नल्लथंबी कलईसेल्वी वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की महानिदेशक बनने वाली पहली महिला हैं. उनकी उपलब्धि को विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जा रहा है.
तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के एक छोटे से शहर अंबासमुद्रम की रहने वाली कलईसेल्वी वरिष्ठ एलेक्ट्रोकेमिकल वैज्ञानिक हैं. सीएसआईआर की महानिदेशक के रूप में वो केंद्रीय विज्ञान मंत्रालय के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव की भूमिका भी निभाएंगी.
कलईसेल्वी इस समय तमिलनाडु के कराईकुडी स्थित सीएसाईआर के ही केंद्रित विद्युत् रासायनिक अनुसंधान संस्थान की निदेशक हैं. इस पद को पाने वाली भी वो भारत की पहली महिला वैज्ञानिक थीं. उन्होंने करीब 25 साल पहले इसी संस्थान में प्रवेश स्तर के वैज्ञानिक के तौर पर शोध करना शुरू किया था.
अपने लंबे करियर में उन्होंने इलेक्ट्रोकेमिकल ऊर्जा प्रणालियों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है. उन्हें लिथियम-आयन बैटरियों के क्षेत्र में उनके काम के लिए जाना जाता है. इन बैटरियों का इस्तेमाल मोबाइल फोन से लेकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों जैसे उपकरणों को चलाने के लिए किया जाता है.
बैटरियां और लंबी कैसे चलें इस पर पूरी दुनिया में वैज्ञानिक निरंतर शोध करते रहते हैं. मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि कलईसेल्वी 2015 से भारत में ई-मोबिलिटी की परियोजना से जुड़ी हुई हैं.
संस्थान की वेबसाइट के मुताबिक कलईसेल्वी ने 125 से भी ज्यादा शोध पेपर लिखे हैं. उनके पास छह पेटेंट भी हैं. उनके मार्गदर्शन में आठ शोधकर्ताओं ने पीएचडी डिग्री भी हासिल की है. उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी नवाजा गया है.
माना जा रहा है कि उनका सीएसआईआर का महानिदेशक बनाया जाना भारत में उन महिलाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत की तरह काम करेगा जो विज्ञान के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं. इस क्षेत्र में महिलाओं को विशेष रूप से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
ताजा सरकारी आंकड़े दिखा रहे हैं कि उच्च शिक्षा के जिन क्षेत्रों में लड़कियों लड़कों से पीछे थीं, अब वो उनमें आगे आ रही हैं. जानिए किन क्षेत्रों को पहले ही अपना चुकी हैं लड़कियां और किन क्षेत्रों को अब धीरे धीरे अपना रही हैं.
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कुल नामांकन बढ़ा
2019-20 में उच्च शिक्षा में कुल 3.85 करोड़ छात्रों ने दाखिला लिया. 2018-19 के मुकाबले इस संख्या में 11.36 लाख (3.04 प्रतिशत) की बढ़ोतरी हुई. 2014-15 में यह संख्या 3.42 करोड़ थी.
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लड़कियां आ रहीं आगे
2015-16 से 2019-20 के बीच उच्च शिक्षा हासिल करने वाली लड़कियों की संख्या (सकल नामांकन दर) 18.2 प्रतिशत बढ़ी है. यह सामान्य नामांकन दर में आई 11.4 प्रतिशत की वृद्धि से ज्यादा है. इस उछाल की वजह से देश में उच्च शिक्षा में लड़कियों की नामांकन दर अब 27.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जबकि लड़कों की नामांकन दर 26.9 प्रतिशत पर ही है.
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कॉमर्स अपना रही लड़कियां
कॉमर्स एक नया क्षेत्र बन कर उभरा है जिसमें लड़कियों का नामांकन बढ़ रहा है. 2019-20 में पूरे देश में कुल मिला कर 41.6 लाख छात्रों ने बी.कॉम के कोर्स में दाखिला लिया. इनमें 21.3 लाख लड़के थे तो 20.3 लाख लड़कियां. पांच साल पहले तक बी.कॉम में हर 100 लड़कों पर 90 लडकियां हुआ करती थीं, लेकिन अब यह अनुपात बराबर हो गया है.
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गिरा तीसरा बैरियर
बी.कॉम ऐसा तीसरा कोर्स बन गया है जिसमें पिछले पांच सालों में लड़कियों ने लड़कों की बराबरी कर ली है. 2017-18 में डॉक्टरी की पढ़ाई यानी एमबीबीएस और विज्ञान के स्नातक कोर्स यानी बी.एससी में यही हुआ था. बल्कि तब से डॉक्टरी और विज्ञान के स्नातक कार्यक्रमों में लड़कियों ने लड़कों को पीछे छोड़ दिया है.
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डॉक्टरी और विज्ञान की पढ़ाई
2017-18 में विज्ञान की पढ़ाई में हर 100 लड़कों पर 100 लड़कियां थीं और डॉक्टरी की पढ़ाई में हर 100 लड़कों पर 101 लड़कियां थीं. अब हर 100 लड़कों पर विज्ञान में 113 लड़कियां हैं और डॉक्टरी में 110.
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कुछ क्षेत्रों में पीछे
इंजीनियरिंग और कानून की पढ़ाई में लड़कियां अभी भी पीछे हैं. बी. टेक के कार्यक्रमों में हर 100 लड़कों पर सिर्फ 42 लड़कियां हैं, और कानून की पढ़ाई में हर 100 लड़कों पर सिर्फ 53 लड़कियां.
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इंजीनियरिंग की गिरती लोकप्रियता
लेकिन आंकड़े दिखा रहे हैं कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई की लोकप्रियता ही गिर रही है. एक तरफ जहां सभी मुख्य उच्च शिक्षा के कार्यक्रमों में नामांकन बढ़ा है, इंजीनियरिंग एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जिसमें छात्रों की संख्या गिरी है. स्नातक स्तर पर इंजीनियरिंग की पढ़ाई में 2018-19 में 38.5 लाख छात्रों के मुकाबले 2019-20 में 37.2 लाख छात्रों ने दाखिला लिया. स्नातकोत्तर स्तर पर भी नामांकन में गिरावट आई है.