भारत के पारसी अपने इतिहास को मौजूदा दौर के ईरान से जोड़ते हैं. 7वीं सदी में अरब ताकतों के ईरान में दाखिल होने के बाद जोरोस्ट्रियन धर्म के अनुयायी दुनिया के अलग-अलग कोनों में फैल गए. करीब 1,20,000 लोगों के वैश्विक पारसी समुदाय में आबादी लगातार गिर रही है.