जर्मन श्रम मंत्री के इस्तीफे का क्या असर होगा
१२ अक्टूबर २०२६
श्रम मंत्री बेर्बेल सत्ताधारी गठबंधन में शामिल मध्य वामपंथी सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी (एसपीडी) की सहनेता भी हैं. उन्होंने सोमवार, 12 अक्टूबर को मंत्री पद और पार्टी के सहनेता पद से इस्तीफा दिया है. बास ने निजी कारणों और सत्ताधारी गठबंधन में शामिल सहयोगी दल की ओर से उनकी आलोचना को इस्तीफे की वजह बताया है.
हाल ही में उनकी सौतेली बेटी की मौत हुई है. बेर्बेल बास का कहना है कि इस समय सरकार और पार्टी के दायित्वों को पूरा करने के लिए जरूरी "सामर्थ्य" उनके पास नहीं है और उन्हें मौजूदा परिस्थितियों से उबरने के लिए थोड़ा समय चाहिए. बास ने कहा है कि उन्होंने एसपीडी के सहनेता लार्स क्लिंगबाइल को इसकी जानकारी दे दी है, और चांसलर मैर्त्स से कहा है कि वह उन्हें कैबिनेट से हटा दें. इस्तीफे के बाद जर्मनी के वित्तमंत्री लार्स क्लिंगबाइल का भारत दौरा रद्द हो गया है.
बेर्बेल बास ने मैर्त्स की रुढ़िवादी पार्टी सीडीयू/सीएसयू की तरफ से उन पर हुए हुए सार्वजनिक हमलों की भी आलोचना की है. सीडीयू और उसकी बवेरियाई सहयोगी पार्टी सीएसयू ने उनपर गठबंधन के मुख्य एजेंडे में शामिल सुधारों की गति धीमी करने के आरोप लगाए हैं. बास ने श्रम मंत्रालय में अपने सहयोगियों का आभार जताया है और कहा है कि वे एक मजबूत नेतृत्व के हकदार हैं जो सुधारों को आगे ले जा सकें. बास ने यह भी कहा है कि वह संसद के निचले सदन बुंडेसटाग की सदस्य बनी रहेंगी.
राजनीति का लंबा अनुभव
2009 से बुंडेसटाग की सदस्य रहीं बेर्बेल बास ने सरकार और पार्टी में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं. वह 2021-2025 तक बुंडेसटाग की अध्यक्ष रही हैं. इससे पहले 2019-2021 में वह एसपीडी के संसदीय दल की उप प्रमुख रहीं. उन्होने 2013-2019 तक एसपीडी के संसदीय दल के सचिव का भी पद संभाला है. स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक नीतियों पर काम करने का उनका अनुभव काफी पुराना है.
अनुभवी राजनेता होने के बावजूद निजी कारणों से इस्तीफा देने की खबरों पर हैरानी जताई गई थी लेकिन अब उन्होंने साफ कर दिया है कि मुश्किल घड़ी में गठबंधन के सहयोगी दल के नेता की आलोचना से से उन्हें दुख पहुंचा है.
क्या जर्मनी में सरकारी पेंशन अच्छा जीवन के लिए काफी नहीं है
जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने इस्तीफे की जानकारी मिलने के बाद सोशल प्लेटफॉर्म एक्स पर डाले पोस्ट में कहा है, "बेर्बेल बास और मैंने संघीय सरकार में आपसी भरोसे की भावना के साथ काम किया है. मैं उन्हें उनके समर्पण के लिए धन्यवाद देता हूं. उनके फैसले का सम्मान होना चाहिए. एक पिता और एक दादा के रूप में मैं सिर्फ कल्पना कर सकता हूं कि उनके दुख से उन पर कितना असर हुआ है. मैं उनके और उनके परिवार को इसका सामना करने की ताकत मिले इसकी कामना करता हूं."
गठबंधन में तनाव
बास का कहना है कि उन्हें अपनी सौतेली बेटी की मौत के दुख से उबरने के लिए "पर्याप्त समय" चाहिए. हालांकि इसी समय उनकी सार्वजनिक रूप से आलोचना भी हो रही है. उनका कहना है, "दुर्भाग्य से सत्ताधारी सहयोगियों की तरफ" से उनकी आलोचना इस निजी तौर पर मुश्किल घड़ी में बढ़ती जा रही है.
सीडीयू/सीएसयू के नेताओं ने पेंशन में सुधारों को लेकर प्रस्तावित ड्राफ्ट को जल्दी से पेश नहीं करने के लिए हाल ही में उनकी आलोचना की. उन्होने उन पर सुधारों में बाधा डालने और देर करने का भी आरोप लगाया. सीडीयू के कई नेताओं ने कार्यसमय के नियमों और पेंशन सुधारों में देरी के लिए बास की आलोचना की थी. राईनलैंड पलैटिनेट राज्य के सीडीयू नेता गॉर्डन श्नाइडर ने सोमवार को बास के इस्तीफे के बाद एक टीवी चैनल से कहा, "इस मामले में आप सिर्फ आलोचना की ही उम्मीद कर सकते हैं."
क्लाइंगबेल जर्मनी के वाइस चांसलर भी हैं और उन्होंने बास के फैसले पर अफसोस जताया है. उन्होंने दुख की घड़ी में उनकी आलोचना को "अभद्र" और "अस्वीकार्य" बताया है. क्लिंगबाइल का कहना है, "दफ्तरों के पीछे हम सब महज इंसान हैं." क्लिंगबाइल का कहना है वह निजी तौर पर उनके फैसले को समझ सकते हैं. एसपीडी के कई और नेताओं ने भी ऐसे समय में बास की आलोचना को अनुचित बताया है.
गठबंधन सरकार इस समय कई मुश्किलों का सामना कर रही है. जनता में सरकार की लोकप्रियतातेजी से कम हो रही है और हाल के प्रांतीय चुनावों में भी सत्ताधारी पार्टियों ने हार का मुंहदेखा है. इसी समय में देश धुर दक्षिणपंथी राजनीतिका उभार भी देख रहा है. ऐसे में सरकार के कार्यकाल पूरा कर पाने को आशंकाएं मजबूत हो रही हैं.
इस्तीफे का असर
बेर्बेल के इस्तीफे की वजह से लार्स क्लिंगबाइल ने भारत दौरा रद्द कर दिया है जो मंगलवार से शुरू होना था. वित्त मंत्रालय का कहना है कि राजधानी बर्लिन में चल रही घटनाओं की वजह से यह दौरा रद्द किया गया है. वित्त मंत्री को नई दिल्ली में मंगलवार को भारतीय अधिकारियों से मुलाकात करने के साथ ही दूसरे कार्यक्रमों में हिस्सा लेना था.
एसपीडी के नेता क्लिंगबाइल ने यह भी घोषणा की है कि इस साल के आखिर में पार्टी सम्मेलन होगा जिसमें सभी नेतृत्व के पदों के लिए चुनाव कराए जाएंगे.
उनके इस्तीफे से पेंशन में सुधारों की गति और धीमी हो सकती है. कर्मचारियों के योगदान से चलने वाला पेंशन सिस्टम काफी मुश्किलें झेल रहा है. खासतौर से जर्मनी में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के लिहाज से पेंशन सिस्टम में बदलाव करना बेहद जरूरी हो गया है. ये सुधार विशेषज्ञों की एक समिति के सुझाए उपायों के आधार पर तैयार किए गए हैं. सत्ताधारी गठबंधन ने देश के आर्थिक और सामाजिक कार्यक्रमों में बदलाव की जो रूपरेखा तैयार की है उनमें ये सुधार एक प्रमुख तत्व हैं.
हालांकि इस्तीफे की वजह से जर्मन सरकार पर कोई असर पड़ने की बात से सरकार ने इनकार किया है. विदेश मंत्री और सीडीयू के नेता योहान वाडेफुल ने कहा है, "निश्चित रूप से गठबंधन के लिए इसका कोई अर्थ नहीं है. हमारे पास अगले चार साल तक करने के लिए काम है." उन्होंने यह दलील भी दी कि जर्मनी और यूरोप को इस वक्त स्थिरता की जरूरत है.