दो दिवसीय मलेशिया दौरे के आखिरी दिन पीएम मोदी ने रक्षा और खुफिया क्षेत्र में आदान-प्रदान बढ़ाने की बात कही. आतंकवाद पर सख्त टिप्पणी करते हुए मोदी ने कहा, "हमारा संदेश स्पष्ट है- ना दोहरापन, ना समझौता."
दो दिवसीय दौरे के आखिरी में प्रेस बयान के लिए साथ मौजूद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिमतस्वीर: Hasnoor Hussain/REUTERS
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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने और रक्षा व सेमीकंडक्टर पर सहयोग बढ़ाने का ऐलान किया है. अपने आधिकारिक दौरे के दूसरे दिन 8 फरवरी को एक प्रेस विज्ञप्ति के दौरान मोदी ने आतंकवाद पर भी टिप्पणी की.
अगस्त 2024 में दोनों देशों द्वारा अपने रिश्तों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने के बाद से मोदी पहली बार इस दक्षिण-पूर्व एशियाई देश का दौरा कर रहे हैं. एक दशक में पहले आधिकारिक दौरे पर मलेशिया पहुंचे मोदी ने यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया. इससे पहले मोदी नवंबर 2015 में मलेशिया के आधिकारिक दौरे पर गए थे.
मोदी 2018 में भी मलेशिया आए थे. तब वे तत्कालीन मलेशियाई प्रधानमंत्री से मिलने के लिए कुछ देर रुके थे. मोदी इंडोनेशिया के दौरे से लौटे थे और सिंगापुर जाने वाले थे.तस्वीर: Hasnoor Hussain/REUTERS
सामरिक रिश्तों को और बढ़ावा
मलेशिया की प्रशासनिक राजधानी पुत्रजया में एक प्रेस वक्तव्य में पीएम मोदी ने कहा, "एआई और डिजिटल तकनीकों के साथ-साथ, हम सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा में साझेदारी को आगे बढ़ाएंगे. साथ ही रक्षा के क्षेत्र में हम आतंकवाद रोकथाम, खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान, और समुद्री सुरक्षा में आपसी सहयोग मजबूत करेंगे.
मोदी ने मलेशिया में भारत के कामगारों के संरक्षण के लिए सोशल सिक्योरिटी समझौता, पर्यटन के लिए मुफ्त ई-वीजा, और डिजिटल पेमेंट इंटरफेस यूपीआई के मलेशिया में शुरू होने की बात भी कही.
मोदी ने मलेशिया को "आसियान सम्मेलन की सफल अध्यक्षता के लिए बधाई" भी दी.
मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम ने कहा, "यह बैठक और ये आदान-प्रदान भारत और मलेशिया के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने और बेहतर बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण, बहुत रणनीतिक और जरूरी हैं."
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शांति और आतंकवाद पर बोले मोदी
मोदी ने कहा, "हमारा साझा मत है कि आज की चुनौतियों का समाधान करने के लिए वैश्विक संस्थाओं का रिफॉर्म जरूरी है. हम शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करते रहेंगे और आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है- ना दोहरापन, ना समझौता."
मलेशिया में मोदी की टिप्पणी भारत द्वारा यह संकेत देने के कुछ दिनों बाद आई है कि भगोड़े धर्म उपदेशक जाकिर नाइक का प्रत्यर्पण पीएम इब्राहिम के साथ चर्चा के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला में शामिल होगा.
सेमीकंडक्टर पर सहयोग
मलेशिया सेमीकंडक्टर के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है और इस लिस्ट में, दुनिया भर में छठे स्थान पर है. मलेशियाई सरकार के आंकड़ों के अनुसार, यह क्षेत्र जीडीपी में लगभग 25 फीसदी का योगदान देता है.
मोदी के दौरे से पहले, भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि वह मलेशिया के पास एक "बहुत मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम" है और "उनके पास उन क्षेत्रों में लगभग 30 से 40 वर्षों का अनुभव है."
मोदी ने अपने दौरे के पहले दिन कुआला लंपुर के बाहरी इलाके सेरी केम्बांगन में भारतीय समुदाय को संबोधित किया. इस मौके पर मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम भी मौजूद रहेतस्वीर: Azneal Ishak/POOL/AFP/Getty Images
नया कॉन्सुलेट और तिरुवल्लुवर सेंटर
इस यात्रा के दौरान देशों के बीच अक्षय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, आपदा प्रबंधन और शांति प्रयासों सहित 11 करार हुए.
मोदी ने मलेशिया में एक नया भारतीय वाणिज्य दूतावास स्थापित करने की घोषणा की. इसके अलावा कुआलालंपुर की यूनिवर्सिटी मलाया में एक समर्पित तिरुवल्लुवर केंद्र की स्थापना की भी घोषणा हुई. इस संस्थान में मलेशियाई नागरिकों के लिए तिरुवल्लुवर छात्रवृत्ति भी स्थापित की जाएगी. मलेशिया में भारतीय मूल के करीब 27.5 लाख लोग रहते हैं जो देश की आबादी का लगभग 9 फीसदी हैं. इनमें से करीब 20 लाख लोग तमिल भाषा बोलते हैं.
क्या है रेअर अर्थ, जिसकी चाबी चीन के पास है
डॉनल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात पर दुनियाभर की नजरें थीं. मीटिंग के सबसे अहम एजेंडा में रेअर अर्थ भी शामिल था. क्या है रेअर अर्थ? दुनिया को इसकी इतनी ज्यादा जरूरत क्यों है, और सप्लाई की चाबी चीन के पास क्यों है?
तस्वीर: Maxim Shemetov/REUTERS
17 धातुओं का एक समूह है रेअर अर्थ
डॉनल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की ताजा मुलाकात से दो चर्चित हासिल निकले. एक, टैरिफ घटाने का एलान. और दूसरा, रेअर अर्थ देने पर चीन की रजामंदी. रेअर अर्थ, या दुर्लभ खनिज संपदा 17 एलिमेंट्स का एक समूह है. इनमें ज्यादातर हैवी-मैटल हैं.
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सभी 17 रेअर अर्थ एलिमेंट्स के नाम
पीरियॉडिक टेबल के क्रम अनुसार इन तत्वों के नाम हैं: स्कैंडियम, इट्रियम, लैंथनम, सेरियम, प्रेजियोडिमियम, नियोडिमियम, प्रॉमीथियम, समैरियम, यूरोपियम, गैडोलिनियम, टेर्बियम, डिस्प्रोजियम, होल्मियम, एर्बियम, थूलियम, इटैर्बियम और लूटीशियम.
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कहां मिलता है ये?
हमारी पृथ्वी की तीन परतें हैं: क्रस्ट, मैंटल और कोर. क्रस्ट सबसे बाहरी परत है. ये सख्त चट्टानों और खनिजों से बनी है. रेअर अर्थ इसी हिस्से में पाया जाता है. यूनाइटेड स्टेट्स जिओलॉजिकल सर्वे का अनुमान है कि हमारी दुनिया में तकरीबन 110 मिलियन मीट्रिक टन रेअर अर्थ का भंडार है. इसमें से 44 मिलियन मीट्रिक टन अकेले चीन के पास है. वही इसका सबसे बड़ा उत्पादक है.
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इतना बड़ा भंडार, फिर रेअर क्यों कहते हैं
आमतौर पर ऐसा कुछ जो बहुत कम या असामान्य हो, दुर्लभ कहलाता है. रेअर अर्थ इस आशय में रेअर नहीं हैं. लेकिन, ये पृथ्वी के क्रस्ट में छोटी-छोटी मात्रा में फैले हैं. ऊपर से, ये दूसरे खनिजों के साथ मिले होते हैं. ऐसे में, कोयले की तरह एक जगह पर इनका विशाल भंडार मिलना मुश्किल है. नतीजतन, इसकी माइनिंग महंगी पड़ती है.
तस्वीर: IMAGO/Wirestock
किन चीजों में जरूरत पड़ती है?
रेअर अर्थ या उनसे बने रेअर अर्थ मैग्नेट, जरूरत की ऐसी ढेरों चीजों के लिए चाहिए जो बड़ी जरूरी हैं. इनमें रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी हैं, जैसे कि आईफोन, वॉशिंग मशीन, इलेक्ट्रिक गाड़ियां.
तस्वीर: Ronny Hartmann/AFP
इनकी सप्लाई ना मिले, तो क्या होगा?
काफी उन्नत उपकरण और मशीनरी में भी इनकी जरूरत है. जैसे कि मिसाइल, रेडार सिस्टम, मेडिकल उपकरण, तेल की रिफाइनिंग. इनकी उपलब्धता ना हो, तो सप्लाई चेन रुक जाएगी. मसलन, इस साल अप्रैल में जब चीन ने इनके निर्यात पर मुट्ठी बंद की, तो कई कार निर्माताओं को अपना उत्पादन रोकना पड़ा.
तस्वीर: JENS SCHLUETER/AFP/Getty Images
कब से हो रही है इनकी माइनिंग?
दिलचस्प है कि रेअर अर्थ्स को बाकी खनिजों से अलग करने और उनसे अशुद्धियां-मिलावट दूर करने की प्रक्रिया विकसित करने में अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मदद की. ये बात है 1950 के दशक की. लेकिन, 1980 के दशक से ही चीन का इस इंडस्ट्री में दबदबा बनने लगा. इसकी कई वजहें थीं. जैसे कि कम लागत, पर्यावरण संबंधी कमजोर नियम और सरकारी मदद.
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रेअर अर्थ्स की माइनिंग से पर्यावरण पर क्या असर?
रेअर अर्थ्स की प्रॉसेसिंग में अक्सर बहुत भारी रसायन इस्तेमाल होते हैं. इनसे निकला विषैला कचरा मिट्टी, पानी और आबोहवा को प्रदूषित कर सकता है. अब ज्यादा ईको-फ्रेंडली तकनीकें विकसित की जा रही हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल बहुत कम ही होता है. प्रदूषण संबंधी चिंताओं के कारण कई देशों में इस सेक्टर को विकसित करने की राह में पर्यावरण कानूनों की अड़चन आती है.
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अभी बना रहेगा चीन का दबदबा
आज दुनिया में खनन के हिसाब से जितना उत्पादन होता है, उसका 60 फीसदी हिस्सा चीन में होता है. रिफाइन्ड प्रॉडक्शन और रेअर अर्थ मैग्नेट उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है. वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित करने के लिए अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में नई परियोजनाएं चल रही हैं. लेकिन इन्हें संतोषजनक उत्पादन शुरू करने में कई साल लगेंगे. और, इस वजह से रेअर अर्थ में अभी चीन का दबदबा बरकरार रहेगा.