जर्मनी में न्यायाधीश संघ के प्रमुख स्वेन रेबेन ने कानून मंत्री के प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा है कि गैरकानूनी पोस्ट को जल्द से जल्द हटाने का प्रस्ताव पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा, "गैरकानूनी पोस्ट को जल्दी डिलीट करना इंटरनेट में घृणा और विद्वेश फैलाने के खिलाफ संघर्ष का सिर्फ एक पाया हो सकता है." उन्होंने कहा कि जो सोशल मीडिया में सजा पाने लायक मैटीरियल पोस्ट करता है, उसके खिलाफ प्रभावकारी कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए.
अब तक जर्मनी में अभियोक्ताओं को सोशल मीडिया कंपनियों से घृणा फैलाने वाले गुमनाम यूजरों के बारे में जानकारी पाने में अक्सर दिक्कत होती है. स्वेन रेबेन कहते हैं, "फेसबुक और उसकी जैसी कंपनियों को बाध्यकारी सूचना कार्यालय खोलना चाहिए, जो जांचकर्ताओं द्वारा पूछे जाने पर विश्वसनीय जानकारी दे सकें." न्यायाधीश संघ की शिकायत है कि सरकारी विधेयक में इस तरह के सूचना कार्यालय का प्रावधान है लेकिन सूचना न देने पर किसी तरह की सजा का प्रावधान न होने के कारण वह प्रभावी नहीं है.
सोशल मीडिया के मुताबिक अभिनेत्री फरीदा जलाल दुनिया को अलविदा कह चुकी थीं. मामला इतना बढ़ा कि अभिनेत्री ने स्वयं ट्वीट कर अपने जिंदा होने की पुष्टि की. यह पहला बार नहीं है जब किसी सेलिब्रिटी को सोशल मीडिया ने मार डाला हो.
तस्वीर: bollywoodhungama.comसोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के एक पेज ने साल 2013 में अभिनेत्री कैटरीना कैफ की मौत की खबर चलाई. इसके पहले कि देशभर में यह खबर जोर पकड़ती पेज ने स्पष्टीकरण दिया कि अभिनेत्री सही-सलामत हैं और उन्हें कुछ नहीं हुआ है.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/R. Kakadeअभिनेता, गायक और वीजे आयुष्मान खुराना को भी सोशल मीडिया पर एक बार मारा जा चुका है. अपने परिवार के साथ छुट्टी पर गए इस अभिनेता को एक स्नोबोर्डिंग दुर्घटना में मृत घोषित कर दिया गया था जिसके बाद ट्वीट कर आयुष्मान खुराना ने अपने जिंदा होने की पुष्टि की थी.
तस्वीर: DW/Maniबॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की अमेरिका में सड़क दुर्घटना में मौत जैसी खबरें भी सोशल मीडिया में चल चुकी हैं. यहां तक कि लोग बच्चन के अंतिम क्रिया-कर्म जैसी बातें भी सोशल मीडिया पर करने लगे थे. लेकिन बच्चन ने ऐसी फिजूल खबरों पर कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
तस्वीर: APमशहूर गायिका लता मंगेशकर को भी सोशल मीडिया जीते जी मार चुका है. खबरों की पुष्टि किए बिना ही ट्वीट और अन्य सोशल साइट के जरिये लोगों ने श्रद्धांजलि देने में भी देरी नहीं दिखाई. हालांकि लता मंगेशकर ने ट्वीट कर अपने जिंदा होने की पुष्टि की थी और अपने फैंस को ऐसी अफवाहों से बचने की सलाह दी थी.
तस्वीर: APएक-दो बार नहीं बल्कि इस महान अभिनेता को ऐसी आधारहीन खबरों का तीन बार शिकार होना पड़ा. पहली बार व्हाट्सएप मैसेज पर उनकी मौत की खबर उड़ी, दूसरी बार जब अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हुए तो सोशल मीडिया में इनकी मौत की खबर आ गई. तीसरी बार अर्पिता खान की शादी के वक्त भी इनके गुजरने की खबर आई थी.
तस्वीर: APवायरल इंफेक्शन के चलते साल 2011 में जब सुपरस्टार रजनीकांत को अस्पताल में भर्ती किया गया था तब उनकी मौत की खबरें सामने आई. यहां तक कि रजनीकांत की मौत की खबर ट्रेंड करने लगी. खबरों ने तूल पकड़ा तो रजनीकांत की पत्नी को सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा और उन्होंने कहा कि रजनीकांत बिल्कुल ठीक हैं.
तस्वीर: Getty Images/AFPसोशल मीडिया पर चल रही कुछ तस्वीरों को देख कर ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि मशहूर रैप सिंगर हनी सिंह चल बसे हैं. इसके बाद हनी सिंह ने ट्वीट कर अपने जिंदा होने की जानकारी दी थी.
तस्वीर: Roberto Schmidt/AFP/GettyImages इसके अलावा न्यायाधीश संघ ने सोशल मीडिया में हेट कैंपेन का शिकार होने वाले लोगों को मीडिया कंपनियों से सीधे जानकारी पाने का अधिकार देने की मांग की है. "जिसे नेट पर बदनाम किया जाये या अपमानित किया जाए उसे नोटिस या हर्जाने के मुकदमे के जरिये प्रभावकारी बचाव करने की स्थिति में होना चाहिए." स्वेन रेबेन ने कहा कि अपराधियों पर इस बात का ज्यादा असर होता है कि उनकी टिप्पणियां सिर्फ हटा ही नहीं ली गई हैं बल्कि उन्हें सजा या जुर्माने का भी खतरा है. जजों के संगठन ने प्रभावित लोगों को नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों के गुमनाम लेखकों के नाम बताने के लिए नेटवर्कों को बाध्य करने पर जोर दिया है.
जर्मन कानून मंत्री द्वारा पेश मसौदे में यह प्रावधान है कि सोशल नेटवर्किंग साइटों को स्पष्ट रूप से गैरकानूनी कंटेंट को 24 घंटे के अंदर हटाना होगा. कानूनी कर्तव्यों का पालन नहीं करने की स्थिति में इन कंपनियों को 5 करोड़ यूरो तक का जुर्माना हो सकता है. कंपनियों को हर तीन महीने पर शिकायतों और उनके निबटारे के बारे में रिपोर्ट भी देनी होगी.
एमजे/एके (एएफपी, डीपीए)
चुनावी हार जीत में मीडिया की अहम भूमिका रहती है. लेकिन कई बार मीडिया भी चुनावी मैदान में स्थिति को भांप नहीं पाता है. देखिये मीडिया की आलोचना के बावजूद चुनाव जीतने वाले कुछ नेताओं को.
तस्वीर: Reuters/Mark Wessels2002 के गुजरात दंगों के बाद भारतीय मीडिया का बड़ा हिस्सा नरेंद्र मोदी के पीछे पड़ गया. 12 साल तक मोदी की खिंचाई होती रही. लेकिन इसके बावजूद 2014 के चुनावों में जनता ने मोदी और उनकी पार्टी बीजेपी को बहुमत दिया.
तस्वीर: Getty Images/A.Karimiदक्षिण अफ्रीका में रंगभेदी शासन का अंत होने के बाद जब 1994 में चुनाव हुए तो प्रेस ने नेल्सन मंडेला और उनकी पार्टी एएनसी की खूब आलोचना की. असल में मीडिया का बड़ा हिस्सा अश्वेत लोगों को मिलने वाली ताकत के लिए तैयार नहीं था. मदीबा कहे जाने वाले मंडेला इसके बावजूद जीते. मंडेला ने "व्हाइट ओन्ड मीडिया" की आलोचना भी की.
तस्वीर: Reuters/Mark Wesselsपोलैंड का करीब करीब पूरा मीडिया उनके खिलाफ मुखर रहा, लेकिन इसके बावजूद लेक काचिंस्की की लॉ एंड जस्टिस पार्टी 2005 का चुनाव जीत गई. काचिंस्की प्रधानमंत्री बने. 2010 में एक विमान हादसे में उनकी मौत हो गई, लेकिन अब भी सरकार लॉ एंड जस्टिस पार्टी की ही है.
तस्वीर: DWतानाशाह की बेटी, जरा सा विवाद होने पर दक्षिण कोरिया के कई अखबार पार्क ग्वेन-हे पर ऐसा ही तंज करते. उन्हें कुलीन भी बताया गया. मीडिया की आलोचना के बावजूद पार्क ग्वेन-हे 2013 का चुनाव जीतीं और दक्षिण कोरिया की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/Jeon Heon-Kyunमीडिया और सोशल मीडिया के एक धड़े की लगातार आलोचना के बावजूद जोकोवी के नाम से विख्यात जोको वीडोडो 2014 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति बने. ड्रग्स को लेकर उनके कड़े रुख का काफी विरोध हुआ, लेकिन जनता ने जोकोवी को जिम्मेदारी सौंपी.
तस्वीर: Reuters/D. Whitesideमुख्यधारा मीडिया और सोशल मीडिया के भारी विरोध के बावजूद रेचप तैयप एर्दोवान तुर्की में अपनी सत्ता बचाने और उसे लगातार पुख्ता बनाने में सफल रहे. 2014 में वह राष्ट्रपति चुनाव भी जीते और देश में राष्ट्रपति प्रणाली लाने की राह पक्की की.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo/K. Ozer2009 में पहली बार दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बनने वाले जैकब जुमा कार्यकाल के अंत तक पहुंचते पहुंचते विवादों के लिए मशहूर हो गए. महिलाओं के बारे में भद्दी टिप्पणी, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के लिए सुर्खियों में रहने के बावजूद वह 2014 में फिर राष्ट्रपति चुने गए.
तस्वीर: Getty Images/AFP/M. Safodienविवादित और बेबाक बयान देने वाले डॉनल्ड ट्रंप के पीछे तो अमेरिका ही नहीं बल्कि कई देशों का मीडिया पड़ा. ट्रंप का आरोप है कि उनके खिलाफ लगातार नकारात्मक खबरें छापी और दिखाईं गईं. लेकिन इसके बावजूद ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव जीते.
तस्वीर: picture-alliance/CNP/C. Kleponis