जर्मनी में गर्मी के साथ आइसक्रीम की मांग बढ़ी है, लेकिन कीमतों में हुई वृद्धि से कई ग्राहक नाराज हैं. भारत में भी आइसक्रीम बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन प्रति व्यक्ति खपत अब भी कम है.
जर्मनी में आइसक्रीम का महंगा होना लोगों को अच्छा नहीं लग रहा हैतस्वीर: Adam Berry/Getty Images
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जर्मनी में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है और लोग गर्मी से राहत पाने के लिए जिन जगहों का रुख कर रहे हैं, उनमें आइसक्रीम की दुकानें भी हैं. लेकिन इस ठंडी मिठास का स्वाद अब पहले जितना सस्ता नहीं रहा. एक नए सर्वे के अनुसार, जर्मनी के ज्यादातर लोग मानते हैं कि आइसक्रीम की कीमतें जरूरत से ज्यादा हो चुकी हैं और इसका असर उनकी खपत पर भी पड़ा है.
सर्वेक्षण संस्था यूगव ने पूरे जर्मनी में यह सर्वे किया है, जिसमें हिस्सा लेने वाले करीब 2,000 वयस्कों में से 64 फीसदी ने कहा कि आइसक्रीम अब "बहुत महंगी" हो गई है. वहीं 60 फीसदी से अधिक लोगों ने माना कि वे पहले की तुलना में अब कम स्कूप ऑर्डर करते हैं, या तो हमेशा या कभी-कभी.
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि 28 फीसदी लोगों ने कहा कि कीमत उनके आइसक्रीम खाने के फैसले को प्रभावित नहीं करती. ज्यादातर लोग अब भी दो (50 फीसदी) या तीन (23 फीसदी) स्कूप लेते हैं. यह तब है जब पिछले कुछ सालों में जर्मनी में महंगाई तेजी से बढ़ी है और अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है.
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कितनीमहंगीहोगईहैआइसक्रीम?
जर्मनी में इतालवी आइसक्रीम बनाने वाली कंपनियों की संस्था यूनिटआइस की प्रवक्ता अनालिसा कार्नियो बताती हैं कि पिछले साल की तुलना में कुछ पार्लरों ने कीमतें बढ़ाई हैं, लेकिन कुल मिलाकर महंगाई कम होने से दाम स्थिर हैं. उन्होंने समाचार एजेंसी डीपीए को बताया, "ग्राहक शिकायत नहीं करते. वे जानते हैं कि सब महंगा हुआ है. थोड़ी बहुत बड़बड़ाहट होती है, लेकिन ऐसा करने वाले कम ही हैं.”
एक स्कूप की कीमत अब 1.30 यूरो यानी करीब 130 रुपये से शुरू होकर 2.80 यूरो यानी करीब 280 रुपये तक जाती है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह पार्लर किस शहर में है, उसका आकार क्या है. इसके अलावा दुकान में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी आइसक्रीम के दाम को प्रभावित करती है. म्यूनिख, हैम्बर्ग और बर्लिन जैसे बड़े शहरों में कीमतें ऊंची हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में आइसक्रीम अभी भी सस्ती है.
आइसक्रीम खाते ही सिर क्यों झनझना जाता है
कई बार आइसक्रीम खाते हुए सिर में चुभता हुआ सा दर्द उठता है. जैसे कुछ देर के लिए माथा जम गया हो. कुछ मिनटों तक सिर के दोनों ओर या सामने माथे पर झन्नाहट जैसा एहसास होता है. इसे "आइसक्रीम हेडेक" कहते हैं. ये क्यों होता है?
तस्वीर: CARL DE SOUZA/AFP/Getty Images
ब्रेन फ्रीज
आइसक्रीम हेडेक, यानी आइसक्रीम खाने पर कभी-कभार होने वाला सिर दर्द. जरूरी नहीं कि सिर्फ आइसक्रीम खाने से ही हो. बहुत ठंडी चीज, जैसे बर्फ का गोला या एकदम चिल्ड पीने की चीज से भी ऐसा दर्द उभर आता है. इसे 'ब्रेन फ्रीज' भी कहते हैं.
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सबको हो, ये जरूरी नहीं
यह 'कोल्ड-स्टिम्युलस हेडेक' है. यानी, ये ठंड की वजह से जगता है. ऐसा नहीं कि दर्द बहुत देर तक बना रहे, आमतौर पर बमुश्किल पांच मिनट में ये खत्म हो जाता है. जरूरी नहीं कि ठंडी चीज खाते हुए हर बार या हर किसी को ये दर्द हो.
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नसों पर होने वाला असर
इसकी वजह क्या है, इस पर अब भी एक राय नहीं है. लेकिन कई जानकार मानते हैं कि इसका संबंध नसों के सिकुड़ने और फैलने से है. जब हम कोई बहुत ठंडी चीज मुंह में रखते हैं, तो वो हमारे मुंह के अंदरूनी हिस्से के ऊपर यानी तालू या गले के नजदीकी हिस्से को छूती है.
तस्वीर: Imaginechina-Tuchong/imago images
दिमाग के पास पहुंचता है संदेश
ठंड के कारण वहां मौजूद छोटी नसें पहले सिकुड़ती हैं और फिर तेजी से फैलती हैं. वहां मौजूद दर्द महसूस करने वाले हमारे सेंसर नसों की परेशानी भांप लेते हैं. वो नन्हे-नन्हे नर्व फाइबरों के मार्फत बड़े नर्व, यानी ट्रायजेमिनल नर्व को यह संदेश पहुंचाते हैं. यहां से इस सिग्नल की डाक आगे दिमाग तक भेजी जाती है.
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दिमाग को हो जाती है गलतफहमी
ट्रायजेमिनल नर्व का मुख्य काम चेहरे को संवेदना या अनुभूति मुहैया कराना है. इसलिए इसे चेहरे से भी दर्द का संकेत मिलता है. फिर ठंड से उभरी इस सनसनी को दिमाग भी पढ़ता है. उसे लगता है कि दर्द का ये सिग्नल सिर से आ रहा है, जबकि असलियत में महसूस हो रहा होता है मुंह को.
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रेफर्ड पेन: चोट कहीं, दर्द कहीं
विज्ञान की भाषा में इसे "रेफर्ड पेन" कहते हैं. मतलब शरीर के किसी हिस्से में चोट लगी हो और दर्द कहीं और ही महसूस हो रहा हो. इसकी वजह ये है कि शरीर की सारी नसें एक बहुत बड़े नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो आपस में जुड़ी हैं.
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बहुत झटपट ना खाएं ठंडी चीज
हार्वर्ड एजुकेशन के मुताबिक, चूंकि इस दर्द की मियाद बड़ी कम होती है इसलिए इन्हें पढ़ना-समझना जरा मुश्किल है. और इस आइसक्रीम हेडेक को किस तरह रोका जाए, इसका भी कोई ठोस तरीका भी नहीं मालूम. हां, ये जरूर कर सकते हैं कि ठंडी चीज एकदम तेजी से ना खाएं. आहिस्ता-आहिस्ता खाएं, तो मजा भी आएगा और शायद दर्द भी ना उठे.
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वेबसाइट कूपंस डॉट डीई के एक अध्ययन के मुताबिक, वसंत 2025 में 60 जर्मन शहरों के 176 आइसक्रीम पार्लरों में औसत कीमत 1.81 यूरो प्रति स्कूप रही. सबसे महंगे स्थान थे जिल्ट और सेंट पीटर-ऑर्डिंग जैसे पर्यटन स्थल, जहां कीमत 2.50 यूरो तक थी. सबसे सस्ती आइसक्रीम डॉर्टमुंड और हैले में पाई गई, जहां यह 1.50 यूरो से कम थी.
साल दर साल तुलना करें तो 2023 में औसत कीमत 1.62 यूरो थी, जो 2024 में 1.72 यूरो हुई और अब 1.81 यूरो तक पहुंच चुकी है.
दूसरेदेशोंमेंक्याहालहै?
अगर यह कीमत ज्यादा लग रही हो तो थोड़ा संतोष इस बात से मिल सकता है कि यूरोप के बाकी हिस्सों में आइसक्रीम और भी महंगी है. यूनिटाइस के अनुसार फ्रांस में एक स्कूप की कीमत 3.50 से 5 यूरो तक है. इटली में 2.50 से 4 यूरो, स्पेन में 3 से 4 यूरो और स्विट्जरलैंड में तो यह कीमत 5 यूरो से भी ऊपर जाती है.
इस लिहाज से जर्मनी अब भी "सस्ती आइसक्रीम वाला देश" बना हुआ है. बाजार अनुसंधान एजेंसी एनआईक्यू के पास इस बात का स्पष्ट डेटा नहीं है कि लोग आइसक्रीम कम खा रहे हैं या नहीं. लेकिन यूनिटाइस का कहना है कि खपत के तरीके में बदलाव तो है, पर कुल मांग में गिरावट नहीं आई है.
उपभोक्ता मनोवैज्ञानिक येंस लोननेकर के अनुसार, "आइसक्रीम में वही मनोवैज्ञानिक आकर्षण है जो चॉकलेट में होता है. यह जीवन की कठोरता के बीच एक मीठी राहत देती है. गर्मी में इसकी ठंडक एक सुखद अनुभव बन जाती है. लेकिन असली जादू तब होता है जब यह पिघलती है. वहीं उसका भावनात्मक असर होता है.”
गर्मियों का कहर, किसका फायदा किसका नुकसान
जर्मनी में गर्मियों का कहर चल रहा है. लोग लू से परेशान हैं. जमीन सूख गई है, घास और पेड़ पौधे झुलस गए हैं और जंगलों में आग लग रही है. लेकिन लोग सिर्फ गर्मियों के सताए नहीं हैं.
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अच्छी शुरुआत
गर्मियों की शुरुआत अक्सर बदलते रहने वाले मौसम में राहत देने वाली थी. लोगों ने इसका फायदा उठाया और घरों से बाहर निकलकर बगीचों और पार्क में समय गुजारा. जब तापमान 39 डिग्री पर पहुंचा तो गर्मी के नुकसान सामने आने लगे.
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जंगल में आग
स्वीडन और ग्रीस के साथ जर्मनी में भी यहां वहां से जंगल में आग लगने की खबर आ रही है. बर्लिन के निकट जिस इलाके में आग लगी, वहां दूसरे विश्वयुद्ध के हथियारों का जखीरा मिला.
यूरोप भर की नदियों और जलाशयों में पानी सूखने लगा. जहां कभी पानी भरा होता था वहां सूखी धरती दिखने लगी. नीदरलैंड में कई खुलने वाले पुलों को बंद करना पड़ा क्योंकि गर्मी से उनकी धातु फैल गई थी.
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सूखे चरागाह
जर्मनी के चरागाह जो आम तौर पर हरे भरे होते हैं, सूखे पड़े हैं. सेक्सनी अलहाल्ट के शोएनेबेक में इन गायों को इस समय हरी घास नहीं मिल रही. उन्हें सूखे से ही गुजारा करना पड़ रहा है.
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परमाणु बिजलीघर
लगातार जारी उच्च तापमान के कारण जर्मनी में शुरुआती परमाणु बिजलीघरों को अपनी क्षमता घटानी पड़ी है. वजह ये है कि नदियों का पानी काफी गर्म हो गया है, बिजली घरों को पर्याप्त ठंडा पानी नहीं मिल रहा.
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आधा माल
घरेलू परिवहन में जहाज सिर्फ आधी लदाई लेकर जा रहे हैं. गर्मी की वजह से नदी का पानी कम हो गया है. मध्य जर्मनी में स्थित कोबलेंस शहर से दक्षिण में जहाज ज्यादा माल भरकर नहीं जा सकते.
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अंगूर की पटौनी
गर्मी के कारण खेती को भी नुकसान पहुंचा है. अंगूर के खेत पूरी तरह सूखकर बर्बाद न हो जाएं, इसलिए पौधों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाता है. कई इलाकों में सूखे के कारण फसल आधी रह गई है.
तस्वीर: picture alliance / dpa
सोलर पैनल की ठाठ
लगातार गर्मी का एक फायदा ये हुआ कि सौर उर्जा का उत्पादन बढ़ गया है. सोलर पैनल से दोपहर के समय जर्मनी की एक तिहाई बिजली बन रही है. बहुत गर्मी होने पर उसका उत्पादन भी कम हो जाता है.
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पौधों को पानी
पुलिस की जो गाड़ी आम तौर पर प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछाड़ करने के काम आती है, इस समय पार्कों में और सड़कों के किनारे पौधों को पानी दे रही है ताकि वे सूख न जाएं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/B. Marks
आइसक्रीम की चाह
गर्मी ने आइसक्रीम की मांग बढा दी है. इस साल पहली बार औसत खरीद प्रति व्यक्ति सालाना 8 लीटर के रिकॉर्ड को पार कर गई है. ब्रांडेड आइक्रीम की बिक्री साल के पाँच महीने के दौरान ही 15 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है.
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बीयर की बिक्री
गर्मी के कारण बीयर की बिक्री भी बढ़ रही है. गर्मी शुरू होते ही मई में बिक्री 2.5 फीसदी बढ़ गई. लिमोनेड, कोला और दूसरे मिक्चरों की बिक्री तो करीब 19 प्रतिशत बढ़ी है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/M. Mülle
कीड़ों का फायदा
गर्मियां हों तो कीड़ों की ऐश हो जाती है. अच्छे मौसम की वजह से बहुत सारी तितलियां देखने को मिल रही हैं तो बहुत सारी मधुमक्खियों ने लोगों को परेशान कर रखा है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/P. Pleul
गायों की शानोशौकत
इन गर्मियों का फायदा किसान हेल्मुट एवर्स की गायों को भी हुआ है. उनके तबेले में 24 डिग्री तापमान होने पर पंखे चलने लगते हैं. और गायों को नियमित नहालाया भी जा रहा है.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/F. Hollemann
तटों पर राहत नहीं
पोलैंड ने बाल्टिक सागर पर गर्मी के कारण खतरनाक काई पैदा होने से कई बीच बंद कर दिए हैं. जर्मनी ने भी बुजुर्ग नागरिकों को समुद्र में तैरने से मना किया है. पानी का तापमान बढ़ने से विब्रियो बैक्टीरिया का खतरा पैदा होता है.
तस्वीर: picture-alliance/NurPhoto/M. Fludra
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पार्लर मालिकों के लिए भी चीजें आसान नहीं हैं. यूनिटाइस के अनुसार, कर्मचारियों की कमी, न्यूनतम वेतन में वृद्धि, और दूध, क्रीम, फल, बिजली और किराए जैसे खर्चों में बढ़ोत्तरी ने लागत को काफी प्रभावित किया है. इसके अलावा कॉफी और कोको जैसे कच्चे माल की कीमतें भी हाल के वर्षों में काफी बढ़ी हैं.
कुछ पार्लरों ने खास फ्लेवर जैसे पिस्ता की कीमतें अलग से तय की हैं, क्योंकि अपने महंगे कच्चे माल के कारण अब यह एक लग्जरी फ्लेवर माना जाता है. यूगव के सर्वे के मुताबिक, चॉकलेट अब भी जर्मनी में सबसे लोकप्रिय आइसक्रीम फ्लेवर है. इसके बाद वनिला और स्ट्राचियाटेला (चॉकलेट चिप) का नंबर आता है. इन पारंपरिक फ्लेवरों के साथ-साथ अब बाजार में खासतौर पर बच्चों और युवाओं के लिए नए स्वाद जैसे यूनिकॉर्न, सॉफ्ट कैरामल सी सॉल्ट और ब्लड ऑरेंज भी दिखने लगे हैं, जिनकी कीमतें थोड़ी और ज्यादा होती हैं.
यूनिटाइस की प्रवक्ता का कहना है कि अगर कच्चे माल की लागत में अचानक कोई उछाल न आए तो फिलहाल कोई बड़ी कीमत वृद्धि की योजना नहीं है.
भारतमेंआइसक्रीमकीस्थिति
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में आइसक्रीम का बाजार अभी शुरुआती दौर में है और उसमें तेजी से बढ़त हो रही है. डाटा होराइजन रिसर्च के मुताबिक 2024 में भारतीय आइसक्रीम बाजार का मूल्य लगभग 268 अरब रुपये था. 2025–2033 तक इसके औसतन 16.7 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है. इंडियन आइसक्रीम मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (आईआईसीएमए) के अनुसार, भारत का यह बाजार अगले तीन साल में 45,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है.
आइसक्रीम से शरारत
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अपस्टॉक्स वेबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्रति व्यक्ति आइसक्रीम की खपत लगभग 1.6 लीटर सालाना है, जबकि अमेरिका में यह करीब 22 लीटर और चीन में 4.3 लीटर है.
हालांकि भारत में एक स्कूप की औसत कीमत का कोई सर्वमान्य सरकारी आंकड़ा नहीं है, लेकिन किराने की दुकान या पार्लर में एक स्टिक या घेरेदार कप आइसक्रीम 20 से 50 रुपये तक मिलते हैं. मेट्रो शहरों में प्रीमियम फ्लेवर वाले कप का दाम 70 से 200 रुपये तक जाता है.