ईरान युद्ध की जद में लाल सागर से होने वाला व्यापार भी आ सकता है. इस्राएल पर हूथी विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया है. इसके बाद से यह आशंका और बढ़ गई है.
ईरान युद्ध के शुरू होने के बाद से यमन के हूथी विद्रोहियों ने पहली बार इस्राएल पर बैलिस्टिक मिसाइल दागी हैतस्वीर: Wang Shang/Xinhua/picture alliance
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हूथी विद्रोहियों की ओर से इस्राएल पर बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने के बाद ईरान युद्ध के लाल सागर में फैलने का डर बढ़ गया है. वहीं पिछले हफ्तों में ईरान की ओर से किए गए हमलों में कम से कम 24 अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की जानकारी सामने आई है. ईरान ने यह हमले सऊदी अरब के एयरबेस पर किए थे. समाचार एजेंसी एपी ने मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों के हवाले से यह जानकारी दी है. इन लोगों की पहचान गुप्त रखी गई है.
ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर शुक्रवार को 6 बैलेस्टिक मिसाइलें और 29 ड्रोन दागे. इन हमलों में कम से कम 15 सैनिक घायल हुए, इनमें से 5 गंभीर रूप से घायल हैं. वहीं अब तक कुल 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है.
अब ईरान युद्ध लाल सागर की ओर फैलने का खतरा भी बढ़ गया है. शुक्रवार रात यमन से छोड़ी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को इस्राएल ने सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया है. इस बात की जानकारी इस्राएल के सैन्य अधिकारियों ने शनिवार तड़के दी. यह पहला अवसर है जब इस्राएल पर यमन की ओर से ऐसा हमला का सामना हुआ है. ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी ली और दावा किया कि उन्होंने दक्षिणी इस्राएल के संवेदनशील सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था.
हमले से ठीक पहले, बेयर शेवा और इस्राएल के परमाणु शोध केंद्रों के आसपास रात में लगातार तीन बार सायरन बजे, क्योंकि ईरान और हिज्बुल्लाह की ओर से मिसाइल और ड्रोन दागे जाते रहे.
हूथी विद्रोही, जो 2014 से यमन की राजधानी सना पर नियंत्रण बनाए हुए हैं, अब तक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष से दूर थे. लेकिन इस्राएल‑ईरान तनाव के बढ़ने के साथ, उनके युद्ध में कूदने की आशंका तेज हो गई है.
एशिया में विरोध का परचम लहराती महिलाएं
सरकार विरोधी प्रदर्शनों की लहर भारत समेत ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में चली हुई है. इनमें से कइयों का मोर्चा देश की महिलाओं ने संभाला है, जो बड़े जोखिम उठा कर व्यवस्था को चुनौती दे रही हैं.
तस्वीर: DW/H.Sirat
भेदभावपूर्ण कानून के खिलाफ
भारत के आम नागरिकों के समूहों ने देश में लागू हुए नए नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ कई हफ्तों से प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी सत्ताधारी बीजेपी पर मुसलमानों के प्रति इस तथाकथित भेदभावपूर्ण कानून को वापस लेने का दबाव बना रहे थे.
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फासीवाद के खिलाफ संघर्ष
भारत के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं ने देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को ठेस पहुंचाने की कोशिशों का विरोध किया. विवादास्पद कानून के अलावा युवा स्टूडेंट ने फासीवादी सोच, स्त्री जाति से द्वेष, धार्मिक कट्टरवाद और पुलिस की बर्बरता के खिलाफ भी आवाज उठाई.
तस्वीर: DW/M. Krishnan
दमनकारी सत्ता के खिलाफ
ईरानी महिलाओं ने 1979 की इस्लामी क्रांति के समय से ही सख्त पितृसत्तावादी दबाव झेले हैं. बराबरी के अधिकारों और बोलने की आजादी जैसी मांगों पर सत्ताधारियों ने हमेशा ही महिलाओं को डरा धमका कर पीछे रखा है.फिर भी महिलाएं हिम्मत के साथ तमाम राजनैतिक एवं नागरिक प्रदर्शनों में हिस्सा ले रही हैं.
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पाकिस्तानी महिलाएं बोल उठीं बस बहुत हुआ
भारत के पड़ोसी पाकिस्तान में भी बराबर का हक मांगने वाली महिलाओं के प्रति बुरा रवैया रहता है. इन्हें कभी "पश्चिम की एजेंट" तो कभी "एनजीओ माफिया" जैसे विशेषणों के साथ जोड़ा जाता है. महिला अधिकारों की बात करने वाली फेमिनिस्ट महिलाओं को अकसर समाज से अवहेलना झेलनी पड़ती है. फिर भी रैली, प्रदर्शन कर समाज में बदलाव लाने की महिलाओं की कोशिशें जारी हैं.
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लोकतंत्र को लेकर बड़े सामाजिक आंदोलन
पाकिस्तान में हुए अब तक के ज्यादातर महिला अधिकार आंदोलन कुछ ही मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं, जैसे लैंगिक हिंसा, बाल विवाह और इज्जत के नाम पर हत्या. लेकिन अब महिलाएं लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शनों में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने लगी हैं. पिछले साल पाकिस्तान की यूनिवर्सिटी छात्राओं ने राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का नेतृत्व किया जिसकी मांग छात्र संघों की बहाली थी. दबाव का असर दिखा और संसद में इस पर बहस कराई गई.
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इंसाफ के लिए लड़तीं अफगानी महिलाएं
अमेरिका और तालिबान का समझौता हो गया तो अफगानिस्तान में एक ओर युद्धकाल का औपचारिक रूप से खात्मा हो जाएगा. लेकिन साथ ही बीते 20 सालों में अफगानी महिलाओं को जो कुछ भी अधिकार और आजादी हासिल हुई है वो खतरे में पड़ सकती है. 2015 में कुरान की प्रति जलाने के आरोप में भीड़ द्वारा पीट पीट कर मार डाली गई फरखुंदा मलिकजादा के लिए इंसाफ की मांग लेकर भी महिला अधिकार कार्यकर्ता सड़क पर उतरीं. (शामिल शम्स/आरपी)
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लाल सागर में फिर उथल-पुथल की आशंका
2023‑25 के बीच हूथियों ने 100 से अधिक व्यापारी जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए थे. इन हमलों में दो जहाज डूब गए थे और कई नाविक मारे गए थे. यदि हूथी विद्रोही फिर सक्रिय होते हैं तो लाल सागर मार्ग से गुजरने वाला करीब 1 ट्रिलियन डॉलर का वार्षिक वैश्विक व्यापार फिर संकट में पड़ सकता है. यहां से होने वाले व्यापार को यमन के पास से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास से होकर गुजरना पड़ता है.
अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड की मरम्मत चल रही है, और विशेषज्ञों को आशंका है कि लाल सागर में उसकी वापसी के साथ पहले जैसी तीखी मुठभेड़ें फिर शुरू हो सकती हैं, जैसा यूएसएस आइजनहावर और यूएसएस ट्रूमैन के साथ हुआ था.
तनाव के बीच एक सकारात्मक संकेत यह मिला कि ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के अनुरोध पर मानवीय और कृषि आपूर्ति को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने पर सहमति जताई. यह वही जलमार्ग है जो दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का पांचवां और उर्वरक व्यापार का लगभग एक‑तिहाई हिस्सा संभालता है. इसकी रुकावट दुनिया की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गई है.
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इस्राएल का ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमला
शनिवार को ईरानी मीडिया ने बताया कि अराक और यज्द प्रांत में दो परमाणु संयंत्रों पर इस्राएली हमले हुए. इस्राएल ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली और दावा किया कि इससे ईरान की परमाणु क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है. ईरान ने बदले की चेतावनी देते हुए कहा कि "इस्राएल को भारी कीमत चुकानी होगी.”
मध्य-पूर्व युद्ध की मार: दुबई की चमक पर पड़ा साया
खाड़ी देशों के दुबई जैसे शानदार शहर कभी लग्जरी और सुरक्षा की मिसाल हुआ करते थे. आज मध्य-पूर्व में युद्ध छिड़ने के बाद से वहां पर्यटन तो ठप हुआ ही है, इसकी साख भी दांव पर है.
तस्वीर: Fatima Shbair/AP/dpa/picture alliance
सब पड़ा है खाली
आम दिनों में दुबई के अल-सीफ बाजार में पर्यटकों का तांता लगा होता था लेकिन आज पूरा बाजार सुनसान है. अमेरिका-इस्राएल के ईरान पर हमला करने के बाद से बाजार का नजारा बिल्कुल उलट गया है.
तस्वीर: Fatima Shbair/AP/dpa/picture alliance
अमीरों की दुनिया
पिछले कई दशकों से दुबई के लिए एक बात कही जाती थी कि यह अमीरों की दुनिया है. दुनिया भर में कहीं किसी भी तरह का संघर्ष हो रहा हो, अमीरात की सीमाओं तक आते-आते सब थम जाता है. इस बार यह धारणा गलत साबित हुई. ईरान के जवाबी हमलों की चपेट में इस बार खाड़ी देश भी आ गए हैं, जिसने विदेशियों को यह क्षेत्र छोड़ के जाने के लिए मजबूर कर दिया है.
तस्वीर: Amr Alfiky/REUTERS
हवाई अड्डे पर हमला
28 फरवरी को ईरान के साथ अमेरिका-इस्राएल युद्ध शुरू होने के बाद से कई खाड़ी देशों ने लगातार अपने इलाके में मिसाइल और ड्रोन हमलों की सूचना दी है. इस हमले में दुबई हवाई अड्डे के आस-पास कई ईंधन डिपो, अमेरिकी दूतावास और होटलों जैसे नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया.
तस्वीर: AFP
हवाई उड़ानें रद्द
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए दुबई हवाई अड्डा इस क्षेत्र के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है लेकिन यात्री विमानों की उड़ानें लगातार रद्द हो रही हैं. ईरानी ड्रोन और मिसाइलों के हमलों के बीच युद्ध की शुरुआत से ही इलाके के कई हवाई अड्डे आंशिक या सीमित क्षमता के साथ काम करने को मजबूर हैं.
तस्वीर: AFP/Getty Images
खाली पड़े समुद्री किनारे
दुबई के ब्रांड न्यू लग्जरी होटल जुमेराह मरसा अल अरब के समुद्री किनारे पर समुद्री पक्षियों के अलावा कोई नहीं है. विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद के अनुसार पर्यटन में आई भारी गिरावट के कारण खाड़ी देशों को कम से कम 60 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है. साल 2025 में पर्यटन संयुक्त अरब अमीरात की जीडीपी का लगभग 12 फीसदी था.
तस्वीर: Fatima Shbair/AP Photo/picture alliance
साख है दांव पर
दुबई के प्रमुख पर्यटन बाजार अल-सीफ के इस दुकानदार के लिए भी यह एक बड़ा झटका है. होटल, रेस्तरां और दुकान सभी इससे प्रभावित हुए हैं. ईरान के साथ छिड़ा युद्ध न केवल आर्थिक रूप से नुकसानदायी है बल्कि क्षेत्र की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है.
तस्वीर: Fatima Shbair/AP/dpa/picture alliance
कुछ सुरक्षित नहीं
अंतरराष्ट्रीय असमंजस के बीच पिछले कई सालों से खाड़ी देश खासकर दुबई खुद को निवेशकों और व्यवसायों के सामने एक सुरक्षित विकल्प के तौर पर पेश कर रहा था. केवल 2025 में ही लगभग 9,800 करोड़पति संयुक्त अरब अमीरात में आकर बसे, जो कि दुनिया के किसी भी अन्य देश के मुकाबले सबसे अधिक है.
तस्वीर: Fatima Shbair/AP Photo/picture alliance
बंजर पड़े शहर
दुबई की गिनती दुनिया के सबसे अमीरों शहरों में की जाती है. टैक्स में भारी छूट, व्यवस्थित नौकरशाही और ‘गोल्डन वीजा प्रोग्राम’ ने इसे अमीरों और व्यवसायों के बीच काफी लोकप्रिय बना दिया था. कभी चहल-पहल से भरी रहने वाली जुमैरा बीच रेजिडेंस की सड़कें आज वीरान हैं.
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आर्थिक मॉडल संकट में
उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध कितना लंबा चलता है, इस बार निर्भर करेगा कि देश की प्रतिष्ठा को कितना नुकसान पहुंचा है और निवेशक कितनी गति से पैसा खीचेंगे. राइस यूनिवर्सिटी के बेकर इंस्टिट्यूट के जिम क्रेन ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, “दुबई का आर्थिक मॉडल कितना संकट में है, इसे कम आंकना मुश्किल है. युद्ध जितना लंबा चलेगा, वैकल्पिक स्थानों की खोज उतनी ही तेज होगी.”
तस्वीर: Fatima Shbair/AP Photo/picture alliance
‘पर्यटकों की याददाश्त कमजोर’
कुछ लोगों का मानना है कि अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है. जर्मन सोसाइटी फॉर टूरिज्म स्टडीज के प्रेसिडेंट युरगन श्मुडे ने जेडडीएफ को बताया, “पर्यटकों की याददाश्त कमजोर होती है.” उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई संघर्ष या युद्ध ज्यादा लंबा नहीं चलता है तो पर्यटन स्थल को अधिक नुकसान नहीं पहुंचता है.
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तेहरान और अन्य शहरों में रातभर विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जबकि ईरान ने तेल अवीव और यरुशलम पर कई मिसाइलें दागीं. सऊदी अरब ने भी अपने हवाई क्षेत्र में आए कई ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया.
अमेरिका, पाकिस्तान और तुर्की सहित कई देशों के राजनयिक युद्धविराम के लिए बातचीत कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है. जी7 देशों ने नागरिक ठिकानों पर हमले तुरंत रोकने की अपील की है.
अमेरिका ने क्षेत्र में 2,500 मरीन और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 1,000 पैरा ट्रूपर्स भेजने का आदेश दिया है. हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि "जमीनी सैनिकों के बिना भी हम अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं.”
अब तक हुई हजारों लोगों की मौत
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ईरान में 82,000 इमारतें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और लाखों लोगों के विस्थापित होने की आशंका है. लेबनान, ईरान, इराक और इस्राएल में कुल मिलाकर हजारों लोगों की मौत और घायल होने की खबरें लगातार बढ़ रही हैं.
इस्राएल में 19 लोग और 4 सैनिकों की मौत हुई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ईरान में 1,900 से ज्यादा लोग और लेबनान में 1,100 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. वहीं वेस्ट बैंक और खाड़ी देशों में कुल मिलाकर 20 लोगों की मौत हुई है. वहीं इराक में, जहां ईरान समर्थित लड़ाके इस युद्ध में शामिल हो गए हैं, 80 सुरक्षाबलों की मौत हुई है.