सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत दिए जाने पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. हालांकि कोर्ट ने कहा है कि केजरीवाल आदतन अपराधी नहीं हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा केजरीवाल दिल्ली के निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं और वह आदतन अपराधी नहीं हैंतस्वीर: Manish Swarup/AP Photo/picture alliance
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब रद्द हो चुकी आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद हैं. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई की और इस दौरान कई टिप्पणियां भी कीं.
सुनवाई की शुरूआत करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने कहा अरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय राजधानी के "निर्वाचित मुख्यमंत्री" हैं. "चुनाव हैं... ये असाधारण स्थितियां हैं और वह आदतन अपराधी नहीं हैं." जस्टिस दत्ता ने कहा, "अगर चुनाव नहीं होते... तो अंतरिम जमानत का कोई सवाल ही नहीं होता."
केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह तिहाड़ जेल में बंद हैंतस्वीर: Hindustan Times/IMAGO
ईडी ने किया विरोध
सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केजरीवाल को अंतरिम राहत दिए जाने का विरोध किया. ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि राजनेताओं को एक वर्ग से अलग नहीं माना जा सकता और केजरीवाल के मामले को आम आदमी के मामले के समान ही माना जाना चाहिए.
इस पर अदालत ने स्वीकार किया कि वह "निश्चित रूप से नहीं चाहती कि अपराधों में शामिल राजनेताओं के साथ अलग व्यवहार किया जाए", लेकिन अदालत ने साथ ही बड़ी तस्वीर की ओर भी इशारा किया कि केजरीवाल को वास्तव में 2024 के लोकसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले गिरफ्तार किया गया था.
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'आप' ने गिरफ्तारी के समय पर उठाया सवाल
आम आदमी पार्टी के नेताओं का आरोप है कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी का समय पार्टी की चुनावी योजनाओं को विफल करना और "एक भी वोट पड़ने से पहले आप को नष्ट करना" था.
सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को भी स्वीकार किया कि केजरीवाल को इसकी जांच में शामिल होने के लिए कई समन से बचने के बाद गिरफ्तार किया गया था.
ईडी की ओर से पेश वकील ने कहा, "जमानत मिलने से गलत संदेश जाएगा और आम आदमी का मनोबल गिरेगा...कि (केजरीवाल को) चुनाव प्रचार का सुख मिलता है..."
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल को अंतरिम राहत देने का विरोध करते हुए कहा कि वह (केजरीवाल) छह महीने तक समन टालते रहे. अगर पहले सहयोग करते तो हो सकता था कि गिरफ्तारी ही ना होती.
दिल्ली के कथित शराब घोटाले में ईडी ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को 9 बार समन जारी किए थे. केजरीवाल किसी भी समन में पेश नहीं हुए थे.
ईडी का आरोप है कि केजरीवाल घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता हैं और वह सीधे तौर पर शराब कारोबारियों से रिश्वत मांगने में शामिल रहे. केजरीवाल ने ईडी द्वारा अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है. सुप्रीम कोर्ट मौजूदा लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें प्रचार के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने पर विचार कर रही थी.
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा, "क्या जमानत मिलने पर वह आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करेंगे. इसके व्यापक प्रभाव हो सकते हैं. हम यह स्पष्ट करते हैं, हम नहीं चाहते कि आप आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करें, अगर हम आपको रिहा करें."
इसके जवाब में केजरीवाल के वकील ने कोर्ट से कहा, "वह किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे. वह दिल्ली शराब नीति मामले में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेंगे."
कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई पूरी कर ली और उनकी अंतरिम जमानत पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. कोर्ट ने समय की कमी के कारण इस मामले में कोई आदेश नहीं दिया है.
अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भारत का सबसे युवा राजनीतिक दल है. 2012 में स्थापना से लेकर 2024 में केजरीवाल की गिरफ्तारी तक, 'आप' की यात्रा अन्य दलों से काफी अलग रही है.
तस्वीर: DW/A. Ansari
स्थापना
'आप' की स्थापना 26 नवंबर, 2012 को दिल्ली में हुई थी. पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को ही उसका मुख्य संस्थापक और संचालक माना जाता है. पार्टी की स्थापना 'लोकपाल आंदोलन' के नाम से जाने जाने वाले भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन के बाद हुई थी, जिसे केजरीवाल और उनके उस समय के कई साथियों ने शुरू किया था.
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कौन हैं केजरीवाल
केजरीवाल सिर्फ करीब 12 सालों से राजनीति में हैं. अपने करियर की शुरुआत में वो पेशे से इंजीनियर थे. उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. बाद में उनका यूपीएससी में चयन हो गया और वो भारतीय राजस्व सेवा में अफसर बन गए.
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एक्टिविज्म में प्रवेश
केजरीवाल ने आयकर विभाग में नौकरी करते हुए 1999 में 'परिवर्तन' नाम का संगठन शुरू किया, जिसका ध्येय था गवर्नेंस के कई क्षेत्रों में सुधार लाने की कोशिश करना. कई साल इसी बैनर के तले एक्टिविज्म करने के बाद, उन्होंने 2006 में आयकर विभाग से इस्तीफा दे दिया. उस समय वो दिल्ली में जॉइंट कमिश्नर थे.
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आरटीआई कार्यकर्ता
इस दौरान केजरीवाल अपने कई साथियों के साथ सूचना के अधिकार की मांग करने वाले आंदोलन में जुट गए थे. 2006 में ही उन्हें सूचना के अधिकार के क्षेत्र में ही उनके काम के लिए रमोन मैग्सेसे पुरस्कार से नवाजा गया.
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लोकपाल आंदोलन
2011 में यूपीए सरकार के खिलाफ घोटालों के आरोपों के बीच केजरीवाल ने कई और लोगों के साथ मिल कर भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाने के लिए एक निष्पक्ष और मजबूत संस्था लोकपाल के गठन की मांग के लिए एक आंदोलन शुरू किया. आंदोलन का चेहरा महाराष्ट्र के समाजसेवी अन्ना हजारे को बनाया गया, लेकिन आंदोलन का संचालन केजरीवाल, किरण बेदी, प्रशांत भूषण, मनीष सिसोदिया, संतोष हेगड़े समेत कई लोगों ने किया.
तस्वीर: Reuters
आंदोलन से पार्टी
जब आंदोलन लोकपाल के गठन के लिए केंद्र सरकार को मजबूर करने में असफल रहा, तब केजरीवाल और कुछ साथियों ने राजनीति में कदम रखने का फैसला किया. उनके कई साथी इस मोड़ ओर उनसे अलग हो गए, लेकिन केजरीवाल और उनके समर्थकों ने नवंबर, 2012 में 'आम आदमी पार्टी' (आप) की स्थापना की.
तस्वीर: Reuters
चुनावी सफलता
'आप' ने 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनावों में अपनी पहली चुनावी परीक्षा में ही अच्छा प्रदर्शन किया और दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी. 'आप' ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया और सरकार बना ली. यह सरकार सिर्फ 49 दिनों तक चली. इसके बाद दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. लेकिन 2015 में फिर से चुनाव हुए और 'आप' ने दिल्ली की 70 सीटों में 67 जीत कर भारी बहुमत से सरकार बनाई.
तस्वीर: UNI
विस्तार
दिल्ली में 2020 में 'आप' ने फिर से जीत दर्ज की और केजरीवाल तीसरी बार मुख्यमंत्री बने. इस बीच पार्टी ने दूसरे राज्यों में भी विस्तार करना शुरू कर दिया था. 2014 में पार्टी ने लोकसभा चुनाव भी लड़े और पंजाब से चार सीटों पर जीत दर्ज की. 2022 में पार्टी ने पंजाब में भी सरकार बना ली.
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राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा
2022 में ही 'आप' ने गुजरात विधानसभा में तीसरा स्थान हासिल कर लिया. अप्रैल, 2023 में चुनाव आयोग ने उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दे दिया. उसे गोवा में भी राज्य स्तर की पार्टी का दर्जा प्राप्त है.
तस्वीर: Charu Kartikeya/DW
आबकारी 'घोटाला'
2021 में दिल्ली में 'आप' की सरकार ने एक नई आबकारी नीति लागू की. जुलाई 2022 में मुख्य सचिव नरेश कुमार ने नीति में अनियमितताओं का दावा किया. उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी. सीबीआई ने धीरे धीरे इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी शामिल थे. मार्च, 2024 में प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में केजरीवाल को भी हिरासत में ले लिया.
तस्वीर: Sonu Mehta/ Hindustan Times/picture alliance