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पहली बार सेना को ऑस्ट्रेलिया भेजेगा जर्मनी

१० जुलाई २०२३

12 देशों के सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने जर्मन सेना ऑस्ट्रेलिया जाएगी. हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह सैन्य अभ्यास शुरू होने वाला है.

ऑस्ट्रेलिया में सैन्य अभ्यास
तस्वीर: Scott Barbour/Getty Images

22 जुलाई से 4 अगस्त 2023 तक ऑस्ट्रेलिया में अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई सेना की सबसे बड़ी ड्रिल होने जा रही है. द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास में इस बार जर्मनी समेत कई और देश हिस्सा ले रहे हैं. सोमवार को जर्मन सैनिकों को पहला दस्ता ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हो रहा है. रवानगी से चंद घंटे पहले जर्मन सेनाध्यक्ष अल्फोंस मायस ने बताया कि 240 जर्मन सैनिक ऑस्ट्रेलिया में होने वाली ड्रिल में शामिल होंगे. इनमें 170 पैराट्रूप्स और 40 मरीन सैनिक हैं.

नाटो देशों के सैन्य अभ्यास के बाद अब ऑस्ट्रेलिया में ड्रिल करेगा जर्मन सेना का एक दस्तातस्वीर: INA FASSBENDER/AFP

चीन को सैन्य ताकत बना रहे हैं जर्मनी से लौटे वैज्ञानिक

हिंद-प्रशांत में प्रभाव बढ़ाने पर नजर

जर्मन सैनिक, जंगल में युद्ध और सहयोगी देशों के सैनिकों के साथ लैंडिंग जैसे अभ्यासों में हिस्सा लेंगे. इन ड्रिलों में इंडोनेशिया, ब्रिटेन, फ्रांस, दक्षिण कोरिया और जापान के सैनिक भी शामिल  होंगे. पश्चिमी देशों और चीन के पड़ोसियों का आरोप है कि बीजिंग सैन्य ताकत के जरिए दक्षिण चीन सागर में परिस्थितियां बदल रहा है. दक्षिण चीन सागर वैश्विक शिंपिंग कारोबार का अहम रूट है. बीते एक दशक से चीन पूरे इलाके पर अपना अधिकार जताने लगा है. अमेरिका और यूरोपीय देशों का आरोप है कि बीजिंग के ये कदम, आजाद समुद्री आवाजाही के अधिकार का उल्लंघन करते  हैं. यही वजह है कि दक्षिण चीन सागर को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. ताइवान भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है.

एशिया के कई देशों के साथ सैन्य अभ्यास कर रहा है अमेरिकातस्वीर: Dita Alangkara/AP/picture alliance

चीन की बढ़ती ताकत

चीन, जर्मनी का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है. यूरोपीय संघ का 40 फीसदी कारोबार दक्षिण चीन सागर पर निर्भर है. वहां किसी भी तरह की बंदिश या निंयत्रणवादी नीति कई देशों के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाती है. जर्मन सेना के चीफ मायस ने कहा, "आर्थिक रूप से निर्भरता के कारकण यह इलाका जर्मनी और यूरोपीय संघ के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है."

सबसे बड़े कारोबारी साझेदार होने के बावजूद बीते तीन चार साल में जर्मनी और चीन के रिश्ते बहुत तेजी से खराब हुए हैं. 2021 में जर्मनी में 20 साल बाद अपना जंगी जहाज दक्षिण चीन सागर भेजा. 2022 में भी बर्लिन ने एक सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए 13 सैन्य विमान ऑस्ट्रेलिया भेजे थे. हाल ही में आई जर्मनी की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में रूस के साथ साथ चीन का भी जिक्र किया गया है.

जर्मनी आर्मी चीफ के मुताबिक, "शीत युद्ध आसान था, वो एक दो-धुव्रीय दुनिया में हो रहा था. आज, हम सिर्फ यूरोप पर फोकस नहीं कर सकते हैं, हमें अपना दायरा ज्यादा विस्तृत करना होगा."

ओएसजे/एसबी (रॉयटर्स)

बेलारूस के बगल में जर्मन फौज

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