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मंडोवी नदी जल विवाद जिस पर गोवा में कांग्रेस बीजेपी साथ हैं

ऋषभ कुमार शर्मा
२२ नवम्बर २०१९

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन करने आए प्रकाश जावड़ेकर को गोवा में विरोध झेलना पड़ा. इसकी वजह मंडोवी नदी जल विवाद है. गोवा सरकार का कहना है कि वो मंडोवी नदी के साथ कर्नाटक को कोई छेड़छाड़ नहीं करने देंगे.

Indien: Goa - Fluss bei Palolem
तस्वीर: Imago/robertharding/M. Williams-Ellis

20 नवंबर को केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडे़कर गोवा में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया का उद्घाटन करने आए थे. यहां उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा. उनके साथ धक्का मुक्की करने के प्रयास किए गए. इसकी वजह है उनके मंत्रालय से दी गई एक अनुमति. यह अनुमति गोवा और कर्नाटक राज्यों के बीच विवाद का मुद्दा भी बन गई है. 23 अक्टूबर को प्रकाश जावडेकर ने एक ट्वीट किया. इस ट्वीट में लिखा, "कर्नाटक की कलासा बंदूरी पेयजल परियोजना के लिए पर्यावरण संबंधी स्वीकृति दे दी गई है." हालांकि कुछ देर बाद उन्होंने अपना ये ट्वीट डिलीट कर दिया. लेकिन इस ट्वीट की वजह से 4 नवंबर को गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत विपक्ष के नेताओं के साथ दिल्ली पहुंच गए. इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने महादयी नदी के ऊपर बनने वाली इस परियोजना को रोकने की मांग की. सावंत ने ट्वीट कर इस पर्यावरण संबंधी स्वीकृति का विरोध जताया.

क्या है पूरा महादयी विवाद

महादयी नदी का उद्गम कर्नाटक के बेलगावी जिले में खानापुर से होता है. आगे बढ़ते हुए इसमें कई सारी जलधाराएं आकर मिल जाती हैं. यह नदी उत्तरी गोवा में सत्तारी तालुक नाम की जगह से प्रवेश करती है. गोवा में इसका नाम मंडोवी हो जाता है. गोवा में 11 नदियां बहती हैं. इनमें से मंडोवी और जुआरी नदी सबसे महत्वपूर्ण हैं. मंडोवी नदी पणजी के पास अरब सागर में गिर जाती है. उद्गम से अरब सागर में गिरने तक इसकी लंबाई 111 किलोमीटर है. इसमें से दो तिहाई हिस्सा यानी 76 किलोमीटर गोवा में बहता है. गोवा की बाकी नदियों में खारा पानी है. मंडोवी गोवा में मीठे पानी का सबसे बड़ा स्रोत है. साथ ही ये मछलीपालन का सबसे बड़ी केंद्र भी है. मंडोवी नदी का पानी कर्नाटक और गोवा के साथ महाराष्ट्र को भी मिलता है.

इस नदी के पानी पर विवाद 1980 के दशक में शुरू हुआ जब कर्नाटक सरकार ने इस नदी पर कुछ बांध बनाने की योजना शुरू की. कर्नाटक ने अपने चार जिलों बेलगावी, धारवाड़, गडग और बगलकोट की पानी की समस्या मिटाने के लिए इस नदी पर कुछ छोटे बांध और नहर बनाने की योजना बनाई. गोवा सरकार 2002 में इसके विरोध में नदी विवादों के निपटारे के लिए बनाए गए प्राधिकरण में गई. 2006 में गोवा सरकार ने इस विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. केंद्र सरकार ने 2010 में इस विवाद का निपटारा करने के लिए महादयी नदी जल विवाद प्राधिकरण बना दिया. अगस्त, 2018 में इस प्राधिकरण ने विवाद का निस्तारण करने के लिए तीनों राज्यों के बीच पानी का बंटवारा कर दिया. ट्रिब्यूनल ने महादयी बेसिन का 13.42 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी मालप्रभा बेसिन के जरिए कलासा बंदूरी प्रोजेक्ट के लिए देने का फैसला किया. गोवा और कर्नाटक दोनों राज्य सरकारें इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गईं. सुप्रीम कोर्ट का फैसला अभी तक नहीं आया है.

ताजा विवाद क्या है

अप्रैल, 2019 में कर्नाटक में सिंचाई परियोजनाओं के लिए जिम्मेदार सरकारी कंपनी कर्नाटक नीरावरी निगम लिमिटेड ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को कलासा बंदूरी पेयजल परियोजना का ड्राफ्ट दिया. इसमें प्रस्ताव रखा गया कि महादयी नदी में आकर मिलने वाली जलधाराओं का 3.90 टीएमसी फीट पानी का रास्ता बदलकर राष्ट्रीय जल नीति 2012 के तहत कर्नाटक के चार जिलों में बांट दिया जाए. 17 अक्टूबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कर्नाटक सरकार की मांग पर सहमति जता दी. इस सहमति का विरोध गोवा सरकार ने किया. गोवा सरकार का कहना है कि कर्नाटक सरकार ने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया है. गोवा सरकार का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से गोवा की इकोलॉजी पर असर पड़ेगा और मीठे पानी की कमी का सामना राज्य को करना पडे़गा. गोवा सरकार ने इसके लिए माधव गडगिल रिपोर्ट 2011 और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट 2013 का भी हवाला दिया.

तस्वीर: Imago/robertharding/J. Sweeney

गोवा के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने पर्यावरण मंत्रालय को बताया कि मंडोवी नदी पर बनने वाले इस प्रोजेक्ट से राज्य में मौजूद भीमगढ़ वन्यजीव उद्यान और महादयी वन्यजीव उद्यान के ऊपर भी असर पडे़गा. ये दोनों मंडोवी नदी के पानी के ऊपर ही निर्भर हैं. साथ ही गोवा की खेती भी मंडोवी नदी के ऊपर ही आश्रित है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मंडोवी में पानी की मात्रा कम होगी तो समुद्र का खारापन इसके पानी को खराब कर देगा और ये पानी भी किसी काम का नहीं रहेगा.

मंडोवी नदी में फिलहाल पानी के साथ राजनीति भी बह रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कर्नाटक में जिन 15 सीटों पर 5 दिसंबर को उपचुनाव होने हैं उनमें से कुछ सीटें इस नदी के पानी से लाभान्वित होने के लिए चुने गए इलाकों में से हैं. अगर इन उपचुनावों में भाजपा नहीं जीत सकी तो राज्य में फिर से विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. ऐसे में केंद्र सरकार कर्नाटक की जनता को खुश करने के लिए ऐसी अनुमति दे रही है. हालांकि गोवा की जनता इसे राजनीति की तरह ना देखकर अपने जीवन के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे की तरह देख रही है. यही वजह है कि वहां की सभी पार्टियां एक सुर में इसका विरोध कर रही हैं.

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