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भारत के पास खूब बिजली तो है लेकिन बैटरी नहीं

२० अगस्त २०२५

भारत ने आधी बिजली स्वच्छ तरीके से बनाने की क्षमता विकसित कर ली है. लेकिन फिर भी देश कोयले से बनने वाली बिजली पर इतना भरोसा क्यों करता है.

भारत में एक सोलर फॉर्म
119 गीगावॉट हुआ भारत का सौर ऊर्जा उत्पादनतस्वीर: Amit Dave/REUTERS

भारत की कुल ऊर्जा क्षमता का अब आधा हिस्सा गैर जीवाश्म ईंधन से आ रहा है. भारत के नवीन ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसे "भारत की ऊर्जा परिवर्तन यात्रा में एक मील का पत्थर" करार दिया है. जोशी के मुताबिक यह लक्ष्य "पांच साल पहले" हासिल किया गया है. भारत 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना चाहता है.

जलवायु विशेषज्ञ अवंतिका गोस्वामी के मुताबिक, 50 फीसदी का यह लक्ष्य हासिल करना एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन इसे कुछ हद तक सीमित छलांग ही कहा जा सकता है. नई दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्न्मेंट (CSE) की गोस्वामी कहती हैं, "पूरी तस्वीर देंखे तो अक्षय ऊर्जा स्रोतों का वास्तविक उत्पादन अब भी काफी कम बना हुआ है."

इसका कारण बताते हुए वह कहती हैं कि अब भी करीब एक तिहाई बिजली, खूब प्रदूषण करने वाले कोयला बिजली संयंत्रों से आ रही है. यह चुनौती तब और गंभीर हो जाती है, जब हम कोयले पर भारत की निर्भरता को देखते हैं.

भारत बड़े बड़े सोलर फॉर्मों में निवेश कर रहा हैतस्वीर: Rafiq Maqbool/AP Photo/picture alliance

कोयला गंदा तो है लेकिन भरोसेमंद बना हुआ है

कोयले की खपत घटाने के बजाए, भारत ने पिछले साल कोयले से मिलने वाली बिजली का प्रोडक्शन पांच फीसदी बढ़ा दिया. भारत अब भी दुनिया में सबसे ज्यादा कोयला खपत करने वाले देशों में दूसरे नंबर पर है. कोयला मंत्रालय के मुताबिक, 2024 में भारत ने एक अरब टन कोयला खोदा. मंत्रालय के मुताबिक, "कोयला अब भी अहम बना हुआ है."

अक्षय ऊर्जा का उत्पादन बढ़ने के साथ ही बिजली का स्टोरेज अब भी चुनौती है. देश के कोयला मंत्रालय का कहना है कि, "कोयला सेक्टर अब भी भारत की मिश्रित ऊर्जा में अहम भागीदार बना हुआ है, यह 74 फीसदी से ज्यादा देश को बिजली देता है और स्टील और सीमेंट जैसे अहम उद्योगों की नींव बना हुआ है."

2024 में एक अरब टन कोयला खोदा भारततस्वीर: Anupam Nath/AP Photo/picture alliance

इस निर्भरता की वजह से भारत, अमेरिका और चीन के बाद ग्रीनहाउस गैसों का तीसरा बड़ा उत्सर्जक है.

हालांकि प्रति व्यक्ति ग्रीनहाउस उत्सर्जन देखें तो 1.4 अरब की आबादी वाला देश वैश्विक औसत का एक तिहाई उत्सर्जन ही करता है. सतत संपदा क्लामेट फाउंडेशन के प्रमुख और जलवायु कार्यकर्ता हरजीत सिंह कहते हैं, "भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन देखें तो भारत जो कोशिशें कर रहा है, वह बहुत अच्छी जा रही हैं."

देश ने 2030 तक इस उत्सर्जन को 45 फीसदी घटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. हालांकि तब तक भारत की बिजली मांग भी दोगुनी होने का अनुमान है. अवंतिका गोवास्मी के मुताबिक, "उस मांग का कुछ हिस्सा अक्षय ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा."

भारत में लगातार बढ़ती जा रही है बिजली की मांगतस्वीर: jayantbahel/Pond5/IMAGO

स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन के बावजूद कहां फंसा है मामला

फिलहाल भारत 484.4 गीगावॉट बिजली, गैर जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर रहा है. इस उत्पादन में सबसे ज्यादा हिस्सा सौर ऊर्जा का है, (119 गीगावॉट). सौर ऊर्जा उत्पादन के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है. भारत फिलहाल, बड़े बड़े सौर और पवन ऊर्जा फार्म बनाने में जुटा है. रेगिस्तान में बन रहे ऐसे फार्मों का आकार सिंगापुर के क्षेत्रफल के बराबर है.

बांधों से मिलने वाली बिजली, पवनऊर्जा और परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी दो फीसदी से भी कम है. समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत की बिजली स्टोर करने की क्षमता 505 मेगावॉट ऑवर ही है. नवीन ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी के मुताबिक हर साल 25 से 30 गीगावॉट स्टोरेज सुविधा जोड़ी जा रही है. लेकिन वह यह भी कहते हैं कि, "स्टोरेज के बिना, या तो हम ऊर्जा बर्बाद करेंगे या फिर अक्षय ऊर्जा में गिरावट आते ही कोयले पर निर्भर हो जाएंगे."

बिजली स्टोरेज बढ़ाने के लिए बड़े बैटरी प्लांटों की जरूरत पड़ती है. ऐसी बैटरियां बनाने के लिए दुर्लभ खनिजों की जरूरत पड़ती है. फिलहाल भारत का पड़ोसी चीन रेयर अर्थ मेटल्स की 70 फीसदी सप्लाई नियंत्रित करता है. हरजीत सिंह के मुताबिक, इस मामले में भारत अब भी चीन पर निर्भर है.

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