जर्मनी के किसान मांग रहे हैं सूखे से राहत
२२ अगस्त २०१८
Germany's farmers seek drought aid
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वैश्विक सूखे के दौर में जी रहे हम
इस वक्त आर्कटिक क्षेत्र से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक पूरी दुनिया सूखे की चपेट में आ चुकी है. बढ़ते तामपान ने फसलों को बर्बाद कर दिया और भूजल का स्तर नीचे जा चुका है. वैश्विक सूखे की यह स्थिति भयावह है.
भारत: पानी का संकट गहराया
बढ़ती आबादी और अव्यवस्था से जूझ रहे भारत में पानी का संकट गहराता जा रहा है. पिछले दिनों आईटी हब बंगलुरू को उन ग्लोबल सिटीज में शामिल किया गया जहां पीने के पानी की कमी देखी गई. साउथ अफ्रीका की राजधानी केप टाउन, इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता और ब्राजील के शहर साओ पाओलो में भी ऐसी स्थिति है.
ऑस्ट्रेलिया: बरसों से सूखाग्रस्त देश
कई दशकों से ऑस्ट्रेलिया का मध्य हिस्सा सूखे की चपेट में है. पिछले दिनों प्रधानमंत्री मालकोल्म टर्नबुल ने सूखाग्रस्त राज्य न्यू साउथ वेल्स के किसानों को आर्थिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सहायता देने का एलान किया. यह राज्य ऑस्ट्रेलिया के पूरे कृषि के एक चौथाई हिस्से का उत्पादन करता है.
इथोपिया: खानाबदोश जीवन का अंत?
साल 2015 से इथोपिया सूखे की चपेट में है जिससे यहां के लोगों के पास खाने का संकट पैदा हो गया है. 2017 में यहां की सरकार ने जानकारी दी कि करीब 85 लाख जनता आपातकाल खाद्य सहायता की जरूरत है और करीब 4 लाख बच्चे कुपोषण के शिकार हो चुके हैं. इस समस्या ने यहां के खानाबदोश जीवन पर असर डाला है.
दक्षिण अफ्रीका: क्या अंटार्कटिक से मंगवाने पड़ेगी बर्फ?
केपटाउन में देर-सबेर हुई बारिश ने सर्वनाश से बचा लिया वरना यहां आपातकालीन राशन बांटने की चर्चा शुरू हो गई थी. पिछले कुछ दशकों के सबसे खराब सूखे के बाद यहां के जलाशय खाली हो चुके थे. अंटार्कटिक क्षेत्र से हिम खंड मंगवाने पर विचार किया जाने लगा था.
यूरोप: बर्बाद हो गईं फसलें
यूरोपीय देशों ने इस साल बुरी तरह गर्मी की मार झेली. आम लोगों को न सिर्फ स्वास्थ्य की समस्याएं हुईं बल्कि किसानों की मेहनत बर्बाद हो गई. सूखा पड़ने से किसानों को अब दिवालिया होने का डर सता रहा है. यूरोपीय संघ ने आशंका जताई है कि सूखे की समस्या आने वाले वक्त में और बढ़ेगी.
ग्रीस: डूबे हुए गांव वापस दिखने लगे
ग्रीस में एक तरफ सूखे की मार है और दूसरी तरफ बाढ़ ने तबाही मचा रखी है. किसानों का कहना है कि उनकी 40 फीसदी फसल बर्बाद हो गई है, फिर भी वे सिंचाई किए जा रहे हैं. सूखे की तीव्रता का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जलाशयों में डूबे हुए गांव फिर नजर आने लगे हैं.
स्वीडन: 1944 के बाद अब तक सबसे बुरा दौर
स्वीडन में तीन महीने से बारिश की एक बूंद नहीं गिरी है और वैज्ञानिकों का मानना है कि यह 1944 के बाद का सबसे बुरा सूखा है. फसलों के नष्ट होने से यहां के किसानों को हजारों यूरो का नुकसान झेलना पड़ा है. आर्कटिक क्षेत्र के इस देश में तापमान पहली बार 30 डिग्री को पार कर गया और जंगलों में आग लग गई.
यूके: ब्रेक्जिट के बीच खाद्य संकट का खतरा
ब्रेक्जिट को अपनाकर आत्मनिर्भर होने की कोशिश कर रहे यूके में सूखे की मार ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. यहां की फूड सप्लाई चेन पर असर पड़ा है. किसानों के राष्ट्रीय यूनियन का कहना है कि देश किसी माचिस की डिबिया जैसा हो गया है. बढ़ती गर्मी ने लोगों के रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाला है.
अमेरिका: धूल भरी आंधियां
अमेरिकी सरकार ने जानकारी दी है कि देश का 29 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में आ चुका है जिससे करीब 7.5 करोड़ लोगों पर असर पड़ेगा. कैलीफोर्निया के जंगलों में बार-बार लग रही आग ने दुनिया भर का ध्यान खींचा. कृषि पर निर्भर राज्य कैनसस में बढ़ती गर्मी और धूल भरी आंधियों ने इसे फिर से 1930 काल के 'डस्ट बाउल' जैसा बना दिया है.