जर्मनी में मोदी, निवेश और कारोबार एजेंडे में सबसे ऊपर
श्रीनिवास मजुमदारु
२९ मई २०१७
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार से दो दिन के जर्मनी दौरे पर हैं. इस दौरान वह भारत में जर्मन कारोबारियों और निवेश को आकर्षित करने की कोशिश करेंगे. ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौते पर भी बात होगी.
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मोदी के साथ कई केंद्रीय मंत्रियों और उद्योगपतियों का एक बड़ा शिष्टमंडल भी जर्मनी आ रहा है. अधिकारियों के मुताबिक मोदी जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल के साथ मुलाकात में व्यापार और निवेश पर मुख्य रूप से चर्चा करेंगे.
भारत के मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने डीडब्ल्यू को बताया, "भारत सरकार का पूरा जोर विकास पर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जर्मनी आ रहे हैं, तो आप देखिएगा कि दोनों देशों के बीच बैठक और चर्चाएं कितनी सार्थक होती हैं. दोनों देशों के बीच सघन सहयोग है."
जावड़ेकर ने बताया कि भारत और जर्मनी कई क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं जिनमें भाषा भी शामिल हैं. उन्होंने बताया, "भारत में अध्यापकों को जर्मन भाषा पढ़ाने की ट्रेनिंग जर्मन अध्यापकों ने यहां आकर दी है. हम अभी जर्मनी में अध्यापक भेज कर वहां के अध्यापकों को हिंदी पढ़ाने की ट्रेनिंग देंगे. क्योंकि यह तय हुआ है कि भारत में जर्मन की पढ़ाई को प्रोत्साहन दिया जाएगा और जर्मनी में हिंदी पढ़ने को. जर्मनी ने हिंदी को स्वीकार किया है. तो बहुत सारे पहलें हैं."
मंगलवार को बातचीत के बाद मैर्केल और मोदी दोनों देशो के उद्योगपतियों को भी संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह एक अवसर होगा कि वह खुद को आर्थिक सुधार लागू करने वाले नेता के रूप में पेश करें और जर्मन कारोबारियों को भारत में ज्यादा से ज्यादा निवेश के लिए प्रेरित करें.
भारत के प्रधानमंत्री मोदी के जितने आलोचक हैं, उससे कहीं ज्यादा समर्थक हैं. उन्हें टेक्नोसेवी और नए जमाने के साथ चलने वाला माना जाता है. सरकार में आते ही उन्होंने कई नई पहलें शुरू कीं. आइए डालते हैं इन्हीं पर एक नजर.
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डिजिटल इंडिया
इस पहल का मकसद लोगों तक सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पहुंचाना है. साथ ही इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर कर ऑनलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर को भी सुधारना है. सरकार इसके जरिए सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना चाहती है.
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स्किल इंडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जुलाई 2015 को इस पहल को शुरू किया. इसके तहत 2022 तक देश के 40 करोड़ लोगों को अलग अलग तरह की ट्रेनिंग देकर दक्ष बनाना है. सरकार जोर शोर से इसका प्रचार करती है, लेकिन आलोचक इसमें मिलने वाली ट्रेनिंग की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हैं.
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मेक इन इंडिया
मोदी सरकार भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहती है, ताकि बहुराष्ट्रीय और भारतीय कंपनियां अपने उत्पाद भारत में ही बनायें. इसलिए मेक इंडिया पहल की शुरुआत की गई. इसके तहत विदेशी निवेश और कंपनियों के लिए भारत में काम का बेहतर माहौल बनाया जाएगा.
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स्टार्टअप इंडिया
स्टार्टअप इंडिया का उद्देश्य युवाओं में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना और नौकरियों के नये अवसर पैदा करना है. इसके तहत छोटे कारोबारों के लिए बैंक लोन आसान बनाने और लालफीताशाही घटाने की बात भी शामिल है. सरकार स्टार्टअप इंडिया के तहत पिछड़े वर्गों और महिलाओं को भी उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित करना चाहती है.
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स्मार्ट विलेज इंडिया
गांवों के विकास के लिए इस पहल को शुरू किया गया है. इसे महात्मा गांधी के "आदर्श ग्राम" विजन से प्रेरित बताया जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आते ही सांसद आदर्श ग्राम योजना भी शुरू की थी, जिसमें हर सांसद से एक गांव को गोद लेकर उसका पूरी तरह विकास करने का आग्रह किया गया था.
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स्मार्ट सिटी मिशन
इस योजना के तहत देश भर के 100 से ज्यादा शहरों को अत्याधुनिक बनाने का लक्ष्य तय किया है. संबंधित राज्य सरकारों के साथ मिल कर केंद्र सरकार इस योजना को लागू करेगी. इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर सरकार ने पांच साल के दौरान एक लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है.
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कैशलेस अर्थव्यवस्था
मोदी सरकार का कैशलेस लेन देन पर बहुत जोर है. आम जनता को भुगतान के डिटिजल विकल्पों से जोड़ने के लिये सरकार ने कई इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लॉन्च किये हैं. इनमें यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, आधार कार्ड से भुगतना और भीम ऐप जैसे विकल्प शामिल हैं.
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स्वच्छ भारत अभियान
मोदी सरकार की जिन पहलों का सबसे ज्यादा प्रचार प्रसार हुआ है, उनसें से एक है स्वच्छ भारत अभियान. साफ सफाई पर जोर देने वाली इस मुहिम के साथ बहुत सी जानी-मानी हस्तियां भी जुड़ीं. हालांकि इसे कितनी गंभीरता से लागू किया जा रहा है, आलोचक इस पर सवाल उठाते हैं.
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गर्व ऐप
भारत के छह लाख गांवों में बिजली पहुंचाने का काम कहां किस रफ्तार से चल रहा है, इसकी जानकारी आप गर्व ऐप पर पा सकते हैं. इस ऐप का मकसद रियल टाइम डाटा मुहैया करा कर पारदर्शिता को बढ़ावा देना है. इसे गगूल प्ले और एप्पल ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है.
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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
"बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को की. इसका उद्देश्य एक तरफ लड़कियों को शिक्षित, योग्य और समर्थ बनाना है, तो वही बिगड़ते लैंगिक अनुपात को सुधारना भी है. 2016 के ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी मलिक इसकी ब्रैंड एम्बैसडर हैं.
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देश के शासन और विकास में लोगों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए सरकार ने माईगव यानी मेरी सरकार पहल शुरू की. प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक इसका मकसद मतदाताओं और उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के बीच अंतर को पाटना है. कई बार मोदी ने इस मंच के जरिए आने वाले विचारों, सवालों और सुझावों को अपने रेडियो कार्यक्रम "मन की बात" में शामिल किया है.
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यूरोप में जर्मनी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है. पिछले साल भारत और जर्मनी के बीच कुल 17.42 अरब यूरो का कारोबार हुआ. जर्मनी की लगभग 1,800 कंपनियां भारत में काम कर रही हैं. भारत में मौजूद आर्थिक संभावनाएं बहुत से जर्मन कारोबारियों को अपनी तरफ खींचती हैं. देश की अर्थव्यवस्था सालाना 6 से 7 प्रतिशत की रफ्तार से आगे बढ़ रही है.
मोदी सरकार जीएसटी को लागू करने जा रही है जिससे पूरे देश में एक राष्ट्रीय टैक्स व्यवस्था कायम की जाएगी. उम्मीद है कि इससे भारत में कारोबार करना आसान होगा और आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज होगी. प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता संभालते ही मेक इन इंडिया पहल भी शुरू की है जिसका मकसद देश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है.
जर्मन कारोबारियों का कहना है कि वे भारत में कारोबारी माहौल को लेकर आशावादी हैं, लेकिन वे भारत में मौजूद कई समस्याओं की तरफ भी इशारा करते हैं. इनमें अत्यधिक लाल फीताशाही, भ्रष्टाचार, बुनियादी ढांचे और दक्ष लोगों की कमी खास तौर से शामिल हैं. साथ ही जर्मन कंपनियों का कहना है कि उन्हें भारत में काम करने के लिए अधिक भरोसेमंद कानूनी और प्रशासनिक ढांचा चाहिए.
भारत में 14 करोड़ लोग गरीबी से निकले
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मोदी और मैर्केल की बातचीत में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर भी चर्चा होगी. इस बारे में बातचीत 2007 में शुरू हुई थी लेकिन अभी तक पूरी नहीं हो सकी है. इस सिलसिले में दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं. इसलिए यह मामला लटक रहा है. खासकर 2013 से इस सिलसिले में बातचीत गतिरोध का शिकार है. लेकिन चांसलर मैर्केल इस बारे में मतभेदों को दूर करने का प्रयास करेंगी ताकि दुनिया को संदेश जाये कि भारत कारोबार के लिहाज से एक आकर्षक जगह है.
भारत में जर्मनी के राजदूत मार्टिन नेय कहते हैं, "अगर आप वैश्वीकरण को आकार देना चाहते हैं तो यह (मुक्त व्यापार समझौता) एक जरिया है जिससे आप इसे आकार दे सकते हैं. अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो फिर दूसरे देश करेंगे."
व्यापार समझौतों को लेकर मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के बीच निकट सहयोग रहा है. जर्मनी स्मार्ट सिटी और गंगा की सफाई जैसी मोदी की कई प्रिय परियोजनाओं को सफल बनाने में योगदान दे रहा है. जर्मन अधिकारियों का कहना है कि जर्मनी भारत में दीर्घकालीन रणनीतिक महत्व की परियोजनाओं को वित्तीय मदद देने के लिए प्रतिबद्ध है. इसमें सड़क, रेल मार्ग, बंदरगाह और बिजली संयंत्रों का निर्माण खास तौर से शामिल है.