ईरान में शुरू हुए प्रदर्शनों पर अयातुल्लाह खामेनेई ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है. सरकार टीवी पर दिए अपने भाषण में उन्होंने 'दुश्मनों' की बात की है.
ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में लंदन स्थित फॉरेन ऑफिस के सामने भी ईरान के झंडों के साथ प्रदर्शन हुएतस्वीर: Alberto Pezzali/NurPhoto/picture alliance
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ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह खामेनेई ने देश में हो रहे प्रदर्शनों के लिए 'दुश्मनों' को जिम्मेदार ठहराया है. इस बीच, देश में हिंसक प्रदर्शनों में मृतकों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है. सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ बीते गुरुवार से शुरू हुए प्रदर्शनों पर खामेनेई ने मंगलवार को पहली प्रतिक्रिया दी. उन्होंने 'देश के दुश्मनों पर ईरान के खिलाफ ताकतों से हाथ मिलाने और हाल के दिनों की हिंसा' का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "दुश्मन मौके की ताक में थे, कोई कमी ढूंढ़ रहे थे, जिसके जरिये वे अपना दखल दे सकें. बीते कुछ दिनों की घटनाओं को देखिए. वे सभी जो इस्लामिक गणतंत्र के खिलाफ हैं, उन सभी ने इस्लामी क्रांति के लिए दिक्कतें पैदा करने के लिए आपस में हाथ मिला लिए हैं."
फोन में रिकॉर्ड ईरान प्रदर्शनों की तस्वीरें
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खामेनेई ने स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि वह किन लोगों की बात कर रहे हैं, लेकिन ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप की प्रदर्शनों के समर्थन के लिए निंदा कर चुके हैं. सरकारी मीडिया में कहा गया है कि मध्य ईरान में हिंसा की ताजा घटनाओं में एक बच्चे समेत नौ और लोगों की मौत हो गई है. तेहरान प्रांत के उप गवर्नर अली असगर नासेरबख्त ने कहा कि बीते कुछ दिनों में "सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लोगों पर हमलों के मामले में" 450 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
मंगलवार को ट्रंप ने एक बार फिर ट्वीट किया और ईरान सरकार को निर्दयी व भ्रष्ट बताया. उन्होंने ट्वीट किया, "आखिरकार, ईरान के लोग निर्दयी व भ्रष्ट ईरानी सत्ता के खिलाफ खड़े हो गए हैं. राष्ट्रपति ओबामा ने मूर्खतापूर्ण तरीके से इन्हें जो धन दिया था, वह सब आतंकवाद में और इनकी जेबों में चला गया. लोगों के पास बेहद कम खाना है, अधिक महंगाई है और कोई मानवाधिकार नहीं हैं. अमेरिका देख रहा है."
अन्य ईरानी अधिकारियों ने देश के हालात के लिए सऊदी अरब, अमेरिका और ब्रिटेन को जिम्मेदार बताया है. यूरोपीय संघ ने ईरान से कहा है कि वह अपने नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की गारंटी दे. संघ ने कहा है कि वह ईरानी अधिकारियों के संपर्क में है और हालात पर निगाह बनाए हुए है. जर्मनी ने भी ईरान सरकार से शांति बहाल करने की अपील की है. जर्मनी के विदेश मंत्री जिगमार गाब्रिएल ने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का आग्रह किया है.
आईएएनएस/आईबी
ईरान में कई साल बाद इतने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं. अलग अलग शहरों में सड़कों पर उतरे ये हजारों लोग आखिर कौन हैं और क्या चाहते हैं, चलिए जानते हैं.
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कब हुई शुरुआत?
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को मशाद शहर से हुई, जब बढ़ती महंगाई के खिलाफ सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए. अगले दो दिनों के भीतर ये प्रदर्शन राजधानी तेहरान समेत कई और शहरों तक पहुंचे गए.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photo
प्रदर्शनों का कारण?
कुछ प्रदर्शनकारी बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असामनात के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं. वहीं बहुत से लोग सरकार की नीतियों से खफा हैं. प्रदर्शनों के दौरान, "रोहानी मुर्दाबाद", "फलस्तीन को भूल जाओ", और "गजा नहीं, लेबनान नहीं, मेरी जिंदगी ईरान के लिए है" जैसे नारे लग रहे हैं.
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प्रतिबंधों की मार?
कुछ लोग आम जनता पर पड़ रहे आर्थिक बोझ की वजह ईरान की विदेश नीति को बता रहे हैं जो कई क्षेत्रीय संकटों में उलझा है, तो कइयों की राय में, ईरान पर लगे प्रतिबंधों का असर अब जनता की जेब पर होने लगा है. कुल मिलाकर लोग सरकार से नाराज हैं.
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सरकार समर्थक भी सड़कों पर
ईरानी राष्ट्रपति हसन रोहानी और सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह खमेनेई का समर्थन करने वाले कट्टरपंथियों ने भी सड़क पर उतर कर अपनी आवाज बुलंद की. हालांकि सरकार समर्थक इन प्रदर्शनाकरियों की संख्या सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों से काफी कम दिखी.
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कितने शहरों में प्रदर्शन?
अब तक एक दर्जन से ज्यादा शहरों से प्रदर्शनों होने की खबर है, जिनमें जनजान, केरमानशाह, खोरामाबाद, अबार, अराक, दोरुद, इजेह, तोनेकाबोन, तेहरान, करज, मशाद, शहरेकोर्द और बांदेर अब्बास शामिल हैं.
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क्या कहती है सरकार?
राष्ट्रपति हसन रोहानी ने कहा है कि लोगों में बढ़ रही हताशा को वह समझते हैं और जनता को प्रदर्शन करने का हक है. लेकिन उन्होंने कहा कि हिंसा और तोड़फोड़ को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.
ईरानी सरकार का कहना है कि इन प्रदर्शनों को फैलाने के लिए सोशल मीडिया और खासकर टेलीग्राम का इस्तेमाल किया गया. इसके बाद सरकार ने कई मैसेजिंग एप्स पर रोक लगा दी है. सरकार ने टेलीग्राम से हिंसा भड़काने वाले अकाउंट्स को बंद करने के लिए कहा है.
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कितने हताहत?
ईरान में हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 21 लोगों के मारे जाने की खबर है. इसके अलावा सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया है. प्रदर्शनों के कारण ईरान की सरकार को तीखी आलोचना झेलनी पड़ रही है.
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क्या बोला विश्व समुदाय?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों को गिरफ्तार ना करने के लिए कहा है. उन्होंने कहा, "दमनकारी व्यवस्था हमेशा नहीं रह सकती. दुनिया देख रही है." जर्मनी और फ्रांस ने भी प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई है.