सदी पहले से प्रशांत महासागर में घूम रहे थे और बस्तियां बना रहे थे. किन लोगों को खोजी कहा जाए इस बारे में दोबारा सोचने का वक्त आ गया है."

डीएनए टेस्ट कितने सटीक होते हैं

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जेनेटिक आंकड़ों का इस्तेमाल कर रिसर्चरों ने पहले पता लगाया है कि पोलेनेसियाई यात्री कैसे सदियों के दौर में एक के बाद एक द्वीपों पर पहुंचे. यह मानव इतिहास की सबसे महान यात्राओं में से हैं, हालांकि, रिसर्च अब तक ईस्टर द्वीप तक ही पहुंच सकी हैं.

ताहिती का विकास

नई रिसर्च में ताहिती के लोगों के जीनोम का एक विस्तृत विश्लेषण किया गया है. यह सोसायटी द्वीपसमूह का एक द्वीप है जिसके निवासियों के सबसे ज्यादा जीनोम रिसर्चरों को मिले हैं. वे उनकी नींव डालने वाली पीढ़ी का आकार और यहां पहुंचने का समय तय करने में सफल हुए हैं. रिसर्चरों को मुताबिक, लगभग 800 लोग साल 1070 के करीब ताहिती पहुंचे थे.

लोआनिडिस का कहना है, "हवाई की यात्रा बहुत लंबी थी तो हमें उम्मीद है कि उसकी नींव जिन लोगों ने डाली थी वह ज्यादा बड़ी ना हो कर छोटी रही होगी." रिसर्चर बताते हैं कि हवाई के मूल निवासी और ईस्टर द्वीपवासियों के बीच कई सांस्कृतिक समानताएं भी हैं जो पूर्वी पोलेनिसियाई लोगों में पाई जाती हैं. इनमें ऑस्ट्रोनेसियाई भाषा और एक तरह का खाना भी शामिल है. इनमें शकरकंद, तारो, केला, गन्ना समेत कई ऐसी चीजें हैं जो दोनों जगह खाने में शामिल की जाती हैं. 

निखिल रंजन निखिल रंजन एक दशक से डॉयचे वेले के लिए काम कर रहे हैं और मुख्य रूप से राजनैतिक विषयों पर लिखते हैं.
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