समुद्र से आने वाली हवा में उड़कर रेत थोड़ी थोड़ी दूर पर जमा होता है, उसमें पौधे अपनी जड़ बनाते हैं और रेत का ढेर बढ़कर टीलों में बदल जाता है. और जब तेज हवा चलती है तो टीले चलने लगते हैं.
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््सििुपपुमंदर के किनारे रेत सागर की विशालता का अनुभव कराते हैं. उत्तरी जर्मनी के विख्यात द्वीप सिल्ट पर रेत का मतलब है उड़ता रेत. समुद्र से आने वाली हवा में उड़कर रेत थोड़ी थोड़ी दूर पर जमा होता है, उसमें पौधे अपनी जड़ बनाते हैं और रेत का ढेर बढ़कर टीलों में बदल जाता है. और जब तेज हवा चलती है तो टीले चलने लगते हैं. इन चलने वाले रेत के टीलों ने हजारों सालों से द्वीप को बचाए रखा है. ये कहना है सिल्ट पर रहने वाले तटरक्षा विशेषज्ञ कार्स्टेन राइजे का. तटों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रंबध किए बिना भी हजारों सालों से ये काम करता आया था. फिर सिल्ट के लोगों ने टीलों को पक्का करना शुरू किया ताकि उनके घर रेत के तूफान से बच सकें.
आजकल तटों को सैकड़ों टन कंक्रीट से सुरक्षित किया जा रहा है. जर्मनी के सिल्ट द्वीप के दक्षिणी छोर पर, जहां समुद्र खासकर किनारों की कटाई कर रहा है, ये विशालकाय ढांचे तट की रक्षा के लिए रखे गए हैं. अल्फ्रेड वेगेनर इंस्टीट्यूट के कार्स्टेन राइजे कहते हैं, "यहां एकदम दक्षिण में लोगों ने सोचा कि हम इस तरह के कंक्रीट के विशाल ढांचों से होरनुम में घरों को को बचा सकते हैं. इससे सचमुच मोहल्ले का यह फायदा हुआ कि वे रेत को यहां रोक पाए, लेकिन इसका दूसरा असर ये हुआ कि द्वीप के और दक्षिण में रेत नहीं पहुंच पाया और वहां इसकी कमी हो गई. नतीजा यह हुआ है कि जबसे यह ढांचा यहां है द्वीप का दक्षिणी कोना छोटा होता गया है."
देखिए, खतरे में हैं कुदरत के अजूबे
खतरे में हैं प्राकृतिक अजूबे
दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं जिन्हें उनकी अद्वितीय सुंदरता और विशेषताओं के कारण प्राकृतिक अजूबा माना जाता है, वे आज हम इंसानों की करनी का बुरा नतीजा झेल रहे हैं. देखिए किनसे है इन्हें खतरा...
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खतरनाक विश्व रिकॉर्ड
हिन्द महासागर में स्थित मालदीव गणराज्य में हजार से भी अधिक द्वीप हैं. खूबसूरत समुद्री तटों और उथली खाड़ियों वाला दुनिया का ये सबसे सपाट देश सबसे बड़े खतरे झेल रहा है. इसके कुछ इलाके समुद्रस्तर से मात्र एक मीटर की ऊंचाई पर हैं, जो कि लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण सबसे पहले डूब सकते हैं.
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संकटग्रस्त महिमा
ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए माउंट किलिमंजारो एक जादुई ठिकाना है. सवाना घास के मैदानों के बीच खड़े अफ्रीका के इस सबसे ऊंचे पहाड़ की बर्फीली चोटियां धीरे धीरे गायब हो रही हैं. वैज्ञानिकों ने बताया है कि अभी ही माउंट किलिमंजारो की बर्फीली चोटी का 85 फीसदी हिस्सा खो चुका है. जलवायु परिवर्तन से हालत और बुरी होगी.
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सांस नहीं मिलती
दुनिया के सात प्राकृतिक अजूबों में से एक - अमेजन के वर्षावनों - को अक्सर पूरी पृथ्वी की सेहत से जोड़ कर देखा जाता है. मूल जंगल का कम से कम 12 फीसदी हिस्सा काटा जा चुका है. हर मिनट कम से कम तीन फुटबॉल के मैदानों जितने बड़े क्षेत्र से ट्रॉपिकल वर्षावन खो रहे हैं. धरती के फेफड़े की ऐसी हालत पूरे ग्रह के लिए बुरी खबर है.
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डेड सी की मौत
डेड सी में पानी की सतह पर यू हीं उतरते रहने का सपना बहुतों का होगा. लेकिन भविष्य में वहां जाने वाले पर्यटकों को शायद पानी की जगह केवल सूखी धरती ही मिले. धरती के सबसे खारे पानी का स्रोत हर साल करीब एक मीटर सिकुड़ता जा रहा है. यहां का पानी कृषि और खनन जैसी इंसानी जरूरतों को पूरा करने में इस्तेमाल किया जाने लगा है.
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दम घुटता प्लिटवाइस का
क्रोएशिया का प्लिटवाइस पार्क अपने झरनों और फिरोजी झीलों के लिए मशहूर रहा है और यूरोप के सबसे खूबसूरत प्राकृतिक ठिकानों में से एक माना जाता है. अप्रैल से सितंबर के बीच हर रोज 13,000 के करीब पर्यटक इसे एक नजर देखने पहुंचते हैं. इतनी बड़ी तादाद से इस जगह पर काफी बोझ पड़ा और 2006 से इसमें तैराकी की भी मनाही करनी पड़ी.
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रोमांच का कूड़ा
अगर आपकी कल्पनाओं में सबसे सुंदर ठिकाना भीड़भाड़ से दूर कोई शांत पर्वतीय ठिकाना है तो भी माउंट एवरेस्ट ना जाएं. ऐतिहासिक रूप से इसकी चोटी नापना दुनिया में केवल कुछ बहादुर और भाग्यशाली लोगों की उपलब्धि रहा है. लेकिन आजकल प्रकृति के इस रत्न पर वहां पहुंचने वाले अनगिनत पर्यटकों के फैलाए कूड़े की धूल जम गई है.
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बाली का संकटपूर्ण भाग्य
इंडोनेशिया का सबसे प्रसिद्ध पर्यटक ठिकाना बाली अपनी बेमिसाल खूबसूरती के कारण "ईश्वरीय द्वीप" कहलाता है. सफेट समुद्र तट, साफ पानी और हिंदू मंदिरों पर अब गहरे काले बादल छाने लगे हैं. पर्यटकों की भीड़ के कारण खुले सैकड़ों होटलों ने ताजे पानी और धरती पर अधिकार कर लिया है. ऊपर से द्वीपों पर जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते समुद्र स्तर का खतरा भी है.
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प्रदूषण का दुष्चक्र
साल 2015 में ही लेक टिटिकाका में कई टन मृत मछलियां, बत्तखें और मेंढक पाए गए. दुनिया की प्रमुख झीलों में सबसे ऊंची लेक टिटिकाका रहस्यमयी इंका सभ्यता का जन्मस्थान भी माना जाता है. गंदे प्रदूषित पानी, खनन और दूसरी औद्योगिक गतिविधियों के कारण इसका पानी जहरीला हो रहा है.
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तट की रक्षा में द्वीप के चारों ओर फैला समुद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. समुद्रविज्ञानी ज्वार भाटे में डूबने वाले समुद्री इलाके पर नजर रखते हैं और इस बात की जांच करते रहते हैं कि ज्वार भाटे के दौरान आने और फिर लौटने वाला पानी किस तरह तट पर रेत और कीचड़ छोड़ जाता है. सोनिक और अन्य उपकरणों की मदद से समुद्र की मिट्टी की जांच करते हैं. तलछट में जमा होने वाली मिट्टी को किसी किताब की तरह पढ़ा जा सकता है. अल्फ्रेड वेगेनर इंस्टीट्यूट की स्वेन्या पापेनमायर बताती हैं, "हमारे यहां ये हुआ है कि घटना तेजी से होने लगी हैं, तूफान जल्दी जल्दी आने लगे हैं, देर तक टिकते हैं और पहले से ज्यादा मजबूत हैं. और स्वाभाविक रूप से इसका असर समुद्र के तल पर हुआ है, तलछट पर हुआ है, जिसका असर तट की सुरक्षा पर भी होता है."
द्वीप और तटीय पानी के आपसी संबंध को समझने के लिए वैज्ञानिक नियमित रूप से समुद्रतल से सैंपल जमा करते हैं. क्योंकि माप उपकरणों से इकट्टा की गई जानकारी कभी कभी धोखा देने वाली साबित हो सकती है. स्वेन्या पापेनमायर कहती हैं कि उत्तरी सागर में लेनिस कीड़े होते हैं जो रेत और शीपियों के टुकड़ों से तट पर पाइप जैसा आकार बनाते हैं. और जब जमीन में छुपे होते हैं तो वे मिट्ट के सिग्नल को बेढंगा कर देते हैं. तब हमें अपने डाटा में एकदम अलग तरह का सिग्नल मिलता है, जो इन कीड़ों के वहां न होने से मिलता.
तस्वीरों में: खोते द्वीप की खूबसूरती
खोते द्वीप की खूबसूरती
प्रशांत सागर में बसा ऑनतोंग जावा द्वीप जलवायु परिवर्तन के मोर्चे पर है. ऊंची उठती लहरें और नियमित तूफान इस द्वीप के अस्तित्व पर संकट पैदा कर रहे हैं. लोग अपनी मातृभूमि खोने का खतरा झेल रहे हैं.
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अलग थलग द्वीप
ऑनतोंग जावा सिर्फ 12 वर्ग किलोमीटर बड़ा है जिसकी जमीन समुद्र स्तर से केवल 3 मीटर ऊंची है. सोलोमन द्वीप से 500 किलोमीटर दूर बसे इस द्वीप के चारों ओर पश्चिमी प्रशांत सागर की गहराइयां हैं. यहां के लोग हमेशा ही लहरों और तूफान के साये में जिए हैं लेकिन मुश्किलें बढ़ रही हैं.
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परंपराओं का पालन
यह द्वीप सैकड़ों सालों से बसा है. पोलीनेशिया के लोग इस द्वीप पर 2000 साल पहले बसे. सदियों पुराने नृत्य ताकतवर प्राकृतिक शक्तियों की कथा कहते हैं. ये नृत्य स्थानीय संस्कृति का अहम हिस्सा तो हैं ही, वे स्थानीय आबादी की पहचान का भी अभिन्न अंग हैं.
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प्रकृति का साथ
परंपरागत रूप से घर नारियल और पंडाना के पेड़ों से बनाए जाते हैं. आजकल इन झोपड़ियों में सौर ऊर्जा की मदद से आधुनिक रोशनी की जाती है. इस द्वीप के दुनिया से कटे होने का एक फायदा यह भी है कि रात के आसमान का अंधेरा पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त दिखता है.
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कहां जाएंगे बच्चे
यदि समुद्र स्तर का बढ़ना जारी रहता है तो जल्द ही यह द्वीप समुद्र में डूब जाएगा. 8 वर्षीय विल्सन आयुंगा जैसे ऑनतोंग जावा के बच्चों के लिए इस द्वीप को छोड़कर कहीं और ऊंची जगह पर बसने के अलावा और कोई चारा नहीं होगा. लोगों को डर है कि उनकी जन्मभूमि छिन जाएगी.
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अप्रतिबद्ध सरकार
लुआनिउआ की अनछुई खूबसूरती ऊपर से साफ दिखती है. यह ऑनतोंग जावा के उन दो द्वीपों में शामिल है जहां लोग रहते हैं. ताड़ के इन खूबसूरत पेड़ों के पीछे एक प्रतिबद्ध सरकार की कमी दिखती है. ऑनतोंग जावा सोलोमन द्वीप समूह का हिस्सा है, लेकिन नागरिक सुविधाओं के अभाव में समस्याएं पैदा हो रही हैं.
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बंटता द्वीप
ऑनतोंग जावा के लोगों को जलवायु परिवर्तन के नतीजे साफ होने लगे हैं. समुद्र का जलस्तर बढ़ने की वजह से हेनुआ आइकू द्वीप दो हिस्सों में बंटने लगा है. समुद्र का पानी द्वीप के बीच से घुसने लगा है और उसने खाद्य सुरक्षा और भूस्खलन की समस्या सबके सामने ला दी है.
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जलवायु परिवर्तन
समुद्री जलस्तर बढ़ने से द्वीप के हिस्से डूब रहे हैं. उनसे होने वाले नुकसान के अलावा जलवायु परिवर्तन के कारण तेज हवाओं और कभी भी आने वाले तूफानों का खतरा बढ़ गया है. ये द्वीप के तटीय इलाकों के अलावा वहां बसे गांवों को भी खतरे में डाल रहे हैं.
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फसल में कमी
समुद्र का पानी द्वीप पर घुसने का एक नुकसान यह भी हो रहा है कि वह जमीन को खराब कर रहा है. मिट्टी के धूसर होने के कारण खेती ठीक से नहीं हो रही है. पैट्रन लालियाना का तारो गार्डन धरती की उर्वरा शक्ति कम होने के कारण उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है.
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बदलता समय
सैरा अबोरा ने अपनी सारी जिंदगी ऑनतोंग जावा पर बिताई है. उन्हें वह समय भी याद है जब द्वीप पर आज जहां गांव है वहां झाड़ियां हुआ करती थी. उन्हें यह भी याद है कि पहले जहां लोग रहा करते थे, वह जगह इस बीच पानी में डूब चुकी है. पानी के बढ़ने से गांव छोटा हो गया है.
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डूबा गांव
ऑनतोंग जावा के लोगों के लिए समुद्री जलस्तर बढ़ने के खतरों के सबूत द्वीप पर हर कहीं दिखते हैं. आज जहां सफेद रेत दिखती है, वहां कभी सुंदर रमणीक गांव हुआ करता था. बढ़ते समुद्री पानी ने 40 घरों और एक कब्रगाह को लील लिया है.
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धरती बिन संस्कृति नहीं
ऑनतोंग जावा के लोगों को पता नहीं कि अपनी धरती के बिना वे अपनी संस्कृति कैसे बचा पाएंगे. अपने द्वीप को छोड़ना उनके लिए पहचान खोने जैसा है. लेकिन जैसे जैसे जलवायु परिवर्तन के नतीजे लोगों को विस्थापित करने का खतरा पैदा कर रहे हैं ऑनतोंग जावा की संस्कृति का भविष्य धूमिल हो रहा है.
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उम्मीद की किरण
ऑनतोंग जावा से लोगों के विस्थापन की संभावना बढ़ती जा रही है, लेकिन अभी भी लोग आशावान हैं कि वे अपनी परंपरागत भूमि पर रह सकेंगे. वह भूमि जिसने उन्हें 2000 साल से पनाह दी है और खुशहाली में जिंदा रखा है.
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रेत को रोकने से तटीय तलछट में कमी हो जाती है, क्योंकि वह वहां तक रेत नहीं पहुंचता. अल्फ्रेड वेगेनर इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक रूने मिषाएलिस के मुताबिक पर्यावरण परिवर्तन की वजह से समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और ज्वार भाटे में आने वाला कीचड़ भी नहीं आता इसलिए संभव है कि इसकी वजह से दूरगामी रूप से इकोसिसस्टम को नुकसान पहुंचेगा.
सिल्ट तट पर दीवार खड़ी कर रक्षा नहीं की जा सकती. तो क्या प्राकृतिक तटीय सुरक्षा पर वापसी सही उपाय है? कार्स्टेन राइजे प्रकृति से लड़ने के बदले समझौता करने की वकालत करते हैं. वह कहते हैं, "हम धीरे धीरे चलने वाले रेत के टीलों के साथ क्यों नहीं जी सकते? आज के जमाने में घरों को खिसकाना या उन्हें ऐसे बनाना कि उन्हें खिसकाया जा सके, असंभव नहीं है. मुझे मालूम है कि सिल्ट की महंगी जमीन के साथ यह मुश्किल है. लेकिन इंसानी समझौता करना ज्यादा आसान है, बनिस्पत इसके कि उत्तरी सागर से कहा जाए, ऊपर चढ़ना बंद करो."
तस्वीरों में: जर्मनी के सबसे सुंदर द्वीप
जर्मनी के सुंदर द्वीप
संरक्षित क्षेत्रों से लेकर पर्यटकों के आकर्षण तक जर्मनी के करीब 80 द्वीपों पर सबों के लिए कुछ न कुछ है. उनमें से अधिकांश देश के उत्तर में स्थित उत्तर और बाल्टिक सागर में हैं, लेकिन कुछ नदियों और झीलों के बीच भी हैं.
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फ्रीजलैंड के द्वीप
उत्तरी फ्रीजलैंड द्वीपों का एक हार है जो श्लेसविष होलश्टाइन के पश्चिमी तट पर ज्वारभाटा वाले राष्ट्रीय पार्क में स्थित हैं. उनमें सबसे बड़ा और विख्यात द्वीप सिल्ट है. वह डेनमार्क के तट तक जाता है. बड़े द्वीपों के अलावा इस इलाके में बहुत से छोटे द्वीप भी हैं.
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समुद्र के बीच ग्लैमर
जर्मनी में सिल्ट की वही जगह है जो न्यूयॉर्क में हैम्प्टंस की है. लोग सिल्ट द्वीप पर वहां के मनोरम 40 किलोमीटर लंबे समुद्र तट का मजा लेने ही नहीं जाते. बल्कि वहां नियमित रूप से जाने वाले विख्यात लोगों की एक बार झलक देखने की उम्मीद लिए भी जाते हैं.
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प्रकृति और संस्कृति
जर्मनी के सबसे बड़े द्वीप पर देखने को और छुट्टियां में करने को बहुत कुछ है. खूबसूरत रेतीले बीच, खाड़ी, लगून, प्रायद्वीप और खल्ली के पहाड़ समुद्रतट को मनोरम और सौंदर्यपूर्ण बनाते हैं. सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए भी बहुत से ओपन एयर कंसर्ट जैसे आयोजन होते हैं.
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रुइगेन का विशाल रिजॉर्ट
समुद्र तट पर छुट्टियां बिताने के लिए यह विशाल रिजॉर्ट नाजियों ने सिर्फ तीन साल में बनाया था. यह समुद्र तट के समांतर साढ़े चार किलोमीटर इलाके में फैला है और इसमें 20,000 लोगों को एक साथ रहने की जगह देने का इरादा था. इसके एक हिस्से में आजकल एक यूथ हॉस्टल है.
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मध्ययुगीन विरासत
ईसाई मठों का द्वीप राइषेनाऊ जर्मनी की सबसे गहरी झील लेक कॉन्सटांस के बीच में स्थित है. वह जर्मनी, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रेलिया की सीमा पर है. द्वीप पर विख्यात बेनेडिक्ट ऑर्डर का एक मठ है जिसकी स्थापना 724 ईसवी में हुई थी. उसकी वजह से राइषेनाऊ 2002 से विश्व सांस्कृतिक धरोहर है.
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नीदरलैंड के उत्तर में
बोरकुम द्वीप की पहली बार चर्चा 1398 में एक दस्तावेज में हुई थी. उस समय यह द्वीप समुद्री लुटेरों के छुपने की जगह होता था. इस बीच समुद्री लुटेरों के बदले बोरकुम में सुंदर समुद्र तट, रेल के टीले और संरक्षित प्राकृतिक क्षेत्र हैं. 30 वर्ग किलोमीटर वाला यह द्वीप पूर्वी फ्रीजलैंड का सबसे बड़ा द्वीप है.
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लंबा द्वीप
लांगेऊग जर्मन भाषा की एक बोली है और इसका शाब्दिक अर्थ लंबा द्वीप है. इसका मतलब यह नहीं है कि यह पूर्वी फ्रीजलैंड के द्वीपों में सबसे लंबा है. लांगेऊग द्वीप पर्यटकों के बीच अपने सुंदर रेतीले बीचों के अलावा 20 मीटर तक ऊंचे रेत के टीलों के लिए मशहूर है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
लंबी आना
हेल्गोलैंड जर्मनी का वह द्वीप है जो मुख्य धरती से सबसे दूर है. मुख्य भूमि से वहां तक पहुंचने में तीन घंटे लगते हैं. प्रकृति की सुरक्षा के लिए द्वीप पर न तो कार ले जाने की इजाजात है और न ही साइकिलें. लाल चट्टान वाली मीनार लंबी आना द्वीप का सबसे मशहूर प्रतीक है.
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लहरों का इलाका
उत्तरी सागर में ज्वार भाटा के दौरान आने वाली लहरों का इलाका डेनमार्क से नीदरलैंड तक जाता है. 2009 में इसे विश्व धरोहरों में शामिल किया गया. इसके जर्मन हिस्से को राष्ट्रीय पार्क बनाकर संरक्षित कर दिया गया है. इसमें समुद्रतट के अलावा आसपास के द्वीप भी शामिल हैं.
तस्वीर: Fotolia/Dieter Pregize
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लेकिन खिसकाये जा सकने वाले घरों से द्वीप के निवासी सहमत नहीं हैं. टूरिज्म से होनेवाली आमदनी को देखते हुए वे सुरक्षा के जाने माने उपायों पर भरोसा कर रहे हैं. आने वाले सालों में भी वे जहां जरूरत पड़ी वहां सुरक्षा के कदम उठाना और रेत डालना जारी रखेंगे.