ईरान डील कैंसल, तो बढ़ेगी अमेरिका यूरोप में खाई: गाब्रिएल
१३ अक्टूबर २०१७
जर्मनी के विदेश मंत्री जिगमार गाब्रिएल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने ईरान के साथ हुई परमाणु डील को खत्म किया तो विश्व राजनीति पर इसका व्यापक असर होगा.
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के साथ सुरक्षा परिषद के पांचों स्थायी सदस्यों और जर्मनी के प्रयासों से हुई डील को लेकर लगातार सवाल उठाते हैं. इस डील के तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए राजी हुआ जिसके बदले अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उसके खिलाफ लगे प्रतिबंधों में ढील दी थी.
जर्मन विदेश मंत्री गाब्रिएल ने कहा है कि ईरान के साथ हुए समझौते को रद्द करने से यूरोप और अमेरिका के बीच खाई और बढ़ेगी. उन्होंने जर्मनी के आरएनडी समाचार पत्र समूह से बातचीत में कहा, "यह जरूरी है कि यूरोप इस मुद्दे पर एकजुट रहे. हमें अमेरिकी लोगों को बताना होगा कि ईरान के मुद्दे पर उनका व्यवहार हम यूरोपीय लोगों को रूस और चीन के अमेरिका विरोधी रुख के करीब ले जायेगा."
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को न सिर्फ विश्व नेताओं की तरफ से बल्कि उनके अपने प्रशासन के लोग भी लगातार चेतावनी देते रहे हैं. बावजूद इसके ईरान को लेकर वह अपने रुख पर अडिग है. माना जा रहा है कि वह शुक्रवार को एक नयी रणनीति पेश कर सकते हैं जिसमें परमाणु समझौते पर ईरान की तरफ से हो रहे अमल को "अमान्य" करार करार दिया जा सकता है.
स्टॉकहोम इंटरनेशल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) ने अपनी 2016 रिपोर्ट में बताया है कि साल 2011-15 के बीच वैश्विक हथियार व्यापार में 2006-10 के मुकाबले 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई. देखिए सबसे बड़े निर्यातक देश कौन हैं.
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1. अमेरिका
दुनिया के 58 देश हथियारों का निर्यात करते हैं जिनमें सबसे आगे है अमेरिका. यूएसए 96 देशों को हथियार भेजता है, जिनमें सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात उसके सबसे बड़े खरीदार हैं. 2015 के अंत में ही अमेरिका ने एफ-35 विमानों की बिक्री के एक बड़े ठेके पर हस्ताक्षर किए.
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2. रूस
दुनिया भर के हथियारों के कुल व्यापार में एक चौथाई हिस्सेदारी रूस की है. भारत, चीन और वियतनाम इसके सबसे बड़े खरीदार हैं. भारत के तो 70 फीसदी हथियार रूस से ही आते हैं. इसके अलावा अपने लड़ाकू विमानों, टैंकों, परमाणु पनडुब्बियों और राइफलों को रूस ने यूक्रेन समेत दुनिया के 50 देशों में भेजा.
पिछले सालों में चीन हथियारों के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर हुआ है और आयात कम कर निर्यात को बढ़ाया है. चीन ने पिछले साल 37 देशों को हथियारों की आपूर्ति की, जिनमें पाकिस्तान (35%), बांग्लादेश (20%) और म्यांमार (16%) इसके सबसे बड़े ग्राहक रहे. 2006-10 और 2011-15 के बीच चीनी हथियारों के निर्यात में 88 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई.
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4. फ्रांस
हालांकि फ्रेंच हथियारों के निर्यात में 2010 के बाद से 9.8% की कमी आई है, फिर भी वह दुनिया में चौथे नंबर का आर्म्स एक्सपोर्टर बना हुआ है. यूरोप में उससे बाद आने वाले जर्मनी से निर्यात कम हुआ है. हाल ही मिले कुछ बड़े ठेकों के कारण फ्रांस के अगले साल भी निर्यातकों के टॉप 5 में शामिल रहने का अनुमान है.
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5. जर्मनी
प्रमुख जर्मन हथियारों के निर्यात में वर्ष 2011-15 के बीच 51 फीसदी की कमी आई. इन सालों में जर्मनी ने अपने खास हथियार 57 देशों को भेजे. इन्हें आयात करने वालों में 29 प्रतिशत तो अन्य यूरोपीय देश ही थे. इसके बाद एशिया, अमेरिका, ओशिनिया को 23 प्रतिशत जबकि इतना ही मध्य पूर्व को बेचा गया. अमेरिका, इजरायल और ग्रीस जर्मन हथियारों के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं.
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6. ब्रिटेन
अगर सऊदी अरब (46%), भारत (11%) और इंडोनेशिया (8.7%) जैसे बाजार ना हों तो ब्रिटिश हथियार उद्योग दिवालिया हो जाएगा. साल 2006–10 और 2011–15 के बीच ब्रिटेन से हथियारों का निर्यात करीब 26 प्रतिशत बढ़ा. यूरोप में इसके बाद स्पेन और इटली का स्थान आता है.
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संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था ने बार बार इस बात की पुष्टि की है कि ईरान उन पाबंदियों पर अमल कर रहा है जो समझौते के तहत उसके सामने रखी गयी थीं. लेकिन ट्रंप का कहना है कि ईरान परमाणु समझौते का "उल्लंघन" कर रहा है. उनके मुताबिक सबसे पहले तो ईरान सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद का समर्थन कर रहा है और दूसरे उसने नव निर्मित गैर-परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया है.
देखिए क्या क्या है चीन के जखीरे में
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गाब्रिएल ने कहा, "बड़ा ड्रामा तो यह है कि ईरान के साथ हुआ समझौता अमेरिका की घरेलू राजनीति का मोहरा बन सकता है." अमेरिका चाहता है कि ईरान के साथ हुए समझौते के तहत इस बात को सुनिश्चित किया जाए कि ईरान सीरिया, इराक या फिर यमन में चल रहे संकटों को भड़काना बंद करे. हालांकि गाब्रिएल का कहना है कि यह ईरान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने की शर्त नहीं हो सकती.
ट्रंप को रविवार तक अमेरिका कांग्रेस को यह बताना है कि वह इस बात में यकीन करते है या नहीं कि ईरान परमाणु समझौते पर अमल कर रहा है. अगर ट्रंप कहते हैं कि ईरान परमाणु समझौते पर अमल नहीं कर रहा है तो उसके 60 दिन के भीतर कांग्रेस को ईरान के खिलाफ नये प्रतिबंधों पर फैसला करना होगा.
एके/एनआर (रॉयटर्स, एएफपी, डीपीए)
परमाणु बम नहीं बल्कि दूसरे कई विस्फोटों ने हाल के सालों में दुनिया भर में खूब तबाही मचाई है. कभी आग, ईंधन या खौलते लिक्विड तो कभी दूसरे खतरनाक विस्फोटक.
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मंदिर पर हमला
17 अगस्त 2015 को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में स्थित एक लोकप्रिय मंदिर पर हुए बम धमाके में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई. यह ब्रह्मा का मंदिर था जिसका निर्माण 1956 में हुआ. यह हिंदू और बौद्ध श्रद्धालुओं का बैंकॉक में पसंदीदा पर्यटन था.
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तियानजिन गोदाम विस्फोट
12 अगस्त 2015 को चीन की पोर्ट सिटी तियानजिन में खतरनाक रसायनों और गैसों वाले गोदाम में दो विस्फोट हुए. इनमें से एक विस्फोट तो 21 टन टीएनटी के फटने के बराबर बताया गया. कुल मिलाकर 114 लोगों की जान गई और 500 से अधिक लोग घायल हुए.
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लाक मेगांटिक ट्रेन धमाका
6 जुलाई 2013 को 73 टैंकों में कच्चा तेल ले जा रही एक रेल कनाडा के लाक मेगांटिक शहर में पटरी से उतर गई. ट्रेन में आग लगी और फिर सारे तेल में फैल गई. दो बड़े धमाके हुए जिसमें 47 लोग मारे गए. शहर में घटनास्थल पर काफी बर्बादी हुई.
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टेक्सास में ज्वलनशील फर्टिलाइजर्स
17 अप्रैल 2013 को टेक्सास की वेस्ट फर्टिलाइजर्स कंपनी में हुए धमाके और फिर आग से 15 लोगों की जान चली गई और 200 घायल हुए. अमेरिका के जियोलॉजिकल सर्वे ने इस धमाके की तीव्रता भूकंप की स्केल पर 2.1 के बराबर मापी.
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रूसी सैनिक सामग्री धुएं में
सेंट्रल एशिया के डोंगुज टेस्ट साइट पर 8-9 अक्टूबर 2012 के बीच चार हजार टन सैन्य गोला बारूद में विस्फोट हुआ. पास के दो शहरों से लोगों को खाली करवा लिया गया था लेकिन 40 किलोमीटर दूर तक विस्फोटों की धमक महसूस हुई.
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जापान में आग के गोले
11 मार्च 2011 को जापान के तोहोकू में 8.9 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके कारण वहां के कई रसायन और तेल के गोदाम नष्ट हो गए. चीबा के कॉस्मो आयल रिफाइनरी में लिक्विड उबलकर वाष्प बन गया और आसमान में आग के गोलों के रूप में दहकता दिखा.
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सबसे बुरा पटाखा विस्फोट
13 मई 2000 को डच शहर एनशेडे में एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से 23 लोगों की जान चली गई. यह यूरोप में पटाखों के कारण होने वाला अब तक का सबसे बुरा हादसा है, जिसमें 947 लोग घायल भी हुए थे. आसपास के सैकड़ों घर नष्ट हो गए.