बवेरिया ने 2023 में इस प्रणाली के खिलाफ जर्मन संघीय संवैधानिक न्यायालय में मामला दायर किया था. अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं आया है.
जर्मनी में एक नियम के मुताबिक अमीर राज्य, आर्थिक तौर से कमजोर राज्यों को आर्थिक मदद देते हैं तस्वीर: Paul Zinken/dpa/picture alliance
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जर्मनी की वित्तीय संतुलन प्रणाली, जिसके तहत धनी राज्य आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों को मदद देते हैं, इस साल की पहली छमाही में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. इस व्यवस्था के तहत कुल 11.18 अरब यूरो अमीर राज्यों से कमजोर राज्यों को भेजे गए. यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 1.35 अरब यूरो अधिक है.
बवेरिया एक बार फिर सबसे बड़ा दाता
दक्षिणी राज्य बवेरिया ने हमेशा की तरह सबसे ज्यादा योगदान दिया. उसने अकेले 6.67 अरब यूरो का भुगतान किया. इसके बाद बाडेन-वुर्टेमबर्ग (2.12 अरब यूरो), हेसे (2.04 अरब यूरो) और हैम्बर्ग (312 मिलियन यूरो) का स्थान रहा. जर्मनी में डाक सेवाओं के खिलाफ रिकॉर्ड शिकायतें
बवेरिया के वित्त मंत्री आल्बेर्ट फ्यूरआकर ने इस प्रवृत्ति को "चिंताजनक" बताते हुए कहा कि "यह व्यवस्था अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही है." उन्होंने कहा कि इस साल की पहली छमाही में बवेरिया का योगदान पिछले साल की तुलना में करीब दो अरब यूरो अधिक है, जो अब कुल योगदान का लगभग 60 फीसदी हो गया है. उन्होंने मांग की कि इस व्यवस्था में "मूलभूत बदलाव” किया जाना चाहिए.
इस व्यवस्था का उद्देश्य देश के सभी 16 राज्यों में जीवन स्तर को तुलनात्मक रूप से बराबर बनाए रखना है. वित्तीय रूप से मजबूत राज्य इस फंड में योगदान करते हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों को इससे फायदा पहुंचता है.
हाल ही में फ्रांस के प्रधानमंत्री ने साल की दो सरकारी छुट्टियां खत्म करने का प्रस्ताव क्या रखा, देश में गंभीर बहस छिड़ गई. आइए देखें यूरोपीय देशों में कहां होती हैं सबसे ज्यादा पब्लिक हॉलीडे.
ये आंकड़े लिविंग एंड वर्किंग कंडीशंस इन यूरोप, पब्लिक हॉलिडे ओवरव्यू और यूके सरकार की वेबसाइटों से लिए गए हैं. अलग अलग इलाकों में अलग अलग साल के लिए इनकी संख्या बढ़ या घट सकती है.
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वित्त मंत्रालय के अनुसार, 2024 में कुल 18.65 अरब यूरो का दोबारा बंटवारा हुआ था, जिसमें बवेरिया का हिस्सा लगभग 9.77 अरब यूरो था. इस साल बवेरिया का योगदान ना केवल बढ़ा है बल्कि उसकी नाराजगी भी बढ़ी है.
बर्लिन को मिला सबसे ज्यादा
जिन राज्यों को सबसे ज्यादा धन मिला है, उनकी सूची में बर्लिन सबसे ऊपर है, जिसे इस साल की पहली छमाही में 2.03 अरब यूरो मिले. इसके बाद तीन पूर्वी जर्मन राज्यों सैक्सनी (1.92 अरब यूरो), थ्यूरिंगिया (1.16 अरब यूरो) और सैक्सनी-अनहाल्ट (1.07 अरब यूरो) रहे. अन्य राज्यों में नॉर्थ राइन वेस्टफेलिया (935 मिलियन यूरो), मेक्लेनबर्ग फोरपॉमारन (827 मिलियन यूरो), ब्रांडेनबुर्ग (795 मिलियन यूरो) और ब्रेमेन (549 मिलियन यूरो) शामिल हैं.
बवेरिया ने 2023 में इस प्रणाली के खिलाफ जर्मन संघीय संवैधानिक न्यायालय में मामला दायर किया था. अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं आया है, लेकिन मामले में 13 राज्यों जैसे बर्लिन, ब्रेमेन, ब्रांडेनुबर्ग और सैक्सनी आदि ने एकजुट होकर बवेरिया के विरोध का विरोध किया है.
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हालांकि मौजूदा गठबंधन सरकार ने हर साल धन देने वाले राज्यों को 400 मिलियन यूरो की संघीय सहायता देने का वादा किया है, लेकिन यह अब तक केवल वादे तक सीमित है, इस पर कोई विधायी पहल नहीं हुई है.
फ्यूरआकर का कहना है, "बवेरिया एकजुटता दिखाने को तैयार है, लेकिन यह नहीं हो सकता कि केवल धन देने वाले राज्यों पर पूरा भार आ जाए. इससे पूरे देश की आर्थिक संरचना पर उलटा असर पड़ेगा." उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि राज्यों के बीच आपसी सहमति नहीं बन पा रही है, इसलिए अदालत में उनकी याचिका बनी रहेगी.
दुनिया के कई देश जैसे जापान, जर्मनी, फ्रांस और सिंगापुर न केवल उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा की पेशकश कर रहे हैं, बल्कि स्कॉलरशिप, सस्ती फीस और रोजगार के बेहतर अवसरों के जरिए अमेरिका की जगह लेने को तैयार हैं.
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जापान: क्वॉलिटी एजुकेशन के साथ पूरा खर्च माफ
जापान की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज जैसे ओसाका यूनिवर्सिटी, टोक्यो यूनिवर्सिटी और क्योटो यूनिवर्सिटी अब अमेरिकी पाबंदियों से प्रभावित विदेशी छात्रों के लिए बड़े अवसर खोल रही हैं. ओसाका यूनिवर्सिटी ने फुल ट्यूशन फी माफ, रिसर्च फंडिंग और ट्रैवल की सहायता की घोषणा की है. जापान में इंग्लिश मीडियम कोर्स की संख्या बढ़ रही है और वहां पढ़ाई के साथ रिसर्च का बेहतरीन माहौल है.
हांगकांग यूनिवर्सिटी और चाइनीज यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग ने अमेरिकी छात्रों को आकर्षित करने के लिए विशेष योजनाएं शुरू की हैं. हांगकांग न केवल शिक्षा के लिए जाना जाता है, बल्कि एक वैश्विक वित्तीय और व्यावसायिक केंद्र होने के नाते, छात्रों को इंटर्नशिप और नौकरी के शानदार अवसर भी देता है. इंग्लिश यहां की आधिकारिक भाषाओं में से एक है, जिससे भारतीय छात्रों को भाषा की समस्या नहीं आती.
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चीन: तेजी से उभरता हुआ रिसर्च और शिक्षा केंद्र
चीन की यूनिवर्सिटी जैसे पेकिंग यूनिवर्सिटी और शीआन जियाओतोंग यूनिवर्सिटी अब अमेरिकी संस्थानों से निकाले गए या असहज छात्रों को प्रवेश देने के लिए सरल दाखिला प्रक्रिया और मदद की पेशकश कर रही हैं. विज्ञान, इंजीनियरिंग और मेडिकल क्षेत्र में चीन ने भारी निवेश किया है और भारतीय छात्रों को यहां रिसर्च, स्कॉलरशिप और मेडिकल सुविधाएं बहुत कम खर्च में मिल सकती हैं.
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जर्मनी: ट्यूशन फीस फ्री और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा
जर्मनी लंबे समय से भारतीय छात्रों की पसंद रहा है, खासकर इंजीनियरिंग और साइंस में. यहां की सरकारी यूनिवर्सिटी में ट्यूशन फीस नहीं लगती और डीएएडी (DAAD) जैसे संगठनों के जरिए स्कॉलरशिप्स आसानी से मिलती हैं. मास्टर्स कोर्सेस में इंग्लिश माध्यम उपलब्ध है और पोस्ट स्टडी वीजा की सुविधा भी आकर्षण का केंद्र है.
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फ्रांस: कम खर्च में अच्छी पढ़ाई
सॉरबोन यूनिवर्सिटी और एसईसी पेरिस जैसी यूनिवर्सिटी न केवल अकैडमिक रूप से बेहतरीन हैं, बल्कि फ्रांस में सरकारी स्कॉलरशिप्स, कम ट्यूशन फीस और संस्कृति से जुड़ाव भी छात्रों को आकर्षित करता है. इंग्लिश मीडियम कोर्सेज की संख्या बढ़ रही है और फ्रांस की सरकार इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को स्थायी रूप से बसने के अवसर भी देती है.
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आयरलैंड: पोस्ट स्टडी वर्क वीजा के साथ मजबूत करियर की संभावना
आयरलैंड की यूनिवर्सिटी जैसे ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन और यूनिवर्सिटी कॉलेज डबलिन ने हाल के वर्षों में भारतीय छात्रों के बीच लोकप्रियता पाई है. आयरलैंड में दो साल का पोस्ट स्टडी वर्क वीजा मिलता है और आईटी, फार्मा और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में करियर बनाना आसान है. यहां की भाषा इंग्लिश है और जीवनशैली भारत के अनुकूल है.
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यूनाइटेड किंगडम: स्कॉलरशिप्स के साथ फिर से बन रहा आकर्षक विकल्प
हालांकि पहले ब्रिटेन की फीस महंगी मानी जाती थी, पर शिवनिंग और कॉमनवेल्थ जैसी स्कॉलरशिप्स भारतीय छात्रों को पढ़ाई का सस्ता और सुरक्षित विकल्प दे सकती हैं. दो साल का पोस्ट स्टडी वीजा और तेजी से रिकवर होती इकॉनमी ब्रिटेन को एक मजबूत विकल्प बनाते हैं. ऑक्सफर्ड, कैम्ब्रिज और एडिनबरा जैसी यूनिवर्सिटी भारत में खूब जानी जाती हैं.
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सिंगापुर: टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का हॉटस्पॉट
एनयूएस और एनटीयू जैसी यूनिवर्सिटीज ग्लोबल रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर हैं. सिंगापुर भारत के करीब है, ट्रैवल सस्ता है और यहां की संस्कृति भारत से मिलती-जुलती है. क्वॉलिटी एजुकेशन, सेफ एनवायरनमेंट और आसान वीजा पॉलिसी सिंगापुर को अत्यंत आकर्षक विकल्प बनाते हैं.
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दक्षिण कोरिया: रिसर्च और स्कॉलरशिप्स के लिए उपयुक्त
केएआईएसटी और पोस्टटेक जैसे संस्थान इंजीनियरिंग और साइंस के लिए दुनिया के सबसे अग्रणी संस्थानों में शामिल हैं. कोरिया सरकार इंटरनेशनल छात्रों के लिए ग्लोबल कोरिया स्कॉलरशिप जैसी योजनाएं चलाती है. यहां आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संतुलन छात्रों को एक अलग अनुभव देता है.