जर्मन संविधान में जलवायु सुरक्षा को शामिल करने की मांग
१७ अगस्त २०२६
यूरोप का बड़ा हिस्सा भीषण गर्मी से जूझ रहा है. कई जगहों पर जंगलों में विकराल आग लगी है तो ज्यादातर देशों में नदियां पानी के लिए तरस रही हैं. जलवायु विज्ञानी लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग से सूखा और जंगल की आग और भीषण हो रहे हैं. खुद जर्मनी में राइन नदी का जलस्तर ऐतिहासिक रूप से घट गया है.
इस बीच जर्मन सरकार में शामिल उदारवादी पार्टी, एसपीडी संविधान में जलवायु सुरक्षा को ठोस जगह देने की मांग कर रही है. सरकार में जूनियर पार्टी के रूप में शामिल एसपीडी ने इसे लेकर चार पन्नों का प्रस्ताव तैयार किया है. समाचार एजेंसी एएफपी ने इस प्रपोजल को देखा है. एएफपी के मुताबिक, प्रस्ताव कहता है कि "जलवायु अनुकूलन और प्रकृति संरक्षण के लिए ज्वाइंट मिशन" तैयार करना होगा. जर्मनी में संविधान को बेसिक लॉ कहा जाता है.
किस तरह के बदलावों का खाका पेश कर करता है जलवायु सुरक्षा प्रस्ताव
प्रस्ताव में एक राष्ट्रीय "हीट एक्शन प्लान" का खाका तैयार किया गया है. इसके तहत शहरी विकास व नियोजन के कानूनों में बदलाव, निर्माण के तरीकों में परिवर्तन और गर्मी को ध्यान में रखते हुए श्रम कानूनों में सुधार की मांग की गई है. एसपीडी का कहना है कि संविधान में जलवायु सुरक्षा को शामिल कर प्रांतीय सरकारों और स्थानीय प्रशासनों के साथ बेहतर तालमेल के साथ काम किया जा सकेगा.
जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए जर्मन शहर ने उठाए कदम
चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की पार्टी सीडीयू और उसकी सिस्टर पार्टी सीएसयू इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं. यह धड़ा चेतावनी दे रहा है कि ऐसी पहल भारी खर्च कराएगी.
सीडीयू के संसदीय समूह के उपाध्यक्ष क्लाउस माक के मुताबिक, वे इस विचार के खिलाफ नहीं हैं लेकिन उन्हें संकोच जरूर है. माक कहते हैं कि प्रस्ताव, वित्तीय नतीजों की अनदेखी करता है और मंत्रालयों के बीच जिम्मेदारियों की स्पष्ट लकीर को भी धुंधला करता है, "सिर्फ एक ठोस प्रस्ताव ही बता सकता है कि क्या बेसिक लॉ में बदलाव करना तार्किक है."
वहीं एसपीडी पार्टी के सूत्रों ने एएफपी से कहा कि इस प्रस्ताव का मकसद, इसी हफ्ते के कैबिनेट आयोजन में एक नई बहस को शुरू करने का है.
पर्यावरण संगठनों की जलवायु सुरक्षा प्रस्ताव पर क्या राय है?
पर्यावरण संगठनों ने सैद्धांतिक तौर पर एसपीडी के जलवायु प्रस्ताव का समर्थन किया है और चांसलर मैर्त्स की आलोचना की है. पर्यावरण संगठनों का कहना है कि सूखे, गर्मी और जल संकट देखने के बाद ऐसी पहल खुद चांसलर को करनी चाहिए थी.
एनवायरमेंट एक्शन जर्मनी की प्रमुख बारबरा मेत्स ने आरएनडी मीडिया ग्रुप से कहा, "इन गर्मियों के दौरान चरम स्थितियों ने दिखा दिया है कि हमारी तरफ जल्द और बार बार आ रही भीषण गर्मी से निपटने में जर्मनी की तैयारियां कितनी कमजोर हैं."
मेत्स के मुताबिक, एसपीडी के इस प्रस्ताव को ठोस कानून का रूप दिया जाना चाहिए. एसपीडी पर भी दबाव डालते हुए उन्होंने कहा कि ये सिर्फ जुमलेबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए.
विपक्षी ग्रीन पार्टी ने भी इस प्रस्ताव को समर्थन देने की मंशा जाहिर की है. वहीं अति वामपंथी पार्टी डी लिंके ने इस प्रस्ताव को "कोरा वादा" बताकर खारिज किया है. धुर दक्षिणंपथी पार्टी एएफडी ने भी इस विचार को सिरे से खारिज किया है.