परमाणु कार्यक्रम पर ट्रंप की धमकी के बाद ईरान का पलटवार
३१ मार्च २०२५
ईरान के सुप्रीम लीडर खमेनेई ने कहा है कि अगर अमेरिका, ट्रंप की कही बमबारी की बातों पर अमल करता है तो ईरान उसे कड़ा झटका देगा. ईरान ने परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका से सीधे बात करने से मना कर दिया है.
राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि ईरान सीधे बातचीत की मेज पर आए और परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी पक्ष की बात माने. ईरान ने अमेरिका से सीधे बातचीत करने के विकल्प को खारिज कर दिया है.तस्वीर: Iranian Supreme Leader'S Office/ZUMAPRESS/dpa/picture alliance
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ईरान ने परमाणु कार्यक्रम पर अपने सुप्रीम लीडर को लिखे अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के एक पत्र का जवाब दिया है और सीधी बातचीत के विकल्प को खारिज कर दिया है. हालांकि तेहरान के इस फैसले के बावजूद, वाशिंगटन के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत की संभावना बनी हुई है.
परमाणु और यूरेनियम संवर्धन के मामले में 2018 के बाद से दोनों देशों के बीच बातचीत की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है. तब ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में थे और उन्होंने ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते (जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन) से अमेरिका को बाहर कर लिया था.
ट्रंप ने पत्र क्यों लिखा?
ट्रंप ने 5 मार्च को ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खमेनेई को परमाणु कार्यक्रमों पर वार्ता के लिए एक पत्र भेजा था. अगले दिन एक टीवी इंटरव्यू में पत्र भेजने की बात स्वीकार भी की थी. उन्होंने कहा, "मैंने उन्हें एक पत्र लिखा है जिसमें कहा है, 'मुझे उम्मीद है कि आप बातचीत करेंगे क्योंकि अगर हमें सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी तो यह बहुत भयानक होगा."
ट्रंप ने ईरान पर अपने 'अधिकतम दबाव' अभियान के तहत नए प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है. उन्होंने तेहरान को फैसला लेने के लिए दो महीने का समय दिया है. अमेरिकी प्रसारक एनबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान को नई धमकियां दीं. उन्होंने कहा, "हम बमबारी करेंगे. ऐसी बमबारी होगी जैसी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी होगी." ट्रंप ने दावा किया कि इस मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि "बातचीत कर रहे हैं."
ट्रंप की धमकियों पर ईरानी सुप्रीम लीडर की प्रतिक्रिया
85 वर्षीय सुप्रीम लीडर अली खमेनेई ने सोमवार (31 मार्च) को कहा कि अगर अमेरिका, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की बमबारी की धमकी पर अमल करता है तो उसे कड़ा झटका झेलना पड़ेगा.
खमेनेई ने कहा, "अमेरिका और इस्राएल से दुश्मनी हमेशा से रही है. वे हम पर हमला करने की धमकी देते हैं, जिसकी हमें ज्यादा संभावना नहीं लगती, लेकिन अगर उन्होंने कोई शरारत की तो उन्हें निश्चित रूप से कड़ा जवाब मिलेगा." उन्होंने कहा, "और अगर वे देश के अंदर पहले जैसे विद्रोह कराने का सोच रहे हैं तो ईरानी जनता खुद उनसे निपटेगी."
ईरानी प्रशासन हालिया अशांति के लिए पश्चिमी देशों को जिम्मेदार ठहराता है. इनमें 2022-2023 में एक युवा महिला महसा अमीनी की हिरासत में मौत पर हुए प्रदर्शन और 2019 में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी पर हुए देशव्यापी प्रदर्शन शामिल हैं.
ईरान में महिलाओं के जीवन से पर्दा हटाती तस्वीरें
ईरानी महिला फोटोग्राफर फरनाज दमनाबी के कैमरे ने देश की महिलाओं की कुछ ऐसी तस्वीरें निकालीं हैं जो वहां के हालात बयां करती हैं.
तस्वीर: Claudia Greco/REUTERS
कैमरे में ईरानी महिलाओं का जीवन
फोटोग्राफर फरनाज दमनाबी की तस्वीरों की प्रदर्शनी इटली के मिलान में लगी हैं. फरनाज दमनाबी ने देश की आम महिलाओं के जीवन को देखने के लिए लगभग पूरे देश की यात्रा की है. उन्होंने अपने कैमरे से महिलाओं के जीवन को बताने की कोशिश की.
तस्वीर: Claudia Greco/REUTERS
ईरान की महिलाएं
29 साल की फोटोग्राफर ने मशहद शहर का दौरा करते हुए ये तस्वीरें लीं. महसा अमीनी की मौत के बाद और देश-विदेश में फैले विरोध प्रदर्शनों के बाद ये तस्वीरें ली गईं थीं.
तस्वीर: Claudia Greco/REUTERS
फरनाज की नजर में महिलाएं ऐसी ही होती हैं
ईरानी महिलाएं हिजाब पहनती हैं नहीं तो कई मामलों में उन्हें कड़ी सजा भी खानी पड़ती है. महसा अमीनी के मामले में यही आरोप लगाकर उन्हें नैतिक पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. अमीनी की मौत के बाद ईरान की महिलाएं भड़क उठीं. फरनाज दमनाबी ने भी नारी शक्ति की तारीफ करते हुए कहा, "मुझे लगता है कि महिलाएं बहुत ताकतवर और बहादुर होती हैं भले ही उन्हें कई चीजों में नहीं देखा जाता है."
तस्वीर: Claudia Greco/REUTERS
फोटोग्राफर बनने का फैसला
फरनाज दमनाबी बताती हैं कि उन्होंने फोटोग्राफर बनने का फैसला आम लोगों के जीवन को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने के लिए लिया.
तस्वीर: Claudia Greco/REUTERS
महिला शक्ति
मध्य पूर्वी देशों में ईरानी महिलाएं सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी हैं. उस देश में महिलाओं की शिक्षा दर 80 फीसदी से अधिक है. फरनाज दमनाबी अपने कैमरे से गांव से लेकर शहर और कार्यस्थल पर महिलाओं की मौजूदगी को कैद करने की कोशिश करती हैं.
तस्वीर: Claudia Greco/REUTERS
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अमेरिका को 'भरोसा बनाना' होगा: पेजेश्कियान
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ईरानी टीवी पर प्रसारित एक कैबिनेट बैठक में कहा, "हमने ओमान के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति के पत्र का जवाब दिया है और सीधी बातचीत के विकल्प को खारिज कर दिया है. लेकिन हम अप्रत्यक्ष वार्ता के लिए तैयार हैं." उन्होंने कहा, "हम बातचीत से नहीं बचते, यह वादों का उल्लंघन है जिसने अब तक हमारे लिए समस्याएं पैदा की हैं." पेजेश्कियान ने कहा,"उन्हें (अमेरिका को) साबित करना होगा कि वे भरोसा बना सकते हैं."
सोमवार (31 मार्च) को जारी एक बयान में यह भी कहा गया कि "अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों के बाद" ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्विस दूतावास के प्रभारी को तलब किया है. अमेरिका और ईरान के बीच आपसी राजनयिक संबंध नहीं हैं और ईरान में अमेरिकी हितों का प्रतिनिधित्व स्विट्जरलैंड करता है.
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ईरान का परमाणु समझौता क्या था?
2015 का परमाणु समझौता तेहरान और विश्व की बड़ी शक्तियों के बीच हुआ था, जिसमें ईरान से अपनी परमाणु कार्यक्रमों को सीमित करने की मांग की गई थी. तेहरान की विवादित परमाणु गतिविधियों के बदले प्रतिबंधों में राहत दी गई थी. पहली बार सत्ता संभालने वाले ट्रंप ने ईरान पर 2018 में फिर से व्यापक प्रतिबंध लगा दिए थे और अमेरिका को समझौते से बाहर निकाल लिया था. तब से ईरान ने परमाणु समझौते में शामिल यूरेनियम संवर्धन सीमाओं को काफी हद तक पार कर लिया है.
पश्चिमी शक्तियां ईरान पर गुप्त रूप से परमाणु हथियार क्षमता विकसित करने का आरोप लगाती रही हैं. इसमें यूरेनियम को उच्च स्तर तक संवर्धित करने का आरोप भी शामिल है. वहीं ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से नागरिक ऊर्जा उद्देश्यों के लिए है.
आरएस/सीके (एपी, डीपीए)
2024 में संघर्षों में उलझे रहे देश
साल 2024 विश्व शांति के लिहाज से निराशाजनक रहा. ऐसी घटनाएं हुईं जिसके बाद जानकार यह आशंका जताने लगे कि क्या दुनिया अगले कुछ वर्षों में एक बड़े युद्ध का सामना करने जा रही है.
तस्वीर: ASSOCIATED PRESS/picture alliance
इस्राएल-हमास संघर्ष
7 अक्टूबर 2023 को इस्राएल में आतंकवादी संगठन हमास के बड़े हमले के जवाब में इस्राएल ने फिलिस्तीनी ग्रुप के कब्जे वाली गजा पट्टी में सैन्य अभियान शुरू किया था. हमास के हमले में करीब 1,200 लोग मारे गए थे जबकि 250 से अधिक लोगों को बंधक बनाया गया था. वहीं गजा पट्टी में भी इस्राएली कार्रवाई में लगभग 45,000 लोग मारे गए और 23 लाख लोग विस्थापित हुए.
तस्वीर: Menahem Kahana/AFP/Getty Images
लेबनान में इस्राएल की कार्रवाई
इस्राएली सेना ने 23 सितंबर से लेबनानी ग्रुप पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए. उसने सीमा पार एक 'सीमित' जमीनी अभियान भी चलाया, जिसका उद्देश्य चरमपंथी संगठन हिज्बुल्लाह को कमजोर करना बताया गया. इस्राएली हमलों में हिज्बुल्लाह के चीफ हसन नसरल्लाह समेत कई कमांडरों की मौत हो गई और उसके कई ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा.
तस्वीर: Adnan Abidi/REUTERS
इस्राएल-ईरान संघर्ष
2024 में पहली बार ईरान और इस्राएल में सैन्य टकराव देखने को मिला. गजा में इस्राएली सैन्य कार्रवाई का ईरान तीखा विरोध कर रहा था. वह हिज्बुल्लाह का भी समर्थक है .ऐसे में उसके सीधे इस्राएल के साथ टकराव की स्थिति बनने लगी. 1 अप्रैल को इस्राएल ने सीरिया के दमिश्क में एक ईरानी वाणिज्य दूतावास परिसर पर बमबारी की, जिसमें कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारी मारे गए.
तस्वीर: Amir Cohen/REUTERS
ईरान ने जब दागे इस्राएल पर रॉके
31 जुलाई को तेहरान में हमास के राजनीतिक नेता इस्माइल हानियेह की हत्या के बाद तनाव और बढ़ गया. ईरान और हिज्बुल्लाह ने इस्राएल पर हत्या का आरोप लगाया. अक्टूबर 2024 में ईरान ने इस्राएल पर मिसाइलें दागीं. इसके बाद इस्राएल ने 25 अक्टूबर को ईरान के खिलाफ और जवाबी हमले किए.
तस्वीर: Mohammad Hamad/picture alliance/Anadolu
रूस-यूक्रेन युद्ध
अमेरिका और उसके सहयोगी जहां यूक्रेन के साथ डटकर खड़े रहे, वहीं रूस भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. इस साल रूस को कई बड़े झटके लगे तो वहीं रूस ने यूक्रेन पर कई मौकों पर मिसाइलों की बौछार की.
तस्वीर: Artur Abramiv/Zuma/picture alliance
सीरिया
13 साल से गृहयुद्ध में उलझा यह देश पिछले कुछ वर्षों में कमोबेश शांत रहा लेकिन 2024 में हालात बदल गए. विद्रोही गुटों ने नवंबर में सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन शुरू कर दिया. लंबे समय से विद्रोहियों का सफलतापूर्वक मुकाबला करने वाले असद इस बार अपनी सत्ता नहीं बचा पाए. 8 दिसंबर को उन्हें सत्ता छोड़कर भागना पड़ा.
तस्वीर: NAEL CHAHINE/Middle East Images/AFP/Getty Images
सूडान
सूडान में 15 अप्रैल 2023 से गृहयुद्ध जारी है. अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) और सूडानी सशस्त्र बल (एसएएफ) खूनी संघर्ष में उलझे हैं. अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अनुमानों के अनुसार, सूडान में चल रहे युद्ध में 27,120 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 1.4 करोड़ से अधिक लोग देश के भीतर या विदेश में विस्थापित हुए हैं.