पढ़ाई में अच्छे नहीं होते सख्त मां-बाप के बच्चे: स्टडी
१० फ़रवरी २०१७
बच्चों को नियम कायदे सिखाने के लिए जरूरी नहीं कि उनके साथ सख्ती बरती जाएं. एक अध्ययन के मुताबिक जिन बच्चों को मां-बाप की लताड़ और सख्ती का सामना करना पड़ता है वे पढ़ाई की जगह सेक्स और अपराध में लिप्त हो जाते हैं.
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स्कूल में बच्चों के अच्छे या खराब प्रदर्शन के जिम्मेदार महज बच्चे ही नहीं बल्कि उनके मां-बाप भी हैं. इसलिए अगर आपका बच्चा स्कूल में अच्छा परफॉर्म नहीं कर रहा तो उसे डांटने के बजाय बतौर मां-बाप आपको सोचना होगा कि आप कहीं गलत ढंग से पेश तो नहीं आ रहे हैं. मां-बाप द्वारा बच्चों को शारीरिक दंड देना या उनके साथ डांट-डपट करना भी इनके खराब प्रदर्शन का कारण हो सकता है.
अजब गजब डिग्रियां
ये ऐसी डिग्रियां हैं कि नाम सुनकर एक बार तो आप सोचेंगे, इसकी पढ़ाई कैसे हो सकती है. पर पढ़ाई तो होती है, देखिए...
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सर्फ साइंस एंड टेक्नॉलजी
कॉर्नवल कॉलेज में दो साल का कोर्स है जिसमें सर्फिंग के बारे में पढ़ाया जाता है.
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कंटेंपररी सर्कस एंड फिजिकल परफॉर्मेंस
बाथ की स्पा यूनिवर्सिटी में यह कोर्स है. इसमें खूब थ्योरी होती है. सर्कस के दर्शन से लेकर एक्रोबेटिक्स तक की पढ़ाई होती है.
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टर्फ ग्रास साइंस
पेन्सिल्वेनिया की पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में टर्फ ग्रास साइंस की डिग्री होती है. यानी घास कैसे उगाते हैं. कहां कौन सी घास उगाई जा सकती है आदि.
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इंटरनेशनल स्पा मैनेंजमेंट
डर्बी यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं कि स्पा क्या होती है, कैसे काम करती है और अच्छी स्पा कैसे चलाई जा सकती है. मालिश की तकनीक और स्वस्थ खानपान की जानकारी भी इस कोर्स का हिस्सा है.
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कुठपुतली कला
कनेक्टिकट यूनिवर्सिटी में एक डिग्री कोर्स सिर्फ कठपुतलियों पर है. उनका इतिहास, विज्ञान और भूगोल सब कुछ इस कोर्स में सीख सकते हैं.
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थीम पार्क इंजीनियरिंग
कैलिफॉर्निया स्टेट लॉन्ग बीच में पढ़ाया जा रहा है कि थीम पार्क में काम कैसे होता है. झूले कैसे, कहां किस तरह लगाए जाते हैं आदि.
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द बीटल्स
बीटल्स के गृह नगर लिवरपूल की होप यूनिवर्सिटी में इस मशहूर म्यूजिक बैंड पर एमए किया जा सकता है.
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बेकिंग टेक्नॉलजी मैनेजमेंट
लंदन की साउथबैंक यूनिवर्सिटी में केक बनाने को लेकर सारी बातें आप डिग्री कोर्स में पढ़ सकते हैं.
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विटीकल्चर और ओएनोलॉजी
ब्रिटेन के प्लंपटन कॉलेज में तीन साल की पढ़ाई होती है कि परफेक्ट वाइन कैसे बनाई जाए.
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वाइकिंग स्टडीज
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में वाइकिंग्स के बारे में तीन साल की पढ़ाई होती है. वाइकिंग्स 8वीं से 11वीं सदी के बीच स्कैंडेनेवियन देशों में हमला करने वाले लुटरों को बोलते थे.
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प्रोफेशनल टेनिस मैनेजमेंट
दुनिया में कई जगह यह डिग्री होती है. जर्मनी और अमेरिका में कई यूनिवर्सिटी यह कोर्स कराती हैं जैसे मिशिगन की फेरिस स्टेट यूनिवर्सिटी.
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अमेरिका की पिट्सबर्ग यूनिवर्सटी के शोधकर्ताओं मुताबिक जो बच्चे सख्त माहौल में पले-बढ़े होते हैं वे ही अधिकतर समय अपना होमवर्क छोड़कर दोस्तों के साथ खेलने जाते हैं. यहां तक कि अपनी दोस्ती निभाने के लिए ये बच्चे मां-बाप द्वारा बनाए गए नियम-कायदों को तोड़ने से भी नहीं कतराते. नतीजन स्कूल में इनके प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ता है.
शोधकर्ताओं ने 12-21 साल की उम्र वाले 1500 बच्चों पर एक अध्ययन किया. इस शोध में मां-बाप द्वारा बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से लताड़े जाने की घटनाओं का आकलन किया गया. साथ ही बच्चों की अपने दोस्तों के साथ होने वाली बातचीत, आपराधिक मामलों पर इनकी सोच और सेक्सुअल बिहेवयर पर भी नजर रखी गई. इन बच्चों से कई सवाल पूछे गए मसलन पिछले महीने कितनी बार इन्हें मां-बाप से डांटा, कितनी बार मां-बाप इन पर चिल्लाए.
नतीजतन, यह देखा गया कि सख्त माहौल में पले-बढ़े 7वीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे दो साल बाद मां-बाप के नियम कायदों के सामने अपने साथियों और दोस्तों को अधिक अहमियत देने लगते हैं. 11वीं कक्षा तक आते-आते ये बच्चे जोखिम मोल लेने लगते हैं. लड़कियों का झुकाव जहां सेक्स की ओर नजर आने लगता है तो लड़कों की आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की संभावना बढ़ जाती है.
ऐसे पूरा करें यूरोप में पढ़ने का सपना
भारत जैसे यूरोपीय संघ के बाहर के देशों के स्टूडेंट भी यूरोप के तमाम कालेजों में पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप पा सकते हैं. जानिए ईयू देशों की सरकारों और विश्वविद्यालयों के कुछ छात्रवृत्ति कार्यक्रमों के बारे में.
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ब्रिटिश शिवनिंग स्कॉलरशिप (यूके)
ब्रिटेन की सरकार की ओर से मिलने वाली इस स्कॉलरशिप के लिए हर साल भारतीय छात्र आवेदन कर सकते हैं. आमतौर पर ये एक साल की मास्टर्स डिग्री के लिए मिलता है. इस स्कॉलरशिप में पढ़ाई की फीस, यूके में रहने का खर्च, भारत से आने जाने का हवाई किराया तो मिलता ही है, पढ़ाई से जुड़ी कुछ अन्य जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त ग्रांट भी मिल सकते हैं. (www.chevening.org/india)
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आइफेल एक्सेलेंस स्कॉलरशिप (फ्रांस)
फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने देश के उच्चशिक्षा संस्थानों की ओर विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के लिए इस स्कॉलरशिप को विकसित किया था. मास्टर्स और पीएचडी स्तर की पढ़ाई के लिए भारत के चुने हुए प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स का आने जाने का विमान किराया, महीने का खर्च, स्वास्थ्य बीमा वगैरह मिलता है, लेकिन पढ़ाई की फीस नहीं. (www.scholars4dev.com)
डच शिक्षा, संस्कृति और विज्ञान मंत्रालय द्वारा प्रायोजित इस स्कॉलरशिप के लिए भी भारतीय छात्र आवेदन कर सकते हैं. नीदरलैंड्स के 48 से भी अधिक शिक्षण संस्थानों में बैचलर या मास्टर्स स्तर की डिग्री लेने के लिए 5,000 यूरो की छात्रवृत्ति मिलती है. (www.international.hu.nl)
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डेनिश गवर्नमेंट स्कॉलरशिप (डेनमार्क)
डेनमार्क का शिक्षा मंत्रालय हर साल उच्च शिक्षा प्राप्त प्रातिभाशाली अंतरराष्ट्रीय छात्रों को डेनिश युनिवर्सिटी से डिग्री लेने के लिए छात्रवृत्ति देता है. इसमें पढ़ाई की फीस का पूरा या आंशिक खर्च उठाया जाता है और डेनमार्क में रहने का खर्च भी अतिरिक्त ग्रांट के जरिए पाया जा सकता है. (www.ucnorth.dk)
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एडिनबरा ग्लोबल मास्टर्स स्कॉलरशिप (यूके)
कई विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय छात्रों को स्कॉलरशिप देते हैं. जैसे ब्रिटेन की एडिनबरा युनिवर्सिटी में किसी भी विषय में फुलटाइम पोस्टग्रेजुएट मास्टर्स डिग्री लेने के लिए एक भारतीय छात्र को 3,000 पाउंड की छात्रवृत्ति मिल सकती है. (www.ed.ac.uk/student-funding)
यूके के इस विश्वविद्यालय में फुलटाइम पोस्टग्रेजुएट कोर्सों के लिए मिलने वाली स्कॉलरशिप में पूरी फीस तक माफ हो सकती है. वहीं अंडरग्रेजुएट कोर्स में हर साल की फीस में 50 फीसदी तक की छूट मिल सकती है. (www.shu.ac.uk/international/scholarships-bursaries/transform)
लाइडेन युनिवर्सिटी में मास्टर डिग्री लेने के लिए भारतीय छात्र स्कॉलरशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं. फीस में से 10,000 से लेकर 15,000 यूरो तक की मदद मिल जाती जाती है. (www.universiteitleiden.nl/en) इसके अलावा युनिवर्सिटी ऑफ मास्ट्रिष्ट की 'हाई पोटेंशियल स्कॉलरशिप' में ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, वीसा और बीमा के पैसे भी मिलते हैं.
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शोधकर्ताओं में शामिल रॉशेल हेंटगीज ने डीडब्ल्यू को बातचीत में कहा, "मां-बाप का यह सोचना गलत है कि बच्चों को कुछ विषयों के बारे में अपने आप ही जानकारी मिल जाएगी, इसकी बजाय बेहतर है कि उन्हें जानकारी दी जाए." इस शोध में भाग ले करीब 56 फीसदी बच्चे अफ्रीकी-अमेरिकी थे.
अमेरिकी पत्रिका "चाइल्ड डेवलपमेंट" में छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि अकसर लोग परवरिश को दो तरीके से देखते हैं. अभिभावक या तो बहुत उदार नजर आते हैं या वे अपने बच्चों के साथ बहुत सख्त होते हैं और शारीरिक दंड देने से भी नहीं हिचकते. लेकिन ये दोनों ही रुख सही नहीं हैं. मां-बाप को अपने बच्चों को प्रोत्साहित करने वाला माहौल देना चाहिए जहां सही-गलत की सीमाएं तय हों लेकिन शारीरिक दंड के लिए कोई जगह न हो.