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ईरान ने अस्थिरता के लिए इस्राएल और अमेरिका पर आरोप लगाए

रजत शर्मा एपी, डीपीए, रॉयटर्स
११ जनवरी २०२६

ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने देश में दो हफ्तों से जारी अस्थिरता के लिए अमेरिका और इस्राएल पर आरोप लगाए हैं. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दोहराया है कि अमेरिका, ईरान के लोगों की मदद के लिए तैयार खड़ा है.

ईरान की संसद में नारे लगाते संसद सदस्य
ईरान की संसद में, देश में हो रहे प्रदर्शनों के खिलाफ नारेबाजी करते संसद सदस्यतस्वीर: tasnimnews

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने देश में जारी अस्थिरता के लिए इस्राएल और अमेरिका पर आरोप लगाए हैं. रविवार, 11 जनवरी को एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सरकार लोगों की बात सुनने और परेशानियां हल करने को तैयार थी और अब भी आर्थिक समस्याएं हल करने के लिए प्रतिबद्ध है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने फिर से सोशल मीडिया पर कहा है कि अमेरिका ईरान के लोगों की मदद के लिए तैयार है.

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 203 लोग मारे गए हैं, जिनमें 162 प्रदर्शनकारी और 41 सुरक्षा बलों के सदस्य हैं. ईरानी सरकार ने प्रदर्शनों में हताहत हुए लोगों का कोई आंकड़ा नहीं दिया है. ईरान में इंटरनेट बंद होने और फोन लाइनें कटने के कारण विदेश से प्रदर्शनों का अंदाजा लगाना ज्यादा मुश्किल हो गया है, इसलिए न्यूज एजेंसियां इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर पा रही हैं.

28 दिसंबर को शुरू हुए प्रदर्शन अर्थव्यवस्था में गिरावट और बढ़ती महंगाई के खिलाफ थे. इस वक्त 10 लाख ईरानी रियाल की कीमत 1 अमेरिकी डॉलर के बराबर है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वजह से उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों ने अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाया है.

पढ़ें: ईरान के खिलाफ अमेरिका, इस्राएल और यूरोप युद्ध छेड़े हुए हैंः ईरानी राष्ट्रपति

ईरान ने 'दंगाइयों और आतंकवादियों' की निंदा की

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने टीवी इंटरव्यू में कहा कि ईरान के दुश्मनों ने "आतंकियों को भीतर पहुंचा दिया है.. जो मस्जिदों में आग लगाते हैं.. बैंकों और सार्वजनिक संपत्तियों पर हमला करते हैं." पेजेश्कियान ने कहा, "परिवारो, मैं आपसे कहता हूं- अपने छोटे बच्चों को उन दंगाइयों और आतंकवादियों में शामिल न होने दें जो लोगों का सिर कलम करते हैं और दूसरों को मारते हैं." उन्होंने जोड़ा कि सरकार लोगों की बात सुनने और आर्थिक समस्याओं को हल करने के लिए तैयार थी. और, वे अब भी आर्थिक समस्याओं का हल निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

शीर्ष ईरानी नेतृत्व के करीबी अली लारीजानी ने सरकारी टीवी पर आकर कुछ प्रदर्शनकारियों पर "लोगों को मारने या कुछ लोगों को जलाने" का आरोप लगाया और इसे आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट के तौर तरीकों से जोड़ा.

वहीं, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर कलीबाफ ने रविवार को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका मौजूदा विरोध प्रदर्शनों को लेकर इस्लामिक गणराज्य पर हमला करता है तो अमेरिकी सेना और इस्राएल, ईरान के "जायज निशाने" होंगे. इस बीच, देश के सरकारी टीवी पर विरोध प्रदर्शनों में मारे गए सुरक्षा कर्मियों के जनाजे की रिपोर्ट प्रसारित की गई.

ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में हुए प्रदर्शनों की तस्वीर. रॉयटर्स ने इस जगह की स्वतंत्र पुष्टि की है.तस्वीर: SOCIAL MEDIA/REUTERS

अमेरिका मदद के लिए तैयार: ट्रंप

शनिवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "ईरान आजादी की ओर देख रहा है, शायद पहले से कहीं ज्यादा. अमेरिका मदद के लिए तैयार खड़ा है."

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरानी घटनाक्रम के संदर्भ में इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई थी. रविवार को नेतन्याहू ने एक साप्ताहिक कैबिनेट बैठक में कहा, "हम सभी उम्मीद करते हैं कि पर्शियन राष्ट्र जल्द ही तानाशाही की बेड़ियों से आजाद हो जाएगा. और जब वह दिन आएगा, तो दोनों देशों की जनता के लिए खुशहाली और शांति का भविष्य बनाने में इस्राएल और ईरान एक बार फिर वफादार सहयोगी होंगे."

निर्वासित क्राउन प्रिंस की लोगों से अपील

1979 की इस्लामी क्रांति में हटाए गए ईरान के आखिरी शाह के बेटे रेजा पहलवी ने अपने ताजा संदेश में प्रदर्शनकारियों से दोस्तों और परिवारों के साथ छोटे रास्तों के बजाए, मुख्य चौराहों की ओर आने को कहा है. 

ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रेजा पहलवी और उनका परिवार. तस्वीर 1962 की हैतस्वीर: Cola Images/IMAGO

इस्राएल के प्रति पहलवी का समर्थन और इस्राएल से उन्हें मिले समर्थन की अतीत में आलोचना हुई है, खासकर पिछले साल 12 दिन तक चले युद्ध के बाद. कुछ विरोध प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों ने शाह के समर्थन में नारे लगाए हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि यह खुद पहलवी के लिए समर्थन है या 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले के समय में लौटने की इच्छा.

पानी को तरसा ईरान

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