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जर्मनी में कल्याणकारी नीतियों के लिए पैसा अब मुमकिन नहीं

ओंकार सिंह जनौटी डीपीए, एएफपी
२४ अगस्त २०२५

जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने सामाजिक कल्याण में सुधारों की अपील की है. पैसे की कमी का हवाला दे रहे चांसलर की ये अपील उन्हीं की गठबंधन सरकार को मुश्किल में डाल सकती है.

ओस्नाब्रुक में सीडीयू के सम्मेलन को संबोधित करते जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स
तस्वीर: Hauke-Christian Dittrich/dpa/picture alliance

जर्मनी के चांसलर फ्रीडिरिष मैर्त्स ने मध्यम आकार की कंपनियों पर टैक्स बढ़ाने की मांग को पूरी तरह खारिज कर दिया है. इसके साथ ही मैर्त्स ने कहा कि जर्मनी को सामाजिक कल्याण से जुड़े खर्च में सुधार करने की जरूरत है.

चांसलर ने लोअर सैक्सनी राज्य में अपनी पार्टी क्रिश्चन डेमोक्रैटिक यूनियन (सीडीयू) की प्रांतीय सभा में यह बयान दिया. इसके बाद जर्मन सरकार में शामिल सोशल डेमोक्रैट्स (एसपीडी) पार्टी और सीडीयू की तकरार हो सकती है.

सामाजिक कल्याण योजनाओं पर निर्भर लोगों की अपनी मजबूरियांतस्वीर: DW

सामाजिक कल्याण में होने वाले खर्च पर चांसलर का रुख

लोअर सैक्सनी प्रांत के ओस्नाब्रुक शहर में शनिवार को मैर्त्स ने कहा, "कल्याणकारी राज्य जो आज हमारे पास है, उसे इस अर्थव्यवस्था के साथ फाइनेंस नहीं किया जा सकता."

गठबंधन में साझेदार, एसपीडी सोशल इंश्योरेंस सिस्टम में सुधार करने पर सहमत है. इस सिस्टम के तहत स्वास्थ्य बीमा, पेंशन और बेरोजगारी भत्ता आता है. बढ़ती महंगाई और संघीय बजट में बढ़ते घाटे की वजह से यह किया जा सकता है.

चांसलर मैर्त्स ने स्वीकार किया कि सेंटर लेफ्ट पार्टी, एसपीडी के साथ सामाजिक कल्याण के बजट पर कैंची चलाना आसान नहीं होगा. उन्होंने, दोनों पार्टियों से इस मुद्दे पर मिलकर काम करने की अपील की है.

इसके साथ ही मैर्त्स ने यह भी कहा कि, "मेरे नेतृत्व वाली इस संघीय सरकार में जर्मनी की मझोले आकार की कंपनियों के इनकम टैक्स में कोई भी इजाफा नहीं होगा."

मैर्त्स के इस बयान से पहले, एसपीडी के नेता और उप चांलसर लार्स क्लिंगबाइल कह चुके थे कि मध्य और उच्च आय वर्ग पर टैक्स बढ़ाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

क्लिंगबाइल की पार्टी एसपीडी सामाजिक कल्याण सुधार की कुछ अहम शर्तों पर अलग राय रखती हैतस्वीर: Drew Angerer/AFP

क्या मुश्किल की तरफ बढ़ रही है सीडीयू-एसपीडी की गठबंधन सरकार

क्लिंगबाइल ने समाजिक कल्याण सुधारों की जरूरत पर जोर तो दिया है, लेकिन वह यह भी कहते हैं कि कर्मचारियों पर कैंची चलाने के बजाए नए किस्म के समाधान खोजने होंगे. शनिवार को उप चांसलर ने जर्मन मीडिया से कहा, "हमें ऐसा देश बने रहने की जरूरत है जो मुश्किल वक्त झेल रहे लोगों की मदद करता है, जो बीमार हैं और मदद चाहते हैं."

एसपीडी के युवा संगठन, यूजोस के प्रमुख फिलिप टुरमर सोशल वेलफेयर पर कटौती के खिलाफ हैं. जर्मन अखबार श्टुटगार्टर त्साइंटुग से बात करते हुए टुरमर ने कहा कि सुधारों के पीछे सोच यह है कि मिलने वाले लाभों को काट दिया जाए, "एसपीडी इस पर एक इंच भी नहीं हिलेगी."

फरवरी 2025 में हुए चुनावों के बाद जर्मनी के चांसलर बने मैर्त्स अपनी लोकप्रियता बचाने के लिए फिलहाल संघर्ष कर रहे हैं. माना जा रहा है कि कल्याणकारी योजनाओं में सुधार करके वह सीडीयू के पारंपरिक वोटरों को अपने साथ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही वे, सीडीयू से धुर दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी की तरफ खिसके वोटरों को फिर वापस हासिल करने की जुगत में भी हैं.

ओस्नाब्रुक में चांसलर ने कहा, "अब तक हमने जो हासिल किया है, मैं उससे संतुष्ट नहीं हूं. इसे और ज्यादा होना चाहिए."

शरणार्थियों को मिलने वाला भत्ता भी जर्मनी में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका हैतस्वीर: Wolfgang Maria Weber/dpa/picture alliance

2026 में जर्मनी में कई प्रांतीय चुनाव

2026 में जर्मनी के बाडेन वुर्टेमबर्ग, सैक्सनी अनहाल्ट, राइनलैंड प्लाटिनेट और बर्लिन राज्य में चुनाव होने हैं. ताजा सर्वेक्षणों के मुताबिक, इन चुनावों में सीडीयू और एसपीडी को धुर दक्षिणपंथी पार्टी, एएफडी से कड़ी टक्कर मिलने जा रही है.

एएफडी लगातार आरोप लगाती है कि शरणार्थियों की समाज कल्याण का खूब पैसा खर्च हो रहा है, जबकि मेहनत कर काम करने वाले जर्मन नागरिक महंगाई और तंगहाली के तले दबे हैं. इसी नाराजगी का फायदा उठाकर धुर दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी अपना जनाधार तेजी से बढ़ाने में सफल हुई है. अब वह जर्मनी की संसद में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है.

जर्मनी में 2015 से शरणार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ी है. सीरिया और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में शरणार्थी जर्मनी आए. कल्याणकारी नीतियों के तहत ऐसे शरणार्थियों को सामाजिक और वित्तीय मदद भी मिलती है. दूसरी तरफ जर्मनी की अर्थव्यवस्था भारी मुश्किल से गुजर रही है. यूक्रेन युद्ध से उपजे ऊर्जा संकट के बाद देश में महंगाई बढ़ी है.

 

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