बेंगलुरु में पुलिस ने एक महिला से छेड़छाड़ वाले वीडियो के सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इस वीडियो के सामने आने के बाद भारत में महिलाओं की सुरक्षा पर फिर बहस शुरू हो गई है.
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यह वीडियो बेंगलुरु में नए साल के जश्न के मौके पर महिलाओं के साथ बड़े पैमाने पर हुई छेड़छाड़ की घटना से अलग है. इसमें दिखाया गया है कि 31 दिसंबर की रात को एक महिला रिहायशी इलाके में सुनसान सी सड़क पर जा रही है. तभी स्कूटर पर जा रहे दो लड़के रुके और उन्होंने छेड़छाड़ शुरू कर दी. वीडियो में एक व्यक्ति लड़की को पकड़कर स्कूटर की तरफ खींचता दिख रहा है और वह खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही है. कई लोग इस घटना को चुपचाप खड़े देखते रहे. बाद में ये दोनों लड़की को जमीन पर गिरा छोड़ कर वहां से भाग गए.
पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर चार लोगों को गिरफ्तार किया है. शहर के एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि ये लोग मामले से सीधे तौर पर जुड़े हैं. नाम ना जाहिर करने की शर्त पर इस अधिकारी ने बताया, "इस मामले में साफ सबूत हैं.” हालांकि पुलिस अधिकारी ने यह नहीं बताया कि दो अन्य लोगों को इस मामले में क्यों गिरफ्तार किया गया है.
देखिए रेप के लिए कहां कितनी सजा है
हाल ही में जर्मनी ने अपने बलात्कार विरोधी कानून को और सख्त बनाने के लिए कदम उठाए हैं. जानिए, जर्मनी में और बाकी देशों में रेप के लिए क्या कानून है.
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जर्मनी
जर्मन कानून में अब तक रेप की कोशिश का विरोध न करने पर मामला रेप का नहीं बनता था. अब इस परिभाषा में बदलाव किया गया है. अब छूने, अंगों को टटोलने और दबोचने को भी यौन हिंसा के दायरे में लाया गया है.
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फ्रांस
फ्रांस में रेप का मतलब है ऐसी कोई भी यौन गतिविधि जिसमें दोनों की सहमति ना हो. वहां 20 साल तक की सजा हो सकती है. गाली-गलौज पर भी दो साल तक की सजा का प्रावधान है.
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इटली
1996 में इटली के रेप विरोधी कानून में व्यापक बदलाव किए गए. इसके बाद पत्नी के साथ जबर्दस्ती को भी रेप के दायरे में लाया गया. इसके लिए 10 साल तक की सजा हो सकती है.
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स्विट्जरलैंड
स्विट्जरलैंड में रेप तभी माना जाता है जब योनि संसर्ग हुआ हो. अन्य यौन हमलों को यौन हिंसा माना जाता है. इसके लिए 10 साल तक की जेल हो सकती है. 2014 के बाद शादी में भी रेप को अपराध माना गया है.
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स्वीडन
स्वीडन में जबरन किसी के कपड़े उतारने पर भी दो साल की कैद हो सकती है. मजबूर लोगों का यौन शोषण, मसलन सोते वक्त या नशे की हालत में या किसी तरह डरा कर सेक्स करने की कोशिश करना भी रेप है.
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अमेरिका
अमेरिका में अलग-अलग राज्यों में रेप की परिभाषा अलग-अलग है. लेकिन वहां सेक्स में सहमति पर जोर दिया गया है. सेक्स से पहले स्पष्ट सहमति जरूरी है.
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सऊदी अरब
यहां रेप के लिए मौत की सजा का प्रावधान है. हालांकि रेप को साबित करना बहुत मुश्किल है. जो महिलाएं रेप की शिकायत करती हैं अगर वे साबित ना कर पाईं तो उन्हें भी सजा हो सकती है.
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भारत
निर्भया कांड के बाद भारत में रेप विरोधी कानून में कई बदलाव किए गे हैं. अब रेप के लिए आमतौर पर सात साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है. लेकिन विशेष परिस्थितियों में जैसे कि पुलिस हिरासत में रेप, रिश्तेदार या टीचर द्वारा रेप के मामले में 10 साल से उम्र कैद तक भी हो सकती है. अगर पीड़िता की मौत हो जाती है तो मौत की सजा भी हो सकती है.
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बेंगलुरु भारत में आईटी का बड़ा केंद्र है और उसे महिलाओं के लिए सुरक्षित समझा जाता है. लेकिन आए दिन वहां से छेड़छाड़ की खबरें मिलती रही हैं. 2012 के दिल्ली सामूहिक बलात्कार कांड के बाद महिला सुरक्षा देश में एक बड़ा मुद्दा है. बावजूद इसके यौन अपराधों की खबरें लगातार सुर्खियां बनती हैं. भारत राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि 2015 में भारत में 34 हजार से ज्यादा बलात्कार हुए. महिला कार्यकर्ताओं का कहना है कि असल संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि ऐसे बहुत से मामले पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते हैं.
कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वरा ने कहा है कि सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी. उन्होंने यह भी कहा कि अगले दो महीनों के भीतर शहर में लगभग 550 सीसीटीवी कैमरे और लगाए जाएंगे. इसलिए अलावा पुलिसकर्मियों की तैनाती भी बढ़ाई जाएगी.
जानिए क्यों होते हैं बलात्कार
भारत में रोजाना औसतन 92 महिलाओं का बलात्कार होता है. जब भी किसी महिला के साथ यह जघन्य अपराध होता है, कभी सवाल उसके कपड़ों तो कभी देर रात घर से बाहर रहने पर उठाए जाते हैं. क्या महिलाओं पर बंदिशें लगाना ही है उपाय?
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तन ढकने की जरूरत
मानव सभ्यता की शुरुआत से ही मौसम की मार से बचने के लिए शरीर को ढकने की जरूरत महसूस की गई. बीतते समय के साथ जानवरों की छाल पहनने से लेकर आज इतने तरह के कपड़े मौजूद हैं. जीवनशैली के आसान होने के साथ साथ कपड़ों के ढंग भी बदले हैं और अब यह अवसर, माहौल, पसंद और फैशन के हिसाब से पहने जाते हैं. फिर पूरे बदन को ढकने वाले कपड़ों पर जोर क्यों?
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अंग प्रदर्शन यानि बलात्कारियों को न्यौता
भारत में बलात्कार के ज्यादातर मामलों में पाया गया है कि पीड़िता ने सलवार कमीज और साड़ी जैसे भारतीय कपड़े पहने हुए थे. उनपर हमला करने वाले पुरुषों ने अपनी सेक्स की भूख के कारण संतुलन खो दिया. ऑनर किलिंग के कई मामलों में किसी महिला को सबक सिखाने के मकसद से उस पर जबरन यौन हिंसा की गई और फिर जान से मार डाला गया. इन सबके बीच कपड़ों पर तो किसी का ध्यान नहीं गया.
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कानून का डर नहीं
संयुक्त राष्ट्र ने 2013 में एशिया प्रशांत क्षेत्र में किए अपने सर्वे में पाया गया कि सर्वे में शामिल हर चार में एक पुरुष ने अपने जीवन में कम से कम एक बार किसी महिला का बलात्कार किया है. इनमें से 72 से लेकर 97 फीसदी मामलों में इन पुरुषों को किसी कानूनी कार्यवाई का सामना नहीं करना पड़ा था.
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मनोरंजन का साधन हैं यौन अपराध
उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ इतने ज्यादा यौन अपराधों का कारण प्रदेश की पुलिस ने वहां मोबाइल फोनों के बढ़ते इस्तेमाल, पश्चिमी देशों के बुरे असर और छोटे कपड़ों को ठहराया. लोगों को सुरक्षा देने की अपनी जिम्मेदारी में पूरी तरह विफल पुलिस का कहना है कि मनोरंजन के बहुत कम साधन होने के कारण पुरुष यौन अपराधों को अंजाम देने लगते हैं.
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महिलाओं से मिल रही है चुनौती
सड़कों, ऑफिसों या किसी सार्वजनिक स्थान पर कई बार महिलाओं के कपड़े नहीं बल्कि उनके चेहरे से झलकता आत्मविश्वास, स्वच्छंद रवैया और अब तक पुरुषों के कब्जे में रहे कई क्षेत्रों में उनकी पहुंच कई पुरुषों को बौखला रही है. सदियों से स्थापित पुरुषसत्तात्मक समाज के समर्थक ऐसी औरतों को सामाजिक संतुलन को बिगाड़ने का जिम्मेदार मानते हैं और यौन हिंसा कर उन्हें समाज में उनकी सही जगह दिखाने की कोशिश करते हैं.
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महिलाओं को ज्यादा बड़ा खतरा किससे
दुनिया के सबसे युवा देश में आज बलात्कार महिलाओं के खिलाफ चौथा सबसे बड़ा अपराध बन चुका है. नेशनल क्राइम ब्यूरो की 2013 रिपोर्ट बताती है कि साल दर साल दर्ज होने वाले इन करीब 98 फीसदी मामलों में बलात्कारी पीड़ित का जानने वाला था. ज्यादातर मामले जो प्रकाश में आते हैं वे सार्वजनिक जगहों पर अनजान लोगों द्वारा किए गए होते हैं जिस कारण इस सच्चाई पर ध्यान नहीं जाता.
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एक कदम आगे, दो कदम पीछे
एक ओर पहले के मुकाबले ज्यादा लड़कियां पढ़लिख रही हैं और कार्यक्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं. दूसरी ओर इस कारण वे शादी और बच्चे देर से पैदा कर रही हैं. भारत में शादी के पहले शारीरिक संबंध बनाने के मामले समाज के लिए असहनीय और खतरा बताए जाते हैं. इस कारण बहुत से युवा पुरुष को अपनी यौन इच्छा पूरी करने का कोई स्वस्थ तरीका नहीं मिलता और कई बार यही यौन हिंसा का कारण बनता है.
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हिंसा का चक्र गर्भ से ही शुरु
भारत में अजन्मे बच्चे की लिंग जांच कर मादा भ्रूण को गर्भ में ही मार देने की घटनाएं आम हैं. जो लड़कियां जन्म ले पाती हैं वे संख्या में इतनी कम हैं कि समाज का संतुलन बिगड़ गया है. स्त्री-पुरुष अनुपात के मामले में भारत 1970 से भी नीचे आ गया है. इसके अलावा बाल विवाह, कम उम्र में मां बनना, प्रसव से जुड़ी मौतें और घरेलू हिंसा के लिए भी क्या छोटे कपड़ों को ही जिम्मेदार मानेंगे.
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हालांकि नए साल के जश्न के दौरान बड़े पैमाने पर महिलाओं से हुई छेड़छाड़ के मामले पर विवादित बयान देने के लिए परमेश्वरा को खूब आलोचना भी झेलनी पड़ी. उन्होंने कहा था, "ऐसी घटनाएं तो होती रहती हैं." वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अबु आजमी ने छेड़छाड़ के लिए उल्टे महिलाओं को ही दोष दिया था. उन्होंने कहा, "यह तो होना ही था. महिलाएं नंगेपन को फैशन कहती हैं. वे छोटे छोटे कपड़े पहने हुए थीं.”