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समाज

परीकथा में समलैंगिक सामग्री पर हंगरी सरकार सख्त

२२ जनवरी २०२१

हंगरी की सरकार ने एक किताब के प्रकाशक को आदेश दिया है कि वह समलैंगिक सामग्री पर डिस्क्लेमर छापे. सरकार ने पहले भी समुदाय के खिलाफ कुछ सख्त कदम उठाए हैं. अधिकार कार्यकर्ता सरकार के इस आदेश को कोर्ट में चुनौती देंगे.

तस्वीर: Gergely Besenyei/AFP/Getty Images

हंगरी की सरकार ने एक प्रकाशक को समलैंगिक सामग्री वाली किताब पर डिस्क्लेमर छापने का आदेश दिया है. देश की दक्षिणपंथी सरकार के निशाने पर एलजीबीटी समुदाय के लोग हैं. सरकार ने प्रकाशक को कहा है कि "पारंपरिक लिंग-आधारित भूमिकाओं के साथ असंगत विषय" वाली किताबों की पहचान करे. सरकार ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा है कि पाठकों की सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है. दरअसल एक समलैंगिक समूह लैब्रिज ने "वंडरलैंड इज फॉर एवरीवन" नाम से परीकथा का संकलन प्रकाशित किया था, संकलन में कुछ कहानियां समलैंगिक विषयों के साथ शामिल थीं.

किताब के लेखकों का कहना है कि इसका उद्देश्य बच्चों को यह पढ़ाने के लिए है कि सभी पृष्ठभूमि के लोगों का सम्मान करना चाहिए. संकलन में एक कहानी मादा हिरण की है जिसकी ख्वाहिश नर हिरण बनने की पूरी हो जाती है, इसमें एक कविता भी है जो एक राजकुमार के बारे में है, जिसकी शादी दूसरे राजकुमार से होती है. अन्य कहानियां अल्पसंख्यकों को सकारात्मक रूप से दर्शाती हैं, जिनमें रोमा समुदाय और विकलांग लोगों की कहानियां भी हैं.

किताब में स्नो व्हाइट के चरित्र को बदलकर लीफ ब्राउन कर दिया गया, जिसकी त्वचा का रंग गहरा है. हंगरी की सरकार के बयान के मुताबिक, "किताब एक परीकथा के रूप में बेची जा रही है, किताब की जिल्द और उसको उसी तरह से डिजाइन किया गया है. लेकिन इसमें तथ्यों को छिपाया जा रहा है." सरकारी आदेश में लैब्रिज को इस तरह की सामग्री वाली किताबों पर डिस्क्लेमर छापने को कहा गया है, जिनमें "वंडरलैंड इज फॉर एवरीवन" भी शामिल है. लैब्रिज और हैटर अधिकार समूह ने कहा कि वे डिस्क्लेमर छापने वाले आदेश पर सरकार के खिलाफ कोर्ट जाएंगे.

अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह आदेश भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है. हंगरी के राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने पिछले कुछ सालों में एलजीबीटी समुदाय के खिलाफ विरोध भरे बयान दिए और उनके खिलाफ नीतियां अपनाई है. पिछले साल हंगरी ने सरकारी दस्तावेजों में ट्रांसजेंडर की पहचान को मान्यता देने पर प्रतिबंध लगा दिया था और संविधान में बदलाव कर परिवार की अवधारणा को फिर से परिभाषित किया था जिसके मुताबिक परिवार में "मां एक स्त्री है और पिता एक पुरुष है."

एए/सीके (रॉयटर्स)

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