तख्तापलट की एक संदिग्ध कोशिश के बाद जर्मनी में बंदूक रखने से संबंधित कानून को और कड़ा करने की कवायद हो रही है. जर्मनी में बंदूक रखने से संबंधित कानूनी पहलुओं पर डीडब्ल्यू की यह रिपोर्ट...
जर्मनी में हथियारों को लेकर कानूनतस्वीर: picture-alliance/dpa/P. Pleul
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जर्मनी में हथियार अधिनियम के मुताबिक यदि आप कोई हथियार या बंदूक खरीदना चाहते हैं या अपने पास रखना चाहते हैं तो इसके लिए आपको वाफेनबेस्टित्सकार्ते (Waffenbesitzkarte) नाम के एक विशेष कार्ड की जरूरत पड़ेगी. और यदि हथियार या गोली से भरी बंदूक लेकर चलते हैं तो इसके लिए वाफेनशाइन (Waffenschein) नाम के एक विशेष लाइसेंस की जरूरत होगी. इसका मतलब हथियारों का संग्रह करने वालों यानी खरीद बिक्री करने वालों को सिर्फ वाफेनबेस्टित्सकार्ते की जरूरत होगी. शिकार करने वालों को हथियार का लाइसेंस तब तक नहीं मिल सकता जब तक कि उनके पास शिकार करने का लाइसेंस यानी याग्ड्शाइन नहीं है और इस मकसद से खरीदी गई बंदूक का उपयोग वे सिर्फ शिकार के लिए ही कर सकते हैं.
हथियार रखने संबंधी कार्ड होने का मतलब यह है कि इसके होने से बंदूक मालिक अपनी बंदूक को एक जगह से दूसरी जगह तक सिर्फ पहुंचा सकता है, उसे साथ लेकर चल नहीं सकता. यानी बंदूक को किसी बंद चीज में रखकर ही सार्वजनिक जगह पर चल सकते हैं.
बंदूक रखने के लिए लाइसेंस यानी वाफेनशाइन केवल दुर्लभ मामलों में ही मिलता है. खासकर तब जबकि आवेदनकर्ता यह सिद्ध कर सके कि उसे आम लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा खतरा है और बंदूक रखने की वजह से वह सुरक्षित रह सकता है. जर्मन कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो यह स्पष्ट कर सके कि बंदूक को अनिवार्य रूप से बंद डिब्बे में रखना है या फिर सार्वजनिक जगह पर उसमें गोली भरी जा सकती है या नहीं.
जर्मन सेना अलग से मिले 100 अरब की रकम से क्या खरीदेगी
कई दशकों से पुराने हथियार और साजो सामान से काम चलाने वाली जर्मन सेना को आधुनिक बनाने के लिए जर्मनी 100 अरब यूरो की रकम अलग से खर्च करने जा रहा है. आखिर इतनी बड़ी रकम से सेना के लिए क्या क्या खरीदा जाएगा.
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सबसे बड़ा हिस्सा वायु सेना को
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक 100 अरब में से तकरीबन 40 अरब रकम से ज्यादा की रकम वायु सेना पर खर्च होगी. जर्मन नौसेना के लिए 19.3 और थल सेना के लिए 16.6 अरब यूरो की रकम खर्च की जाएगी. बाकी रकम संयुक्त रूप से सेना के लिये नई तकनीकों के विकास पर खर्च होगी.
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लड़ाकू विमान
जर्मन वायु सेना के पास फिलहाल टोरनाडो लड़ाकू विमान है जो बहुत पुराना हो चुका है और कई विमान तो अब उड़ने के काबिल भी नहीं रहे. जर्मन सरकार अमेरिका से एफ-35 लड़ाकू विमान खरीदने की इच्छा रखती है. इतना ही नहीं वायु सेना में नया यूरोफाइटर और टोरनाडो की जगह लेने के लिए एक और विमान बेड़ा भी तैयार होगा.
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एयर डिफेंस सिस्टम
जर्मनी इस्राएल से एक नया एयर डिफेंस सिस्टम एरो खरीदने की तैयारी में है. जर्मनी के पास पहले से पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम है लेकिन यह कम ऊंचाई और दूरी की मिसाइलों के लिए है. एरो पृथ्वी से बहुत ज्यादा ऊंचाई पर और लंबी दूरी तय कर के आने वाली मिसाइलों को रोकता है.
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अर्ली वार्निंग सिस्टम
जर्मनी एक अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने की भी तैयारी में है. यह वार्निंग सिस्टम अंतरिक्ष में रहते हुए काम करेगा और मिसाइलों से हमले की जानकारी मुहैया करायेगा जिससे कि समय रहते एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से हमलावर मिसाइल को बेकार किया जा सके. एक ड्रोन डिफेंस सिस्टम भी विकसित करने की बात हो रही है.
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हथियारबंद ड्रोन
जर्मनी की संसद ने हेरॉन टीपी ड्रोन के लिए 140 मिसाइल खरीदने की मंजूरी दे दी है. इसके लिए करीब 15.26 करोड़ यूरो का करार होगा. हाल के महीनों तक जर्मन सेना को हथियारबंद ड्रोन का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं थी लेकिन अब मिल गयी है.
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कमांड और कंट्रोल सिस्टम
सेना के कमांड और कंट्रोल सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए जर्मन सेना 20.7 अरब यूरो की रकम खर्च कर रही है. इसमें एनक्रिप्टेड रेडियो, बैटल मैनेजमेंट सिस्टम और कई दूसरी चीजें शामिल हैं. इससे पहले माली जैसे देशों में जर्मन सेना उधार के एनक्रिप्टेड रेडियो का इस्तेमाल करती थी ताकि संयुक्त अभियानों में समस्या ना हो.
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लड़ाकू जलपोत और पनडुब्बी
नौसेना के लिए जंगी जहाज, मिसाइल और पनडुब्बी भी जर्मन सेना की खरीदारी की लिस्ट में शामिल है. जर्मनी के-130 टाइप के पांच और लड़ाकू जलपोत खरीदेगा. ये जलपोत इसी तरह के पुराने जहाजों की जगह लेंगे. इसके साथ ही एफ-126 टाइप के दो और फ्रिगेट भी खरीदने के विकल्प पर भी विचार हो रहा है.
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समुद्री गश्ती विमान
जर्मन सेना को बोइंग के बनाये पी8ए विमान भी मिलेंगे जो समुद्र में गश्त के लिए इस्तेमाल होते हैं. इसके अलावा भारी हथियारों से लैस लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर भी सेना में शामिल होंगे. फिलहाल सेना एच145एम इस्तेमाल कर रही है जिन्हें भारी हथियारों से लैस करने के बाद इनमें भी हमलावर हेलीकॉप्टर की क्षमता आ जायेगी.
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वर्दी और हेलमेट
सरकार जर्मन सैनिकों के यूनिफॉर्म, हेलमेट और नाइट विजन जैसे उपकरणों पर करीब 2 अरब यूरो की रकम खर्च करेगी.
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मार्डर टैंक बदला जायेगा
थल सेना के लिए खरीदारी में मार्डर टैंक के दस्ते को बदलना भी शामिल है. इसके लिए नये टैंकों के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है.
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इसके अलावा छोटी बंदूकों के लिए क्लाइनेर वाफेनशाइन नाम का एक अलग सर्टिफिकेट जारी किया जाता है जिसे प्राप्त करना आसान होता है और कम क्षमता वाले हथियारों को रखने के लिए यह सर्टिफिकेट अनिवार्य होता है. इनमें छोटी पिस्टल, बंदूकें या ऐसे हथियार जिनकी वजह से सिर्फ जलन सी होती है, कोई और खतरा नहीं होता है. कम क्षमता की एअर गन (7.5 जूल से कम) भी इसी नियम के तहत आती हैं.
इन प्रमाणपत्रों की कीमत करीब पांच सौ यूरो बैठती है जिसमें जरूरी बीमा प्रीमियम भी शामिल होता है.
जर्मनी में किस तरह की बंदूकें रखने की कानून अनुमति देता है
जर्मन कानून के तहत हथियार और युद्ध हथियार के बीच एक स्पष्ट अंतर है. युद्ध हथियारों की सूची वेपंस कंट्रोल एक्ट के तहत स्पष्ट की गई है.
किसी भी तरह का युद्ध हथियार रखना या इस्तेमाल करना जर्मनी में गैर कानूनी है. इनमें पूरी तरह से स्वचालित राइफल्स, मशीन गन्स या फिर ऐसे हथियारों में काम आने वाली चीजें शामिल हैं. हां, द्वितीय विश्व युद्ध या उससे पहले के कुछ सजावटी हथियारों को रखने की छूट है. पंप एक्शन से चलने वाली शॉटगन्स भी वेपंस एक्ट के तहत प्रतिबंधित हैं. कुछ, सेमी ऑटोमेटिक हथियारों को भी युद्ध हथियारों के रूप में परिभाषित किया गया है, लेकिन सारे नहीं.
जर्मनी में कौन बंदूक लेकर सकता है
जर्मनी में बंदूक का लाइसेंस लेने वालों को ये शर्तें अनिवार्य रूप से पूरी करनी पड़ती हैं
कम से कम 18 साल का होना चाहिए
उसमें आवश्यक "विश्वसनीयता” और "व्यक्तिगत योग्यता” हो
आवश्यक "विशेष ज्ञान” का प्रदर्शन कर सके
"जरूरत” बता सके
व्यक्तिगत क्षति और संपत्ति नुकसान के लिए दस लाख यूरो तक के बीमा की राशि अदा करने लायक हो
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आवेदक की ‘विश्वसनीयता' और ‘व्यक्तिगत योग्यता'
बंदूक लाइसेंस के आवेदनों पर कार्रवाई के लिए स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होते हैं और इसीलिए विश्वसनीयता, निजी क्षमता और बंदूक की जरूरत जैसे मामलों की पड़ताल भी वही करते हैं. आवेदक के निवास स्थल के आधार पर यह जिम्मेदारी या तो पब्लिक ऑर्डर ऑफिस यानी ऑर्डनुंगजाम्ट के पास होती है या फिर पुलिस के पास.
इसके अलावा, अन्य कानूनी शर्तों के तहत ऐसा व्यक्ति अविश्वसनीय समझा जाएगा या फिर उसमें व्यक्तिगत क्षमता की कमी पाई जाएगी जो...
. पिछले दस साल में किसी अपराध के लिए सजा पाया हो
. उनकी परिस्थितियां की वजह से ऐसा समझा जाए कि वो हथियार का बेतहाशा इस्तेमाल कर सकते हैं
. वे किसी ऐसे संस्थान के सदस्य रहे हैं जो या तो प्रतिबंधित है या फिर असंवैधानिक है
. उन्होंने पिछले पांच साल में कोई ऐसा काम किया हो या फिर उसका समर्थन किया हो जो जर्मनी के विदेशी हितों को नुकसान पहुंचाने वाला हो.
. पिछले पांच साल में एक से ज्यादा बार उन्हें पुलिस कस्टडी में लिया जा चुका हो
. वो मदिरा, ड्रग्स इत्यादि का सेवन करता हो या फिर दिमागी रूप से अस्वस्थ हो.
इसके अलावा, 25 साल से कम उम्र का व्यक्ति पहली बार बंदूक के लाइसेंस के लिए तभी आवेदन कर सकता है जबकि उसके पास किसी सरकारी स्वास्थ्य अधिकारी या मनोवैज्ञानिक की ओर से जारी किया हुआ ‘मानसिक क्षमता' का सर्टिफिकेट हो.
आवेदक ‘विशेष ज्ञान' का प्रदर्शन कैसे करते हैं
बंदूक का लाइसेंस लेने वाले अभ्यर्थी को एक परीक्षा पास करना या फिर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होता है. इसमें राज्य में हथियार रखने से संबंधित कानूनी और तकनीकी जानकारी का परीक्षण करते हैं, मसलन, बंदूकों के बारे में, उन्हें कैसे सुरक्षित तरीके से रखा जाता है और उन्हें बंदूक चलानी आती है या नहीं.
जर्मनी में अरबों के नोट छिपाने वाला सीक्रेट बंकर
कोई कहता था कि यह स्कूल है. कोई इसे हथियारों का गुप्त ठिकाना बताता था. पुलिस को नहीं पता था कि इमारत में भीतर आखिर है क्या? अब पता चला है कि यहां अरबों जर्मन मार्क रखे थे, जिन्हें बाद में राख कर दिया गया.
तस्वीर: Ina Fassbender/AFP
स्कूल नहीं, बंकर है
बाहर से स्कूल जैसी दिखने वाली यह इमारत जर्मनी के केंद्रीय बैंक, बुंडेसबांक की इमरजेंसी रिजर्व थी. 1962 से 1964 के बीच इस सीक्रेट रिजर्व को बनाया गया. 8,700 वर्ग मीटर में फैला रिजर्व कोखेम शहर के रिहाइशी इलाके में बनाया गया था. आसपास रहने वालों को भी इस बात की भनक नहीं थी कि इस इमारत में क्या होता है.
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एक बेहद गहरा तहखाना
सीक्रेट रिजर्व बनाने के लिए जानबूझकर इस जगह को चुना गया. मोजेल नदी की पहाड़ी ढाल वाले इस इलाके में परमाणु हमले की लहर बर्दाश्त करने की क्षमता है. टॉप सीक्रेट कही जाने वाली इस लोकेशन पर करीब 15 अरब जर्मन मार्क (आज के हिसाब से 7.6 अरब यूरो) छुपाए गए थे.
तस्वीर: Ina Fassbender/AFP
इमरजेंसी मुद्रा की वजह
शीत युद्ध के दौरान पश्चिमी जर्मनी की सरकार को लगा कि बड़े पैमाने पर फर्जी मुद्रा की सप्लाई कर अर्थव्यवस्था को तबाह किया जा सकता है. अगर जर्मन मार्क (यूरो से पहले जर्मनी की मुद्रा) से लोगों का भरोसा उठ गया, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं. इसी वजह से एक वैकल्पिक मुद्रा बीबीके टू छापने का भी फैसला किया गया.
तस्वीर: Ina Fassbender/AFP
चाबियां कहीं और
स्टील के मोटे दरवाजों के पीछे इस तिजोरी तक बुंडेसबांक के कुछ चुनिंदा कर्मचारी ही पहुंच सकते थे. चाबियों का सेट यहां से कुछ दूर बसे शहर फ्रैंकफर्ट में रखा गया था. सुरक्षा के लिए इस इमारत की दीवारों में आवाज और कंपन को पकड़ने वाले सेंसर लगे थे. सेंसरों का ऑटोमैटिक अलार्म स्थानीय पुलिस स्टेशन से भी जुड़ा था. हालांकि, पुलिस को भी नहीं पता था कि इमारत में है क्या?
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गोपनीय खजाना
कोखेम के इस बंकर में कई बक्सों में 15 अरब मूल्य की सीक्रेट करेंसी रखी थी. इसमें 10, 20, 50 और 100 जर्मन मार्क के नोट भी शामिल थे. जरूरत पड़ने पर बाजार से पुराने नोटों को हटाया जाता और खास सीरियल नंबर वाले इन नोटों को बाजार में उतारा जाता. हर तीन महीने में फ्रैंकफर्ट से बैंक कर्मचारी यहां आकर तिजोरी चेक करते थे.
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बीते दौर की तकनीक
यह बंकर सिर्फ पैसे के लिए ही नहीं था. परमाणु युद्ध की सूरत में इस बंकर के भीतर दो हफ्ते तक सुरक्षित रहने का इंतजाम था. भीतर जर्मनी के आंतरिक मंत्रालय से सीधे कनेक्शन वाला रेडियो लिंक था. बिजली के लिए डीजल जेनरेटर, 18,000 लीटर फ्यूल रिजर्व और 40,000 लीटर पीने का पानी भी स्टोर था.
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80 लोगों के लिए इंतजाम
आपात स्थिति में बंकर के भीतर 80 आम नागरिकों को भी आराम से रखने की सुविधा थी. उनके सोने के लिए कमरे बने थे. हवा की सप्लाई के लिए सैंड फिल्टर लगे थे. लेकिन, इस बात की जानकारी कभी नहीं मिली कि परमाणु हमले की स्थिति में यहां शरण लेने वाले 80 लोगों की लिस्ट में किस-किसका नाम था.
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बर्बाद हो गया पैसा
1988 में इस पैसे को नष्ट करने का फैसला किया गया. इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम आने की वजह से नगदी को ऐसे स्टोर रखना बेकार लगने लगा. पैसा खत्म किए जाने के बाद यह बंकर काफी समय तक खाली रहा. 2014 में एक निवेशक ने इस खरीदा. 2016 से यह आम लोगों के लिए खुला है. (रिपोर्ट: फिलिप ब्योल)
तस्वीर: Jürgen Fromme/augenklick/firo Sportphoto/picture alliance
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इसके अलावा कुछ अन्य परीक्षणों के माध्यम से उनके विशेष ज्ञान को भी परखा जाता है. इनमें शिकारी लाइसेंस परीक्षा, बंदूक के व्यापार की परीक्षा या तीन साल के लिए बंदूक या हथियारों के व्यापार में पूर्णकालिक रोजगार शामिल हैं.
बंदूक समेत कुछ निश्चित प्रशिक्षण कोर्स के पूर्ण होने पर एक परीक्षा होती है, जिसे विशेष ज्ञान परीक्षण कहा जाता है.
इसके अलावा, मान्यता प्राप्त शूटिंग असोसिएशन भी अपनी तरफ से कुछ परीक्षाएं आयोजित कर सकते हैं.
आवेदक बंदूक की जरूरत का प्रदर्शन कैसे करते हैं
कानून के मुताबिक आवेदकों को बंदूक का लाइसेंस पाने के लिए उसकी जरूरत को साबित करना होगा और साबित करना होगा कि यह उन्हें "निजी या आर्थिक हितों के लिए चाहिए और वो शिकारी, निशानेबाज, परंपरागत शिकारी, हथियार संग्रह करने वाले, हथियार विशेषज्ञ, हथियार निर्माता या हथियार व्यापारी से अलग हैं.”
जो लोग किसी भी तरह के अपराध को झेल चुके हैं या पीड़ित हैं, वो भी खुद के लिए हथियारों की जरूरत को प्रमाणित कर सकते हैं.
इसके अलावा शूटिंग एसोसिएशन और क्लबों के सदस्य भी बंदूक के लाइसेंस की जरूरत बता सकते हैं लेकिन ऐसा करने से पहले उन्हें अपने क्लबों या खेल एसोसिएशन से यह सर्टिफिकेट लेना होगा कि वे अपनी परंपरा का निर्वहन करने के लिए हथियार लेना चाहते हैं.