अमेरिका में आए दिन स्कूल और कॉलेजों में गोलीबारी की खबरों के बाद जर्मनी में अब स्कूलों में बच्चों को सिखाया जा रहा है कि ऐसी स्थिति में उन्हें क्या करना चाहिए.
तस्वीर: imago/photothek/F. Gaertner
विज्ञापन
खतरनाक चट्टानें, सर्पीली पगडंडियां या फिर मुश्किल से नदी पार करना, कई देशों में हजारों गरीब बच्चे आज भी इसी तरह स्कूल जाते हैं. ग्रामीण इलाकों के इन बच्चों के पास और कोई विकल्प भी नहीं है.
खतरनाक चट्टानें, सर्पीली पगडंडियां या फिर मुश्किल से नदी पार करना, कई देशों में हजारों गरीब बच्चे आज भी इसी तरह स्कूल जाते हैं. ग्रामीण इलाकों के इन बच्चों के पास और कोई विकल्प भी नहीं है.
तस्वीर: Senator Film Verleih, Berlin
चट्टान और मौत पर चढ़ाई
चीन के शिचुआन प्रांत के अतुलेर गांव का एक स्कूल शायद दुनिया का सबसे खतरनाक स्कूल है. हर दिन बच्चों को बेहद कड़ी 800 मीटर की चढ़ाई चढ़ स्कूल जाना पड़ता है, वापसी में इसी रास्ते से नीचे भी उतरना पड़ता है.
तस्वीर: picture alliance/AP Images/Chinatopix
तीन घंटे का सफर
स्कूल पहुंचने में बच्चों को करीब डेढ़ घंटा लगता है. पथरीली चट्टान में कुछ जगहों पर लकड़ी के तख्तों वाली सीढ़ी भी लगाई गई है. भीगने के बाद फिसलने वाली इस कामचलाऊ सीढ़ी से गिरकर कई लोगों की मौत हो चुकी है. अब आखिरकार शिचुआन की प्रांतीय सरकार ने स्टील की सीढ़ियां लगाने का वादा किया है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/Imaginechina Tao ge
अकेला मामला नहीं
अतुलेर का स्कूल अपवाद नहीं है. दक्षिणी चीन के गुआंशी प्रांत में भी बहुत से बच्चों को हर दिन दो घंटे पहाड़ी रास्ते पर चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है. नोग्योंग के इस पहाड़ी रास्ते में कोई रैलिंग वगैरह भी नहीं है.
तस्वीर: picture alliance/Photoshot/H. Xiaobang
निर्धन हैं, पर निराश नहीं
चीन के गुलु नेशनल जियोपार्क के पास बसे पहाड़ी गांव गुलु के बच्चे हर दिन ऐसे ही स्कूल जाते हैं. पहाड़ी पगडंडी वाला यह रास्ता कुछ जगहों पर दो फुट चौड़ा है. एक तरफ चट्टान है तो दूसरी तरफ गहरी खाई और वहां उफनती नदी.
तस्वीर: picture-alliance/dpa
ट्यूब का सहारा
टायर ट्यूब कितनी अहम होती है, इसका जबाव दुनिया भर में दूर दराज के इलाकों में बिना गाड़ियों के रहने वाले लोगों से पूछिये. फिलिपींस में बच्चे टायरट्यूब में हवा भरकर नदी पार करते हैं. बच्चे इस बात का भी ख्याल रखते हैं, उनकी यूनिफॉर्म गीली न हो.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/D. M. Sabagan
रस्सी पर
इंडोनेशिया के ही लेबना हुंग जिले में कई बार आर पार जाने के लिए सिर्फ रस्सी बचती है. नदी पार स्कूल जाने के लिए रस्सी वाले जुगाड़ को पार करना ही पड़ता है. अब वहां पुल बनाया जा रहा है.
तस्वीर: Getty Images/AFP/Str
पानी के ऊपर
इंडोनेशिया के बोयोलाली के बच्चे हर दिन पेपे नदी के ऊपर संतुलन साधते हुए 30 मीटर नदी पार करते हैं. साइकिल हो तो और सावधानी से रास्ता पार करना पड़ता है.
तस्वीर: picture alliance/AA/A. Rudianto
तरह तरह के जुगाड़
फिलिपींस के एक पिछड़े गांव में बच्चे बांस की जुगाड़ु नाव के सहारे रिजाल नदी पारकर स्कूल जाते हैं. ये हाल सिर्फ यहीं का नहीं है, देश के दूसरे पिछड़े इलाकों में भी हालात ऐसे ही हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/D. M. Sabagan
जज्बे को सलाम
पढ़ाई के लिए हर दिन ऐसे हालात से सिर्फ गुलु के बच्चे ही नहीं गुजरते हैं. मोरक्को की जाहिरा हर दिन 22 किलोमीटर का पथरीला रास्ता पार करती है. स्कूल आने जाने में ही उसे चार घंटे लगते हैं.