जर्मनी में एक कानून है बियर शुद्धता कानून. इस कानून को इस साल 500 साल पूरे हो गए हैं. लोग इसे सबसे पुराना उपभोक्ता कानून कहते हैं. लेकिन इस पर विवाद भी बहुत हैं.
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जर्मन बियर कानून ने इस साल अपने 500 साल पूरे कर लिए हैं. बियर कानून सुनकर आप चौंक तो नहीं गए? यह सच है. जर्मनी में एक बियर कानून है जो 1516 में बनाया गया था और तब से चला आ रहा है. हालांकि अब इसमें बदलाव की मांग सुनाई दे रही है.
जर्मनी का बियर कानून एक अद्भुत कानून है. कई बार तो इसे दुनिया का सबसे प्रसिद्ध खाद्य कानून भी कहा जाता है. जब किसी को उपभोक्ता अधिकारों का ख्याल भी नहीं आया था तब यह कानून बना दिया गया था. इसके जरिये सुनिश्चित किया गया कि बियर बनाने में पानी, होप्स और जौं का इस्तेमाल ही हो ताकि उसकी शुद्धता कायम रहे. और इसकी वजह सच में उपभोक्ताओं का ख्याल ही था. हुआ यूं कि 500 साल पहले पीने का पानी नहीं मिल पाता था. लोग अक्सर उसकी जगह बियर पी लेते थे. और खूब पीते थे ताकि प्यास न लगे. तब इस बात का ख्याल आया कि बियर की गुणवत्ता उच्च कोटि की हो ताकि लोगों को नुकसान न हो. इसके लिए बियर शुद्धता कानून बनाया गया.
क्या है बियर शुद्धता कानून
जर्मन में इस कानून के लिए शब्द है राइनहाइट्सगेबॉट जो कि शब्दशः इस कानून का मकसद जाहिर कर देता है कि आपको बियर की शुद्धता बनाए रखनी है. इसके अनुसार होप्स, पानी और जौ के अलावा बियर बनाने में किसी और चीज का इस्तेमाल नहीं हो सकता. 1516 में इस कानून को बावेरिया राज्य में ही लागू किया था. 1871 में जब बिस्मार्क ने जर्मनी के एकीकरण की बात की तो बावेरिया ने शर्त रखी कि बियर शुद्ता कानून को पूरे जर्मनी में लागू करना होगा. तब से यह पूरी जर्मनी का कानून बन गया.
कानून पर हमले
भले ही यह कानून अपने आप में एक गाथा है लेकिन इस पर हमले भी होते रहे हैं. कई आलोचक मानते हैं कि इसकी वजह से जर्मन बियर उद्योग को नुकसान हुआ है. यूरोपीय संघ भी इस कानून को लेकर कई बार नाराजगी जाहिर कर चुका है. बियर बनाने वाले इस कानून के कुछ आलोचकों का कहना है जर्मन बियर में इतनी सहनशीलता तो होनी ही चाहिए कि वह कुछ और तत्वों को अपने अंदर मिला सके.
जर्मनी में बीयर की गुणवत्ता को लेकर 1516 में शुद्धता कानून बना. पांच शताब्दियों बाद अब भी इन्हें दुनिया भर में बीयर की गुणवत्ता के लिए मुहर की तरह माना जाता है. जानिए बीयर से जुड़े कुछ अहम तथ्य.
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जर्मन बीयर
जर्मनी के मशहूर बीयर ब्रांड लंबे समय से अंतराष्ट्रीय महफिलों में दिखते रहे हैं. जर्मनी में 1350 से अधिक अलग अलग ब्रुअरी हैं और करीब 5500 बीयर के ब्रांड. जर्मनी यूरोप में सबसे अधिक बीयर उत्पादन करता है. हर साल यहां साढ़े नौ करोड़ हेक्टोलीटर बीयर का उत्पादन होता है.
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10 बड़े बीयर ब्रांड
उत्पादन के लिहाज से पहले नंबर पर ओएटिंगर और क्रोमबाखर एक दूसरे को बराबर की टक्कर देते हैं. ये ग्राफिक डाटा 2014 के आंकड़ों के मुताबिक बनाया गया है. अभी हाल ही में आए शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक क्रोमबाखर ने विदेशों में हुई भारी बिक्री के चलते बढ़त बना ली है.
ओएटिंगर
ओएटिंगर इसी नाम के एक फैमिली बिजनेस का हिस्सा है. इसका मुख्यालय ओएटिंगेन नाम के कस्बे में है और गोथा के अलावा मोएंशनग्लाडबाख और ब्राउनश्वाइग कस्बों की भट्टी में बीयर तैयार की जाती है.
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बीयर की खपत
पिछले कुछ दशकों में जर्मन लोगों के बीच बीयर की खपत गिरती गई है. 1980 में जब ये अपने चरम पर थी तब औसतन हर जर्मन साल में 146 लीटर बीयर पीता था. लेकिन 2015 में ये आंकड़ा नीचे लुड़क कर 106 लीटर तक आ पहुंचा है.
क्रोमबाखर
क्रोमबाखर कंपनी 1803 में बनी और 1922 से ये शाडेबर्ग परिवार से जुड़ी है. इसका नाम नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया प्रांत के क्रॉयत्सटाल शहर के नाम पर रखा गया जहां इसकी भट्टी है. इसकी अल्कोहल फ्री बीयर भी काफी मशहूर है.
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दुनिया भर में बीयर
बात जब दुनिया भर में बीयर की खपत की होती है तो बेशक एशिया ही शीर्ष पर खड़ा नजर आता है. इसकी वजह दरअसल इसकी आबादी है. औसत के लिहाज से एशिया में रहने वाला हर व्यक्ति यूरोप के एक व्यक्ति की तुलना में कम बीयर पीता है.
बिटबुर्गर
बिटबुर्गर को 1817 में जॉन पीटर वॉलेनबॉर्न ने बनाया. उन्हीं के वंशज अब भी इस कंपनी के मालिक हैं. ये बीयर अभी 60 देशों में बिक रही है और जर्मनी के बाजार में ये तीसरे नंबर पर है.
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दुनिया की सबसे बड़ी भट्टियां
ग्राफिक दर्शा रहा है कि जर्मन बीयर भट्टियां अंतराष्ट्रीय बीयर कंपनियों के सामने कुछ भी नहीं हैं. दुनिया भर में बीयर बाजार का नेतृत्व करने वाली अनहॉयजर बुश का 100 अरब डॉलर की एक डील के बाद अपनी नजदीकी प्रतिद्वंदी एसएबी मिलर में विलय हो गया है.
फेल्टिंस
फेल्टिंस की शुरूआत 1824 में हुई. 1994 मां के गुजरने के बाद से सुजाने फेल्टिंस कंपनी की इकलौती मालकिन हैं और कंपनी में नवीनताओं को बढ़ावा दे रही हैं. इस कंपनी का 'मिसेस' बीयर जर्मनी के बाजार में सबसे ज्यादा मशहूर है.
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इंस्टिट्यूट फॉर प्योर बियर के मानद अध्यक्ष हर्बर्ट फ्रांकेनहाउसेर ने अंग्रेजी पत्रिका श्पीगल से कहा कि यह कानून अक्षमताओं के खिलाफ एक ढाल है और विदेशी बियर की बुराइयों से भी लड़ता है. लेकिन हैम्बर्ग के रहने वाले बियर व्यापारी ओलिवर वेसलोह का कहना है कि यह दुनिया की सबसे पुराना मार्किटिंग अभियान है और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने के बजाय उन्हें धोखे में रखने के काम आता है. प्रोविजनल बियर लॉ ऑफ 1993 के तहत बियर में अगर कुछ ऐसे तत्व हैं जिनसे बचा नहीं जा सकता तो उसके खिलाफ बियर शुद्धता कानून कुछ नहीं कहता. मसलन सिंथेटिक पॉलिमर का इस्तेमाल ब्रू को बांधने के लिए किया जाता है. उसके तत्व ब्रू में मिल जाते हैं. लेबल पर इन तत्वों का जिक्र बस इस तरह किया जाता है कि "टेक्निकल अनअवॉएडेबल अमाउंट्स" भी मिलाए गए हैं. ऐसे कई तत्व हैं जो बियर बनाने की अलग-अलग प्रक्रियाओं के दौरान उस द्रव का हिस्सा बनते जाते हैं जिसे लोग पीते हैं.
ऐसी रिसर्चों और दलीलों की कोई कमी नहीं है जिनमें कम मात्रा में शराब के सेवन को सेहत के लिए अच्छा और कई बार लंबी उम्र का कारण भी बताया गया है. एक नया सर्वे कई लोगों को भाने वाली इस मान्यता को खारिज कर रहा है.
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ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपी रिपोर्ट बताती है कि शराब के फायदों के बारे में पहले कई दावे बढ़ाचढ़ा कर किए गए थे. ज्यादा शराब पीने का 200 से भी अधिक बीमारियों से संबंध है. रोज केवल एक या दो ड्रिंक लेने वालों को होने वाले फायदे की रिपोर्टों पर इसलिए सवाल उठ रहे हैं क्योंकि उन स्टडीज में कम शराब पीने वालों की तुलना ज्यादा पीने वालों से की गई थी, ना कि शराब बिल्कुल ना पीने वालों से.
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में हर साल होने वाली कुल मौतों में से करीब 6 फीसदी का कारण शराब है. रूस और बेलारूस जैसे पूर्वी यूरोपीय देश शराब की खपत के मामले में दुनिया के टॉप पांच देशों में हैं. बेलारूस का एक नागरिक औसतन साल में 17.5 लीटर शुद्ध एल्कोहल पी जाता है जबकि रूस में ये औसत करीब 15.1 लीटर पाया गया.
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जर्मनी को बीयर प्रेमी देश माना जाता है. यहां साल में प्रति व्यक्ति औसतन 11.8 लीटर शराब पी जाती है, जबकि ब्रिटेन का औसत 11.6 लीटर है. उत्तरी अमेरिका और एशिया के मुकाबले यूरोपीय देश बहुत आगे हैं.
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माना जाता है कि एशिया में खपत कम होने का एक कारण ये भी हो सकता है कि कुछ एशियाई समुदायों में एल्कोहल को पचाने में मदद करने वाले एंजाइम ही नहीं होते.
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महिलाओं के शरीर में पुरुषों के मुकाबले बॉडी वॉटर कम होता है जिसके कारण एल्कोहल पूरे शरीर में ज्यादा आसानी से फैल जाता है. डॉक्टर बताते हैं कि महिलाओं में पानी से ज्यादा वसा का भार होता है इसलिए उनमें एल्कोहल कम जगह में ज्यादा सान्द्रता में पाया जाता है.
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चीन और भारत जैसे विकासशील देशों में शराब की खपत लगातार बढ़ रही है. बढ़ते मध्यवर्ग के लोग अब महंगी विदेशी शराब भी काफी खरीदने लगे हैं, जैसे जर्मन बीयर या फ्रेंच वाइन.
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उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई देशों में लोग काफी कम शराब पीते हैं. पाकिस्तान, कुवैत और लीबिया जैसे देशों में साल की औसत खपत मात्र 0.1 लीटर के आसपास है.
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वहम है, प्यार है
2013 में जर्मन बियर असोसिएशन ने कोशिश की कि यूनेस्को इस कानून को हेरिटेज लिस्ट में शामिल कर ले. यूनेस्को ने मना कर दिया. जर्मन लोगों को बुरा लगा. वे अपनी बियर से, उसकी शुद्धता से और इस कानून से प्यार करते हैं. लेकिन यह भी सच है कि तकनीक बियर में घुल चुकी है. उसकी वजह से बियर में तरह-तरह की मिलावट हो चुकी है. मसलन होप ही अब 200 तरह का मिलता है. लिहाजा शुद्धता अब एक वहम है और जर्मनों को इस वहम से प्यार है. इसीलिए शुद्धता कानून के 500 साल पूरे होने का जश्न खूब धूमधाम से मनाया जा रहा है.