1. कंटेंट पर जाएं
  2. मेन्यू पर जाएं
  3. डीडब्ल्यू की अन्य साइट देखें

क्यों बड़ी बात है डिएगो गार्सिया पर ईरान का हमला

विवेक कुमार एपी, एएफपी, डीपीए
२२ मार्च २०२६

ईरान ने हिन्द महासागर स्थित रणनीतिक ब्रिटिश‑अमेरिकी अड्डे डिएगो गार्सिया की दिशा में मिसाइलें दागीं, लेकिन वे लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाईं. ब्रिटेन ने इसे “लापरवाह हमला” बताया.

फेयरफोर्ड में यूएस आर्मी, सांकेतिक तस्वीर
डिएगो गार्सिया पर ईरान के असफल मिसाइल हमले को ब्रिटेन ने गैरजिम्मेदाराना बताया है. यह इलाका अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य कार्रवाई के नजरिए से बेहद संवेदनशील और अहम माना जाता है.तस्वीर: Henry Nicholls/AFP

ईरान ने हिन्द महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप की दिशा में मिसाइलें दागीं, जहां ब्रिटेन और अमेरिका का एक रणनीतिक सैन्य अड्डा मौजूद है. ब्रिटेन ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के इन हमलों को "लापरवाह हमले” बताया है. मिसाइलें लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं और उन्हें रास्ते में ही नाकाम कर दिया गया. यह स्पष्ट नहीं है कि वे द्वीप से कितनी दूरी तक पहुंचीं. हालांकि यह द्वीप ईरान से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर है.

यह हमला उस सैन्य अड्डे पर हुआ है जिसे अमेरिकी रणनीतिक अभियानों के लिए बेहद अहम माना जाता है. यहां दशकों से अमेरिकी, ब्रिटिश और सहयोगी देशों की गतिविधियां होती रही हैं. लिहाजा भू-राजनैतिक रूप से यह एक अहम जगह है.

क्यों अहम है डिएगो गार्सिया

अमेरिका के अनुसार डिएगो गार्सिया में उसका सैन्य अड्डा मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और पूर्वी अफ्रीका में उसकी सुरक्षा गतिविधियों के लिए "लगभग अपरिहार्य” जगह है. यहां करीब 2,500 कर्मचारी हैं जिनमें ज्यादातर अमेरिकी हैं. इस अड्डे ने वियतनाम से लेकर इराक और अफगानिस्तान तक अमेरिकी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 2008 में अमेरिका ने यह स्वीकार किया था कि इस जगह का इस्तेमाल आतंकवाद के संदिग्धों को लिए जाने वाली गुप्त रेंडिशन उड़ानों के लिए भी किया गया था.

पिछले साल अमेरिका ने यमन के हूथी विद्रोहियों के खिलाफ हवाई अभियान के बीच कई परमाणु-सक्षम बी-2 स्पिरिट बमवर्षक विमानों को इसी अड्डे पर तैनात किया था. इसी कारण यह अड्डा क्षेत्रीय संघर्षों में रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील माना जाता रहा है.

ब्रिटेन के पीएम स्टार्मर के डिएगो गार्सिया से ईरान पर अमेरिकी हमलों की अनुमति न देने से ट्रंप और ज्यादा नाराज हो गए.तस्वीर: Brook Mitchell/REUTERS

ईरान युद्धकी शुरुआत में ब्रिटेन ने अमेरिका और इस्राएल को ईरान पर हमले के लिए डिएगो गार्सिया का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी. हालांकि, जब ईरान ने क्षेत्रीय देशों की ओर कड़े रुख दिखाए, तब ब्रिटेन ने कहा कि अमेरिकी बमवर्षक विमानों को ईरान के मिसाइल ठिकानों पर हमले के लिए डिएगो गार्सिया और एक अन्य ब्रिटिश अड्डे का इस्तेमाल करने की अनुमति दी जा सकती है. शुक्रवार को ब्रिटिश सरकार ने यह भी कहा कि यह अनुमति उन ठिकानों के लिए भी होगी जहां से होर्मुज की खाड़ी में जहाजों पर हमले किए जा रहे हैं.

ब्रिटेन का दावा है कि यह अनुमति केवल "विशिष्ट और सीमित रक्षात्मक अभियानों” के लिए है. लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री किएर स्टार्टमर "ब्रिटिश नागरिकों को खतरे में डाल रहे हैं, क्योंकि ब्रिटेन अपने अड्डों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाइयों के लिए करने दे रहा है.”


बालिस्टिक मिसाइलों की सीमा

ईरान ने पूर्व में अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर खुद ही लगभग 2,000 किलोमीटर की दूरी की सीमा तय की थी. डिएगो गार्सिया इस सीमा से काफी दूर है. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का आरोप रहा है कि ईरान का अंतरिक्ष कार्यक्रम उसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास की क्षमता दे सकता है.

रॉयल युनाइटेड सर्विसेज इन्स्टिट्यूट के शोधकर्ता जस्टिन ब्रोंक के अनुसार, डिएगो गार्सिया पर हमले के लिए ईरान ने संभवत सिमोर्ग अंतरिक्ष प्रक्षेपण रॉकेट का इस्तेमाल किया होगा, जो दूरी बढ़ा सकता है, लेकिन उसकी सटीकता कम हो सकती है.

डिएगो गार्सिया विवादित चागोस द्वीपसमूह का हिस्सा है, जिसमें 60 से अधिक द्वीप शामिल हैं. फ्रांस ने 1814 में इसे ब्रिटेन को सौंपा था और तब से यह ब्रिटिश नियंत्रण में है. 1960 और 1970 के दशक में यहां से लगभग 2,000 लोगों को निकाल दिया गया था ताकि अमेरिका सैन्य अड्डा स्थापित कर सके.

हाल के समय में ब्रिटेन द्वारा इस द्वीपसमूह पर नियंत्रण और स्थानीय आबादी के जबरन विस्थापन पर लेकर आलोचना बढ़ी है. संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने ब्रिटेन से कहा है कि वह द्वीपों पर अपना "औपनिवेशिक प्रशासन” समाप्त करे और संप्रभुता मॉरिशस को सौंप दे.

कितने अलग थलग पड़ चुके हैं ट्रंप

02:57

This browser does not support the video element.

ट्रंप की आलोचना और राजनीतिक विवाद

लंबी बातचीत के बाद ब्रिटेन और मॉरिशस ने पिछले साल एक समझौता किया था, जिसके अनुसार द्वीपों की संप्रभुता मॉरिशस के पास जाएगी और ब्रिटेन कम से कम 99 वर्षों के लिए डिएगो गार्सिया अड्डे को पट्टे पर लेगा. ब्रिटिश सरकार का कहना है कि यह सौदा अड्डे के भविष्य को कानूनी चुनौतियों से बचाएगा. लेकिन ब्रिटिश विपक्ष के कई राजनेता इसे चीन और रूस जैसी शक्तियों द्वारा संभावित हस्तक्षेप का खतरा बताते हैं.

विस्थापित चागोस द्वीपवासी और उनके वंशज भी इस समझौते पर नाराज हैं. उनका कहना है कि उनसे कोई परामर्श नहीं किया गया और यह स्पष्ट नहीं है कि वे कभी अपने घर लौट सकेंगे या नहीं.

अमेरिकी प्रशासन ने शुरुआत में इस सौदे का स्वागत किया था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंपने जनवरी में इसे "महान मूर्खता” बताया था. स्टार्मर के डिएगो गार्सिया से ईरान पर अमेरिकी हमलों की अनुमति न देने से ट्रंप और ज्यादा नाराज हो गए. उन्होंने इसी महीने कहा था कि "ब्रिटेन उस बेकार द्वीप के मामले में बहुत ही असहयोगी रहा है.” ब्रिटिश संसद में इस समझौते पर आगे की प्रक्रिया अमेरिकी समर्थन मिलने तक रोक दी गई है.

ईंधन ढांचों पर हमले से और सुलगा ईरान युद्ध

03:14

This browser does not support the video element.

डीडब्ल्यू की टॉप स्टोरी को स्किप करें

डीडब्ल्यू की टॉप स्टोरी

डीडब्ल्यू की और रिपोर्टें को स्किप करें

डीडब्ल्यू की और रिपोर्टें