हेनरी नानेन जर्नलिस्ट स्कूल जर्मनी का नामी पत्रकारिता स्कूल है. इस साल 1800 आवेदकों में से 16 चुने गए हैं. एडमिशन कमिटी का कहना है कि अब तक कोई सभी सवालों के सही जवाब नहीं दे पाया है.
तस्वीर: Henri Nannen Preis 2014
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हैम्बर्ग में स्थित इस पत्रकारिता संस्थान में दाखिले की प्रक्रिया अत्यत कठिन है. दाखिले के बाद ट्रेनिंग बहुत ही सख्त और व्यापक है. इसीलिए इसे देश का सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता कॉलेज माना जाता है. जर्मनी के प्रमुख प्रकाशनगृह ग्रुनर+यार, श्पीगेल और साइट इसे चलाते हैं. ट्रेनिंग 18 महीने की होती है और इस दौरान चुने गए 16 उम्मीदवारों को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए पत्रकारिता का हुनर सिखाया जाता है.
इस स्कूल में दाखिला पाने की संभावना इतनी कम होती है कि चुने जाने के लिए उम्मीदवारों का खास होना जरूरी है. इसलिए उन्हें अपने आवेदन के साथ एक टेक्स्ट लिखकर भेजना होता है. और टेक्स्ट और बाकी बायोडाटा के आधार पर चुने जाते हैं उनमें से 70 लोग. असल परीक्षा तो इनकी होती है, तीन दिन का टेस्ट और 72 घंटे का तनाव.
देखिए, 2016 की अवॉर्ड विनिंग प्रेस फोटो
वर्ल्ड प्रेस फोटो अवॉर्ड 2016
शरणार्थी संकट 2015 में सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहने वाला विषय रहा. इसी से जुड़ी एक तस्वीर को किसी पत्रकार द्वारा ली गयी साल की बेहतरीन तस्वीर चुना गया है. देखिए इस साल और कौन कौन सी तस्वीरें चुनी गयीं.
तस्वीर: Christian Walgram/GEPA pictures
वॉरन रिचर्डसन, ऑस्ट्रेलिया
सर्बिया और हंगरी की सीमा पर ली गयी इस तस्वीर को इस साल का वर्ल्ड प्रेस फोटो अवॉर्ड दिया गया है. आधी रात में ली गयी इस तस्वीर के लिए रोशनी सिर्फ चांद की ही मौजूद थी. सीमा पुलिस का ध्यान इस ओर ना जाए, इसलिए फ्लैश का इस्तेमाल नहीं किया गया.
तस्वीर: Warren Richardson
मॉरीसियो लीमा, ब्राजील
सीरिया में ली गयी इस तस्वीर को समाचार श्रेणी में पहला पुरस्कार मिला है. तस्वीर में डॉक्टर इस्लामिक स्टेट के एक 16 साल के लड़ाके के जले हुए शरीर पर मरहम लगा रहा है. पीछे कुर्दिस्तान वर्कर पार्टी के नेता अब्दुल्लाह ओएचेलान की तस्वीर टंगी है.
तस्वीर: Mauricio Lima/The New York Times
झांग ले, चीन
यह तस्वीर चीन के तिआनजिन शहर की है, जिस पर धूल की चादर बिछी हुई है. 10 दिसंबर 2015 को ली गई इस तस्वीर को आधुनिक समय के सबसे अहम मुद्दों की श्रेणी में पुरस्कार दिया गया है.
तस्वीर: Zhang Lei/Tianjin Daily
केविन फ्रेयर, कनाडा
यह तस्वीर भी चीन की ही है. शांशी शहर के करीब स्थित इस बिजलीघर में कोयले से बिजली बनती है. कोयले पर निर्भरता के कारण चीन दुनिया भर में होने वाले कार्बन डाय ऑक्साइड के कुल उत्सर्जन के एक तिहाई के लिए जिम्मेदार है.
तस्वीर: Kevin Frayer/Getty Images
मैरी एफ कैलवर्ट, अमेरिका
यह तस्वीर 21 मार्च 2014 को ली गयी. इसे लॉन्ग टर्म प्रोजेक्ट की श्रेणी में चुना गया है. तस्वीर 21 साल की नताशा शुटे की है, जिन्हें अमेरिका की सेना की ओर से अपने ड्रिल सार्जेंट के यौन हमले की रिपोर्ट करने की हिम्मत के लिए पुरस्कार दिया गया.
तस्वीर: Mary F. Calvert
रोहन केली, ऑस्ट्रेलिया
सिडनी के बोंडी बीच की इस तस्वीर में एक बड़ा सा काला बादल देखा जा सकता है जो किसी सूनामी जैसा लगता है. इसी दौरान बीच पर मौजूद लोग शांति से लेटे हैं. इसे प्रकृति की श्रेणी में पहला पुरस्कार दिया गया है.
तस्वीर: Rohan Kelly/Daily Telegraph
माटिच जोरमन, स्लोवेनिया
शरणार्थियों से ही जुड़ी एक और तस्वीर को भी पुरस्कार मिला. 7 अक्टूबर 2015 को सर्बिया के एक शरणार्थी कैंप में यह तस्वीर ली गयी. रेनकोट पहने यह बच्ची शरणार्थियों के पंजीकरण की कतार में खड़ी है.
तस्वीर: Matic Zorman
क्रिस्टियान वालग्राम, ऑस्ट्रिया
15 फरवरी 2015 को यह तस्वीर अमेरिका में हो रही एफआईएस वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान ली गयी. चेक गणराज्य के ओंद्रे बांक स्की के दौरान अपना संतुलन खो बैठे और फिसल गए. इस तस्वीर को खेल श्रेणी में चुना गया.
तस्वीर: Christian Walgram/GEPA pictures
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पिछले सालों में टेस्ट के परिणामों में बहुत बदलाव नहीं आया है. जर्नलिस्ट स्कूल के डायरेक्टर आंद्रेयास वोल्फर्स का कहना है कि ज्यादातर उम्मीदवार 40 से 70 प्रतिशत के बीच मार्क्स पाते हैं. पिछले दशकों में अब तक कोई भी सारे सवालों का जवाब नहीं दे पाया है. वोल्फर्स का मानना है कि ऐसा संभव भी नहीं है क्योंकि सवाल विभिन्न इलाकों से पूछे जाते हैं. किसी के लिए भी हर सवाल का उत्तर जानना संभव नहीं.
तीन दिनों के टेस्ट के दौरान उम्मीदवारों की सामान्य ज्ञान की परीक्षा ली जाती है. सामान्य ज्ञान के टेस्ट में उनसे विभिन्न सवाल पूछे जाते हैं, वाक्यों को पूरा करने के लिए कहा जाता है, बयानों की पुष्टि के लिए कहा जाता है. इस सेक्शन में इस साल 64 सवाल पूछे गए. टेस्टों में तस्वीरों का टेस्ट भी शामिल है जिसमें उम्मीदवारों से यह अपेक्षा की जाती है कि उन्हें तस्वीरों पर दिखाने वाले लोगों या घटनाओं की जानकारी हो. और अंतिम टेस्ट होता है रिपोर्ट बनाने का. जो जितनी क्षमता दिखा पाए, उसका उतना ही फायदा.
और ये हैं दुनिया की टॉप 10 यूनिवर्सिटी
टॉप-10 यूनिवर्सिटीज
द टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रिपोर्ट 2016-17 में चीन ने बड़ी छलांग लगाई है. चीन की चार यूनिवर्सिटीज टॉप-50 में हैं. देखिये टॉप-10 में कौन कौन है.
तस्वीर: AP
नंबर 1
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (यूके)
तस्वीर: picture alliance
नंबर 2
कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (अमेरिका)
तस्वीर: picture-alliance/dpa/R.Chiu
नंबर 3
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (अमेरिका)
तस्वीर: King of Hearts/Wikimedia Commons/dpa
नंबर 4
केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी (यूके)
तस्वीर: Fotolia/Konstiantyn
नंबर 5
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (अमेरिका)
तस्वीर: Ben Tang
नंबर 6
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (अमेरिका)
तस्वीर: Getty Images/R. Spencer
नंबर 7
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी (अमेरिका)
तस्वीर: cc-by-carbonnyc
नंबर 8
इंपीरियल कॉलेज लंदन (यूके)
तस्वीर: Getty Images/J.Li
नंबर 9
स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ज्यूरिख (स्विट्जरलैंड)
तस्वीर: picture-alliance/KEYSTONE
नंबर 10
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले (अमेरिका)
तस्वीर: Imago
नंबर 10
शिकागो यूनिवर्सिटी (अमेरिका)
तस्वीर: AP
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तीन दिन के टेस्ट के बाद चुने जाते हैं जर्मनी के सबसे अच्छे पत्रकारिता के कैंडिडेट. उन्हें 18 महीने की ट्रेनिंग मिलती है प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पत्रकारिता के हुनर में. ट्रेनिंग दो हिस्सों में होती है, सेमिनार ब्लॉक के रूप में सैद्धांतिक ट्रेनिंग और उसके बाद जर्नलिस्ट स्कूल से जुड़े विभिन्न मीडिया हाउसेस के किसी विभाग में व्यवहारिक ट्रेनिंग ताकि सेमिनार में सीखी गई कारीगरी को व्यवहार में परखा जा सके और तराशा जा सके. ट्रेनिंग मुफ्त है और ट्रेनी को महीने में करीब 764 यूरो की स्कॉलरशिप मिलती है.