अब एआई क्रांति की तैयारी में है भारत
१५ फ़रवरी २०२६
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास में अमेरिका और चीन जैसे देशों से पिछड़ने के बाद भारत अब इस खाई को तेजी से भरने की कोशिश कर रहा है. आंध्र प्रदेश सरकार एक विशाल "डेटा सिटी” की योजना बनाने में जुटी है, जिसका मकसद देश के डिजिटल विकास को रफ्तार देना है. आंध्र प्रदेश के आईटी मंत्री नारा लोकेश इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं.
लोकेश के अनुसार, "एआई क्रांति यहां है, इसमें कोई दो राय नहीं.” उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार विशाखापट्टनम को भारत की एआई स्ट्रैटिजी का प्रमुख आधार बना रही है. अगले हफ्ते नई दिल्ली में आयोजित होने वाले एक अंतरराष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन से पहले उन्होंने समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में कहा, "एक देश के रूप में हमने यह तय किया है कि हमें इसे अपनाना ही है.” ऐसे सवाल उठते रहे हैं कि भारत अब तक अपना कोई एआई मॉडल क्यों नहीं बना पाया.
लोकेश ने दावा किया कि राज्य ने 175 अरब डॉलर के निवेश समझौते किए हैं, जिनमें 760 परियोजनाएं शामिल हैं. इनमें गूगल का 15 अरब डॉलर का वह निवेश भी है, जिससे अमेरिका के बाहर उसका सबसे बड़ा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर हब इसी राज्य में स्थापित होगा. इसके अलावा भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज, कनाडा की ब्रुकफील्ड और अमेरिकी कंपनी डिजिटल रियल्टी के जॉइंट वेंचर के जरिए 11 अरब डॉलर के निवेश से एआई डाटा सेंटर स्थापित किए जाने की योजना है.
विशाखापट्टनम, जिसे "विजाग” के नाम से भी जाना जाता है, की पहचान तकनीकी ढांचे से ज्यादा अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के लिए है. लेकिन अब यह दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर भारत और सिंगापुर को जोड़ने वाली पनडुब्बी इंटरनेट केबलों का प्रमुख प्रवेश बिंदु बनने की ओर आगे बढ़ रहा है. लोकेश के अनुसार, प्रस्तावित डेटा सिटी लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में विकसित की जाएगी. तुलना में उन्होंने कहा कि ताइवान की चौड़ाई भी लगभग इतनी ही है.
पूरी ‘वैल्यू चेन' को जोड़ने की योजना
लोकेश ने कहा कि योजना केवल डाटा कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है. राज्य ने 2025 में भारत आने वाले कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा आकर्षित किया है. उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश बड़े निवेशकों को सिर्फ एक अमेरिकी सेंट प्रति एकड़ (तीन सेंट प्रति हेक्टेयर) की दर से भूमि उपलब्ध कराएगा. इसका उद्देश्य डाटा सेंटर के साथ-साथ उन कंपनियों को भी आकर्षित करना है जो सर्वर, एयर कंडीशनिंग, पानी आधारित कूलिंग सिस्टम और अन्य संबंधित तकनीक का निर्माण करती हैं. उनके शब्दों में, राज्य "पूरी चेन” को अपने यहां स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है.
स्टैन्फर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़े 43 साल के लोकेश आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चन्द्रबाबु नायडू के बेटे हैं. चन्द्रबाबु नायडू को हैदराबाद को एक बड़े तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने का श्रेय दिया जाता है, जिसे "साइबराबाद” भी कहा जाता है. वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सहयोगी हैं, जो सोमवार से शुरू होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी करेंगे.
भारत वर्तमान में वैश्विक एआई शक्ति रैंकिंग में तीसरे स्थान पर है, जो दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों से ऊपर है. यह रैंकिंग स्टैन्फर्ड यूनिवर्सिटी के ह्यूमन-सेंटर्ड एआई संस्थान द्वारा पेटेंट, निजी निवेश और अन्य 40 से अधिक संकेतकों के आधार पर तैयार की जाती है. देश में एक अरब से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के कारण जेनरेटिव एआई कंपनियों का निवेश तेजी से बढ़ रहा है.
दिसम्बर में माइक्रोसॉफ्ट ने भारत के एआई ढांचे को मजबूत करने के लिए 17.5 अरब डॉलर का निवेश करने की घोषणा की थी. कंपनी के सीईओ सत्य नडेला ने कहा था कि यह एशिया में कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा निवेश है.
रोजगार और ऊर्जा जरूरतों को लेकर उठते सवाल
आलोचकों का कहना है कि भारत अभी भी उच्चस्तरीय कंप्यूटिंग शक्ति और व्यावसायिक एआई तैनाती में पिछड़ा हुआ है और उपभोक्ता की भूमिका में ज्यादा है, निर्माता की भूमिका में कम. यह भी सवाल उठते हैं कि बड़े पैमाने पर बनने वाले डेटा सेंटर क्या पर्याप्त रोजगार पैदा करेंगे. लेकिन लोकेश इस आलोचना को खारिज करते हैं. उनका कहना है कि हर औद्योगिक क्रांति ने उतने रोजगार नहीं छीने जितने नए रोजगार पैदा किए.
लोकेश का कहना है कि ऊर्जा तथा पानी की जरूरतों का आकलन राज्य सरकार ने पहले ही कर लिया है. उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान बंगाल की खाड़ी में बह जाने वाले "अतिरिक्त पानी” का उपयोग इन विशाल डाटा सेंटरों को ठंडा करने में किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर पानी का समुद्र में चले जाना "एक अपराध” जैसा है.
चीन से प्रेरित मॉडल
लोकेश ने कहा कि औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की यह रणनीति उन्होंने चीन के आर्थिक बदलाव से सीखी है. चीन के बारे में उन्होंने कहा कि वह देश बड़े पैमाने पर लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफल रहा है, और यही सीख वे आंध्र प्रदेश में लागू करना चाहते हैं.
राज्य का लक्ष्य छह गीगावाट क्षमता वाले डाटा सेंटरों का निर्माण करना है, जिनमें से तीन गीगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और तीन गीगावाट पाइपलाइन में हैं. भारत ने पिछले साल आंध्र प्रदेश के कोव्वाडा में छह 1.2 गीगावाट की परमाणु ऊर्जा इकाइयों को "सैद्धांतिक स्वीकृति" दी थी, जिससे राज्य की ऊर्जा उपलब्धता और बढ़ने की संभावना है. लोकेश ने कहा, "हम एक यात्रा पर हैं. हम इन परियोजनाओं को ऐसी गति से पूरा करेंगे, जैसी देश ने पहले कभी नहीं देखी.”