अगली बार जब आप किसी मॉल या दुकान में जाएं तो हो सकता है कि आपको ऐसा रोबोट दिख जाए जो ग्राहक के पीछे-पीछे सामान उठाए चल रहा हो.
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अब तक आपने रेस्तरां में रोबोट को ऑर्डर लेते और खाना परोसते देखा होगा या अखबार या टीवी न्यूज में देखा होगा कि किन-किन क्षेत्रों में रोबोटों का इस्तेमाल हो रहा है लेकिन अब बाजार में ऐसे रोबोट बिकने को तैयार हैं जिसे कोई भी खरीद सकता है और शॉपिंग के लिए उसे अपने साथ ले जा सकता है.
क्रिसमस की छुट्टियों के मौके पर बाजार में ऐसे रोबोट बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे जो ग्राहक के पीछे पीछे उसी तरह से चलते दिखेंगे जैसे कुत्ते चलते हैं. सवाल यह कि कितने लोग होंगे जो ऐसा रोबोट खरीदना चाहेंगे. अमेजन, फेडेक्स और फोर्ड जैसे बड़े कॉरपोरेट दिग्गज घर तक डिलीवरी करने वाले रोबोटों पर पहले से ही प्रयोग कर रहे हैं. अब वेस्पा स्कूटर बनाने वाली इटली की पिआजो बाजार में ऐसे रोबोट पेश करने जा रही है जिसकी कीमत करीब 3,250 अमेरिकी डॉलर है. भारतीय रुपये में इसकी बात की जाए तो यह करीब 2 लाख 33 हजार होगी. पीछे-पीछे चलने वाले रोबोट में दो चक्के लगे हैं और इसका वजन करीब 22 किलो है. इस रोबोट का नाम गीटा है. इसे पकड़ने की जरूरत नहीं होगी, यह सामान उठाकर पीछे चलने में सक्षम है.
कैमरे की मदद से करेगा पहचान
इतालवी कंपनी पिआजो की बॉस्टन स्थित फास्ट फॉरवर्ड के सीईओ ग्रेग लिन कहते हैं, "हमारी कोशिश है कि आप बाहर जाएं और पड़ोस की उन जगहों से जुड़ें जो चलने लायक है."
लेकिन तकनीकी दुनिया के कुछ जानकार गीटा को पहले से ही विफल करार दे रहे हैं. उनका मानना है कि जब तक गीटा का इस्तेमाल अस्पताल, गोदाम और कारखानों में नहीं होता है और वह भारी वजन नहीं ढो पाता है तब तक इसका कोई लाभ नहीं. तकनीकी विशेषज्ञ जेपी गाउंडर कहते हैं, "इतना महंगा रोबोट खरीदकर आप सिर्फ किराने का सामान लाएंगे."
पिछले दिनों गीटा को बॉस्टन के रीवरफ्रंट के पास लिन के साथ टहलते देखा गया था. गीटा को किसी फोन नंबर, फेशियल रिकॉग्निशन, जीपीएस तकनीक की जरूरत नहीं है. फास्ट फॉरवर्ड के एक और सह-संस्थापक जेफरी श्नाप कहते हैं, "यह सिर्फ आपको देखता है और पीछे-पीछे चलने लगता है."
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रोबोट से सस्ती तो ट्रॉली है!
अमेरिका की कुछ जगहों पर अमेजन डिलीवरी रोबोट्स का प्रयोग कर रहा है. वहीं फेडेक्स भी पिज्जा डिलीवरी के लिए रोवर का परीक्षण कर रहा है. गाउंडर गीटा से प्रभावित नहीं दिख रहे हैं, उनका कहना है कि जमीन पर चलने वाले रोबोट और ड्रोन में ज्यादा कौन सफल साबित होता यह भविष्य में ही पता चल पाएगा.
तो क्या रोबोट छीन लेंगे ये नौकरियां?
आने वाले सालों में 40 फीसदी नौकरियां रोबोट के हाथों में होंगी. जानिए वह कौन कौन सी नौकरियां हैं, जो इन मशीनों ने करनी शुरू भी कर दी हैं या फिर जल्द करने वाले हैं और जहां शायद भविष्य में इंसानों की कोई जरूरत ना रह जाए.
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वेटर
आप रेस्तरां में जा कर बैठें और एक रोबोट आपसे खाने का ऑर्डर लेने आए. कुछ देर बाद वही हाथ में ट्रे लिए आपका खाना भी लाए. यह तस्वीर बांग्लादेश के एक रेस्तरां में काम करने वाले वेटर रोबोट की है.
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डाकिया
जर्मनी की डाक सेवा डॉयचे पोस्ट ने इनका इस्तेमाल शुरू कर दिया है. पीले रंग के रोबोट डाक ले कर लोगों के घर तक जाते हैं. हालांकि क्योंकि अभी इन्हें सीढ़ियां चढ़ना नहीं आता है, इसलिए एक व्यक्ति मदद के लिए इनके साथ रहता है.
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सेल्समैन
आप दुकान में पहुंचें और एक रोबोट आपसे पूछे कि बताइए, मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं. यह किसी फिल्म का सीन नहीं है, बल्कि ऐसा होने लगा है. जर्मनी में पॉल नाम का रोबोट इलेक्ट्रॉनिक्स के स्टोर पर काम करता है.
पिज्जा डिलीवरी
पिज्जा के लिए मशहूर डॉमिनोज काफी समय से डिलीवरी वाले रोबोट पर काम कर रहा है. बहुत जल्द आपके घर पिज्जा की डिलीवरी रोबोट किया करेगा. और हो सकता है कि यह उड़ता हुआ ड्रोन के रूप में आप तक पहुंचे.
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पुलिस
इन्हें पब के बाहर बॉडीगार्ड के रूप में भी खड़ा किया जा सकता है और घरों के बाहर सुरक्षा के लिए भी तैनात किया जा सकता है. दुबई में बुर्ज खलीफा के बाहर खड़ा यह रोबोट पुलिस का काम कर रहा है.
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सर्जन
ऑपरेशन थिएटर में रोबोट का इस्तेमाल अब कई सालों से हो रहा है. डॉक्टर किसी वीडियो गेम की तरह रोबोट को चलाता है. उसे स्क्रीन पर सब कई गुना बड़ा नजर आता है.
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बारटेंडर
अगर रोबोट खाना खिला सकता है, तो ड्रिंक्स भी तो पिला सकता है. बोतल खोल कर ग्लास में बियर डालने का काम रोबोट बखूबी कर लेते हैं, और तो और इन्हें टिप भी नहीं देना पड़ता.
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सफाई
बाजार में इस तरह के कई रोबोट उपलब्ध हैं, जो खुद ही आपके घर की सफाई कर सकते हैं. ये दरअसल वैक्यूम क्लीनर हैं, जिन्हें आपको पकड़ने की कोई जरूरत नहीं है. ये खुद ही घर में घूमते रहते हैं और कूड़ा जमा करते रहते हैं.
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खेती
फसल को काटने का काम भी रोबोट करते हैं. इन्हें बता दिया जाता है कि कहां तक खेत हैं, इन्हें किस दायरे में घूमना है और कटाई जमीन से कितने सेंटीमीटर ऊपर से करनी है. सारी मेहनत ये मशीनें खुद ही कर लेती हैं.
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पैकेजिंग
ऑनलाइन कंपनी एमेजॉन के गोदाम में पैकेजिंग का काम रोबोट करते हैं. ये रोबोट खुद ही तय कर लेते हैं कि किस पैकेट को कहां रखना है. सब कुछ ऑटोमेटेड है.
रिपोर्टर
आने वाले समय में इस पेशे पर भी खतरा है. कई जगह रिपोर्ट बनाने के लिए रोबोट का इस्तेमाल होने भी लगा है, खास कर खेल जगत में. रोबोट समाचार एजेंसियों द्वारा मिली सामग्री को मिला जुला कर इंसानों की ही तरह रिपोर्ट लिख सकता है.
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टीचर
बहुत मुमकिन है कि भविष्य में क्लासरूम में टीचर की जगह रोबोट खड़ा मिले. क्या क्या पढ़ाना है, यह रोबोट में प्रोग्राम किया जा सकता है. ऑनलाइन यूनिवर्सिटी आज हकीकत हैं. लोग स्क्रीन के आगे बैठ कर तो पढ़ाई करते ही हैं, रोबोट के आगे भी किया करेंगे.
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पेंटर
रोबोट कलात्मक काम भी करते हैं. इस रोबोट का नाम बसकर है और यह इंसानों की ही तरह पेंटिंग बनाता है. हर कैनवास पर अलग चित्र, अलग अंदाज. क्या पता भविष्य में रोबोट की पेंटिंग्स की प्रदर्शनी भी लगा करे.
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रसोइया
फ्रिज में क्या क्या सामान रखा है, इसे देख कर रोबोट खुद ही तय कर सकता है कि खाने में क्या बनेगा. अगर आपकी कोई खास फरमाइश है, तो रोबोट दुकान पर सामग्री का ऑर्डर भी दे सकता है.
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नागरिकता भी
सोफिया पहली ऐसी ह्यूमनॉइड रोबोट है जिसे किसी देश की नागरिकता मिल गयी है. 2017 में सऊदी अरब ने इसे अपना पासपोर्ट दिया. यह भारत समेत कई देश घूम चुकी है.
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और भी बहुत कुछ
बहुत कुछ मुमकिन है. पब में बारटेंडर से ले कर वकीलों के दफ्तर में रिसर्च करने वाले पैरालीगल तक, सब काम रोबोट संभाल सकते हैं. तो क्या साइंस फिक्शन फिल्मों की तरह भविष्य में इंसान रोबोट से घिरा दिखा करेगा? यह तो वक्त ही बताएगा.
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ड्रोन को चलाने के लिए भी देखरेख की जरुरत पड़ती है और उसे रिमोट के जरिए संचालित किया जा सकता है. वहीं गीटा के साथ एक चुनौती यह है कि वह कई जगहों पर अव्यवहारिक हो सकता है जैसे भीड़-भाड़ वाले इलाके, कच्चे फुटपाथ या बहुत दूर स्थित स्टोर या मॉल. जानकार कहते हैं कि अगर बाजार से किराना ही लाना है तो ऐसी ट्रॉली खरीद लें जिसमें दो चक्के लगे होते हैं और उसकी कीमत भी बेहद कम होती है.
एए/आरपी (एपी)
वेस्पा: आजादी और रोमांस की पहचान
70 साल पहले इटली में वेस्पा मोटर स्कूटर बनाया गया. मोटरसाइकिल की सैन्य ताकत या मर्दाना छवि के उलट स्कूटर परिवार, आजादी और फक्कड़ी की पहचान बन गया. एक नजर वेस्पा की दुनिया पर.
अप्रैल 1946 को पिआजो नाम की कंपनी का पंजीकरण हुआ. कंपनी ने वेस्पा स्कूटर नाम से पेटेंट हासिल किया. इटली के गेनोआ शहर में कंपनी ने स्कूटरों का उत्पादन शुरू किया. वेस्पा स्कूटर ने तुरंत यूरोप को अपने आगोश में ले लिया. स्कूटर युवाओं की पहचान बन गया.
एनरिको पिआजो (तस्वीर में) ने मोटरसाइकिल से अलग डिजायन बनाया. पिआजो असल में एक हेलिकॉप्टर बनाना चाहते थे, लेकिन अनुभव की कमी आड़े आ गई. लेकिन उनके भीतर की कशमकश उन्हें कुछ न कुछ बनाने के लिए प्रेरित करती रही. आखिरकार उन्होंने वेस्पा स्कूटर डियाजन किया.
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डिजायनर चाहते थे कि मशीन आसान हो, हल्की हो और उसका रखरखाव भी सस्ता हो, ताकि लोगों को उसके इस्तेमाल में दिक्कत न हो. स्कूटर की बॉडी के साथ वो ऐसा करने में कामयाब भी हुए.
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1946 में कंपनी ने "वेस्पा 98" मॉडल का उत्पादन शुरू किया. अधिकतम रफ्तार थी 60 किलोमीटर प्रतिघंटा. युवाओं के लिए यह तेज रफ्तार आजादी जैसी थी. अब वे आसानी से आसपास की जगहों पर जा सकते थे.
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वेस्पा का अगला मॉडल 1953 में लॉन्च हुआ. उसे पोप प्रियुस ने पेश किया. 5 हॉर्सपॉवर की ताकत वाला ये स्कूटर 75 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से भाग सकता था. पहली बार स्कूटर के हैंडल पर लाइट भी लगाई गई.
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वेस्पा की लोकप्रियता ऐसी बढ़ी कि 1953 की रोमांटिक कॉमेडी फिल्म "रोमन हॉलीडे" के मुख्य कलाकार भी इसी स्कूटर की सवारी करते दिखे. फिल्म ने भी उसकी लोकप्रियता में योगदान दिया.
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अब स्कूटर का लाभ सेना को भी दिखा. 1956 में सेना के लिए वेस्पा के मॉडल भी बने. इनमें एंटी टैंक हथियार लगाया गया. यह फ्रांसीसी सेना के लिए बनाया गया था. यह मॉडल आज भी म्यूजियम में है.
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1950 के दशक में यूरोप में सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को पेंट और स्कर्ट पहनने की आजादी नहीं थी. लेकिन वेस्पा ने युवा महिलाओं को आजादी दी. 1960 के दशक में महिलाएं भी वेस्पा लेकर निकलने लगीं.
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वेस्पा स्कूटर का मतलब सिर्फ शहरों में घुमाई नहीं था. इसके लिए जरिए लोग एक गांव से दूसरे गांव या दूसरे शहर जाने लगे. प्रेमियों की इस स्कूटर ने खासी मदद की. 1965 में 30 लाख से ज्यादा वेस्पा स्कूटर बिके.
लेकिन 1970 का दशक आते आते यूरोप में वेस्पा की बिक्री गिरने लगी. युवाओं की आर्थिक स्थिति बेहतर होने लगी और वे कार खरीदने लगे. लेकिन तभी वेस्पा के लिए भारत, ईरान, पूर्वी एशिया और अफ्रीका में बाजार खुला.
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यूरोप के कई देशों में आज भी वेस्पा प्रेमियों के क्लब हैं. जर्मनी के वेस्पा प्रेमी आज भी समय समय पर मिलते है और अपने प्यारे स्कूटर के साथ रैली सी निकालते हैं.
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वक्त के साथ वेस्पा स्कूटरों का चेहरा भी बदला. आज यह और ज्यादा हल्के और स्कूटी के रूप में सामने आ रहे हैं. हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अब वेस्पा को होंडा और बजाज जैसी कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है. लेकिन यूरोप में वेस्पा अब भी भावुकता से भरी आजादी जैसा अहसास है.