भारत में रेल को लाइफलाइन कहा जाता है. अब सरकार देश के विशाल रेलवे नेटवर्क के जरिए विदेशी सैलानियों को आकर्षित करने में जुटी है और उन्हें ट्रेन के जरिए भारत दर्शन की दावत दे रही है.
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बर्लिन में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेले (आईटीबी) के मौके पर भारत ने अपनी लग्जरी ट्रेनों की खासियतों बताईं और जर्मन लोगों से इन ट्रेनों के जरिए भारत की विविध और रंग बिरंगी संस्कृति से रूबरू होने को कहा. 12 हजार ट्रेनों और सात हजार रेलवे स्टेशनों के साथ भारत दुनिया के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्कों में शुमार होता है. जिन ट्रेनों को जर्मन सैलानियों के सामने खास तौर से पेश किया गया, उनमें महाराजा एक्सप्रेस, बुद्धिस्ट सर्किट ट्रेन और होम ऑन व्हील ट्रेन शामिल हैं.
शाही अंदाज में मेहमानवाजी के लिए मशहूर महाराजा एक्सप्रेस सैलानियों को भारत के अहम ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन कराती है. उसके सात रातों और आठ दिन के पैकेज में नई दिल्ली से लेकर आगरा, रणथंबौर, जयपुर, जोधपुर, अंजाता और मुंबई जैसे कई अहम ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल शामिल हैं. वहीं बुद्धिस्ट सर्किट ट्रेन अपने मुसाफिरों को लुंबिनी, बोध गया, वाराणसी और कुशीनगर समेत उन सभी जगहों पर लेकर जाती है जो गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े हैं. 2007 में शुरू की गई इस ट्रेन का मकसद दुनिया भर के बौद्ध तीर्थ यात्रियों को आकर्षित करना है. वहीं होम ऑन व्हील आपको बिल्कुल घर जैसा अहसास देती है और आपको भारत दर्शन कराती है.
जापान ने दुनिया की सबसे लक्जरी ट्रेन लॉन्च की है. ट्रेन जितनी आलीशान है उसका किराया भी उतना ही कीमती है. यहां देखिए भीतर से कैसी दिखती है ये लक्जरी ट्रेन.
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फाइव स्टार
जापान मोटी जेब वाले पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है. शायद यही वजह है कि नेशनल रेलवे कंपनी ने दुनिया की सबसे विलासिता भरी रेल सेवा शुरू की है. शिकी-शिमा ट्रेन किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं.
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पैनोरमा वाला नजारा
10 डिब्बों वाली इस ट्रेन में सिर्फ 30 मुसाफिर यात्रा कर सकते हैं. डिब्बों में लक्जरी रूम, डायनिंग रूम और बालकनी भी है. ट्रेन में बड़ी खिड़कियों वाले कुछ डिब्बे भी हैं. उनमें सोफे लगे हैं.
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जबरदस्त सफर
शिकी-शिमा ट्रेन का ट्रैवल पैकेज बुक करने वालों को नारुको के गर्म पानी के कुंड या हिरोशाकी किले पर भी आमंत्रित किया जाएगा. ट्रैवल सर्विस देने वाली कंपनी के मुताबिक यात्रियों को ऐसी जगह ले जाया जाएगा, जहां अब तक बहुत ज्यादा टूरिस्ट नहीं पहुंचे हैं.
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ट्रेन फुल
10 डिब्बों वाली ट्रेन का किराया 2,200 से 10,000 डॉलर के बीच है. मुसाफिर चार रूटों में से कोई एक चुन सकते हैं. ईस्ट जापान रेलवे के मुताबिक मार्च 2018 तक ट्रेन पूरी तरह बुक हो चुकी है.
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जबरदस्त फॉर्मूला
जापान की राजधानी टोक्यो में 2020 में ओलंपिक खेल होने हैं. जापान को उम्मीद है कि इस दौरान चार करोड़ से ज्यादा विदेशी पर्यटक वहां पहुंचेंगे. इनमें से कई लक्जरी ट्रेन पर भी सवार होंगे.
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टिकट की मुश्किल
बहुत ज्यादा दाम के बावजूद सारे टिकट बहुत जल्द बिक गये. जापान के सरकारी टीवी चैनल एनएचके के मुताबिक शिकी-शिमा की पहली यात्रा के एक टिकट के लिये 76 लोग लाइन में थे.
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अरबों डॉलर की ट्रेन
नेशनल रेलवे कंपनी के मुताबिक शुरु में इसका बजट पांच अरब येन आंका गया. लेकिन बाद में जब ट्रेन बहुत लक्जरी वाली नहीं लगी तो डिब्बों को और बेहतर बनाने के लिए और पैसा खर्च किया गया. ट्रेन के भीतर महंगी लकड़ी साइप्रस वुड का इस्तेमाल किया गया है जो फ्लोर हीटिंग से लैस है.
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दिग्गज डिजायनर की दिमाग
पोर्शे, फरारी और मासेराटी जैसी महंगी कारों की इंटीरियर डिजायनिंग कर चुके केन ओकुयामा का काम इस ट्रेन में दिखता है. खिड़की के कांच और फ्रेम को ऐसे डिजायन किया गया है कि जंगल से गुजरती ट्रेन बिल्कुल वन जैसी शांति का अहसास कराये.
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नामी रेस्तरां
जापान के मशहूर शेफ कात्सुहिरो नाकामुरा ने ट्रेन के रेस्तरां को डिजायन किया है. ट्रेन, जिस इलाके से गुजरेगी, उसी इलाके का स्थानीय खाना मेहमानों को परोसा जाएगा. नाकामुरा जी-8 सम्मेलन के दौरान राष्ट्र प्रमुखों के लिए भी खाना परोस चुके हैं.
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प्यारा गुडबॉय
विलासिता भरी यात्रा का आखिरी पड़ाव टोक्यो का यूएनो स्टेशन रखा गया है. इसके यात्रियों के लिए एक खास प्लेटफॉर्म बनाया गया है. प्लेटफॉर्म पर भी स्पेशल लाउंज है जहां मुसाफिरों के आराम के लिए तरह तरह की सुविधाएं हैं. (रिपोर्ट: रिज्की नुग्राहा/ओएसजे)
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आईटीबी के लिए बर्लिन आए भारतीय रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने कहा कि भारतीय रेल सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह अपने आप में एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन भी है. उन्होंने कहा कि मौजूदा लग्जरी ट्रेनों के अलावा इस तरह और ट्रेनें लाई जा रही हैं. डीडब्ल्यू से बातचीत में लोहानी ने कहा कि रेल के साथ विदेशी सैलानियों का अनुभव अच्छा रहे, इस पर बहुत ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने बताया, "साफ सफाई पर खास तौर से ध्यान दिया जा रहा है. यात्रियों के लिए सुविधाओं और सुरक्षा को बेहतर किया जा रहा है. स्टेशनों को बेहतर बनाया जा रहा है. वहां सीसीटीवी लगाए जा रहे हैं और वाईफाई की सुविधा दी जा रही है. मकसद यही है कि कुल मिलाकर यात्रियों का अनुभव अच्छा रहे."
लोहानी कहते हैं कि यात्री सुविधाओं को बेहतर किया जा रहा हैतस्वीर: DW/Ashok Kumar
इसके बावजूद भारत में ट्रेन देरी से चलने के लिए बदनाम हैं और जर्मन लोग पूरी दुनिया में समय के पाबंद होने के लिए मशहूर हैं. इस बारे में अश्विनी लोहानी कहते हैं, "भारतीय रेल की समयबद्धता में इजाफा हो रहा है. हम लोग रेलवे को सुधार रहे हैं. पंक्चुएलिटी इतनी भी खराब नहीं है. लेकिन हां, जर्मन लोगों जैसी पंक्चुएलिटी तो नहीं हो सकती. लेकिन जब आप किसी पर्यटन स्थल या हिल स्टेशन पर जाते हैं, तो आपके मन में यही बात रहती है कि हम उस जगह को जाकर देखें. ऐसे में अगर थोड़ी बहुत देर हो जाए, तो फर्क नहीं पड़ता है. लेकिन हां, हम पंक्चुएलिटी को बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं."
आईटीबी के मौके पर भारत के पर्टयन मंत्री केजे अलफोंस भी बर्लिन में थे. डीडब्ल्यू से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत अगले तीन साल में भारत आने वाले सैलानियों की संख्या को दोगुना करना चाहता है. उन्होंने कहा कि भारतीय लग्जरी ट्रेनों जैसा आरामदायक सफर आपको पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलेगा. साथ ही उन्होंने आईटीबी में भारत की भागीदारी पर खुशी जताई जिसे इस बार बेस्ट एक्जीबिटर का अवॉर्ड भी मिला. बर्लिन में होने वाले दुनिया के सबसे बड़े पर्यटन मेले में इस बार 180 देशों और क्षेत्रों की 10 हजार से भी ज्यादा ट्रैवल कंपनियों, टूर ऑपरेटरों, होटल और एयरलाइन कंपनियों ने हिस्सा लिया.
भारत में रेल के बिना सार्वनजिक परिवहन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. लेकिन 21वीं सदी में ऐसे कई देश हैं जहां रेलवे नेटवर्क नहीं है. डालते हैं इन्हीं पर एक नजर.