भारत की खूनी सड़कें
भारत में हर घंटे सड़क दुर्घटना में 16 लोगों की जान जाती है. 2014 में साढ़े चार लाख से ज्यादा दुर्घटनाएं हुईं और 141,000 से ज्यादा लोग मारे गए. हर मिनट एक दुर्घटना, हर चौथे मिनट एक मौत.
ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत में हर घंटे सड़क दुर्घटना में 16 लोगों की जान जाती है. पिछले साल साढ़े चार लाख से ज्यादा दुर्घटनाएं हुईं और 141,000 से ज्यादा लोग मारे गए. हर मिनट एक दुर्घटना, हर चौथे मिनट एक मौत.
तस्वीर: DW/K. Prabhakarभारत में सड़कों पर गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. लापरवाह ड्राइविंग दुर्घटनाओं की मुख्य वजह है.
तस्वीर: Getty Images/AFP/N. Nanuदेश के ज्यादाlर हिस्सों में सड़कों की हालत भी बहुत अच्छी नहीं है. ऐसे में सावधानी गई दुर्घटना हुई.
तस्वीर: DW/K. Prabhakarदेश तेजी से प्रगति कर रहा है. तेज आधुनिक गाड़ियां आ रही हैं, लेकिन परिवहन के पुराने साधन भी मौजूद हैं.
तस्वीर: DW/K. Prabhakarकोलकाता जैसे शहरों में सड़क तो ज्यादा नहीं बने, लेकिन गाड़ियों की संख्या बहुत बढ़ गई है. नतीजा जैम.
तस्वीर: DW/K. Prabhakarसड़क का इस्तेमाल करने वाले लोग आराम तो चाहते हैं लेकिन सुरक्षा के लिए उनमें जागरुकता का अभाव है.
तस्वीर: DW/K. Prabhakarट्रैफिक नियम काफी पुराने, ढ़ीले और कम असरदार हैं. ट्रैफिक पुलिस को नियमित ट्रेनिंग देने की भी जरूरत है.
तस्वीर: DW/K. Prabhakarपैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त फुटपाथ नहीं है. उन्हें सड़के किनारे छोटी जगहों पर या सड़क पर ही चलना पड़ता है.
तस्वीर: DW/K. Prabhakarबहुत सारे शहरों में गाड़ियों की पार्किंग के बारे में कुछ भी नहीं सोचा गया है. इससे भी अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं.
तस्वीर: DW/K. Prabhakarयातायात में टेलिफोन का इस्तेमाल और लापरवाही भी दुर्घटनाओं की एक महत्वपूर्ण वजह है.
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