राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गुरुग्राम में सोमवार शाम एक महिला को एसयूवी में सवार कुछ पुरुषों ने जबरदस्ती गाड़ी के अंदर खींचने की कोशिश की.
यह 26 वर्षीय महिला शहर की एक आईटी कंपनी में काम करती हैं. उन्होंने फेसबुक पोस्ट में बताया कि सोमवार शाम जब वह कैब बुक करने के लिए इफको चौक बस स्टॉप के पास मोबाइल में बेहतर सिग्नल तलाश कर रही थीं, उसी दौरान एक स्कॉरपियो गाड़ी उनके पास आकर रुकी और गाड़ी में पीछे की सीट पर बैठे एक आदमी ने उन्हें अंदर खींचने की कोशिश की. साइबरसिटी स्थित एक आईटी कंपनी में काम करने वाली इस महिला ने घर पहुंचकर इस पूरी घटना को फेसबुक पर पोस्ट किया.
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लड़ाइयां खत्म हो जाती हैं, लेकिन जख्म हमेशा के लिए रह जाते हैं. बातें रह जाती हैं उलझी हुईं. ऐसी ही उलझी कहानी है उन हजारों महिलाओं की जिन्हें 'कंफर्ट विमिन' कहा जाता है.
तस्वीर: Sam Yeh/AFP/Getty Imagesये वे महिलाएं थीं जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सैन्य वेश्यालयों में रखा गया था ताकि वे जापानी सैनिकों की शारीरिक जरूरतों को पूरा कर सकें.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/Taipei Women's Rescue Foundationजापान में कुछ लोग इन महिलाओं को ‘सेक्स स्लेव’ यानी यौन गुलाम नहीं मानते. वे कहते हैं कि अच्छी तन्ख्वाहों पर अपनी मर्जी से जापानी सेना के लिए काम कर रही थीं. ऐसी नौकरियों के लिए 1930 के दशक में बाकायदा विज्ञापन निकाले जाते थे.
तस्वीर: Reuters/K. Hong-Jiवहीं कुछ लोग कहते हैं कि ये महिलाएं अपनी मर्जी से कहीं और नहीं जा सकती थी तो इन्हें गुलाम ही कहा जाएगा. जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे इस मुद्दे पर ‘दिल की गहराइयों से’ माफी मांग चुके हैं.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/F.R.Malasigजापान ने पहले भी ऐसी माफी मांगी है, लेकिन दक्षिण कोरिया इसे स्वीकार नहीं करता. वो कहता है कि जापान इन महिलाओं की कानूनी जिम्मेदारी उठाए और दक्षिण कोरिया की सरकार को इसका मुआवजा दे.
तस्वीर: Reuters/J. Yeon-Jeकुछ लोग इन महिलाओं की संख्या दो लाख तक बताते हैं जिनमें ज्यादातर महिलाएं कोरियाई थीं जबकि चीन, फिलीपींस, इंडोनेशिया और ताइवान की महिलाएं भी इनमें शामिल थीं.
तस्वीर: picture-alliance/AP Photoबताया जाता है कि ऐसी 46 महिलाएं अब भी दक्षिण कोरिया में रहती हैं और ज्यादातर की उम्र 80 को पार कर गई है. कंफर्ट विमिन का मुद्दा लंबे समय से जापान और दक्षिण कोरिया के रिश्तों की एक अनसुलझी गांठ रहा है.
तस्वीर: APपिछले साल दोनों देशों के बीच सहमित बनी कि जापान इन महिलाओं के लिए 1 अरब येन यानी 83 लाख डॉलर की रकम देगा. दक्षिण कोरिया का कहना है कि अगर जापान अपना वादा निभाएगा तो वह इस मामले को खत्म समझेगा.
तस्वीर: AP मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि शाम के 7 बजे उस भीड़भाड़ वाले इलाके में उनकी मदद के लिए कोई भी आगे नहीं आया. उन्होंने कहा कि वह पुलिस में शिकायत दर्ज करना चाह रही थीं लेकिन वह यही सोचती रहीं कि ऐसा करने से उनके मां-बाप परेशान हो जाएंगे और उन्हें उनके घर जयपुर वापस आने को कहेंगे. लेकिन उन्होंने घर आकर एक फेसबुक पोस्ट लिखा और गुरुग्राम के वुमन कम्यूनिटी पेज के साथ भी इसे साझा किया ताकि अन्य महिलाओं को सतर्क किया जा सके. हाल में बेंगलूरु में महिलाओं के साथ हुई छेडखानी की घटना के कुछ दिन बाद ही यह मामला सामने आया है.
महिला ने लिखा कि एक पल तो मुझे समझ ही नहीं आया कि मेरे साथ क्या हुआ. इसके बाद मैं फौरन उस ओर भागी जहां महिलाएं थीं. उन्होंने बताया कि इस पूरे मसले की ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की कोशिश भी उन्होंने की थी, लेकिन वे इसे दर्ज नहीं कर सकीं क्योंकि उनके पास पूरी जानकारी नहीं थी, मसलन गाड़ी का नंबर और गाड़ी की अन्य जानकारी. महिला के मुताबिक वह बाद में वापस उस जगह यह देखने भी गईं कि शायद वहां कोई सीसीटीवी कैमरा हो लेकिन रोशनी कम होने की वजह से शायद ही कुछ कैमरे की कैद हुआ होगा.
तस्वीरों में: देश जागा और फिर सो गया
दिल्ली की सड़कों पर 16 दिसंबर 2012 की रात हुए बलात्कार और हत्या के मामले ने देश भर को हिला दिया था. लेकिन हर गुजरते साल के साथ सवाल उठते रहे कि गुस्से और प्रदर्शनों के बाद क्या बदला और क्या नहीं.
तस्वीर: Reutersनोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ट्विटर हैंडल @k_satyarthi से लिखते हैं, "निर्भया की कहानी अभी पूरी नहीं हुई है. हमारी बेटियों के साथ अभी शोषण, बलात्कार और हत्याएं हो रही हैं. क्या आप इस सब पर पूर्ण विराम लगाने के मेरे आह्वान का जवाब देंगे?"
तस्वीर: Rolf Schultes/Lindau Nobel Laureate Meetingsएक यूजर ने @Kolkata_Chhori ट्विटर हैंडल से लिखा है, "तुम हमें आज भी याद हो. हमें न्याय चाहिए, ना सिर्फ उसके लिए बल्कि सैकड़ों पीड़ित औरतों के लिए जिनके नाम नहीं हैं."
तस्वीर: picture-alliance/dpa/M. Sharmaसुधीर चौधरी @sudhirchaudhary ट्विटर हैंडल से लिखते हैं, "क्या बदला है? सिस्टम? मानसिकता? देश एक हफ्ते के लिए जागा और फिर सो गया, किसी भी औरत से पूछ लो!" लोगों का यह भी लिखना है कि क्या गारंटी है कि जुवेनाइल सुधर गया है और बाहर आकर वह समाज के लिए खतरा नहीं साबित होगा.
तस्वीर: Getty Images/N. Seelamएंथनी परमाल ने @anthonypermal ट्विटर हैंडल से लिखा है, "वाह! भारत, तुम अपनी मूर्खता कहीं रोक नहीं सकते, है ना?" उन्होंने ऐसा लिखते हुए नाबालिग दोषी से रिहाई पर अच्छे बर्ताव का कानूनी बॉन्ड भरवाने के गृह मंत्रालय के विचार करने पर टिप्पणी की.
तस्वीर: picture-alliance/dpa/M. Sharmaराजीव आनंद @SlayerRajiv लिखते हैं, "भारत - ऐसा देश जहां लोग हर बात आसानी से भूल जाते हैं और निंदा की कोशिश करते हैं." नाबालिग दोषी को रिहाई के बाद पुनर्वास के मकसद से दिल्ली सरकार ने सिलाई मशीन और 10 हजार रुपए देने का प्रस्ताव रखा है. इस पर भी लोगों ने भारी गुस्सा जताया.
तस्वीर: UNIबलात्कार के समय नाबालिग रहे एक दोषी को तीन साल बाद छोड़े जाने का सोशल मीडिया पर जमकर विरोध हुआ. पीड़िता के मां-बाप ने जुवेनाइल को सबसे ज्यादा क्रूर बताते हुए उसका चेहरा सार्वजनिक करने की मांग की थी.
तस्वीर: picture-alliance/PIXSELL/Puklavec गुरुग्राम के 17/18 सेक्टर पुलिस स्टेशन के एसएचओ राम कुमार ने महिला से शिकायत दर्ज करने को कहा है साथ ही यह भरोसा भी दिलाया है कि पुलिस हरसंभव तरीके से उनकी मदद करेगी. कुमार ने कहा कि वह चाहे तो अपनी शिकायत फोन या ऑनलाइन किसी भी माध्यम से दर्ज करा सकती हैं जिसके बाद हम जांच शुरू कर देंगे.
वहीं मंगलवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने एक संबोधन में कहा कि लोगों को महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए स्वयं में संवेदनशीलता और सकारात्मक भावनाएं लानी होंगी. उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक है लेकिन 158 देशों पर तैयार की गई वर्ल्ड हैपीनेस रिपोर्ट में हम 117वें स्थान पर है.