ऑस्ट्रेलिया के बाद अब इंडोनेशिया ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगा दी है. ऑनलाइन खतरों और मानसिक सेहत को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है.
इंडोनेशिया की 28 करोड़ की आबादी में लगभग 25 फीसदी (करीब 7 करोड़) बच्चे 16 साल से कम उम्र के हैंतस्वीर: Agoes Rudianto/NurPhoto/IMAGO
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इंडोनेशिया ने 28 मार्च को एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी है. दक्षिण-पूर्व एशिया में इस तरह का सख्त कानून लाने वाला इंडोनेशिया पहला देश बन गया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दुनिया भर में 'बिग टेक' कंपनियों पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है.
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क्या हैं नए नियम और किन ऐप्स पर लगी पाबंदी?
सरकार ने इस महीने की शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि वह बच्चों को ऑनलाइन पोर्नोग्राफी, धोखाधड़ी, साइबर बुलीइंग और इंटरनेट की लत से बचाने के लिए ऐसा कदम उठाने जा रही है. नए नियमों के मुताबिक, बच्चे अब इन प्लेटफॉर्म्स पर अपना अकाउंट नहीं बना पाएंगे:
टिकटॉक, इंस्टाग्राम और फेसबुक
यूट्यूब, थ्रेड्स और एक्स
रोब्लॉक्स और बिगो लाइव
इंडोनेशिया की 28 करोड़ की आबादी में लगभग 25 फीसदी (करीब 7 करोड़) बच्चे 16 साल से कम उम्र के हैं, जिन पर इस नियम का सीधा असर पड़ेगा.
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर इंडोनेशिया की सरकार ने यह फैसला लिया हैतस्वीर: Yasuyoshi Chiba/AFP
'समझौते की कोई गुंजाइश नहीं'
इंडोनेशिया की संचार मंत्री मेउत्या हाफिद ने साफ कर दिया है कि नियमों का पालन ना करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उन पर देशव्यापी बैन भी लग सकता है.
उन्होंने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "एक्स और बिगो लाइव ने नए नियमों को पूरी तरह अपना लिया है. हम अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से भी अपील करते हैं कि वे तुरंत अपनी सेवाओं और फीचर्स को उम्र की इन नई सीमाओं के हिसाब से बदलें. नियमों के पालन को लेकर किसी भी तरह के समझौते की कोई जगह नहीं है."
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए काम करने वाली एक संस्था की संस्थापक डिएना हारयाना ने इस फैसले का स्वागत किया है. उनका मानना है कि सोशल मीडिया बच्चों की मानसिक सेहत पर बुरा असर डालता है.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "बच्चों को डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल सही समय, सही उम्र और सही मार्गदर्शन में करना सीखना चाहिए. माता-पिता और स्कूलों को चाहिए कि वे बच्चों को असली दुनिया से जुड़ने और उसमें खुशियां ढूंढने के लिए प्रेरित करें."
वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इसे लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि बच्चे वीपीएन के जरिए इन पाबंदियों को आसानी से तोड़ सकते हैं.
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इसे लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि बच्चे वीपीएन के जरिए इन पाबंदियों को आसानी से तोड़ सकते हैंतस्वीर: Cristina Quicler/AFP/Getty Images
दुनिया भर में बैन हो रहा है सोशल मीडिया
इंडोनेशिया से पहले पिछले साल दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया ऐसा कानून लाने वाला दुनिया का पहला देश बना था. वहां अब तक बच्चों के लगभग 47 लाख अकाउंट बंद किए जा चुके हैं. अब जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और मलेशिया जैसे देश भी इसी दिशा में कदम बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. ब्रिटेन में भी बच्चों पर सोशल मीडिया बैन लगाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है.
इसी हफ्ते अमेरिका की एक अदालत ने मेटा और यूट्यूब को एक महिला को करोड़ों रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है. अदालत ने माना कि इन कंपनियों के लत लगाने वाले फीचर्स की वजह से उस महिला को डिप्रेशन का सामना करना पड़ा. इस फैसले ने दुनिया भर की टेक कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है.
ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन
ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह रोक लगा दी है. बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर कई और देश भी इसी तरह के उपायों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं.
तस्वीर: Jonathan Raa/NurPhoto/picture alliance
ऑस्ट्रेलिया की पहल
ऑस्ट्रेलिया 10 दिसंबर 2025 से 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर रहा है. इसमें टिकटॉक, यूट्यूब और मेटा की इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसी बड़ी ऐप्स शामिल हैं. नवंबर 2024 में पारित कानून का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
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ब्रिटेन
2023 में पारित 'ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट' से सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्ती बढ़ी है. इसके बाद से हानिकारक सामग्री से नाबालिगों को बचाने के लिए कंपनियों को उम्र-आधारित उपाय करने जरूरी हो गए. हालांकि, सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए ब्रिटेन में अभी कोई तय आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई है.
तस्वीर: Dmitrii Marchenko/Zoonar.com/IMAGO
चीन
चीन में "माइनर मोड" सिस्टम लागू है. इसके अंतर्गत उम्र के आधार पर स्क्रीन टाइम सीमित करने के लिए डिवाइस में और ऐप में भी खास तरह के कंट्रोल के विकल्प देना जरूरी है.
तस्वीर: Beijing Institute for General Artificial Intelligence
डेनमार्क
डेनमार्क ने इसी साल नवंबर में घोषणा की है कि वहां 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगेगा. 13 साल तक के बच्चों को पेरेंट्स अनुमति दे सकते हैं. इसे संसद का समर्थन मिल चुका है.
तस्वीर: FrankHoermann/SVEN SIMON/IMAGO
फ्रांस में तकनीकी बाधा
फ्रांस ने 2023 में कानून पारित किया जिसके अनुसार 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए अभिभावक की सहमति लेना जरूरी है. लेकिन फिलहाल तकनीकी जटिलताओं के कारण इसे लागू करने में दिक्कत आ रही है.
तस्वीर: Matthias Balk/dpa/picture alliance
जर्मनी में और सख्ती की जरूरत
फिलहाल यहां 13 से 16 वर्ष के किशोर सोशल मीडिया का इस्तेमाल तभी कर सकते हैं, जब उनके माता-पिता सहमति दें. लेकिन कई विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मनी में मौजूदा नियंत्रण काफी नहीं हैं.
तस्वीर: Depositphotos/IMAGO
इटली में टीनएजर्स को थोड़ी ज्यादा छूट
इटली में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट के लिए अभिभावकों की अनुमति चाहिए. 14 वर्ष के बाद सहमति आवश्यक नहीं है.
तस्वीर: Nina Janeckova/Westend61/IMAGO
मलेशिया में भी कड़ाई
मलेशिया ने नवंबर में घोषणा की है कि वह 2026 से 16 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाएगा.
तस्वीर: Donald Iain Smith/Blend Images/picture alliance
नॉर्वे के नियम
नॉर्वे में 2024 में प्रस्ताव आया कि सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की न्यूनतम आयु 13 से बढ़ाकर 15 वर्ष की जाए. 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पेरेंट्स से अनुमति लेनी होगी. सरकार इस समय 15 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा को अनिवार्य बनाने का कानून तैयार कर रही है.
तस्वीर: Dmitrii Marchenko/Zoonar/picture alliance
अमेरिका में क्या चलता है
अमेरिका में लागू एक कानून कंपनियों को 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का डेटा पेरेंट्स की सहमति के बिना इकट्ठा करने से रोकता है. कई अमेरिकी राज्यों ने सोशल मीडिया चलाने के लिए माता-पिता की अनिवार्य सहमति लेने के लिए कानून बनाए हैं, लेकिन वहां उन्हें अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार के कारण कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.
तस्वीर: HalfPoint Images/Imago
यूरोप में कैसे हैं कानून
यूरोपीय संसद ने नवंबर में एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें सोशल मीडिया पर न्यूनतम आयु सीमा 16 वर्ष करने की सिफारिश की गई. साथ ही पूरे ईयू में 13 वर्ष की डिजिटल आयु सीमा और वीडियो-शेयरिंग सेवाओं और "एआई साथियों" के लिए भी 13 वर्ष की सीमा तय करने की बात कही गई.
तस्वीर: Robin Utrecht/picture alliance
टेक कंपनियों के अपने नियम
टिकटॉक, फेसबुक और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म खुद भी कम से कम 13 साल के यूजर चाहते हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन प्लेटफॉर्मों पर इसे सख्ती से लागू नहीं किया जाता. कई यूरोपीय देशों के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 13 साल से कम उम्र के बहुत से बच्चे यहां सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं.