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समाज

निर्भया के देश में और कितने बलात्कार?

१ अक्टूबर २०२०

हाथरस की युवती की चिता की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि एक और बलात्कार का मामला सामने आया है. यूपी के बलरामपुर में युवती के साथ बलात्कार हुआ और उसकी मौत हो गई. वहीं राजस्थान में भी बलात्कार का मामला सामने आया है.

India: Women protest against violence Women wear blindfold and apply red color during a demonstration to protest agains
तस्वीर: imago images/Pacific Press Agency

उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 साल की दलित लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म और कथित शारीकि हमले के बाद उसकी मौत ने जहां देश भर में लोगों के दिलों में आक्रोश भर दिया है तो वहीं एक के बाद एक बलात्कार की कुछ और घटनाएं अन्य राज्यों से सामने आ रही हैं. उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में 22 साल की दलित युवती की बलात्कार के बाद मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक पीड़िता के भाई की शिकायत में नामजद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक बलात्कार के बाद युवती की हालत बिगड़ गई थी जिसके बाद उसे आरोपी डॉक्टर के पास ले गए लेकिन हालत और बिगड़ने के बाद उसे घर भेज दिया. यह घटना हाथरस से करीब 500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बलरामपुर जिले के थाना गैसड़ी की है. आरोप है कि 22 साल की युवती का अपहरण किया गया और उसके बाद उसके साथ बलात्कार किया गया. करीब 9 घंटे बाद जब युवती किसी तरह से घर लौटी तो बस इतना ही बोल पाई "हम मर जाएंगे."

परिवार का कहना है कि पीड़िता कॉलेज में दाखिला लेने के लिए 30 सितंबर की सुबह 10 बजे घर से निकली और कई घंटे बीत जाने के बाद जब वह घर नहीं लौटी तो परिवार चिंता में पड़ गया और उसे फोन लगाया लेकिन फोन ऑफ था. बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक देव रंजन वर्मा ने मीडिया को बताया कि पीड़ित युवती एक स्थानीय निजी फर्म में काम भी करती थी. उन्होंने बताया, "वह अर्ध-बेहोशी की अवस्था में रिक्शा पर सवार होकर घर आई, उसके हाथ पर ग्लूकोज की ड्रिप लगी हुई थी. उसकी हालत खराब थी. रिश्तेदारों ने उसे अस्पताल पहुंचाया लेकिन उसकी रास्ते में ही मौत हो गई."

बलरामपुर पुलिस का कहना है कि बलात्कार की घटना को किराने की दुकान के पास अंजाम दिया गया और दोनों ही आरोपी इस किराने की दुकान को चलाते हैं. पुलिस साथ ही यह भी कह रही है कि मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर जल्द दोषियों को सजा दिलाई जाएगी.

"निर्भया", "गुड़िया" और "लाडली"

दूसरी ओर राजस्थान के बारां में भी दो नाबालिग लड़कियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है लेकिन पुलिस इससे इनकार करती दिख रही है. राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्विटर पर सफाई दी है कि राजस्थान के बारां में जो घटना हुई है उसकी तुलना हाथरस कांड से विपक्ष और मीडिया का एक तबका कर रहा है. उनका कहना है कि लड़कियों ने मजिस्ट्रेट के सामने आईपीसी की धारा 164 के तहत बयान दिया है कि उनके साथ ज्यादती नहीं हुई है.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दो नाबालिग लड़कियों ने कैमरे पर माना है कि दो लड़के उन्हें कोटा और जयपुर ले गए और तीन दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया. हालांकि राजस्थान पुलिस इन आरोपों से इनकार कर रही है. नाबालिग लड़कियों ने कैमरे पर ड्रग्स दिए जाने और गैंगरेप की बात मानी है लेकिन पुलिस का दावा है कि लड़कियों ने अपने बयान में बलात्कार के आरोपों से इनकार किया है. पीड़ित परिवार का दावा है कि उन्हें शिकायत ना कराने की धमकी दी गई थी.

राजनीतिक लड़ाई

उधर उत्तर प्रदेश के हाथरस में गैंगरेप और पीड़िता की मौत के बाद प्रदेश की बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर राजनीतिक हमले तेज हो गए हैं. कांग्रेस, बीएसपी, समाजवादी पार्टी समेत अन्य दल दलितों पर अत्याचार के मुद्दे को उठा रहे हैं. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, यूपी प्रदेश के अध्यक्ष लल्लू सिंह और महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव दिल्ली से निकलकर पीड़ित परिवार से मिलने निकल गए. उन्हें हाथरस के रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया. 

दूसरी ओर यूपी के मंत्री और सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने राहुल और प्रियंका से सवाल किया कि वे राजस्थान के बारां क्यों नहीं जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान के बारां में बलात्कार की घटना पर प्रियंका और राहुल चुप क्यों हैं. साथ ही उन्होंने बीएसपी प्रमुख मायावती और अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि वे सिर्फ राजनीति कर रहे हैं.

वहीं इस मामले में मायावती ने केंद्र सरकार से उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है, उनका कहना है कि ऐसा करना राज्य की जनता के हित में होगा. मायावती का कहना है कि अगर योगी बेटियों की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें खुद ही पीछे हट जाना चाहिए और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

दुख की बात यह है कि तमाम राजनीतिक बयानबाजी के बीच असल मुद्दे कहीं पीछे छूट जाते हैं.

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आमिर अंसारी डीडब्ल्यू के दिल्ली स्टूडियो में कार्यरत विदेशी संवाददाता.
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