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अब जर्मनी में युवाओं का बड़े प्रदर्शन का एलान

ओंकार सिंह जनौटी एएफपी, डीपीए
३० अक्टूबर २०२६

यूरोप के कई देशों में जारी युवाओं का प्रदर्शन अब जर्मनी में भी शुरू हो रहा है. शनिवार को देश भर के 30 शहरों में प्रदर्शन का एलान किया गया है. इनमें करीब डेढ़ लाख लोग हिस्सा ले सकते हैं.

बर्लिन की हुमबोल्ट यूनिवर्सिटी में छात्रों का प्रदर्शन
जर्मनी के 30 शहरों में प्रदर्शन करने जा रहे हैं छात्रतस्वीर: Erbil Basay/Anadolu/picture alliance

अल्बानिया, सर्बिया, फ्रांस, इटली और स्पेन के बाद अब जर्मनी में युवाओं के प्रदर्शन शुरू हो रहे हैं. शनिवार को राजधानी बर्लिन समेत फ्रैंकफर्ट और कोलोन जैसे महानगरों में प्रदर्शनों का एलान किया गया है. प्रदर्शनकारी खुद को "जेनजी रेगल्ट" यानी जेन जी तय करेंगे, कह रहे हैं.

जर्मनी में प्रदर्शनों में हिस्सा लेने के लिए करीब डेढ़ लाख लोगों ने खुद को रजिस्टर कराया है. प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह की हिंसा न करने का एलान किया गया है. हालांकि पुलिस का कहना है कि इस एलान के बावजूद वह भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात करेगी. कुछ शहरों में ज्वैलरी और कपड़ों की दुकानों ने अपनी खिड़कियों से कीमती सामान हटाना शुरू कर दिया है. 17 अक्टूबर को फ्रांस में हुए प्रदर्शनों के दौरान अभूतपूर्व लूटपाट और आगजनी की कई घटनाएं सामने आईं.

यूरोप के कई देशों में हो रहे युवाओं के इन प्रदर्शनों में कई किस्म के मुद्दे छाए हुए हैं. स्पेन में मुख्य मुद्दा सस्ते घरों की कमी और जवाबदेही है तो फ्रांस में सरकारी स्कूलों की खराब हालत, इटली में युवा महंगाई के विरोध में सड़कों पर हैं.

जर्मनी में प्रदर्शनों का एलान करने वाले ग्रुप ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा, "हम वे युवा हैं जो अब पीछे बैठकर ये नहीं देखते रहेंगे कि हमारी सुने बिना हमारे भविष्य को लेकर फैसले किए जाएं." प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे खुद को किसी भी राजनीतिक धड़े का हिस्सा नहीं मानते हैं.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जर्मनी में शिक्षा, संस्कृति और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई मुद्दे उन्हें व्यथित कर रहे हैं, "कटौती हमारी कीमत पर की जा रही है, जबकि दिग्गज कंपनियां लगातार मुनाफा कमा रही हैं और सैन्यीकरण में अरबों यूरो खर्च किए जा रहे हैं."

जेनजी रेगल्ट के मुताबिक, "हम जहां भी देखते हैं, हमें संकट और अपने लिए बमुश्किल कोई उम्मीद दिखती है."

हेलोवीन की वजह से चिंता में जर्मन प्रशासनतस्वीर: Ina Fassbender/AFP/Getty Images

हैलोवीन की वजह से प्रशासन को चिंता     

31 अक्टूबर को हैलोवीन फेस्टिवल भी है. इस दौरान कई लोग मेकअप के साथ डरावने, चौंकाने वाले या भूतिया किस्म के लिबास भी पहनते हैं. जर्मन प्रशासन को लगता है कि हैलोवीन की वजह से प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भी हो सकती है. बर्लिन प्रशासन ने फ्रांस और इटली के अधिकारियों से भी संपर्क किया है. बर्लिन के अधिकारियों को डर है कि इन देशों के अराजक तत्व, जर्मन प्रदर्शनों में भी शामिल हो सकते हैं.

अलग अलग पार्टियों के राजनेता, प्रदर्शन के इस एलान पर भिन्न भिन्न किस्म की राय दे रहे हैं. वहीं प्रदर्शन आंदोलनों के विशेषज्ञ कहे जाने वाले समाजशास्त्री क्रिस्टियान फोल्क कहते हैं कि जर्मनी में बड़े विरोध आंदोलन के लिए माहौल तैयार है.

समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में फोल्क ने कहा, "बहुत ही ज्यादा दबाव बन रहा है. युवा मांग कर रहे हैं कि भविष्य को लेकर उनके राजनीतिक अनुभव और उनकी आकांक्षाएं सुनी जाएं."

फोल्क के मुताबिक, जर्मनी के प्रदर्शन फ्रांस से अलग होंगे. उनके मुताबिक, फ्रांस के प्रदर्शनों में जहां टकराव का इतिहास रहा है, वहीं जर्मनी में ऐसा नहीं दिखाई पड़ता है.

इटली की राजधानी रोम में ऐतिहासिक कोलोजियम के पास प्रदर्शन करते छात्रतस्वीर: Andreas Solaro/AFP

इटली में फिर बड़े प्रदर्शन

शुक्रवार को इटली में एक बार फिर बड़े प्रदर्शन हुए. इस दौरान छात्रों और कामगारों ने मार्च निकाले. इटली के प्रदर्शनकारियों की मांग है कि स्कूलों को ज्यादा फंडिंग दी जाए और बढ़ती महंगाई से राहत दी जाए. इससे पहले इटली में स्कूल कब्जा और बढ़ते सैन्य खर्च के खिलाफ भी प्रदर्शन हो चुके हैं.

शुक्रवार को प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में राजधानी रोम, मिलान, टुरीन, बोलोना, जेनोओ और नैपल्स की सड़कों पर उतरे. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रधानमंत्री जॉर्जियो मेलोनी की सरकार ने मजदूरी सस्ती रखी है, जबकि सेना पर वह खूब पैसा खर्च कर रही है. तेल की कीमतों में इजाफे से महंगाई का असर पूरे देश में महसूस किया जा रहा है.

रोम में मार्च कर रही 21 साल के एक स्टूडेंट ने कहा, "महंगी ट्यूशन फीस नहीं दे सकते, महंगा किराया नहीं दे सकते, हम नहीं चाहते कि हम अपने मां बाप पर बोझ बनें."

छात्रों के इस प्रदर्शन के साथ ही यूबीएस श्रम संगठन ने भी हड़ताल का एलान किया. इसके चलते कर्मचारी, टैक्सी और ट्रक ड्राइवर और किसान प्रदर्शनों में शामिल हुए. राजधानी रोम में रोमनकालीन धरोहर कोलोजियम के पास ट्रैक्टरों के साथ जमा हुए लोगों ने नारे लगाए, "हमें ज्यादा घर चाहिए, बम नहीं."

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