हिमाचल प्रदेश से लेकर असम तक कई राज्यों में भारी बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं. मौसम विभाग ने और बारिश होने का पूर्वानुमान दिया है जिससे लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं.
दिल्ली में यमुना के ऊपर बादलतस्वीर: Adnan Abidi /REUTERS
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मंगलवार 18 जुलाई को दिल्ली में बारिश के बाद यमुना का स्तर एक बार फिर ऊपर चला गया. नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिसकी वजह से दिल्ली सरकार ने राहत शिविरों में रह रहे लोगों को अभी भी वहीं रहने के लिए कहा है.
कम से कम 25,000 लोगों को शहर के बाढ़ग्रस्त इलाकों से बचाया गया है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इनमें से करीब 18,000 लोग 47 राहत शिविरों में रह रहे हैं. बाकी लोग रिश्तेदारों के घरों और अन्य ठिकानों पर चले गए हैं.
पहाड़ों में आपदा
बीते दिनों यमुना में बाढ़ आने की वजह से पूर्वी, उत्तर पूर्वी, केंद्रीय और दक्षिणी दिल्ली के कई इलाकों में नदी के किनारे बसी कॉलोनियों, झुग्गी बस्तियों, बाजारों, अनाधृकित कॉलोनियों और यहां तक कि सरकारी आवासीय कॉलोनियों में भी पानी भर गया था.
बाढ़ में डूबे बाग, मुसीबत में फल किसान
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बारिश के बाद और अन्य आपदाएं दिल्ली के अलावा कई दूसरे राज्यों में भी आई हैं, जिनमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और असम जैसे राज्य शामिल हैं.
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश के बाद भूस्खलन और पहाड़ों से बड़े बड़े पत्थरों के गिरने की खबर है.
पंजाब और हरियाणा में हजारों एकड़ में फैले खेत डूब गए हैं जिसकी वजह से धान की फसल बर्बाद हो गई है. सोशल मीडिया पर कई वीडियो डाले गए हैं जिनमें किसानों की व्यथा नजर आ रही है.
उत्तर प्रदेश में भी नदियां उफान पर हैं. आगरा में यमुना नदी में पानी का सतर इतना बढ़ गया है कि पानी ताज महल की चारदीवारी के निचले हिस्से तक पहुंच गया है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ऐसा 45 सालों में पहली बार हुआ है.
असम में ब्रह्मपुत्र नदी में भी बाढ़ आ गई है जिसकी वजह से कई इलाकों में लोगों के लिए खतरा पैदा हो गया है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम 17 जिलों में लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हैं.
बिहार में भी कई नदियों में पानी का सतर बढ़ गया है और कई जिलों में पानी खेतों और मकानों में घुस गया है. कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सभी बाढ़ प्रभावित राज्यों को मिला कर अलग अलग घटनाओं में करीब 100 लोगों की मौत हुई है.
इसके अलावा भारी आर्थिक नुकसान भी हुआ है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सभी राज्यों को मिलाकर अभी तक 10 से 15 हजार करोड़ रुपयों का नुकसान हो चुका है.
यमुना नदी में पानी का स्तर ज्यादा बढ़ जाने के बाद दिल्ली के कई निचले इलाकों में बाढ़ आ गई है. माना जा रहा है कि दिल्ली में इससे पहले कभी भी यमुना में पानी का स्तर इतना ऊपर नहीं गया.
तस्वीर: Ab Rauoof Ganie/DW
यमुना का स्तर
13 जुलाई, 2023 को यमुना में पानी का स्तर 208 मीटर पार कर गया, जबकि खतरे का निशान 205 मीटर पर है. इसके बाद नदी के पास बसे उत्तरी, पूर्वोत्तर दिल्ली के कई इलाकों और केंद्रीय और दक्षिणी दिल्ली के कुछ इलाकों में बाढ़ आ गई. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह एक नया रिकॉर्ड है. इससे पहले 1978 में पानी 207.49 मीटर तक पहुंचा था.
तस्वीर: Ab Rauoof Ganie/DW
लोग हुए बेघर
दिल्ली में यमुना नदी के किनारे बसे कई लोगों के मकान और दुकानें डूब चुकी हैं. हजारों लोगों को डूबे हुए इलाकों से निकाला गया है और अस्थायी आश्रय गृहों में रखा गया है. दिल्ली सरकार के मुताबिक पूरी राजधानी में करीब 2,500 राहत शिविर बनाए गए हैं.
तस्वीर: Mayank Makhija/NurPhoto/IMAGO
दूसरे राज्यों का योगदान
नदी में बाढ़ के लिए दिल्ली के साथ साथ दूसरे राज्यों में हुई बारिश को जिम्मेदार माना जा रहा है. दिल्ली सरकार ने कहा कि हरियाणा सरकार ने हथिनी कुंड बैराज में पानी छोड़ा और उसकी वजह से दिल्ली में बाढ़ आ गई. हरियाणा सरकार का कहना है कि हिमाचल प्रदेश से पानी छोड़ने की वजह से वहां पानी ज्यादा हो गया था.
तस्वीर: Adnan Abidi/REUTERS
स्कूल, कॉलेज बंद
बाढ़ के मद्देनजर दिल्ली में सभी स्कूलों और कॉलेजों को बंद कर दिया गया है. सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा गया है. निजी दफ्तरों को भी अपने कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहने की सलाह दी गई है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आम लोगों को से जब तक जरूरी ना हो तब तक घर से ना निकलने की अपील की है.
तस्वीर: Ab Rauoof Ganie/DW
पीने के पानी की व्यवस्था को खतरा
बाढ़ की वजह से दिल्ली के तीन वॉटर ट्रीटमेंट संयंत्रों को बंद कर दिया गया, जिससे 2-3 दिनों के लिए पीने के पानी की सप्लाई बाधित होने की आशंका है.
तस्वीर: Ab Rauoof Ganie/DW
भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित
सिंघु बॉर्डर, बदरपुर बॉर्डर, लोनी बॉर्डर और चिल्ला बॉर्डर से दिल्ली में भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित घोषित कर दिया गया है. हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर और उत्तराखंड से आने वाली बसों को भी सिंघु बॉर्डर पर ही खाली कर देने के आदेश दिए गए हैं.
तस्वीर: Ab Rauoof Ganie/DW
यातायात प्रभावित
बाढ़ग्रस्त इलाकों में सड़क यातायात के साथ साथ मेट्रो सेवायें भी प्रभावित हुई हैं. मेट्रो के चार पुल नदी के ऊपर बने हुए हैं और उन चारों से होकर गुजरने वाली ट्रेनों की रफ्तार को कम कर दिया गया. कुछ मेट्रो स्टेशनों तक पहुंचने के रास्ते में पानी भरा गया जिसकी वजह से स्टेशनों तक पहुंचना मुश्किल हो गया.
ये महिलाएं बाढ़ के पानी में ही अपने एक मृत रिश्तेदार का अंतिम संस्कार कर रही हैं.
तस्वीर: Ab Rauoof Ganie/DW
लाखों क्यूसेक पानी
एक रिपोर्ट के मुताबिक साल भर हथिनी कुंड बैराज से करीब 352 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा जाता है, लेकिन मंगलवार 11 जुलाई को अचानक 3.59 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया.
तस्वीर: Ab Rauoof Ganie/DW
22 किलोमीटर बहती है नदी
दिल्ली में यमुना वजीराबाद बैराज से लेकर ओखला बैराज तक 22 किलोमीटर की यात्रा तय करती है. यह यमुना की कुल लम्बाई का सिर्फ दो प्रतिशत हिस्सा है लेकिन दिल्ली में यह बेहद प्रदूषित हो जाती है.
तस्वीर: Adnan Abidi/REUTERS
पहले भी आई बाढ़
दिल्ली में इससे पहले 2018 और 2013 में भी बाढ़ आई थी, जिनमें नदी के किनारे बसे कई इलाके डूब गए थे और लोगों को अस्थायी शिविरों में जाना पड़ा था. (रऊफ फिदा)