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जर्मनी की गर्मी में महंगी आइसक्रीम से परेशान लोग

२८ जून २०२५

जर्मनी में गर्मी के साथ आइसक्रीम की मांग बढ़ी है, लेकिन कीमतों में हुई वृद्धि से कई ग्राहक नाराज हैं. भारत में भी आइसक्रीम बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन प्रति व्यक्ति खपत अब भी कम है.

गर्मी में आइसक्रीम का मजा लेते बर्लिन के लोग
जर्मनी में आइसक्रीम का महंगा होना लोगों को अच्छा नहीं लग रहा हैतस्वीर: Adam Berry/Getty Images

जर्मनी में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है और लोग गर्मी से राहत पाने के लिए जिन जगहों का रुख कर रहे हैं, उनमें आइसक्रीम की दुकानें भी हैं. लेकिन इस ठंडी मिठास का स्वाद अब पहले जितना सस्ता नहीं रहा. एक नए सर्वे के अनुसार, जर्मनी के ज्यादातर लोग मानते हैं कि आइसक्रीम की कीमतें जरूरत से ज्यादा हो चुकी हैं और इसका असर उनकी खपत पर भी पड़ा है.

सर्वेक्षण संस्था यूगव ने पूरे जर्मनी में यह सर्वे किया है, जिसमें हिस्सा लेने वाले करीब 2,000 वयस्कों में से 64 फीसदी ने कहा कि आइसक्रीम अब "बहुत महंगी" हो गई है. वहीं 60 फीसदी से अधिक लोगों ने माना कि वे पहले की तुलना में अब कम स्कूप ऑर्डर करते हैं, या तो हमेशा या कभी-कभी.

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि 28 फीसदी लोगों ने कहा कि कीमत उनके आइसक्रीम खाने के फैसले को प्रभावित नहीं करती. ज्यादातर लोग अब भी दो (50 फीसदी) या तीन (23 फीसदी) स्कूप लेते हैं. यह तब है जब पिछले कुछ सालों में जर्मनी में महंगाई तेजी से बढ़ी है और अर्थव्यवस्था कमजोर हुई है.

कितनी महंगी हो गई है आइसक्रीम?

जर्मनी में इतालवी आइसक्रीम बनाने वाली कंपनियों की संस्था यूनिटआइस की प्रवक्ता अनालिसा कार्नियो बताती हैं कि पिछले साल की तुलना में कुछ पार्लरों ने कीमतें बढ़ाई हैं, लेकिन कुल मिलाकर महंगाई कम होने से दाम स्थिर हैं. उन्होंने समाचार एजेंसी डीपीए को बताया, "ग्राहक शिकायत नहीं करते. वे जानते हैं कि सब महंगा हुआ है. थोड़ी बहुत बड़बड़ाहट होती है, लेकिन ऐसा करने वाले कम ही हैं.”

एक स्कूप की कीमत अब 1.30 यूरो यानी करीब 130 रुपये से शुरू होकर 2.80 यूरो यानी करीब 280 रुपये तक जाती है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह पार्लर किस शहर में है, उसका आकार क्या है. इसके अलावा दुकान में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी आइसक्रीम के दाम को प्रभावित करती है. म्यूनिख, हैम्बर्ग और बर्लिन जैसे बड़े शहरों में कीमतें ऊंची हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में आइसक्रीम अभी भी सस्ती है.

वेबसाइट कूपंस डॉट डीई के एक अध्ययन के मुताबिक, वसंत 2025 में 60 जर्मन शहरों के 176 आइसक्रीम पार्लरों में औसत कीमत 1.81 यूरो प्रति स्कूप रही. सबसे महंगे स्थान थे जिल्ट और सेंट पीटर-ऑर्डिंग जैसे पर्यटन स्थल, जहां कीमत 2.50 यूरो तक थी. सबसे सस्ती आइसक्रीम डॉर्टमुंड और हैले में पाई गई, जहां यह 1.50 यूरो से कम थी.

साल दर साल तुलना करें तो 2023 में औसत कीमत 1.62 यूरो थी, जो 2024 में 1.72 यूरो हुई और अब 1.81 यूरो तक पहुंच चुकी है.

दूसरे देशों में क्या हाल है?

अगर यह कीमत ज्यादा लग रही हो तो थोड़ा संतोष इस बात से मिल सकता है कि यूरोप के बाकी हिस्सों में आइसक्रीम और भी महंगी है. यूनिटाइस के अनुसार फ्रांस में एक स्कूप की कीमत 3.50 से 5 यूरो तक है. इटली में 2.50 से 4 यूरो, स्पेन में 3 से 4 यूरो और स्विट्जरलैंड में तो यह कीमत 5 यूरो से भी ऊपर जाती है.

इस लिहाज से जर्मनी अब भी "सस्ती आइसक्रीम वाला देश" बना हुआ है. बाजार अनुसंधान एजेंसी एनआईक्यू के पास इस बात का स्पष्ट डेटा नहीं है कि लोग आइसक्रीम कम खा रहे हैं या नहीं. लेकिन यूनिटाइस का कहना है कि खपत के तरीके में बदलाव तो है, पर कुल मांग में गिरावट नहीं आई है.

उपभोक्ता मनोवैज्ञानिक येंस लोननेकर के अनुसार, "आइसक्रीम में वही मनोवैज्ञानिक आकर्षण है जो चॉकलेट में होता है. यह जीवन की कठोरता के बीच एक मीठी राहत देती है. गर्मी में इसकी ठंडक एक सुखद अनुभव बन जाती है. लेकिन असली जादू तब होता है जब यह पिघलती है. वहीं उसका भावनात्मक असर होता है.”

पार्लर मालिकों के लिए भी चीजें आसान नहीं हैं. यूनिटाइस के अनुसार, कर्मचारियों की कमी, न्यूनतम वेतन में वृद्धि, और दूध, क्रीम, फल, बिजली और किराए जैसे खर्चों में बढ़ोत्तरी ने लागत को काफी प्रभावित किया है. इसके अलावा कॉफी और कोको जैसे कच्चे माल की कीमतें भी हाल के वर्षों में काफी बढ़ी हैं.

कुछ पार्लरों ने खास फ्लेवर जैसे पिस्ता की कीमतें अलग से तय की हैं, क्योंकि अपने महंगे कच्चे माल के कारण अब यह एक लग्जरी फ्लेवर माना जाता है. यूगव के सर्वे के मुताबिक, चॉकलेट अब भी जर्मनी में सबसे लोकप्रिय आइसक्रीम फ्लेवर है. इसके बाद वनिला और स्ट्राचियाटेला (चॉकलेट चिप) का नंबर आता है. इन पारंपरिक फ्लेवरों के साथ-साथ अब बाजार में खासतौर पर बच्चों और युवाओं के लिए नए स्वाद जैसे यूनिकॉर्न, सॉफ्ट कैरामल सी सॉल्ट और ब्लड ऑरेंज भी दिखने लगे हैं, जिनकी कीमतें थोड़ी और ज्यादा होती हैं.

यूनिटाइस की प्रवक्ता का कहना है कि अगर कच्चे माल की लागत में अचानक कोई उछाल न आए तो फिलहाल कोई बड़ी कीमत वृद्धि की योजना नहीं है.

भारत में आइसक्रीम की स्थिति

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में आइसक्रीम का बाजार अभी शुरुआती दौर में है और उसमें तेजी से बढ़त हो रही है. डाटा होराइजन रिसर्च के मुताबिक 2024 में भारतीय आइसक्रीम बाजार का मूल्य लगभग 268 अरब रुपये था. 2025–2033 तक इसके औसतन 16.7 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है. इंडियन आइसक्रीम मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (आईआईसीएमए) के अनुसार, भारत का यह बाजार अगले तीन साल में 45,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है.

आइसक्रीम से शरारत

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अपस्टॉक्स वेबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्रति व्यक्ति आइसक्रीम की खपत लगभग 1.6 लीटर सालाना है, जबकि अमेरिका में यह करीब 22 लीटर और चीन में 4.3 लीटर है.

हालांकि भारत में एक स्कूप की औसत कीमत का कोई सर्वमान्य सरकारी आंकड़ा नहीं है, लेकिन किराने की दुकान या पार्लर में एक स्टिक या घेरेदार कप आइसक्रीम 20 से 50 रुपये तक मिलते हैं. मेट्रो शहरों में प्रीमियम फ्लेवर वाले कप का दाम 70 से 200 रुपये तक जाता है.

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