जर्मन कंपनियों द्वारा हथियारों की बिक्री पर 2016 के पहले छह महीनों की रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी से हथियार खरीदने वाले दस प्रमुख देशों में से पांच संकट क्षेत्रों में है. इनमें अल्जीरिया, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण कोरिया शामिल हैं. रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल 25वें नंबर पर रहने वाला तुर्की इस साल 8वें नंबर पर आ गया है.
विपक्षी पार्टियां खासकर सऊदी अरब जैसे देशों को हथियार बेचे जाने की आलोचना कर रही हैं. ग्रीन पार्टी के संसदीय दल की सुरक्षा प्रवक्ता अग्निएश्का ब्रुगर कहती हैं, "ये जर्मन सरकार अपने गैरजिम्मेदाराना व्यवहार को जारी रख रही है और बेरोकटोक सारी दुनिया में हथियारों की बिक्री की अनुमति दे रही है."
रिपोर्ट के अनुसार जर्मन सरकार ने 2016 के पहले छह महीनों में 4 अरब यूरो के हथियारों और सैनिक साज सामानों की बिक्री की अनुमति दी है. ये पिछले साल की पहली छमाही के मुकाबले 50 करोड़ यूरो से ज्यादा है. इस राशि का एक चौथाई हिस्सा अल्जीरिया को बेचे गए एक युद्धपोत की बदौलत आया है. इस खरीद के साथ उत्तरी अफ्रीकी देश जर्मनी से सैन्य साजोसामान खरीदने वाले देशों में पहले नंबर पर है.
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अरब दुनिया में इस्राएल अकेला गैर मुस्लिम देश है. उसकी आबादी लगभग अस्सी लाख है. लेकिन रणनीति और सैन्य क्षमताओं के कारण वो मध्य पूर्व के सबसे अहम देशों में से एक है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/epa IDF1948 में इस्राएली राष्ट्र के गठन के कुछ समय बाद ही इस्राएली सेना का गठन किया गया, जिसका आधिकारिक नाम इस्राएली डिफेंस फोर्स है.
तस्वीर: Reuters/Jinpixगठन के साथ ही इस्राएल को मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, लेबनान और इराक के साथ युद्ध लड़ने पड़े. ऐसे में, इस्राएल ने अपनी सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत किया.
तस्वीर: H. Bader/AFP/Getty Imagesयही वजह है कि युद्ध के मोर्चे पर इस्राइल की सैन्य दक्षता की कई बार मिसालें दी जाती हैं.
तस्वीर: GIL COHEN MAGEN/AFP/Getty Imagesहाल के सालों में इस्राएली सेना गाजा में अपनी कार्रवाई को लेकर चर्चा में रही है. जुलाई 2014 में वहां इस्राएली सेना की कार्रवाई में दो हजार से ज्यादा लोग मारे गए.
तस्वीर: Reutersइस्राएली सेना में पौने दो लाख सक्रिय सैनिक हैं जबकि रिजर्व सैनिकों की तादाद साढ़े चार लाख के आसपास है.
तस्वीर: Hazem Bader/AFP/Getty Imagesइस्राएल में महिला हो या पुरूष, 18 साल का होने पर हर नागरिक के लिए सेना में अपनी सेवाएं देना अनिवार्य है.
तस्वीर: Jack Guez/AFP/Getty Imagesआम तौर पर महिलाएं दो साल तक अपनी सेवाएं देती हैं जबकि पुरुष तीन साल. महिलाओं को अक्सर युद्धक अभियानों पर नहीं भेजा जाता है.
तस्वीर: dapdभले ही महिलाओं को युद्धक अभियानों पर न भेजा जाता हो, सेना में महिला पायलट और थल सेना ईकाई हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/epa IDFइस्राएल मध्य पूर्व में अमेरिका का अहम सहयोगी है इसलिए उनकी सेना अत्याधुनिक साजोसामान से लैस है.
तस्वीर: Jack Guez/AFP/Getty Imagesटैकों, मिसाइलों और लड़ाकू विमानों के अलावा इस्राएल दुनिया के उन चंद देशों में शामिल है जिनके पास परमाणु हथियार बताए जाते हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa ये रिपोर्ट अर्थनीति मंत्री जिगमार गाब्रिएल के अधिकार क्षेत्र में है. एक साल के विकास की तुलना करने पर पता चलता है कि एक साल पहले शरणार्थी संकट शुरू होने के बाद से तुर्की 7.6 करोड़ यूरो के हथियारों की करीद के साथ 8वें नंबर पर आ गया है. दो तिहाई निर्यात विमानों के पुर्जों, मानवरहित विमानों और मोटरों का किया गया है.
जर्मन सरकार के लिए एक अशांत इलाके में स्थिरता का कारक समझा जाने वाला सऊदी इरब इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर है. उसने पिछले साल के 19 करोड़ यूरो के मुकाबले इस साल 48.4 करोड़ के हथियार खरीदे हैं. जर्मनी ने विवादित सल्तनत को हेलिकॉप्टर, विमान और हवा में पेट्रोल भरने की मशीनें बेची हैं. सऊदी अरब के नेतृत्व वाला एक गठबंधन मार्च 2015 से यमन में शिया विद्रोहियों के ठिकानों पर बमबारी कर रहा है.
ग्रीन सांसद ब्रुगर ने इस बात की आलोचना की है कि कारोबार रोकने के बदले जर्मन सरकार सऊदी अरब की अमानवीय सरकार को आपूर्ति बढ़ा रही है. रिपोर्ट के अनुसार निर्यात के मूल्य का एक बड़ा हिस्सा कई यूरोपीय देशों द्वारा बनाए गए सिविल हेलिकॉप्टरों का है. इनका उपयोग सीमा सुरक्षा के अलावा बचाव कार्य और विपदा के समय किया जाएगा. इस बिक्री के वजह से सऊदी अरब खरीदारों की सूची में तीसरे स्थान पर चला गया है.
जानिए, सबसे ज्यादा हथियार कौन बेचता है
स्टॉकहोम इंटरनेशल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) ने अपनी 2016 रिपोर्ट में बताया है कि साल 2011-15 के बीच वैश्विक हथियार व्यापार में 2006-10 के मुकाबले 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई. देखिए सबसे बड़े निर्यातक देश कौन हैं.
तस्वीर: Fotolia/Haramis Kalfarदुनिया के 58 देश हथियारों का निर्यात करते हैं जिनमें सबसे आगे है अमेरिका. यूएसए 96 देशों को हथियार भेजता है, जिनमें सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात उसके सबसे बड़े खरीदार हैं. 2015 के अंत में ही अमेरिका ने एफ-35 विमानों की बिक्री के एक बड़े ठेके पर हस्ताक्षर किए.
तस्वीर: Reutersदुनिया भर के हथियारों के कुल व्यापार में एक चौथाई हिस्सेदारी रूस की है. भारत, चीन और वियतनाम इसके सबसे बड़े खरीदार हैं. भारत के तो 70 फीसदी हथियार रूस से ही आते हैं. इसके अलावा अपने लड़ाकू विमानों, टैंकों, परमाणु पनडुब्बियों और राइफलों को रूस ने यूक्रेन समेत दुनिया के 50 देशों में भेजा.
तस्वीर: picture-alliance/Bildagentur-online/Belcherपिछले सालों में चीन हथियारों के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर हुआ है और आयात कम कर निर्यात को बढ़ाया है. चीन ने पिछले साल 37 देशों को हथियारों की आपूर्ति की, जिनमें पाकिस्तान (35%), बांग्लादेश (20%) और म्यांमार (16%) इसके सबसे बड़े ग्राहक रहे. 2006-10 और 2011-15 के बीच चीनी हथियारों के निर्यात में 88 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई.
तस्वीर: APहालांकि फ्रेंच हथियारों के निर्यात में 2010 के बाद से 9.8% की कमी आई है, फिर भी वह दुनिया में चौथे नंबर का आर्म्स एक्सपोर्टर बना हुआ है. यूरोप में उससे बाद आने वाले जर्मनी से निर्यात कम हुआ है. हाल ही मिले कुछ बड़े ठेकों के कारण फ्रांस के अगले साल भी निर्यातकों के टॉप 5 में शामिल रहने का अनुमान है.
तस्वीर: Reuters/ECPADप्रमुख जर्मन हथियारों के निर्यात में वर्ष 2011-15 के बीच 51 फीसदी की कमी आई. इन सालों में जर्मनी ने अपने खास हथियार 57 देशों को भेजे. इन्हें आयात करने वालों में 29 प्रतिशत तो अन्य यूरोपीय देश ही थे. इसके बाद एशिया, अमेरिका, ओशिनिया को 23 प्रतिशत जबकि इतना ही मध्य पूर्व को बेचा गया. अमेरिका, इजरायल और ग्रीस जर्मन हथियारों के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं.
तस्वीर: Ralph Orlowski/Getty Imagesअगर सऊदी अरब (46%), भारत (11%) और इंडोनेशिया (8.7%) जैसे बाजार ना हों तो ब्रिटिश हथियार उद्योग दिवालिया हो जाएगा. साल 2006–10 और 2011–15 के बीच ब्रिटेन से हथियारों का निर्यात करीब 26 प्रतिशत बढ़ा. यूरोप में इसके बाद स्पेन और इटली का स्थान आता है.
तस्वीर: Reuters रिपोर्ट से ये भी पता चलता है कि इस साल की पहली छमाही में छोटे हथियारों की बिक्री कम हुई है लेकिन उनके लिए गोलियों की बिक्री बढ़ी है. गोलियों की बिक्री 2.7 करोड़ से बढ़कर 28 करोड़ हो गई. सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी के गाब्रिएल के कार्यकाल में जर्मनी से छोटे हथियारों की बिक्री में भारी कमी आई है. जर्मन सरकार का कहना है कि यूरोपीय संघ और नाटो से बाहर समस्या वाले देशों को हथियार बेचने के मामले में संवेदनशील हो गई है. विपक्षी लेफ्ट पार्टी के सांसद यान फान आकेन की मांग है कि छोटे हथियारों की बिक्री पूरी तरह रोकी जानी चाहिए.
एमजे/वीके (डीपीए)