जर्मनी होरमुज में अमेरिकी नौसैनिक मिशन पर संशय में
३१ जुलाई २०१९
जर्मनी के उप चांसलर ओलाफ शॉल्त्स ने कहा है कि होरमुज में अमेरिकी नौसैनिक मिशन में शामिल होने से इलाके में बड़ा विवाद भड़क सकता है. ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने अमेरिका समर्थित यूरोपीय सैनिक मिशन की वकालत की है.
हाल ही में ओमान की खाड़ी में नॉर्वे और सिंगापुर के दो तेल टैंकरों पर संदिग्ध हमले की खबर आई. हमला होरमुज जलडमरूमध्य के नजदीक हुआ है. रणनीतिक रूप से होरमुज जलडमरूमध्य तेल व्यापार का सबसे अहम रास्ता माना जाता है.
होरमुज जलडमरूमध्य, फारस की खाड़ी में पड़ता है. यह ईरान और ओमान के जल क्षेत्र में आता है. सबसे संकरे बिंदु पर होरमुज की चौड़ाई महज 33 किलोमीटर है. दोनों दिशाओं में शिपिंग लेन सिर्फ तीन किलोमीटर चौड़ी है. यह ओमान की खाड़ी की ओर जाता है जहां से जहाज पूरी दुनिया में जाते हैं. यह पूरी दुनिया के तेल व्यापार के लिए बड़ा ट्रांजिट प्वाइंट है.
खबर आई कि 13 जून को तेल के दो तेल टैंकरों पर होरमुज जलडमरूमध्य के करीब संदिग्ध हमले हुए. सभी 44 नाविकों को अमेरिकी नौसेना की मदद से सुरक्षित निकाला गया. इस मामले ने एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को बढ़ा दिया.
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अमेरिका का आरोप
इस संदिग्ध हमले से पहले भी अमेरिका ने 12 मई को संयुक्त अरब अमीरात के फुजाइरा में समुद्री जहाजों के बीच चार टैंकरों पर हुए हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था. हालांकि ईरान ने किसी भी हमले से साफ इनकार किया है.
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होरमुज क्यों अहम
समुद्री रास्तों के जरिए होने वाला तकरीबन एक तिहाई तेल कारोबार मतलब पूरी दुनिया का कुल 20 फीसदी कारोबार इस समुद्री मार्ग से होता है. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत समेत चीन, भारत, जापान, और दक्षिण कोरिया में भी इसी मार्ग से तेल पहुंचाया जाता है. इसके साथ ही कतर से दुनिया भर में किए जाने वाला तरल प्राकृतिक गैस एक्सपोर्ट भी इसी मार्ग से होता है.
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आम आदमी पर असर
होरमुज जलडमरूमध्य के संकरे रास्ते में अगर कुछ भी घटता है तो वह दुनिया भर के ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है. किसी भी प्रकार का विवाद दुनिया भर की तेल कीमतों में तेजी ला सकता है. विश्लेषक मान रहे हैं खाड़ी क्षेत्रों में तनाव पैदा होता है तो कीमतों में लंबे वक्त तक बढ़ोतरी बनी रह सकती है साथ ही साथ आपूर्ति भी प्रभावित होगी.
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अब क्या होगा
भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि अमेरिका और ईरान की सरकारें इस मामले पर कैसी प्रतिक्रिया देगी. अमेरिका ने हाल में इस क्षेत्र में अपने नौसेना बल की तैनाती में इजाफा किया है. हालांकि अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा पहले से ही मध्यपूर्व में तैनात है. अमेरिकी नौसेना का मुख्यालय बहरीन का मनामा है.
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ईरान का विकल्प
ईरान ने परमाणु समझौते पर नई रूपरेखा बनाने के लिए यूरोप को सात जुलाई तक का समय दिया है. अमेरिकी प्रतिबंधों से आर्थिक रूप से परेशान ईरान ने मई 2019 में एलान किया था कि वह संवर्धित यूरेनियम को देश के बाहर नहीं भेजेगा, बल्कि देश में ही यूरेनियम का और उच्च संवर्धन करेगा. परमाणु बम बनाने के लिए उच्च संवर्धित यूरेनियम की जरूरत होती है. वहीं ईरान होरमुज से होने वाले तेल कारोबार को बाधित कर सकता है.