जुगाड़ के जरिए रूसी कंपनियों ने दिया ट्रंप को चकमा?
१७ दिसम्बर २०२५
भारत में रूसी तेल के आयात में बहुत भारी कमी नहीं आई है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि दिसंबर महीने में रूसी तेल की खरीदारी 10 लाख बैरल प्रति दिन के स्तर पर पहुंचने वाली है.
रूस की बड़ी तेल कंपनियों पर अमेरिकी टैरिफ लगने के बाद अनुमान था कि भारत में तेल के आयात में भारी कमी आ सकती है. मगर, इन संभावनाओं से उलट कई भारतीय रिफाइनरों ने रूसी तेल खरीदना फिर शुरू कर दिया है. वो ऐसी तेल कंपनियों से खरीदारी कर रहे हैं, जिनपर सैंक्शन नहीं लगा और वो भारी छूट भी दे रही हैं.
भारत बनाम अमेरिका: कारोबारी विवाद किसे पड़ेगा ज्यादा भारी?
भारत ना केवल रूसी तेल खरीद रहा है, बल्कि उसे विदेशों में निर्यात भी कर रहा है. सीआरईए डेटा के मुताबिक, भारत और तुर्की की छह रिफाइनरियों ने आंशिक तौर पर रूसी कच्चे तेल से बने रिफाइंड ऑइल उत्पाद यूरोपीय संघ (ईयू), अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा को निर्यात भी किया.
इनका अनुमानित मूल्य करीब 81 करोड़ यूरो है. इनमें सबसे ज्यादा मात्रा ईयू गई, करीब 46.5 करोड़ यूरो मूल्य का एक्सपोर्ट. अमेरिका दूसरे नंबर पर है. इस समूचे एक्सपोर्ट में करीब 30 करोड़ यूरो के उत्पाद, रूसी क्रूड से रिफाइन किए गए थे.
सैंक्शन को चकमा देने के दांव?
रोसनेफ्ट और लुकऑइल, दोनों मिलकर भारत आने वाले रूसी क्रूड का करीब 60 फीसदी हिस्सा सप्लाई करते थे. इनपर सैंक्शन लग गया. कई विशेषज्ञों का अनुमान था कि प्रतिबंध के बाद नई कंपनियां, या सैंक्शन की परिधि से बाहर की कंपनियां आगे आएंगी. इसी क्रम में रूसी क्रूड का आयात जारी रखने के लिए भारत को अपने सप्लायर बदलने होंगे.
रूस की आर्थिक मुश्किलें पुतिन पर दबाव बढ़ा रही हैं
रॉयटर्स की एक नई रिपोर्ट यही ट्रेंड दिखाती है. इसके मुताबिक, रूसी तेल उत्पादक घरेलू बाजार में अदला-बदली करके एक्सपोर्ट जारी रख रहे हैं. इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, तेल की जो खेप लोकल रिफाइनरियों में जानी थी, उसे एक्सपोर्ट में भेजा जा रहा है. वो भी, बिना प्रतिबंधित कंपनियों के माध्यम से. ताकि, आर्थिक प्रतिबंधों का उल्लंघन किए बिना भारत को निर्यात जारी रखा जा सके.
घरेलू आपूर्ति को चुस्त रखने के साथ-साथ निर्यात जारी रखने के लिए रूस में इस तरह की अदला-बदली आम है. प्रशांत वशिष्ठ, आईसीआरए में वाइस प्रेजिडेंट हैं. उन्होंने रॉयटर्स को बताया, "एक संभावना है कि नॉन-सैंक्शन्ड कंपनियां अपने कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ा सकती हैं और अपनी आपूर्ति, निर्यात बाजार की ओर मोड़ सकती हैं. और, प्रतिबंधित (कंपनियों) के बैरल रूस में घरेलू मांग को पूरा करेंगी."
क्या भारत अब रूसी तेल की खरीदारी बंद करने वाला है?
जनवरी 2026 में रूसी तेल जिस कीमत पर मिल रहा है, उससे भी भारतीय कंपनियां आकर्षित हो रही है. रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, डेटेड ब्रेंट (उस वक्त के तेल पर) के प्रति बैरल पर करीब छह डॉलर छूट की पेशकश की जा रही है. अगस्त के मुकाबले, यह दो से तीन गुना ज्यादा है.
ट्रंप नाराज हैं, लेकिन भारत-रूस की छन रही है
इसी महीने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए थे. तब, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन, दोनों ने कहा था कि दोनों देशों का आपसी सहयोग जारी रहेगा.
पश्चिमी देशों, खासकर ट्रंप प्रशासन के लगाए आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद नई दिल्ली और मॉस्को के रिश्ते मजबूत बने हुए हैं. जबकि, भारत का रूस से तेल खरीदना ट्रंप के लिए आंख की किरकिरी है.
ट्रंप का आरोप है कि रूस से तेल और गैस खरीदकर भारत, यूक्रेन युद्ध जारी रखने में मॉस्को की मदद कर रहा है. जैसा कि अपने एक सोशल पोस्ट में उन्होंने लिखा, "भारत ना केवल विशाल मात्रा में रूसी तेल खरीद रह है, बल्कि इसके बाद वह, खरीदे गए तेल का ज्यादातर हिस्सा बड़े मुनाफे पर ओपन मार्केट में बेच रहा है. उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि रूसी वॉर मशीन द्वारा यूक्रेन में कितने लोग मारे जा रहे हैं."
रूसी तेल को आधार बनाकर ट्रंप ने अगस्त में भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया. इसके कारण, पहले के 25 पर्सेंट टैरिफ के साथ मिलकर भारतीय एक्सपोर्ट पर लागू शुल्क 50 प्रतिशत हो गया. ट्रंप को उम्मीद थी कि यह दबाव काम करेगा. उन्होंने साफ कहा था कि वह उम्मीद करते हैं भारत, रूसी तेल का आयात बंद कर देगा.
ट्रंप ने यह भी दावा किया था कि पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत रूसी तेल का आयात रोक देगा. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप बोले, "मैं खुश नहीं था कि भारत तेल (रूसी) खरीद रहा है, और (मोदी) ने आज मुझे आश्वासन दिया कि वे रूस से तेल नहीं खरीदेंगे. यह बड़ा कदम है."
फिर बढ़ रहा है रूसी तेल का आयात?
भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रूड इंपोर्टर है. रूसी तेल के मामले में चीन के बाद भारत सबसे बड़ा आयातक है. अमेरिकी टैरिफ के कारण फौरी तौर पर रूसी तेल के इंपोर्ट में कुछ गिरावट आई. मगर फिलहाल ये ट्रेंड बदलता दिख रहा है.
रॉयटर्स के मुताबिक, नवंबर में भारत ने प्रति दिन करीब 17 लाख बैरल रूसी तेल खरीदा. 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' (सीआरईए) के नवंबर 2025 के आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर के मुकाबले भारत ने चार प्रतिशत ज्यादा रूसी तेल खरीदा. पिछले पांच महीने से तुलना करें, तो यह सबसे अधिक मात्रा है.
भारत की प्राइवेट कंपनियों ने जहां रूसी तेल का आयात थोड़ा कम किया, वहीं सरकारी कंपनियों ने इंपोर्ट बढ़ा दिया. एक महीने पहले की अवधि के मुकाबले, नवंबर में सरकारी कंपनियों में रूसी तेल की अपनी खरीद 22 प्रतिशत तक बढ़ा दी.
एलएसईजी ट्रेड फ्लो डेटा के मुताबिक, दिसंबर में तेल आयात 12 लाख बैरल प्रति दिन के स्तर से आगे बढ़ने की संभावना है. महीने के अंत तक यह बढ़कर 15 लाख बैरल प्रति दिन के औसत को छू सकता है.
अगर भारत और चीन रूसी तेल खरीदना बंद कर दें तो क्या होगा?
सीआरईए ने भी अनुमान जताया है कि दिसंबर महीने में रूसी तेल का भारत में आयात वृद्धि का एक और रिकॉर्ड दर्ज कर सकता है. क्योंकि, यूएस ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) के सैंक्शनों के प्रभावी होने से पहले जो कार्गो लादे जा चुके थे उनकी डिलिवरी जारी है.
रॉयटर्स ने व्यापारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि जनवरी 2026 में भी आयात, दिसंबर के स्तर पर बने रहने का अनुमान है. इसका कारण है कि सैंक्शन के दायरे से बाहर की नई रूसी कंपनियां सप्लाई में खाली जगह भर रही हैं.
हालांकि, व्यापार और रिफाइनिंग सूत्रों के अनुमान में थोड़ा अंतर है. रिफाइनिंग सोर्सेज का आकलन है कि जनवरी में आयात की मात्रा 10 लाख बैरल प्रति दिन से कम रहेगी. क्योंकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने खरीदारी रोक दी है.
सरकारी तेल कंपनियां कितना क्रूड खरीद रही हैं?
रॉयटर्स के अनुसार, भारत की सरकारी कंपनियां भी रूसी तेल खरीद रही हैं. इंडियन ऑयल कमोबेश उसी मात्रा में तेल खरीद रहा है, जितना सैंक्शन के पहले खरीदता था.
भारत पेट्रोलियम ने भी जनवरी 2026 में खरीद बढ़ा दी है. दिसंबर के मुकाबले, वह कम-से-कम छह कार्गो ज्यादा खरीदेगा.
हिंदुस्तान पेट्रोलियम की अभी जनवरी के लिए बातचीत चल रही है. तीनों सरकारी रिफाइनरों और केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस विषय पर रॉयटर्स को जवाब नहीं दिया.
निजी रिफाइनरों में नायरा एनर्जी केवल रूसी तेल खरीद रही है. इस कंपनी में अधिकांश हिस्सेदारी रोसनेफ्ट जैसे रूसी कंपनियों के पास है. जुलाई 2025 में यूरोपीय संघ (ईयू) ने नायरा एनर्जी पर प्रतिबंध लगा दिया था.
बाकी प्राइवेट कंपनियों में रिलायंस और एसपीसीएल मित्तल एनर्जी कह चुकी हैं कि वो रूसी तेल की खरीद रोक रही हैं. इन दोनों के साथ-साथ 'मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स' भी जनवरी में रूसी खेप नहीं मंगवा रहा है.